अच्छा भासन है बस चेहरे पर सच की चमक नहीं है
दिल जानता है की राजपूतों से ही झूट बुलवा ले रही है बीजेपी
SC/ST एक्ट, आरक्षण UGC Act का सवाल दिल चीर रहा
ये कैसी गुलामी की कौम से गद्दारी करनी पड़े ?
मंडल जी मैं बता दूँ -
केस 1 - विष्णु तिवारी - SC ST ke फर्जी मामले में 20 साल जेल में रहे। दोषमुक्त होकर निकले। तब तक उनके माता-पिता और भाई की मृत्यु हो गई थी। जीवन के 20 वर्ष काल कोठरी में बीत गया।
केस 2 - UP के अलीगढ़ में चन्द्रावती नाम की महिला हुई। SC ST act के तहत झूठे केस कर के 10 वर्षों में 46 लाख बना लिए।
केस 3 - अधिवक्ता दोहरे और परिवार का मामला (उत्तर प्रदेश) भी कुछ ऐसा ही है। 23 लाख रुपये का मुआवजा मिल चुका है और 10 मामले लंबित है जिसमें उन्होंने मुआवजा मांगा हुआ है।
केस 4- यूपी के प्रयागराज में महिला और उनकी 2 बहुओं ने 19 सामान्य वर्ग के लोगों के खिलाफ SC ST act ke तहत मामला दर्ज कराया था। 4.5 लाख मुआवजा मिला। हाई कोर्ट में केस झूठा निकला। कोर्ट ने न केवल मुआवजा लौटाने का आदेश दिया बल्कि ₹5लाख का फाइन भी लगाया।
केस 5 - लखनऊ में एक महिला ने व्यक्तिगत रंजिश के चलते SC/ST एक्ट के तहत एक मनगढ़ंत और झूठी एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता महिला को साढ़े तीन साल (3.5 वर्ष) जेल की सजा सुनाई।
केस 6 - कर्नाटक में एक ही व्यक्ति ने एक साल के भीतर लगभग एक जैसी शिकायतों के साथ तीन अलग-अलग केस दर्ज कराए और ₹3.5 लाख की सहायता राशि ली। 2023 में कोर्ट ने रुपए वापसी के आदेश दिये।
बाकी NCRB के आंकड़े कहते हैं कि SC ST act के तहत किए गए मुकदमों में दोष सिद्धि दर सिर्फ 32% है। अर्थात लगभग 70% लोगों पर दोष साबित नहीं हो पाता।
लीजिए मंडल जी ठीक वैसे ही मामलों की लिस्ट आपके सामने है। इतना ही लिख पाया हूं लिस्ट बहुत लंबी है। आप एक एक केस की जांच कीजिए। गलत साबित हुआ तो इस एक्ट के विरुद्ध आज से एक शब्द नहीं कहूंगा और यदि सही हुआ तो आपको इस एक्ट की कमियां दूर करने के लिए आवाज उठानी होगी।
बोलिये चुनौती स्वीकार करते हैं?
‘आइफोन डुओ’ पहला फोल्डिंग फोन लग रहा है जो इस फॉर्म फैक्टर को सॉफ्टवेयर-हार्डवेयर के तौर पर लुक्स और परफ़ॉर्मेंस दोनों में साध रहा है।
मूल्य तीन लाख है, जो किडनी वाले जोक के भी ऊपर चला गया है। अब फेफड़ा इन्क्लूड करना पड़ेगा।
राशिद अल्वी का दर्द है कि फ़िल्म “हनुमान अंश” से हिंदुओं को धार्मिक किया जा रहा है
और आरफ़ा को दिक़्क़त थी कि फ़िल्म “धुरंधर” से लोगों को राष्ट्रवादी बनाया जा रहा है
असल में इन लोगों को“बिल्ला नंबर 786” पर फ़िल्में देखने की लत लगी हुई है, वो भी पाकिस्तानी कलाकारों के साथ
🚨 बीजेपी वालों, जनता को अब पहले वाली जनता मत समझना! 👀🔥
पहले शिक्षा कम थी, सोशल मीडिया नहीं था… जानकारी के विकल्प भी सीमित थे।
आज जनता पढ़ी-लिखी है, जागरूक है और सही-गलत का फर्क समझती है। 📚📱
BJP को समझकर कांग्रेस का पत्ता साफ करने वाली यही जनता थी…
अब वही जनता आपकी हर हरकत का हिसाब भी रख रही है।
⚠️ समय रहते संभल जाओ—वरना जनता सत्ता का पत्ता साफ करना भी जानती है! 🇮🇳
हमारी सोसायटी मे प्रतिदिन मुस्लिम के नाबालिग लडके बाईक लेकर आते है कभी किसी के घर के बाहर से कोई वस्तु चुरा लें जाते है कभी बहन बेटियों को छेड़ना और @DelhiPolice मे शिकायत दो तो कोई कार्यवाही नहीं होती।
दिल्ली पुलिस चाहती ही नहीं है की उन्हें अरेस्ट करें क्योंकि किसी के घर दारू बिकती है तो किसी के घर ओर प्रकार का नशा।
Thank God going back to the ’70s and ’80s is only a virtual trend. Otherwise, Congress would happily return to that era to kill Sikhs and burn them alive again, just as men like Rajiv Gandhi, Kamal Nath, Sajjan Kumar, Jagdish Tytler and H. K. L. Bhagat did in 1984.
