It's unbelievable love for #Dmart continues even after series of dismal quarter performance. On the other hand #VMM continues to deliver superior performance one after another.
Last 5 years fcf for dmart is -2176Cr vs 3588Cr for #Vishalmart.
Let's wait for this q result of #VMM
$Silver spot price is =51.00US$/ounce
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Current price of #silverbees
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Currently #Silverbees is at discount to silver price.
Next week is very crucial.
निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख संघर्ष समिति ने नियामक आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर वार्ता हेतु समय देने की मांग की : संघर्ष समिति का पक्ष सुने बिना आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर निर्णय लिया गया तो नियामक ��योग मुख्यालय पर मौन विरोध प्रदर्शन होगा
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार को आज एक पत्र भेजकर मांग की है कि वह पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिये गए आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों पर पावर कॉरपोरेशन का जवाब सुनने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्�� समिति, उत्तर प्रदेश को अपना पक्ष रखने के लिए समय दें।
संघर्ष समिति ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि विद्युत नियामक आयोग से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद भी संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल को समय न दिया तो विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर सैकड़ों ��िजली कर्मी विद्युत नियामक आयोग के मुख्यालय पर मौन प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी नियामक आयोग के अध्यक्ष की होगी।
पत्र में कहा गया है कि समाचार पत्रों के माध्यम से यह विदित हुआ है कि विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने माननीय ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम केआरएफपी डॉक्यूमेंट पर नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों के संबंध में अलग से चर्चा की है। चर्चा यह भी है कि इस बैठक में यह तय हो गया है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा आपत्तियों पर दिए जाने वाले जवाब पर विद्युत नियामक आयोग ने अपनी सहमति दे दी है जिसके बाद निजीकरण का रास्ता प्रशस्त हो जाएगा।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यदि यह सही है तो यह बहुत ही गंभीर बात है कि सरकार, प्रबं��न और विद्युत नियामक आयोग के बीच निजीकरण को लेकर मिलीभगत हो गई है। एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के दाम पूर्व निर्धारित निजी घरानों के हाथ बेच��े की साजिश है यह ।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में सबसे बड़े स्टेकहोल्डर बिजली के उपभोक्ता और बिजली के कर्मचारी हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से लगभग 60000 संविदा कर्मियों और साढ़े सोलह हजार नियमित कर्मचारियों की नौकरी समाप्त होने जा रही है। हजारों की संख्या में बिजली कर्मियों की पदावनती होने जा रही है। निजीकरण के दुष्प्रभाव ���े बिजली कर्मचारियों में भारी चिंता और गुस्सा व्याप्त है।
बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज लगातार 315वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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वित्त मंत्री एवं ऊर्जा मंत्री के साथ हुये समझौते का सम्मान करते हुये निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की मांग : निजीकरण के विरोध में प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी
प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री श्री सुरेश खन्ना और तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा के साथ ठीक पांच वर्ष पूर्व आज के ही दिन हुये लिखित समझौते का ��ल्लेख करते हुये बिजली कर्मियों ने आज सभी जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर मांग की कि प्रदेश सरकार के शीर्ष मंत्रियों के साथ हुये समझौते का सम्मान करते हुये पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाय।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि आज की ही तारीख को 06 अक���टूबर, 2020 को वित्त मंत्री एवं पूर्व ऊर्जा मंत्री से वार्ता के बाद विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के साथ लिखित समझौता हुआ था। समझौते के पहले बिन्दु में ही लिखा गया है -"विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही सुधार हेतु कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाही की जायेगी। कर्मचारियों और अभियंताओं को विश्वास में लिये बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जायेगा।"
