हॉर्सशू क्रैब (घोड़े की नाल जैसा केकड़ा) पृथ्वी पर 45 करोड़ वर्षों से भी अधिक समय से मौजूद है।
गंगा डेल्टा से जुड़े तटीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले ये प्राचीन जीव समुद्री जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये कई प्रवासी पक्षियों और जलीय जीवों की खाद्य श्रृंखला का अहम हिस्सा हैं।
इनके अंडे अनगिनत तटीय पक्षियों के लिए भोजन का स्रोत बनते हैं, जिससे अलग-अलग पारिस्थितिक तंत्रों के बीच जीवन का संतुलन बना रहता है।
लेकिन तटीय प्रदूषण, आवासों का विनाश और बदलते ज्वार-भाटे इनके अस्तित्व के लिए खतरा बन रहे हैं और इनकी संख्या तेजी से घट रही है।
अगर हॉर्सशू क्रैब गायब हो गए, तो तटीय जीवन की एक पूरी खाद्य श्रृंखला धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगेगी।
पृथ्वी के सबसे प्राचीन जीवों का अस्तित्व आज भी स्वस्थ जल पर निर्भर है।
स्वस्थ जल बचाइए, जैव विविधता बचाइए।
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लेपर्ड कैट (Prionailurus bengalensis)
छोटे तेंदुए जैसी दिखने वाली लेपर्ड कैट जंगली बिल्लियों की एक प्रजाति है।
इसका लंबा और पतला शरीर, आँखों और कानों के बीच की काली धारियाँ तथा आँखों से नाक तक फैला सफेद रंग इसकी प्रमुख पहचान हैं।
लेपर्ड कैट पेड़ों पर चढ़ने में माहिर होती है और आवश्यकता पड़ने पर आसानी से तैर भी सकती है।
वन्यजीवों का सम्मान करें, उनके प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखें और उनके संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं।
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बिहार सहित भारत के अधिकांश मैदानी एवं उप-हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला शहतूत- मध्यम आकार का घना एवं छायादार पर्णपाती वृक्ष है। इसकी पहचान इसके फल और पत्तियों से होती है।
शहतूत की पत्तियों का उपयोग रेशम उत्पाद के लिए किया जाता है। वहीं, इसके फल का इस्तेमाल जैम, शरबत आदि बनाने में किया जाता है।
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इमली
वितरण (Distribution): इमली (Tamarindus indica) की उत्पत्ति उष्णकटिबंधीय अफ्रीका मानी जाती है मगर यह भारत में बड़े पैमाने पर उगाई जाती है। यह दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका तथा अन्य उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भी व्यापक रूप से वितरित है। भारत में यह मैदानी एवं पठारी क्षेत्रों में विशेष रूप से सामान्य है।
जैव-भौगोलिक क्षेत्र (Biogeographic Provinces): दक्कन प्रायद्वीप (Deccan Peninsula), मध्य उच्चभूमि (Central Highlands), गंगा का मैदानी क्षेत्र (Gangetic Plains), पूर्वी एवं पश्चिमी घाट (Eastern & Western Ghats), अर्ध-शुष्क एवं शुष्क क्षेत्र।
स्वरूप (Habit): बड़ा, दीर्घायु एवं सदाबहार से अर्ध-सदाबहार वृक्ष (Large Long-lived Evergreen to Semi-evergreen Tree)।
आवास (Habitat): यह प्रजाति उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में शुष्क से लेकर आर्द्र जलवायु तक अच्छी तरह विकसित होती है। यह विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में उग सकती है, किंतु अच्छी जल निकासी वाली दोमट एवं बलुई-दोमट मिट्टी में सर्वोत्तम वृद्धि करती है। यह सूखा एवं उच्च तापमान सहन करने की क्षमता रखती है।
देशज या विदेशी (Native/Exotic): विदेशी (Exotic) – भारत में प्राचीन काल से प्राकृतिक रूप से स्थापित (Naturalized)
फूलने-फलने का समय (Phenology):
फूल: अप्रैल – जून
फल: दिसंबर – अप्रैल
पारिस्थितिक भूमिका (Ecological role): इमली के घने वृक्ष पक्षियों, गिलहरियों एवं अन्य छोटे वन्यजीवों को आश्रय प्रदान करते हैं, जबकि इसके फल अनेक जीवों के भोजन का स्रोत होते हैं। इसकी विस्तृत जड़ प्रणाली मिट्टी के कटाव को कम करने तथा कार्बन अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह वृक्ष शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में उत्कृष्ट छायादार वृक्ष के रूप में भी महत्त्वपूर्ण है।
स्थानीय उपयोग (Local Usage): इमली के गूदे का उपयोग भोजन, पेय पदार्थ, चटनी, अचार तथा विभिन्न व्यंजनों में खट्टे स्वाद के लिए किया जाता है। इसके फल विटामिन एवं खनिजों से भरपूर होते हैं। पत्तियों, छाल एवं फल का उपयोग आयुर्वेद एवं पारंपरिक चिकित्सा में पाचन, ज्वर तथा अन्य रोगों के उपचार में किया जाता है। इसकी कठोर एवं टिकाऊ लकड़ी का उपयोग कृषि उपकरण, फर्नीचर, हस्तशिल्प एवं ईंधन के रूप में किया जाता है।
करौंदा (Carissa carandas)
छोटे, सुगंधित फूलों और रंग-बिरंगे फलों वाला करौंदा एक उपयोगी और कम देखभाल में पनपने वाला पौधा है।
इसके फलों का उपयोग अचार, जैम और जेली बनाने में किया जाता है।
वहीं यह आयरन और विटामिन-C का भी अच्छा स्रोत माना जाता है।
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हर सुबह, एक सही फैसला!