प्रधानमंत्री की तेरही का समोसा बाटने वाली लड़की, देवी देवताओं को अपमानित करने वाली लड़की तुम्हारी नाक के नीचे बैठी है और तुम लोग सनातन पर सिर्फ विशुद्ध ज्ञान पेल रहे हो
है किसी की माई के दूध में दम जो गिरफ्तार करवा सके ईशनिंदकों को
सावरकर को भारत रत्न देने की जगह, उनके विचारों की कसमे खाने वाली पार्टी ने फिर से उन्हें काला पानी की सज़ा दे दिया है।
वो कह रहे हैं कि अभी उनकी ज़रूरत नहीं है, अभी सामाजिक न्याय वाले आइकॉन चाहिए क्यूंकि अब दूसरे रंग का वोट पक्का करना है।
पूढ़े चला!!
जब UGC के काले नियमों पर चौतरफा थूक-फ़ज़ीहत हुई और सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया, तो आईटी सेल के चंपू आदेश की कॉपियाँ चमकाकर सफ़ाई देने मैदान में उतर आए कि
"अरे साहब, मोदी जी की क्या गलती? UGC का ड्राफ्ट तो सीधा-साधा था, वो तो सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा जयसिंह के नोट को जोड़ने का आदेश दिया था, इसलिए UGC बाबुओं को मजबूरन ये कड़े नियम डालने पड़े!"
जो आदमी देश में शौचालय से लेकर ई-रिक्शा, बस और हर वंदे भारत का फीता काटने और वाहवाही लूटने के लिए सबसे आगे खड़ा रहता है, वो उन UGC गाइडलाइन्स की ज़िम्मेदारी से कैसे भाग सकता है जिसे बनाने और ड्राफ्ट करने में उसकी पार्टी के 15-15 सांसद शामिल थे ❓
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ इतना कहा था कि याचिकाकर्ताओं के सुझावों पर विचार किया जा सकता है। क्या कोर्ट ने सरकार को बाध्य किया था कि वामपंथी वकीलों के तुगलकी सुझावों को आंख मूंदकर अक्षरशः स्वीकार कर लिया जाए ❓ अगर एक वकील के सुझाव पर सरकार ऐसे घुटने टेक दे, तो यह 56 इंच की नहीं, बल्कि पूरी तरह पंगु सरकार है!
👺 और एक बात अगर मोदी सरकार 2018 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रातों-रात अध्यादेश लाकर पलट सकती थी, तो 2026 में यूजीसी के इन काले नियमों को रोकने से किसने रोका था ⁉️आईटी सेल वाले चाहे जितना 'कोर्ट-कोर्ट' चिल्लाकर मोदी जी को बचाने का ढोंग कर लें, हकीकत यही है कि अपनी राजनीति और वोटबैंक के चक्कर में सामान्य वर्ग की बलि चढ़ाने की पूरी साजिश रची गई थी!
#AjeetBharti #UGCRegulationsExposed #BJPITCellExposed #CoreVoterProtest #ModiGovernmentExposed #UGC
70% of GCs have realised BJP and Modi’s true intentions towards our community. The rest are either paid or hardcore andhbhakts.
If SC/ST Act, UGC, Bhim politics etc haven’t opened your eyes, nothing will. But I believe most of us will realise the truth before 2029!
Uninstall #BHIM upi app immediately.
Narendra Modi kept this name to appease STSC voters. He is accepting this himself. This man can stoop so low. I am shocked.
😡😡😡😡😡😡😡😡😡😡
I hate him even more now 😡😡
What a lowlife he is.
Please share this message with as many people as possible. We have been fooled 😡😡