संघर्ष समिति ने कहा कि इतने वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों के साथ किए गये लिखित समझौते का खुला उल्लंघन कर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन द्वारा ऐलान किए जाने का दुष्परिणाम यह है कि प्रदेश के ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मी विगत 314 दिनों से सड़क पर उतरकर आंदोलन करने हेतु विवश हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि कि बिजली कर्मी सदा ही संघर्ष से पहले सुधार को महत्व देते हैं किंतु बड़े अफसोस की बात है कि 06 अक्टूबर 2020 को हुए समझौते के अनुरूप पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने सुधार पर आज तक विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र से कोई वार्ता नहीं की। उल्लेखनीय है कि संघर्ष समिति ने समझौते के एक महीने के अंदर ही पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन को सुधार का प्रस्ताव दे दिया था।
संघर्ष समिति ने कहा कि इतने वरिष्ठ मंत्रियों के साथ हु�� समझौते का सम्मान न करने से बिजली कर्मियों में अनावश्यक रूप से अविश्वास का वातावरण बन रहा है जो सरकार और प्रबन्धन दोनों के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
समझौते के ठीक पांच साल पूरा होने पर आज बिजली कर्मियों ने सभी जनपदों में समझौते की प्रतियां लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने नारे लगाये - " समझौते का सम्मान करो, निजीकरण वापस लो।"
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विजया दशमी के पहले बोनस देने के बजाय पॉवर कॉरपोरेशन की बड़े पैमाने पर ��भियंताओं और कर्मचारियों को जबरन सेवा निवृत्ति देने और अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की तैयारी : निजीकरण के लिये उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां करने का आरोप
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि मा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देश के अनुसार नवरात्र में निर्बाध बिजली आपूर्ति में लगे बिजली अभियंताओं और कर्मियों को विजया दशमी के पूर्व बोनस देने के बजाय ���ॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने बड़े पैमाने पर अभियंताओं और कर्मचारियों को जबरन सेवा निवृत्ति देने और अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की तैयारी शुरू कर दी है जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो गया है।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता की पूरी स��ची जारी कर इनके विरुद्ध चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाहियों की अद्यतन स्थिति तत्काल मांगी गई है जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर अभियंताओं को जबरन सेवा निवृत्त करना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि 24 सितंबर को जारी किए गए पत्र में तीन दिन के अंदर 27 सितंबर तक अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की अद्यतन स्थित मांगी गई है। संघर्ष समिति ने कहा कि अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता पदों की पदोन्नतियां के लिये चयन पहले ही हो चुका है। ऐसे में सभी अधीक्षण अभियंताओं और सभी मुख्य अभियंताओं की सूची जारी कर उनके बारे में अनुशासनामक कार्यवाहियों की अद्यतन स्थिति मांगने के पीछे जबरन सेवा निवृत्ति देना ही एकमात्र उद्देश्य दिखाई देता है।
संघर्ष समिति ने कहा कि शक्ति भवन के कॉरिडोर से मिल रहे समाचारों के अनुसार निजी घरानों को सहूलियत देने के लिए अभियंताओं और कर्मचारियों की बड़ी पैमाने पर जबरन सेवा नि���ृत्ति कर छटनी की जानी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन प्रबन्धन विगत कई महीनों से लगातार बिजली कर्मियों का अलग-अलग तरह से उत्पीड़न कर रहा है। अभी भी हजारों बिजली कर्मचारियों को फेशियल अटेंडेंस के नाम पर 3 माह से रुका वेतन नहीं दिया गया। बड़े पैमाने पर बिजली कर्मियों को दूर दराज स्थानों पर स्थानांतरित किया गया, हजारों संविदा कर्मियों को डाउनसाइजिंग के नाम पर निकाला गया और अब जबरन सेवानिवृत्ति देने की प्रक्रिया की जा रही है।
संघर्ष समिति ने कहा की बिजली कर्मी निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत हैं किंतु वह आम जनता को किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होने दे रहे हैं बिजली कर्मी नवरात्र, दशहरा और दीपावली पर जनता को कोई तकलीफ नहीं होने देंगे, यह संघर्ष समिति का निर्णय है ।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की निजीकरण हेतु की जा रही दमनकारी नीतियों के विरोध में आंदोलन तेज करने का फैसला दशहरे के बाद लिया जाएगा जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी ।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज 307 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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I think both #gravita and #Bectorfood are available at good valuations. Softer inflation of raw material will add margins for bector. Valuations and growth to take gravita higher.
केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण और आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की मिलीभगत से संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण की साजिश : संघर्ष समिति ने सार्वजनिक किये डॉक्यूमेंट: राष्ट्रीय स्तर के आन्दोलन की तैयारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के साथ मिली भगत में अपना समांतर सेक्रेटेरिएट चला रहा है और संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण की गुपचुप योजना तैयार की जा रही है। संघर्ष समिति ने इस बाबत ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के सचिवालय के पत्र व्यवहार को आज यहां सार्वजनिक किया।
संघर्ष समिति ने बताय��� कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल श्री आलोक कुमार ने 09 सितंबर देश के सभी ��र्जा निगमों के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशकों को एक पत्र भेजा है जिस पत्र से बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है की केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की शह पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन ऊर्जा निगमों के कार्य में सीधे दखलंदाजी कर रहा है। श्री आलोक कुमार अपने पत्र में देश के विभिन्न ऊर्जा निगमों से डाटा ऐसे मांग रहे हैं मानो वही देश के विद्युत मंत्री बन गए हों।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है और अब यह बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण के लिए ही ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन बनाया गया है और यह एसोशिएशन सरकार और निजी घरानों के बीच बिचौलिए का काम कर रही है।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा कि फेडरेशन और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स इस मामले को केंद्रीय विद्युत म���त्री मनोहर लाल खट्टर के सामने शीघ्र रखेगी।
उन्होंने बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के सेक्रेटेरिएट की दखलंदाजी तत्काल बंद न की गई और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से जुड़े हुए ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पद से न हटाए गए तो देश के 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इसके विरोध में सड़क पर उतरकर आंदोलन प्रारंभ करने हेतु बाध्य होंगे।
संघर्ष समिति ने कहा की पत्र में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल श्री आलोक कुमार ने लिखा है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने 08 सितंबर को एक मीटिंग किया था जिसमें ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को भी बुलाया गया था । इस मीटिंग में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने ऑल इंडिया डिस्कॉम ए��ोशिएशन से यह कहा कि वह विद्युत वितरण, ट्रांसमिशन और उत्पादन में कॉस्ट रिडक्शन के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को एक सुझाव दें। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की मीटिंग में यह भी तय हुआ कि इस बाबत ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन देश के सभी ऊर्जा निगमों से इनपुट डाटा मांगे और प्रस्ताव बनाए। इसी आधार पर श्री आलोक कुमार ने देश के सभी ऊर्जा निगमों के चेयरमैन से इस संबंध में डाटा मांगा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह सारे घटनाक्रम बहुत ही गंभीर है और सरकारी काम में सोसाइटी एक्ट के अंतर्गत रजिस्टर्ड एक संस्था की इस प्रकार की दखलंदाजी देश के इतिहास में पहली बार हो रही है।
संघर्ष समिति ने आश्चर्य व्यक्त किया कि कि यह सब केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के इशारे पर हो रहा है। श्री आलोक कुमार ने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन ने अ���्रैल 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के सामने भी एक प्रेजेंटेशन किया था।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में ऑल इंडियाडिस्कॉम एसोसिएशन का प्रादुर्भाव अचानक नहीं हुआ है बल्कि यह एक सोची समझी रणनीति के तहत निजीकरण को अंजाम देने हेतु बनाई गई संस्था है। सबसे आपत्तिजनक बात यह है कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के शीर्ष पदाधिकारी भी बने हुए हैं जिससे यह मामला सीधे तौर पर हितों के टकराव का बनता है।
