शर्म लिहाज़ बची है गोदी मीडिया वालों
@chitraaum@anjanaomkashyap
तो अपने आका से पूछो कि "जल शक्ति मिशन" या "हर घर नल से जल।"
जिसके लिए सरकार ने 1 लाख 22 हजार करोड़ रुपए आवंटित किए थे उसका क्या हुआ?? कितना बड़ा घोटाला हुआ है।
@RubikaLiyaquat
आरक्षण के विरोध में वर्तमान सत्ता के संरक्षण में खड़े किए जा रहे तथाकथित लोगों को मेरा तथ्यात्मक जवाब।
अब समय केवल बहस का नहीं, बल्कि अपनी आवाज़ बुलंद करने का है।
मैं सभी सामाजिक संगठनों, युवाओं, बुद्धिजीवियों से आग्रह करता हूँ कि सामूहिक रूप से बैठक कर आंदोलन की तिथि, स्वरूप और रणनीति तय करें, ताकि हमारी आवाज़ संगठित, अनुशासित और प्रभावी ढंग से उठ सके।
ये एक बेहद गंभीर मामला है जिसका दर्दनाक और ख़ौफ़नाक असर उस बच्चे पर जीवनभर हो सकता है।
टीचर्स में इतनी समझ तो होनी चाहिए कि उन्हें बच्चों से हमदर्दी और इंसानियत से पेश आना चाहिए।
तत्काल यथोचित कार्रवाई हो!
मुँह, नाभि से पैदा होने का क्लेम करने वाले लोगो ने अब नया ड्रामा शुरू किया है। अभी एक मुस्लिम प्रसिद्ध आईडी समर्थन करते हुए मत व्यक्त कर रही थी, जिसपर इबोक्स में भी सभी हाँ-हाँ में समर्थन कर रहे थे। यह;
"गंगा-जमुना तहजीब का जबरदस्त उदाहरण है"
जिसमे;
1.एससी/एसटी आरक्षण = खत्म करो
2.आर्टिकल 30 में ईसाई व मुस्लिम को मिल रहा आरक्षण = नही हटाना। फादर/अब्बा है हमारे
एससी/एसटी के आरक्षण को हटाने के लिए मुहिम चला रहे है"
इनकीं खासियत यह है कि;..
1.यह एससी/एसटी को हिन्दू बताते है।।
2.लेकिन;
"भारत मे सबसे बेहतरीन आर्टिकल 30 के आरक्षण प्राप्त कर रहे ईसाई मुस्लिम व अन्य अल्पसंख्यक को फादर बना लेते है"
उसपर न तो इनके पूर्वजो ने एक शब्द बोला और न ही उनके वर्तमान के बच्चे बोल रहे है।।
3.अब या तो ईसाई व मुस्लिम को अब्बा मान लो, हमे दिक्कत नही, लेकिन एससी/एसटी को अपने धर्म से न जोडो।।
दुनिया का सबसे बेहतरीन आरक्षण आर्टिकल 30 का आरक्षण है।।संस्था बनाओ। सस्ती जमीन खरीदो, कॉलेज व स्कूल।बनाओ, आर्टिकल 30 के आरक्षण में 50% छात्र ईसाई, मुस्लिम या अन्य अल्पसंख्यक से भरने का प्राप्त करो, माली से लेकर प्रोफेसर्स, क्लर्क, टीचर व अन्य भर्ती करने का अधिकार मुस्लिम/अन्य अल्पसंख्यक संस्था को है, भर्ती करो, सैलरी का बिल सरकार के पास भेज दो।
4.केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में दिए जवाब के अनुसार आर्टिकल 30 में;
हर तरह के स्कूल/कॉलेजी/मेडिकल/इंजीनियरिंग संस्थान = 13602
ईसाई = 7550
मुस्लिम = 5153
5.Higher Education मे 2 लाख 18 हजार टीचर्स वर्किंग है।
6.स्कूल स्तर पर;
मुस्लिम स्कूल = 27259
ईसाई स्कूल = 15808
