कितने बड़े-बड़े अपराधियों को जमानत मिल गई, आतंकवादी को भी जमानत मिल गई लेकिन Innocent Sant Shri Asharamji Bapu को नहीं, क्यों?
क्या न्याय बिकता है?
जनता की मांग है Justice For Bapuji and #StopMisuseOfLaw 👉
बापूजी के केस की लड़ाई में आज सबसे बड़ा सवाल है क्या सुप्रीम कोर्ट की आखिरी उम्मीद को सही दिशा मिल रही है?
क्या पंकज मीरचंदानी उर्फ अर्जुन बापूजी के लिए सही सीएलपी तैयार किया होगा?
पुराने फैसलों, कानूनी रणनीतियों और उठे विवादों को देखते हुए साधकों में चिंता है कि कहीं फिर कोई गलत कदम नुकसान न कर दे।
अब समय है कि भावनाओं से ऊपर उठकर पारदर्शिता, एकता और मजबूत कानूनी प्रयासों के साथ न्याय की लड़ाई लड़ी जाए।
It is unfortunate that @GautamKhattar and his younger brother, Madhav Khattar, have been arrested in hate speech case by the Goa Police, who appear to have acted with unusual speed and aggression. Many Hindus believe they are not criminals but have spoken what they see as the truth. The Inquisition remains a dark chapter of Goa’s history that deserves discussion even today. Everyone should speak up on this issue. We cannot accept such high-handed actions.
न्यायपालिका में पारदर्शिता और विश्वास: संतुलन की असली परीक्षा
एक समय ऐसा था जब आम लोगों के मन में न्यायालयों को लेकर भरोसा धीरे-धीरे कमजोर पड़ता नजर आ रहा था। अदालतों की कार्यवाही आम जनता की नज़र से दूर रहती थी, जिससे शंकाएँ और अविश्वास पैदा होते थे। लेकिन जैसे ही अदालतों में वीडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था शुरू हुई, न्यायिक प्रक्रिया में एक नई पारदर्शिता आई। लोगों को यह महसूस हुआ कि न्याय केवल किया ही नहीं जा रहा, बल्कि होता हुआ दिख भी रहा है और यहीं से न्यायपालिका के प्रति विश्वास और सम्मान फिर से मजबूत होने लगा।
इसी दिशा में सुप्रीम कोर्ट के हालिया दिशानिर्देश बेहद अहम हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और पूरी रिकॉर्डिंग को बढ़ावा दिया जाए। जहां रिकॉर्डिंग की अनुमति है, वहां वीडियो के साथ ऑडियो रिकॉर्डिंग भी अनिवार्य होगी, ताकि किसी भी तरह की अधूरी या भ्रामक जानकारी की गुंजाइश न रहे। साथ ही, आधिकारिक रिकॉर्डिंग में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप जैसे बीच में आवाज़ बंद करना या वीडियो रोकना कानूनन गलत माना गया है।
पारदर्शिता किसी भी न्याय व्यवस्था की सबसे मजबूत नींव होती है। जब अदालत की कार्यवाही खुली और रिकॉर्डेड होती है, तो यह न केवल न्यायाधीशों और वकीलों की जवाबदेही तय करती है, बल्कि आम नागरिकों को यह भरोसा भी देती है कि न्याय निष्पक्ष और निष्कलंक है। ऐसे में, लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान कोर्ट की कार्यवाही का वीडियो या ऑडियो बंद करना सीधे-सीधे पारदर्शिता के सिद्धांत के खिलाफ जाता है और यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर क्या छिपाया जा रहा है।
हालांकि, हर नियम के साथ जरूरी अपवाद भी होते हैं। विशेष रूप से रेप जैसे संवेदनशील मामलों में पीड़िता की गरिमा, निजता और सुरक्षा सर्वोपरि होती है। ऐसे मामलों में, जब पीड़िता का बयान दर्ज किया जा रहा हो या किसी गवाह की गवाही हो रही हो, तब वीडियो बंद करना न केवल उचित बल्कि आवश्यक भी है। यह कदम न्याय के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं और अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया जाता है।
अंततः, न्याय व्यवस्था की असली ताकत पारदर्शिता में है, और उसकी गरिमा संवेदनशीलता में। यदि इन दोनों के बीच सही संतुलन बनाया जाए, तो न केवल न्यायपालिका मजबूत होगी, बल्कि आम जनता के दिलों में उसका विश्वास और भी गहरा होगा।
#RajasthanHighCourt