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बिजली का निजीकरण करने के लिए कंसल्टेंट के तौर पर Grant thornton एक ब्रिटिश कंपनी पावर कॉर���ोरेशन से 2.39 करोड़ का टेंडर लेते वक्त झूठा शपथ पत्र देती है कि पिछले 3 साल में उसके ऊपर कोई पेनल्टी नहीं लगी है। लेकिन बाद में जब पता चला कि अमेरिका के रेगुलेटर "पब्लिक कंपनी अकाउंटिंग आवर साइड बोर्ड" ने 20 फरवरी 2024 में GT पर 40000 US doller की पेनल्टी लगाई थी।
अमेरिका में लगी पेनल्टी का ऑर्डर सामने आने के बाद ��्रॉड और धोखाधड़ी के मामले में कंपनी पर मुकदमा दर्ज होना चाहिए था, ब्लैक लिस्ट होनी चाहिए थी और उसके द्वारा तैयार किए गए निजीकरण के डॉक्यूमेंट को निरस्त किया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ पूरा मामला दबा दिया गया है आज भी वह कंपनी निजीकरण के लिए डॉक्यूमेंट तैयार करने का काम कर रही है।
इसलिए पूरे प्रदेश के बिजली कर्मियों ने संकल्प लिया है कि यदि गरीब विरोधी, किसान विरोधी, युवा विरोधी, छो��े व्यापारी विरोधी, कर्मचारी विरोधी, छात्र विरोधी, आरक्षण विरोधी बिजली के निजीकरण का टेंडर जारी होता है तो उसी क्षण पूरे प्रदेश के बिजली बिजली कर्मी लोकतांत्रिक तरीके से "जेल भरो आंदोलन" प्रारंभ करने के लिए विवश होंगे।
उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि धोखाधड़ी कर झूठा शपथ पत्र देकर टेंडर लेने वाली कंसल्टेंट कंपनी Grant thornton को ब्लैक लिस्ट कराने की कृपा करें तथा इसके द्वारा बनाए गए निजीकरण के प्रस्ताव को व्यापक जनहित में निरस्त किया जाये।
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निजीकरण के दस्तावेज को अनुमोदित कराने हेतु पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन पर गलत आंकड़ों के आधार पर पैरवी का आरोप : निजीक���ण के विरोध में प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आरोप लगाया है कि निजीकरण हेतु तैयार किए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को अनुमोदित कराने हेतु पावर कार्पोरेशन प्रबंधन गलत आंकड़ों के आधार पर पैरवी कर रहा है और दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 304 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने सभी जनपदो पर व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट द्वारा तैयार किए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को अनुमोदित कराने के लिए नियामक आयोग से लेकर शासन के उच्च स्तर तक दौड़ लगा रहे हैं। पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष मुख्य सचिव के पास ��ाकर गलत आंकड़ों के आधार पर घाटा दिखाकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पैरवी कर रहे हैं ।
संघर्ष समिति ने मुख्य सचिव से अपील की है कि वह निजी घरानों से मिली भगत में बनाए गए निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट को किसी भी प्रकार मंजूरी न दें। संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष को भी पत्र भेजकर मांग की है कि निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट क��� कोई भी मंजूरी देने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का पक्ष विद्युत नियामक आयोग को सुनना चाहिए क्योंकि निजीकरण से बिजली उपभोक्ताओं के साथ सबसे अधिक प्रभाव बिजली कर्मचारियों के भविष्य पर पड़ने वाला है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की निजी घरानों के साथ मिली भगत है और उन्होंने सरकारी विभागों के बकाया और सब्सिडी की धनराशि को घाटे में जोड़कर पूर्वांचल व��द्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के घाटे को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया है। संघर्ष समिति ने कहा कि इसके अतिरिक्त दोनों विद्युत वितरण निगमों की एक ए टी एंड सी हानियां बढ़ा चढ़ा कर दिखाइ गई हैं।
यह पता चला है कि ए टी एंड सी हानियों को बढ़ाकर दिखाने के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में निजी नलकूपों की बिजली खपत कम करके आंकी जा रही है। उल्लेखनीय है कि निजी नलकूपों को उत्तर प्रदेश सरकार क�� नीति के अनुसार मुफ्त बिजली मिलती है। ए टी एंड सी हानियों को बढ़ा कर दिखाने से गत वर्ष ��ी तुलना में विद्युत वितरण निगमों की अधिक हानि दिखाई गई है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार लगातार इस बात का प्रचार करती रही है कि 2017 में 41% ए टी और सी हानियों को वर्तमान सरकार ने घटाकर 16% के नीचे कर दिया है। अब निजीकरण के लिए इसके विपरीत ए टी एंड सी हानियों को बढ़ाकर बताया जा रहा है जिससे चुनिंदा निजी घरानों को लाभ दिया जा सके ।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि आगरा और कानपुर के निजीकरण के समय भी आगरा और कानपुर शहर की ए टी एंड सी हानियों को बढ़ाकर दिखाया गया था। आगरा के विषय में कैग की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है और निजी कम्पनी को बेजा लाभ देने का आरोप लगाया गया है । इसके बावजूद आगरा का फ्रेंचाइजी करार रद्द करने के लिए पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन ने आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
