मैंने तुम्हें छोड़ा नहीं है
बस तुम्हें जाने दिया है
क्योंकि तुम्हें जाना था
तुम कह सकते हो कि...
मैंने हार मान ली या मैंभी औरों सा हूं
पर सत्य यही है कि तुम्हारे लिए मैं किसी से लड़ सकता हूं।
मगर
मैं तुमसे कैसे लड़ूं?
तुम्हें जाने देना मेरे प्रेम की आखिरी कुर्बानी थी।
@Vimal_Bal@DelhiPolice@MIB_India@PIBFactCheck@Cyberdost मैंने तो सिर्फ विडियो शेयर किया, कोई ओपीनियन तो दिया नहीं।
तुमलोग खुद ही साबित करने में लगे हो कि मोदी जी ग़लत एक्टिविटी में इन्वॉल्व हैं।
हैस टैग रीच के लिए लगाते हैं मैंने तो #महानवमी भी लिखा है अब तुमने यही मानना है तो कोई क्या ही कर सकता है।
जो कूटनीति हो रही है वो नेशन-स्टेट के बीच नहीं है।
मार्को रूबियो का साउथ ब्लॉक छोड़कर सीधे जामनगर जाना यह बताता है कि 21 वीं सदी में अगर किसी देश की संप्रभुता को मोड़ना है तो बस यही काफ़ी है कि उसके पॉलिसी मेकर्स की पुरानी फ़ाइल सही समय पर टेबल पर ले आई जाये और उसके सबसे बड़े व्यापारिक साम्राज्य को अपने प्रॉफिट के जाल में फँसा लिया जाए!
विदेशनीति कुल जमा इतनी है कि किसी राष्ट्रपति के बेटे के वेंचर में किस कॉर्पोरेट घराने ने पैसा लगाया है और किस मंत्री की कौन सी पुरानी फ़ाइल अमेरिकी न्याय विभाग की तिजोरी में बंद है!
#TheCompromisedPM#TheBlackmailedDalal, सुन लो।
बाज़ अगर थोड़ी देर उड़ान छोड़ दे तो आसमान गिद्धों का नहीं हो जाता।
अर्थात~ देशभक्त अगर शांत हो जाएं तो देश गद्दारों का नहीं हो जाता! हां सत्ता दलालों के पास जरूर चली जाती है। और देश का मतलब न सत्ता होती है न कोई पार्टी।
@RahulGandhi जी इस देश में असल लड़ाई #bjp vs #कांग्रेस नहीं है बल्कि लड़ाई है~
#ब्रह्मणवाद/#मनुवाद/#मुल्लावाद vs #संविधान
देश के दुश्मन संस्थान हैं #rss~
#राष्ट्रीय_सत्यसंहारक_संघ और #पूंजीवाद
हम मिश्रित अर्थव्यवस्था हैं लेकिन कितना %?
और कौन कौन से सेक्टर??
क्या शिक्षा को मिश्रित अर्थव्यवस्था के अंदर रख कर किसी भी आरक्षण नीति से समानता की कल्पना की जा सकती है???@INCIndia@priyankagandhi
ओ भोसड़ी वाले चच्चा! तुम्हें तो इन चूतिये अफसरों का पता है पर हमें तो तेरे नपुंसक संघी बापों का भी पता है कि कौन कौन कब कहां क्या घोटाला किया है।
सिंहासन ख़ाली करो जनता आती है।
#EpstienFiles#दशहरा#HappyDussehra
غزل
ग़ज़ल
اُسے جاناں اُسے کعبہ اُسے قبلہ کہا میں نے
وہی انور وہی باطن اُسے کیا کیا کہا میں نے
उसे जानाँ उसे का'बा उसे क़िब्ला कहा मैं ने
वही अनवर वही बातिन उसे क्या क्या कहा मैं ने
اُسی خالق نے کی تخلیق تو قائم ہوئی دنیا
وہی گزرا وہی دوراں جسے فردا کہا میں نے
उसी ख़ालिक़ ने की तख़लीक़ तो क़ायम हुई दुनिया
वही गुज़रा वही दौराँ जिसे फ़र्दा कहा मैं ने
اُسے کس طور کوئی سمجھے سمجھاؤں بھلا کیسے
وہی غائب وہی حاضر وہی پردہ کہا میں نے
उसे किस तौर कोई समझे समझाऊँ भला कैसे
वही ग़ाइब वही हाज़िर जिसे पर्दा कहा मैं ने
وہی جلوت وہی خلوت وہی ہلچل میں ہے شامل
وہی جنگل وہی صحرا جسے دریا کہا مَیں نے