मुहम्मद ख़ुर्शीद ने गौरक्षक फरसे वाला बाबा जी को ट्रक से कुचला।
इस षड्यंत्र के पीछे बहुत सारे लोग है।
@Uppolice आपको अपराधियों पर कार्यवाही करनी थी ना की हमारे गौरक्षक भाइयो पर।🥹
कृपया कर के आप गौरक्षकों को जल्द से जल्द रिहा करे और अपराधियों पर कठोर से कठोर कार्यवाही करे।🥹🙏🏻
हिंदू शेर टाइगर राजा भैया की दहाड़ 🔥✊
फरसा बाबा की हत्या पर योगी जी से की बड़ी अपील
गऊ तस्करों को ऐसी सजा दो की गाय के पास से गुजरने
के लिए भी ये हत्यारे 1000 बार सोचे
🚨 यही वह ट्रक बताया जा रहा है जिससे गौरक्षक फरसा बाबा की कुचलकर मौत हुई। वहीं, ट्रक चालक मोहम्मद खुर्शीद की भी अस्पताल में मौत हो गई है।
बताया जा रहा है कि ट्रक में तार लदा हुआ था। फिलहाल फरसा बाबा के साथ आखिर क्या और कैसे हुआ, यह जांच का विषय बना हुआ है।
⚠️ घटना को लेकर कई सवाल, पुलिस जांच में जुटी
#BreakingNews #Accident #Investigation #CrimeNews
ईद पर दो घटनाएं हैं
- जयपुर में हिंदुओं ने नमाजियों पर फूल बरसाए
- मथुरा में गौरक्षक फरसा वाले बाबा की हत्या कर दी गई
सेक्यूलर हिंदू ईद पर फूल बरसा रहा है और गौतस्कर ईद पर गौरक्षक फरसा वाले बाबा चंद्रशेखर की जान ले रहे हैं
ये है सेक्यूलरिज्म जो हिंदुओं के खून से मजबूत होता है
चलो पुणे!
गौ माता के वैज्ञानिक, आध्यात्मिक, धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व को समझने, देखने और अनुभव करने के लिए आयोजित #GauTech2026 — विश्व का सबसे बड़ा प्रदर्शनी एवं संवाद कार्यक्रम — आज पुणे में हो रहा है।
मैं आज दोपहर 12 बजे वहाँ पहुँच रहा हूँ।
स्थान: कृषि महाविद्यालय, शिवाजी महाराज नगर, पुणे।
आप भी अवश्य पधारें।
@shekhar_mundada@VallabhbhaiKat1@PuneCityPolice@Dev_Fadnavis
#GauTechExpo #GauTech
आज कम से कम दस मीडिया आउटलेट्स ने आशाराम जी बापू के काशी विश्वनाथ मंदिर जाने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या मीडिया ने इस पूरे घटनाक्रम को जिम्मेदारी और तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया है?
रिपोर्ट्स में यह कहा जा रहा है कि उनके मंदिर जाने से “वीआईपी कल्चर” को बढ़ावा मिलता है। पर क्या किसी ने यह बताने की ज़हमत उठाई कि 90 वर्ष के एक वृद्ध संत ने न तो गर्भगृह में प्रवेश किया, न कोई विशेष पूजा करवाई, और केवल सामान्य दर्शन कर शांतिपूर्वक लौट गए?
काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश सरकार के ट्रस्ट के अधीन है, जहाँ पहले से ही एनआरआई और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग दर्शन व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में यदि एक 90 वर्षीय व्यक्ति ने उसी सुविधा के अंतर्गत दर्शन किए, तो इसे “वीआईपी कल्चर” का मुद्दा बनाना कितना उचित है?
यहाँ असली सवाल मीडिया की भूमिका पर खड़ा होता है—
क्या मीडिया का काम तथ्यों को संतुलित तरीके से रखना है या फिर आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर विवाद खड़ा करना?
क्या हर घटना को सनसनीखेज बनाना ही अब पत्रकारिता का मानक बन गया है?
और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न—
यदि एक वरिष्ठ नागरिक, वह भी 90 वर्ष की आयु में, बिना किसी विशेषाधिकार का दुरुपयोग किए केवल दर्शन करता है, तो क्या उसे भी अब कटघरे में खड़ा किया जाएगा?
मीडिया को चाहिए कि वह तथ्यों की पूर्ण और संतुलित तस्वीर सामने रखे, न कि केवल एक पक्ष को उभारकर भ्रम और विवाद पैदा करे।
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@Thakur_VishalS
रमजान में इफ्तारी के लिए चमचमाती कालीनें लेकिन मंदिरों में हिन्दू श्रद्धालुओं पर पुलिस के थप्पड़.
धर्मनिरपेक्ष सत्ता द्वारा शासित झारखंड में आपका स्वागत है..
राजप्पा मन्दिर का दृश्य... जहां वर्दी वालों ने महिला भक्तों पर भी नहीं दिखाई दया.
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