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आज जनपद बिजनौर के थाना नहटौर के अंतर्गत बिजली चोरी में पकड़े गए दबंगों द्वारा दिनदहाड़े उपखंड अधिकारी (विद्युत) के कार्यालय में घुसकर मारपीट की तथा तमंचा लगाकर एसडीओ का अपहरण करने का प्रयास किया। जब सरकारी अधिकारी अपने कार्यालय में ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता की सुरक्षा का क्या हाल होगा, यह जिला प्रशासन के लिए चिंता का विषय होना चाहिए, यह घटना अत्यं��� दुर्भाग्यपूर्ण है लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
विद्युत अभियंताओं पर उनके कार्यालय में घुसकर मारपीट की घटनाये लगातार बढ़ती ही जा रही है, ऊर्जा विभाग और उत्तर प्रदेश शासन को बिजली अभियंताओं की सुरक्षा के लिए कठोर कदम उठाये जाने की तत्काल आवश्कता है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि उपरोक्त प्रकरण में हमलावरों पर कठोर कार्रवाई कराये जाने की कृपा करें, जिससे विद्युत अभियंता प्रदेश की जनता को निर्बा��� विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में अपना पूर्ण योगदान देते रहें।
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मेरठ में हुए चिन्तन मंथन शिविर में निजीकरण का विकल्प खारिज करने का संकल्प : पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ कई बड़े शहरों के फ्रेंचाइजी के समाचार से बिजली कर्मियों का गुस्सा फूटा
उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के तत्वावधान में मेरठ में आयोजित "चिन्तन मंथन शिविर - संदर्भ निजीकरण" में अभियंताओं ने पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिए गए निजीकरण के विकल्प को एक स्वर में खारिज कर दिया और संकल्प लिया कि निजीकरण के विरोध में आन्दोलन और तेज किया जायेगा तथा निजीकरण के विरोध में संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
चिन्तन मंथन शिविर में मुख्य वक्ता आल इंडिया पावर इंज���नियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने पावर कारपोरेशन ��े चेयरमैन डॉ आशीष गोयल द्वारा पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बाद दिए जाने वाले विकल्पों का विस्तार से विश्लेषण कर उसे खारिज कर दिया । उन्होंने विकल्प के तीनों बिन्दुओं निजी कंपनी की नौकरी ज्वॉइन कर लें, अन्य निगमों में वापस आ जाएं और स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले लें, का विश्लेषण करते हुए यह बताया कि तीनों ही विकल्प बिजली कर्मियों के भविष्य को बर्बाद कर देंगे अतः निजीकरण किसी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
पूर्व दिल्ली विद्युत बोर्ड के इ सत्यपाल और इ यशपाल शर्मा जो ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के संरक्षक और सेक्रेटरी (मुख्यालय) है, ने निजीकरण के बाद दिल्ली में बिजली कर्मियों और अभियंताओं की हो रही दुर्दशा के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि निजीकरण बहुत ही भयावह है अतः पूरी शक्ति से संघर्ष की तैयारी करिये।
मेरठ में शिविर के दौरान ही यह जा���कारी मिलने से कि, पश्चिमांचल के बड़े शहरों में अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी होने जा रहा है, अभियंताओं में गुस्सा फूट पड़ा। शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि यह पुख्ता जा��कारी मिली है कि जिन जिन शहरों में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है उन सभी शहरों के अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी का टेंडर भी पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के टेंडर के साथ ही जारी किया जाएगा।
उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा कि चिन्तन मंथन शिविर का मुख्य उद्देश्य अभियंताओं को निजीकरण के विरोध में ���िर्णायक संघर्ष के लिये प्रशिक्षित करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे पांच शिविर डिस्कॉम स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अभियन्ता संकल्प लेकर सामने आएं तो उप्र में पॉवर सेक्टर में निजी घरानों को रोकना कोई कठिन काम नहीं है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।
