Modi govt is desperately on an MP shopping spree to get 2/3rd majority in both houses of the Parliament to legally make India a dictatorship!
Yes you read that right...
मुस्लिम लीग के फजलुल हक की बंगाल सरकार में वित्त मंत्री रहे श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को उनकी जयंती पर नमन 🙏🏼
फजलुल हक ने 1940 में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों की स्वायत्तता की माँग रखकर पाकिस्तान का आधार रखा था। फिर 1941 से 1943 तक हिंदू महासभा के साथ मिलकर बंगाल में सरकार बनाई।
सिर्फ पैर टूटा था... ICU में भर्ती कर ब��ा दिया ₹22 लाख का बिल, ओर फिर जान भी चली गई,😡😡
रांची के राज हॉस्पिटल में एक मरीज को एडमिट कराया गया था क्योंकि उसका पैर ��्रैक्चर हुआ था,
भर्ती करने के बाद मरीज की 2–3 दिन तक ड्रेसिंग नहीं की गई, जिसके कारण शरीर में इंफेक्शन फैल गया,
ऊपर से इलाज के नाम पर करीब ₹22 लाख लिए गए और बाद में डॉक्टरों ने कहा कि मरीज को बचाया नहीं जा सकता,
सच कहूं तो आजकल कुछ प्राइवेट हॉस्पिटलों में गजब की लूट मची हुई है।
Mughals looted us & gave us Taj Mahal, Qutub Minar, Laal Kila, etc.
Britishers looted us & gave us Railways, Civil Services, etc.
Congress looted us & gave us ISRO, IIT, AIIMS, DAMS, etc.
BJP looted us & gave us Andbhakts, Potholes, Ethanol, Hindu-Muslim, Paper Leaks, etc.
Allahu Akbar 🚀the verse the Iranians chose in-front of the Saudi delegation at Shaheed Sayed Ali’s funeral is a kill shot 🚀🚀 It was beyond cinematic and will be remembered as a story of great legend.
🔸The Leader's Story 🔸
The Leadership Decision
Inside the historic Assembly of Experts meeting, Ayatollah Khamenei is elected Leader despite insisting he did not want the role. faces the question of who will lead next.
यह पिछले 12 वर्षों के इतिहास में किसी भी न्यायालय द्वारा दिया गया अकेला न्याय है जिसमें संविधान, देश और आम आदमी के मौलिक अधिकारों की विजय हुई है। यह बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस माधव जामदार हैं। इस विद्वान न्यायाधीश ने अपने एक फैसले में जो कहा है वो नजीर है, नजीर रहेगीं। इनका फैसला बीजेपी और मोदी एवं शाह की आँखों के किरचों की तरह चुभेगी।
दरअसल सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी के खिलाफ एक साल के लिए जिला बदर आदेश पारित किया था। सईद केंद्र सरकार के विभिन्न फैसलों जैसे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के खिलाफ मोर्चे और धरने आयोजित कर रहे थे
जस्टिस जामदार इस आदेश पर आगबबूला हो गए। उन्होंने कहा "यह क्या है? ���भी नागरिकों को भारतीय सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे प्रदर्शन नहीं कर सकते, आंदोलन नहीं कर सकते ।यह सब क्या है? अब इतने सारे पेपर लीक हो रहे हैं। अगर लोग विरोध करें तो आप केस थोप देंगे। यह क्या है? नागरिकों का प्रदर्शन करना उनका अधिकार है।
याचिकाकर्ता ने तो सिर्फ 'बीजेपी सरकार मुर्दाबाद', 'अमित शाह मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाए.।नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए जिला बदर आदेश क्यों?"
जस्टिस जामदार ने आगे मौखिक रूप से टिप्पणी की कि पुलिस नागरिकों को सिर्फ इसलिए बाहर नहीं कर सकती क्योंकि उन्होंने सरकार के फैसलों का विरोध किया है।"पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की सेवक नहीं है, वे जनसेवक हैं। मैं आपके अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाऊंगा।"
जस्टिस जामदार ने महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे "हॉर्स ट्रेडिंग" पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा "कल परसों एक 10 साल के बच्चे की दुर्घटना में मौत हो गई और राज्य विधानसभा में क्या चर्चा हो रही थी कि प्रेसिडिंग ऑफिसर कैसे चुना जाए और वह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कैसे शिफ्ट ��ो गया।यह क्या है? वैसे भी पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है। आपके पास कुछ FIRs हैं।केस बदलने पर विचार करें, वॉशिंग मशीन है।" और सईद अहमद का जिला बदर रद्द कर दिया गया।
सैल्यूट जस्टिस माधव, सैल्यूट बॉम्बे हाईकोर्ट
"All citizens are being made slaves of Indian Government. They cannot stage protests, they cannot agitate-What is all this? Now so many papers have been leaked. If people protest, you will slap cases... What is this? It is the right of the citizens to protest.
The petitioner has just raised slogans like 'BJP Government Murdabad', 'Amit Shah Murdabad'... Why citizens can't raise such slogans? Why externment orders for such slogans?" - Bombay High Court Judge Justice Madhav Jamdar asks.
पाकिस्तान एक साथ ईरान और अमेरिका दोनों का भरोसा जीतने में कामयाब रहा है जबकि तेहरान और वॉशिंगटन दोनों एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत विदेश नीति के मोर्चे पर कहीं चूक गया है? क्या भारत को ईरान के पक्ष में ��ोलना चाहिए था?
रिपोर्ट: टीम बीबीसी न्यूज़ हिन्दी
आवाज़: प्रियंका
एडिट: दानिश आलम