खाली पेट चाय पीने की बजाय दिन की शुरुआत पर्याप्त पानी पीकर करें और कुछ मिनट हल्की शारीरिक गतिविधि अपनाएं। छोटी-सी यह स्वस्थ शुरुआत पूरे दिन शरीर को तरोताज़ा और सक्रिय रखने में मदद कर सकती है।
Healthy Morning | Morning Routine | Healthy Lifestyle
#NHMUP
अमड़ा (Spondias pinnata) बिहार में पाए जाने वाले महत्वपूर्ण फलदार वृक्षों में से एक है। इसके फल का उपयोग स्वादिष्ट अचार, चटनी एवं विभिन्न व्यंजनों को बनाने में किया जाता है।
विटामिन C सहित अनेक पोषक तत्वों से भरपूर अमड़ा हमारी जैव विविधता और पारंपरिक खान-पान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आइए, अपने आसपास के स्थानीय वृक्षों एवं जैव विविधता के संरक्षण के प्रति जागरूक बनें और हरियाली को बढ़ावा दें।
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कौआ (Corvus splendens)
यह एक अत्यंत बुद्धिमान, सर्वाहारी और सामान्यतः मानव बस्तियों के आसपास पाया जाने वाला पक्षी है।
कौए को प्रकृति का महत्वपूर्ण सफाईकर्मी माना जाता है, क्योंकि यह मृत जीवों और जैविक अपशिष्ट को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में योगदान देता है।
कौआ हानिकारक कीटों को खाकर फसलों की सुरक्षा में भी सहायक होता है। इसके अलावा, यह बीजों के प्रसार में योगदान देकर नए पेड़-पौधों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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इस पोस्ट के माध्यम से जानिए कॉमन करैत (Bungarus caeruleus) और इंडियन कोबरा (Naja naja) की पहचान और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।
* सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक में समय न गंवाएँ, तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुँचें और चिकित्सकीय सहायता लें।
* ब्लॉक स्तर से ऊपर के सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी-वेनम सीरम उपलब्ध है।
* अधिक जानकारी एवं सहायता के लिए विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-345-7252 पर संपर्क करें।
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क्या आप जानते हैं? चमगादड़ पृथ्वी पर पाया जाने वाला एकमात्र उड़ने वाला स्तनधारी है।
बिहार में इसकी 27 प्रजातियां पाई जाती हैं और परागण, बीज प्रसार से लेकर कीट नियंत्रण तक, चमगादड़ प्रकृति के संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं।
आइए, इन जीवों के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएं और जैव विविधता को सुरक्षित रखें।
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🌧️बेहतर आहार, स्वस्थ परिवार! 🥗
🌿बारिश का मौसम हो या सुबह की शुरुआत—सेहत से समझौता क्यों? पौष्टिक आहार चुनें, शरीर को पोषण दें और मानसून में खुद को स्वस्थ रखें।
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भारतीय लाल बिच्छू को सबसे विषैले बिच्छुओं में से एक माना जाता है। इसका डंक गंभीर हो सकता है, इसलिए इसे कभी भी हल्के में न लें।
अगर बिच्छू डंक मार दे, तो घबराने के बजाय तुरंत सावधानी बरतें—
डंक वाली जगह पर चीरा न लगाएं।
विष को मुंह से चूसने की कोशिश न करें।
झाड़-फूंक या किसी भी अवैज्ञानिक उपचार से बचें।
बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचें।
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रेड सैंड बोआ
भूरा-लाल रंग, मोटा शरीर और छोटी आंखें इसकी प्रमुख पहचान हैं। यह एक विषहीन साँप है, जो मुख्य रूप से चूहों, छिपकलियों और अन्य छोटे जीवों की संख्या को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रेड सैंड बोआ को ‘दोमुंहा साँप’ के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इसकी पूंछ सिर जैसी दिखाई देती है, जिसका उपयोग यह शिकारियों को भ्रमित करने के लिए करता है।
भारत में रेड सैंड बोआ को पकड़ना या इसकी तस्करी करना कानूनन अपराध है। इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षण प्राप्त है।
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प्रकृति में प्रत्येक जीव का अपना विशिष्ट महत्व है। जीवों के खान-पान एवं आहार की प्रकृति के आधार पर उन्हें मुख्य रूप से मांसाहारी, शाकाहारी एवं सर्वाहारी वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है।
वन्यजीवों की विविधता एवं इनके बीच स्थापित प्राकृतिक खाद्य-श्रृंखला पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
आइए, वन्यजीवों, जैव विविधता एवं प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति जागरूक बनें और पर्यावरण संरक्षण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।
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