अभियन्ता संघ के उपाध्यक्ष कृष्णा सारस्वत, उपाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह, संयुक्त सचिव आलोक श्रीवास्तव, संगठन सचिव जगदीश पटेल, सहायक सचिव निखिल कुमार, संघर्ष समिति पश्चिमांचल के संघर्ष समिति के संयोजक सी पी सिंह ने शिविर को संबोधित किया।
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निजीकरण का टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आंदोलन: आन्दोलन के लगातार 300 दिन पूरा होने पर बिजली कर्मियों ने भरी हुंकार : प्रान्त भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन : आरएफपी डॉक्यूमेंट गोपनीय रखने के समाचार से बिजली कर्मियों में उबाल
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने चेतावनी दी है कि यदि जोर जबरदस्ती करके निजीकरण का टेंडर निकाला गया तो टेंडर निकलते ही बिजली कर्मी समस्त जनपदों में सामूहिक जेल भरो आंदोलन प्रारंभ कर देंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबन्धन की होगी ।
निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 300 दिन पूरा होने पर आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर सामूहिक जेल भरो सत्याग्रह प्रारम्भ करने का संकल्प लिया।
राजधानी लखनऊ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश और राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज शक्ति भवन मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया और कहा कि बिजली कर्मी घाटे के झूठे आंकड़े,दमन और उत्पीड़न के नाम पर किसी भी स्थिति में निजीकरण की साजिश कामयाब नहीं होने देंगे।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यह विदित हुआ है कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन और आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के बीच यह तय हुआ है कि टेंडर की पूरी प्रक्रिया गोपनीय रखी जाय। इसके अंतर्गत पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के पांच निगम बनाकर पांच अलग अलग टेंडर निकाले जाएंगे जिनमें एक लिंक दी जाएगी। लिंक तभी खुलेगी जब टेंडर डालने वाली निजी कंपनी पांच लाख रुपए का भुगतान करें साथ में यह शपथ पत्र भी देना होगा की लिंक खुलने के बाद आरएफपी डॉक्यूमेंट को कोई कंपनी सार्वजनिक नहीं करेगी।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजी घरानों के साथ नियमित मुलाकात हो रही है और डिस्कॉम एसोशिएशन निजीकरण के मामले में बिचौलिए की भूमिका का निर्वाह कर रही है। ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के बीच में आ जाने के बाद से निजीकरण के म���मले में लेन देन की चर्चा भी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति है।ऐसे में टेंडर की पूरी प्रक्रिया और आरएफपी डॉक्यूमेंट को गोपनीय रखना बहुत गंभीर बात है और इस तरह सारी प्रक्रिया में ही भ्रष्टाचार की बू आ रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यदि ऐसा होता है तो संभवत: यह देश के इतिहास में पहली बार होगा की लाखों ���रोड़ रुपए की परिसंपत्तियों को इतने गुपचुप ढंग से बेचा जा रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि आरएफपी डॉक्यूमेंट को छिपाना बहुत ही गंभीर मामला है।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में विगत 28 नवंबर से लगातार चल रहे आंदोलन के आज 300 दिन पूर��� होने पर बिजली कर्मियों,संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर संकल्प लिया कि वे किसानों और उपभोक्ताओं को साथ लेकर निजीकरण के विरोध में अपना आन्दोलन तब तक जारी रखेंगे जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
राजधानी लखनऊ में हुई विरोध सभा को शैलेन्द्र दुबे, जितेंद्र सिंह गुर्जर, अजय कुमार, बलबीर सिंह यादव, महेन्द्र र���य, पी के दीक्षित, सुहेल आबिद,श्री चन्द ,दीपक चक्रवर्ती, मोहम्मद इलियास , प्रेम नाथ राय, सरजू त्रिवेदी ने मुख्यतया सम्बोधित किया।
राजधानी लखनऊ के अलावा वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
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आज बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता जनपद बलिया को उनके कार्यालय में घुसकर हमलावरों द्वारा गाली गलौज करते हुए मारपीट की गई।