7.इन स्कूलों में चाहे वो higher Education के हो या प्राइमरी से लेकर इंटर तक, सभी मे 50% छात्र अपने धर्म के भरने का आरक्षण अल्पसंख्यक वर्गों को है।
8.अधिकतर माइनॉरिटी संस्थान सहायता प्राप्त है। जिसमे माली, चपरासी से लेकर क्लर्क, टीचर, प्रोफेसर्स तक कि भर्ती संस्था करेगी। वेतन का बिल सरकार को भेज देंगे।
9.इन संस्थानों को आर्टिकल 30 में यह तक आरक्षण है कि शिक्षा अधिकार अधिनियम का महत्वपूर्ण भाग इनपर लागू नही होता है। माइनॉरिटी संस्थान में भारत सरकार की सबसे बेहतरीन योजना की प्राइवेट स्कूल में 25% गरीब वर्ग का बच्चा लॉटरी के माध्यम से एडमिशन लेगा, फीस सरकार देगी। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए, जीतकर आ गए।
10.सुप्रीम कोर्ट ने 20 से लेकर 25 साल या ऊपर के प्राइमरी टीचर के लिए टीचर एजिबिलिटी टेस्ट पास करने का आदेश दिया है नही तो 2 साल में नौकरी से बाहर। यह केस मुस्लिम संस्था अंजुमन का था जिसमे उन्होंने अपनी संस्था में प्रमोशन में टेट अनिवार्यता को चैलेंज किया था, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें छोड़कर पूरे देश के 25 लाख टीचर्स को करने को कह दिया। और मजेदार बात यह कि;
"आर्टिकल 30 के आरक्षण कर दायरे में आने के कारण अंजुमन सोसाइटी को allow कर दिया कि शिक्षा अधिकार अधिनियम उनपर लागू नही होता इसलिए बिना टेट के प्रमोशन कर सकते है"
यह कट्टर हिन्दू बताने वाले कंही मुस्लिम को मिल रहे सबसे बेहतरीन आरक्षण का विरोध नही करते है।।
यह सामने के वार को नौशिखिया व अपरिपक्व उन दो कौड़ी के एससी/एसटी को देखना चाहिए जो कट्टरता के नाम पर इन लोगो के साथ जुड़ जाते है।
विकास कुमार जाटव
आज दिनांक 26-07-2026 को जनपद लखनऊ के विधानसभा सरोजनी नगर में बहुजन समाज पार्टी द्वारा आयोजित विधानसभा स्तरीय समीक्षा बैठक में शामिल हुआ जिसमें बूथ /सेक्टर की समीक्षा तथा मिशन 2027 को सफल बनाने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
#जयभीम#BSP#लखनऊ#मिशन_2027#सरोजनी_नगर #बहुजन_समाज_पार्टी
प्रश्न : अगर धर्मेंद्र प्रधान "कुर्मी" की जगह धर्मेंद्र "यादव" होते तो क्या तब भी समाजवादी पार्टी उनके विरोध करती?
उत्तर : नही।
क्यो?
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ जैसे ही माहौल बना उनके पक्ष में सबसे पहले;
"अखिलेश यादव उतर आये। बकायदा कह दिया कि जमीन मामले में भाजपा मोहन यादव को फँसाकर उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाना चाह रही है"
इसका परिणाम यह हुआ कि मोहन यादव का मामला दब गया।
बाकी में Pay back to Society के साप्ताहिक कार्यक्रम से होकर आता हूँ। तब तक अपनी राय जरूर दें।
आपको क्या लगता है?