वही जलवत वही ख़लवत वही हलचल में है शामिल
वही जंगल वही सहरा जिसे दरिया कहा मैं ने
وہی غزلیں وہی نظمیں وہی معنی بنا بیٹھا
وہی اُولیٰ وہی ثانی جسے مصرع کہا مَیں نے
वही ग़ज़लें वही नज़्में वही मा'नी बना बैठा
वही ऊला वही सानी जिसे मिस्रा कहा मैं ने
اُسے سوچا اُسے لکّھا مگر سمجھا نہیں اب تک
جسے ساکن جسے حرکت جسے نقطہ کہا مَیں نے
उसे सोचा उसे लिक्खा मगर समझा नहीं अब तक
जिसे साकिन जिसे हरकत जिसे नुक़्ता कहा मैं ने
اُسے چاہا اُسے کھوجا اُسے پایا نہیں لیکن
جسے گایا جسے پوجا جسے شیوَہ کہا مَیں نے
उसे चाहा उसे खोजा उसे पाया नहीं लेकिन
जिसे गाया जिसे पूजा जिसे शेवा कहा मैं ने
وہی بندہ وہی مالک وہی رستہ کہے خود کو
جسے قربت جسے دوری جسے سجنا کہا مَیں نے
वही बंदा वही मालिक वही रिश्ता कहे ख़ुद को
जिसे क़ुर्बत जिसे दूरी जिसे सजना कहा मैं ने
وہی ہر دم وہی بے دم وہی دم کاف کا دم ہے
جسے ہونا جسے جینا جسے مرنا کہا مَیں نے
वही हर दम वही बे-दम वही दम 'काफ़' का दम है
जिसे होना जिसे जीना जिसे मरना कहा मैं ने
- کاف
- काफ़
मोहन यादव के राज में सरकारी खरीद में करोड़ों के घोटाले का सबूत है ये वीडियो.
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे सामने बैठे अधिकारियों से जो कह रहे हैं , उसे सुनिए .
इसके बाद MPSEDC के
एडिशनल एमडी अंशुमान राज का प्रेजेंटेशन देखिए .
राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा जी @Pawankhera एपस्टीन मामले को बेहद नजदीक से समझने देखने वाले वो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने हरदीप - एपस्टीन संवाद की तमाम परतें खोली थी। तस्वीरों के सामने आने के बाद वो जो कह रहे हैं वो महत्वपूर्ण है।
"जेफरी एपस्टीन के साथ हरदीप पुरी की अकेली तस्वीर ने उनके इस दावे को बुरी तरह से ध्वस्त कर दिया है कि वे कुख्यात यौन तस्कर से केवल एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में मिले थे।
पुरी का दावा है कि आठ वर्षों में उनकी 1-2 मुलाकातें और 3-4 ईमेल हुए थे। इसे कहने का यह एक बड़ा चालाकी भरा तरीका है।
लेकिन हममें से जिन्होंने फाइलों के सामने आने पर उनका गहन अध्ययन किया था, वे शुरू से ही जानते थे कि कहानी उससे कहीं अधिक विस्तृत थी जितना वह हमें विश्वास दिलाना चाहते थे। अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट पर मौजूद एपस्टीन फाइलों के अनुसार,
केवल 3 वर्षों (2014-17) की अवधि में, एपस्टीन और हरदीप के बीच कम से कम 62 ईमेल का आदान-प्रदान हुआ।
अब तक हमें जितनी जानकारी है, उसके अनुसार 14 बैठकें और विस्तृत बातचीत हुई थीं, और उनमें से कई व्यक्तिगत मुलाकातें थीं।
हाल ही में सामने आई तस्वीरों ने हमारे दावों को और भी पुख्ता कर दिया है, जबकि कुछ सवाल अभी भी बने हुए हैं:
तो क्या केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री जनता को गुमराह करना बंद करेंगे और एपस्टीन के साथ अपने संबंधों/सहयोग की वास्तविक सीमा का खुलासा करेंगे?