जब जनपद में बिजली विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी अपने सरकारी कार्यालय में ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता का क्या हाल होगा, अपराधियों का बोलबाला है कोई ���ी, कहीं पर भी, किसी को भी, घुस कर मार रहा है पुलिस प्रशासन त्वरित कार्रवाई भी नहीं कर रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कृपया ऐसे हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई कराने की कृपा करें, तथा बिजली अभियंताओं को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने की कृपा करें । जिससे बिजली अभियंता ��्रदेश की जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगे रहे।
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संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग से मांग की कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा भेजे गए निजीकरण के दस्तावेज को निरस्त किया जाए : निजी घरानों की मिली भगत से तैयार किए गए दस्तावेज को अनुमति दी तो नियामक आयोग कार्यालय पर मौन प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष से मांग की है कि वह पावर कॉरपोरेशन द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु तैयार किए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को मंजूरी न दें और उसे निरस्त कर दें। संघर्ष समिति ने कहा है कि निजी घरानों की मिली भगत से तैयार क���ए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को निरस्त न किया गया तो मजबूरन बिजली कर्मियों को नियामक आयोग के कार्यालय पर मौन प्रदर्शन करना पड़ेगा।
संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार को याद दिलाया है कि 05 अक्टूबर 2020 को जब वह उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष थे तब उन्होंने संघर्ष समिति के साथ एक लिखित समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जिसमें लिखा है कि बिजली कर्मियों को विश्वास में लिए बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी क्षेत्र में बिजली का निजीकरण नहीं किया जाएगा। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के दस्तावेज को मंजूरी देना ��स समझौते का खुला उल्लंघन होगा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां जारी बयान में कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा बनाया गया आरएफपी डॉक्यूमेंट निजीकरण की आड़ में एक बड़ा घोटाला है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह ��रएफपी डॉक्यूमेंट पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष और निदेशक वित्त निधि नारंग ने कुछ चुनिंदा निजी घरानों की मदद करने के लिए उनके साथ मिलीभगत में तैयार किया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि इस आरएफपी डॉक्यूमेंट के अनुसार पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की एक लाख करोड रुपए की परिसंपत्तियों को बेचने के लिए रिजर्व प्राइस मात्र 6500 करोड रुपए निर्धारित की गई है । इस प्रकार यह लूट का दस्तावेज है।
संघर्ष समिति ने मांग की कि विद्युत नियामक आयोग को निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट पर बिजली कर्मियों का अभिमत जानने के लिए संघर्ष समिति से तत्काल वार्ता करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि पूरा का पूरा आरएफपी डॉक्यूमेंट एक मेगा घोटाले का दस्तावेज है।
संघर्ष समिति ने कहा कि जैसे पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों को बेचने के लिए रिजर्व प्राइस नगण्य कर दी ���ई है इसी प्रकार ए टी एंड सी हानियां बहुत अधिक दिखाकर आगरा शहर की बिजली व्यवस्था अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के तहत टोरेंट पावर को दे दी गई थी। इसका परिणाम यह है कि टोरेंट पावर कंपनी प्रतिवर्ष 800 करोड रुपए का मुनाफा कमा रही है और पावर कारपोरेशन को लगभग 1000 करोड़ का घाटा हो रहा है। एक बार फिर मात्र 6500 करोड रुपए की रिजर्व प्राइस पर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को बेचकर एक बड़े घोटाले की पृष्ठभूमि तैयार की गई है।
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि विद्युत निया���क आयोग ने निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट को निरस्त न किया तो विरोध दर्ज करने के लिए बिजली कर्मी नियामक आयोग पर मौन प्रदर्शन करने हेतु विवश होंगे।
संघर्ष समिति ने बताया कि पता चला है कि निदेशक वित्त श्री निधि नारंग ने निजीकरण से सम्बंधित 10 से अधिक फाइलों की छाया प्रति कराकर उसे अपने पास रख लिया है। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि यह सच है तो यह बहुत ही गंभीर बात है। संघर्ष समिति जुलाई से ही आरोप लगाती रही है कि निदेशक वित्त का कमरा सील किया जाए अन्यथा श्री निधि नारंग गोपनील दस्तावेज बाहर लेजाएंगे।