विकास कुमार जाटव
Tim Curtis, Director and Representative, UNESCO Regional Office for South Asia, congratulates the Government of India on the inscription of the Ancient Buddhist Site of Sarnath on the UNESCO World Heritage List.🌍🏛️✨
जितने भी ऑनलाइन एग्जाम होते हैं यानी CBT (Computer Based Test), उनमें पेपर लीक होना लगभग नामुमकिन है।
कैसे होगा? पेपर तो exam time पर ही system में land होता है।
CBT में पेपर लीक नहीं, बल्कि cheating होती है।
System का remote access कराकर बाहर बैठे solver gang से live paper solve कराया जाता है। आज maximum CBT exams इसी बीमारी का शिकार हैं।
आज लगभग सब कुछ outsourcing और private companies के भरोसे चल रहा है। ज़रूरत है कि सरकार का अपना exam infrastructure हो या फिर सिर्फ़ उन्हीं credible agencies like TCS से exam कराए जाएँ जिनका track record मजबूत हो।
साथ ही एक Centre Affiliation Board होना चाहिए जो पूरे देश के CBT centres का audit करे, standards तय करे और उनकी accountability सुनिश्चित करे।
Paper leak और CBT cheating दोनों अलग-अलग समस्याएँ हैं।
-देश के छात्रों व युवाओं केे आन्दोलन के चलते आज केन्द्रीय शिक्षा मन्त्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान द्वारा इस्तीफा दिये जाने का फैसला उचित, जो यह पहले ही ले लिया जाता तो बेहतर होता। साथ ही, हमारी पार्टी केन्द्र सरकार से यह भी अपेक्षा करती है कि जिन पुलिसकर्मियों ने जन्तर-मन्तर पर शान्तिमय ढंग से प्रदर्शन कर रहे निहत्ते लड़के व लड़कियों पर बरबर्तापूर्वक लाठी, डन्डों आदि से चोट पहुँचायी है जिससे ये बड़ी संख्या में गम्भीर रूप से घायल हुए, उनपर सख़्त कार्रवाई की जानी चाहिये।
-और ख़ास तौर से जिन पुरूष पुलिसकर्मियों ने लड़कियों के साथ बेहूदा व शर्मनाक बदसलूकी की और बल प्रयाग किया, उनको चिन्हित करके, उनके खिलाफ अनुशासनिक एवं क्रिमनल केस चला कर सख़्त से सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जानी चाहिये, जिससे कि भविष्य में इस तरह की घिनौनी हरकत करने की कोई हिम्मत ना कर सके।
- इसके साथ-साथ, सरकार को आन्दोलन कर रहे छात्रों व युवाओं के ख़िलाफ जो भी FIR या complaint दायर की गई है, उन सभी को वापस ले लिया जाये, जिससे इनको आगे चलकर थानों व कोर्ट कचहरी के चक्कर ना काटने पड़े और इस वजह से उनका भविष्य भी ख़राब ना हो, जिससे फिर देश में सौहार्दपूर्ण वातावरण बन सके।
- साथ ही मेरा सभी आन्दोलनकारियों से यह कहना है कि वो इस मामले में किसी भी पार्टी को उनके इस संघर्ष का राजनीतिकरण ना करने दें तथा अपने भविष्य को भी ख़राब ना होने दें।
1.देश में नीट-यूजी सहित विभिन्न परीक्षाओं के पेपरलीक व उसके उपरान्त परीक्षार्थियों द्वारा होने वाली आत्महत्याओं से उपजे छात्र-छात्राओं/युवाओं के ’कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) आन्दोलन के नई दिल्ली जन्तर-मन्तर में लगातार जारी शान्तिपूर्ण धरना को हालाँकि लोगों की व्यापक सहानुभूति हासिल है, किन्तु सरकारी जवाबदेही के रूप में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उनकी ज़िद्दी माँग को लेकर विपक्ष व सरकार दोनों के बीच ज़बरदस्त राजनीति का बाज़ार काफी गर्म है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में ज़रूरी व्यापक सुधार का असली मुद्दा ही कहीं लुप्त ना हो जाये?