एपस्टीन के साथ उनकी कई मुलाकातों में से कौन सी मुलाकात उनकी हाल ही में सामने आई अकेले की तस्वीर में कैद है?
सबसे महत्वपूर्ण बात, इस मुलाकात का असल मकसद क्या था?
और क्या भारत सरकार अपने केंद्रीय मंत्री की एक दोषी बाल यौन तस्कर के साथ इस शर्मनाक संलिप्तता की जांच करने का नैतिक साहस दिखाएगी?"
چلو مانا کہ کعبہ حج کی منزل ہے
مگر کعبے کا کعبہ تو مرا دِل ہے
चलो माना कि का'बा हज की मंज़िल है
मगर का'बे का का'बा तो मिरा दिल है
اگر میں نورِ الٰہی سے بنا ہوں تو
وہی جلوہ مری رگ رگ میں شامل ہے
अगर मैं नूर-ए-इलाही से बना हूँ तो
वही जलवा मिरी रग रग में शामिल है
- کاف
- काफ़
सेक्स ओफेंडर जैफरी एपस्टीन से भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की यह तस्वीर खूबसूरत है।रावणों के चेहरे विजयादशमी पर सामने आ ही जाते हैं।
जेफरी एपस्टीन की ओर से हरदीप पुरी निरंतर अपने राजनयिक संपर्कों और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे थे, जिन्हें 2008 में एक नाबालिग से जुड़े यौन तस्करी के मामले में पहले ही दोषी ठहराया जा चुका था।
फिर से याद करिए हरदीप पुरी ने सीरियल रेपिस्ट और सेक्स ट्रैफिकर जैफरी एपस्टीन के दोस्त को अपने रसूख का इस्तेमाल कर तात्कालिक वीजा उपलब्ध कराया था।
हरदीप और एपस्टीन के संबंध कितने गहरे थे इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 24 अक्टूबर 2014 को एपस्टीन ने हरदीप पुरी को लिखा था“मेरी सहायक को भारत में एक शादी में शामिल होने के लिए तुरंत वीज़ा चाहिए। क्या दूतावास में कोई ऐसा व्यक्ति है जिससे वह बात कर सके?” हरदीप पुरी ने इसे एक सामान्य प्रश्न नहीं माना। उन्होंने हस्तक्षेप करने के लिए हर संभव प्रयास किया - सेवानिवृत्त राजदूत प्रमोद बजाज और न्यूयॉर्क में स्थित संजीव नामक व्यक्ति को ईमेल भेजकर एपस्टीन की सहायता करने का निर्देश दिया था।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा जी @Pawankhera जी के पूर्व में पूछे गए सवाल इस तस्वीर के सामने आने के बाद एक बार फिर जेरेगौर हैं।
1. हरदीप पुरी ने किसी को, विशेष रूप से एपस्टीन के करीबी लोगों को, सहायता दिलाने में जल्दबाजी करने के लिए कूटनीतिक और राजनीतिक प्रभाव का अनुचित उपयोग क्यों किया?
2. एक दोषी यौन अपराधी के साथ काम करने वाले व्यक्ति के लिए दरवाजे खोलने से पहले, हरदीप पुरी ने यह सत्यापित करने के लिए क्या उचित जांच-पड़ताल की कि यह यात्रा वास्तव में "एक शादी" के लिए थी - न कि भारत की सुरक्षा और गरिमा के लिए खतरा पैदा करने वाली किसी घृणित गतिविधि के लिए?
3. इस शर्मनाक संबंध से उन्हें क्या लाभ मिल रहा था कि वे एपस्टीन को लाभ पहुंचाने और उसके लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार थे?
4. क्या हरदीप पुरी अब भी यही मानते हैं कि एपस्टीन के साथ उनकी बातचीत केवल "डिजिटल इंडिया" को बढ़ावा देने तक सीमित थी?