आज अवकाश के दिन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के पदाधिकारियों ने आपस में विचार विमर्श किया और सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक जन संपर्क कर निजीकरण के नाम पर हो रहे घोटाले और ल��ट से लोगों को अवगत कराया।
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उड़ीसा और चण्डीगढ़ में निजीकरण पूरी तरह विफल हो जाने के बाद उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की मांग : निजीकरण के विरोध ��ें प्रांत भर में विरोध प्रदर्शन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि चण्डीगढ़ में हाल ही में किया गया बिजली का निजीकरण पूरी तरह विफल हो जाने के बाद उ.प्र. में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की कृपा करें। संघर्ष समिति ने कहा कि उड़ीसा सहित देश के सभ�� भागों में और उ.प्र. में आगरा और ग्रेटर नोयडा में निजीकरण का प्रयोग पहले ही विफल हो चुका है। ऐसे में इस विफल प्रयोग को उ.प्र. के 42 जनपदों पर थोपने का कोई औचित्य नहीं है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु ट्रॉजैक्शन कंसल्टेंट के चयन के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट में निजी���रण हेतु चण्डीगढ़ को टेस्ट केस बताया गया है। चण्डीगढ़ के विद्युत विभाग को गोयनका की एमीनेंट पॉवर कंपनी लिमिटेड को 01 फरवरी 2025 को बिजली कर्मियों के प्रबल प्रतिरोध के बावजूद सौंपा गया था। चण्डीगढ़ का निजीकरण करते समय यह तर्क दिया गया था कि निजीकरण के बाद 24 घण्टे निर्बाध गुणवत्ता परक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी। उ.प्र. में निजीकरण के पीछे भी यही तर्क दिया जा रहा है।
संघर्ष समिति ने बताया कि चण्डीगढ़ में निजीकरण के बाद आए दिन 02 घण्टे से 06 घण्टे तक बिजली की कटौत�� की जा रही है और आम नागरिकों को भीषण गर्मी में बिना बिजली के उबलना पड़ रहा है। निजीकरण के बाद मात्र 06 महीने में ही चण्डीगढ़ में बिजली आपूर्ति पूरी तरह पटरी से उतर गयी है। उन्होंने बताया कि चण्डीगढ़ की मेयर हरप्रीत कौर बाबला ने कहा है कि निजीकरण के बाद आम उपभोक्ताओं की शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है और निजी कंपनी की हेल्पलाईन भी पूरी तरह निष्क्रिय पड़ी है। चण्डीगढ़ रेजीडेंट एसोसिएशन वेलफेयर फ���डरेशन के अध्यक्ष हितेश पुरी का बयान है कि घरेलू उपभोक्ताओं खास कर गरीब उपभोक्ताओं की बिजली कटौती आए दिन हो रही है, जो 06 महीने पहले सरकारी क्षेत्र में नहीं होती थी। हालात इतने खराब हो गए हैं कि मुख्य सचिव को सीधे अपने हाथ में कमान लेनी पड़ी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु तैयार किये गए आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट चण्डीगढ़ ���े आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट के आधार पर तैयार किया गया है। चण्डीगढ़ में लगभग 22 हजार करोड़ रुपए की विद्युत विभाग की परिसम्पत्तियों को बेचने हेतु मात्र 124 करोड़ रुपए की रिजर्व प्राइस रखी गयी थी और इस डाक्यूमेंट के आधार पर चण्डीगढ़ का विद्युत विभाग मात्र 871 करोड़ रुपए में बेच दिया गया।
संघर्ष समिति ने कहा कि उ.प्र. पॉवर कार्पोरेशन के चेयरमैन और प���र्व निदेशक वित्त निधि नारंग द्वारा कार्पोरेट घरानों की मिलीभगत से पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की 01 लाख करोड़ रुपए की परिसम्पत्तियों को बेचने हेतु चण्डीगढ़ की तर्ज पर रिजर्व प्राइस मात्र 6500 करोड़ रुपए रखी गयी है। इस प्रकार यह आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट लूट का दस्तावेज है, अतः इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि उ.प्र. के 42 गरीब जनपदों में बिजली के निजीकरण ���ा भयावह प्रयोग करने के पहले उ.प्र. में ही ग्रेटर नोयडा और आगरा के निजीकरण की समीक्षा किया जाना बहुत जरुरी है। उल्लेखनीय है कि ग्रेटर नोयडा में निजी कंपनी के खराब परफार्मेंस को देखते हुए उ.प्र. सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय में ग्रेटर नोयडा का निजीकरण का करार रद्द कराने के लिए मुकदमा लड़ रही है। इसी प्रकार आगरा में टोरेंट पॉवर कंपनी ने पॉवर कार्पोरेशन का 2200 करोड़ रुपए का बिजली राजस्व हड़प ल���या है और निजी कंपनी को लागत से कम मूल्य पर बिजली देने के चलते पॉवर कार्पोरेशन को 10 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है।
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