2.वैसे इस गर्म मुद्दे को भुनाने हेतु विशेषकर विरोधी पार्टियों में सड़क से लेकर संसद तक में ज़बरदस्त होड़ लगी हुई है, उससे भी सरकार व विपक्ष के बीच तनाव व टकराव की भी परिस्थिति हिंसक होकर किसी न किसी रूप में राज्यों में भी फैल रही हैै, जिससे अपनी पार्टी के लोगों को सचेत व सजग रहने की सलाह।
3.इस प्रकार इस मुद्दे का पूरी तरह से राजनीतिकरण हो जाने के साथ ही जन्तर-मन्तर में आन्दोलनकारियों के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाईयों ने स्थिति को और अधिक गर्म व गंभीर बना दिया है।
4.इस भारी तनाव व टकरावपूर्ण स्थिति के कारण संसद का वर्तमान मानसून सत्र अभी तक एक दिन भी सही व सुचारू रूप से नहीं चल पाया है, जिससे देश व जनहित के और भी अनेकों महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही एक प्रकार से रुक सी गयी है।
5.इसके साथ ही, सरकार सीजेपी के आन्दोलन से निपटने हेतु जो उपाय ढूंढने का प्रयास कर रही है वह भ्रष्टाचार एवं अयोग्यता आदि के कारण होने वाले पेपरलीक होने के बाद की सख़्त कार्रवाई के द्योतक हैं, जबकि पेपरलीक के जघन्य अपराध ना हों इसके नियंत्रण हेतु उचित उपाय नहीं होता दिखने से भी लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
6.इसलिये वर्तमान राजनीतिक हालात में उग्र व निराश होने के बजाय अपने लागों को अपने मिशन के प्रति पूरी लगन व तन, मन, धन से लगातार डटे रहना है, यही अपील।
A fair education system is the foundation of a strong nation.
The concerns of students deserve to be heard through dialogue not violence. Lathi charges and the use of force against students are deeply unfortunate and should have no place in a democracy.
At the same time those who deliberately disrupt or oppose a fair and merit based education system must also be held accountable. Fairness cannot be sacrificed. Dharmendra Pradhan should take all the responsibilities
The future of our country deserves justice, transparency and accountability. 🇮🇳
1.काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का देश की राजधानी नई दिल्ली में संसद के नज़दीक जन्तर मन्तर में पिछले कई दिनों से, ख़ासकर मेडिकल की नीट जैसी विशेष परीक्षा आदि में पेपरलीक व अन्य गड़बडियों के दुष्परिणामों से छात्र-छात्राओं व उनके परिवार के काफी बुरी तरह से प्रभावित हो रहे जीवन को लेकर जारी अनिश्चितकालीन आन्दोलन के कारण सड़क से लेकर संसद तक में ज़बरदस्त हंगामा बरपा है और अब इसका राजनीतिकरण करने से यह मुद्दा सरकार के साथ सीधे टकराव का हो गया है, जिस विषम स्थिति से देश को निकालना ज़रूरी है, क्योंकि इससे दिल्ली में ही नहीं बल्कि विभिन्न राज्यों में भी आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
2.वैसे चाहे पूरे देश में अयोध्या श्रीराम मन्दिर में चढ़ावा चोरी/ग़बन आदि का गर्म मामला हो या फिर आल-इण्डिया व राज्यों की परीक्षाओं आदि में पेपरलीक का मुद्दा हो, यह सभी मूलतः भ्रष्टाचार के हर स्तर पर पनपने का ही परिणाम है।
3.इसके साथ ही यह संवैधानिक नैतिकता (constitutional morality) से भी जुडा़ मामला है, जिसके अभाव में यह देश को दीमक की तरह खाता चला आ रहा है, जबकि संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने गुड गवरनेन्स हेतु इस पर ख़ास ध्यान देने की ज़रूरत पर विशेष बल दिया है।
4.संक्षेप में मेरा यही कहना है कि देश व जनहित से जुड़े वर्तमान विकट हालात के सौहार्दपूर्ण समाधान हेतु सरकार तथा माननीय कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं को अपनी भूमिका निभाने की पहल करनी चाहिये तो यह बेहतर होगा।
5.साथ ही, सीजेपी के व्यापक हो रहे आन्दोलन का अब विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपने-अपने संकीर्ण स्वार्थ में राजनीतिकरण करके सड़क से लेकर संसद तक में टकराव व हिंसा किया जाना घोर अनुचित। सरकार व आन्दोलनकारी दोनों मिलकर इसका शान्ति व सौहार्दपूर्ण समाधान जितना जल्द निकालें उतना ही उचित।