क्या आपको नहीं लगता Chennai Super Kings, Mumbai Indians और Kolkata Knight Riders की तरह बेमिसाल बिहार की भी एक टीम होनी चाहिए?
बिहार की मिट्टी ने देश को बहुत से बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी दिए हैं।
पटना में जन्मे ईशान किशन ने सबसे कम गेंदों में ODI double century लगाई। समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी सबसे कम उम्र में IPL debut करने वाले खिलाड़ी बने। और गोपालगंज के साधारण परिवार में जन्मे साकिब हुसैन की शानदार गेंदबाजी पर आज पूरी दुनिया की नज़रें हैं।
लेकिन एक बात मुझे हमेशा खलती है कि हमारे बिहार को क्रिकेट में अब भी वह नाम और पहचान क्यों नहीं मिल पा रही जिसके हम हकदार हैं।
मेरा हमेशा से यह सपना और प्रयास रहा है कि बिहार के युवाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले, हमारे खिलाड़ियों को भी world class infrastructure और support बिहार में ही मिलना चाहिए। मुझे पूरा भरोसा है कि अगर हमारे बच्चों को सही प्रेरणा और सुविधाएं मिलें, तो हमारे बिहार से बनने वाली टीम दुनिया की बेस्ट टीम होगी।
और मैं इस काम में बिहार के युवाओं के साथ पूरी मज़बूती से खड़ा हूँ। बिहार की क्रिकेट टीम और यहाँ के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए मैं अपनी तरफ से unconditional support दूंगा।
बिहार मेरे लिए सिर्फ एक राज्य नहीं, एक emotion है।
और अब वक्त आ गया है कि हमारी मिट्टी का talent मैदान पर दिखे।
ये हरियाणा के पानीपत में स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रिफाइनरी का दृश्य है। वीडियो में जो लोग आपको प्रदर्शन करते नज़र आ रहे हैं उनमें से 90% लोग बिहार के रहने वाले हैं।
इन लोगों की बड़ी मामूली मांग है। ये चाहते हैं कि इनकी ड्यूटी के घंटों को 12 घंटों से घटाकर 8 घंटे किये जाएं और इन्हें महीने की 1-5 तारीख के बीच वेतन मिल जाए। पहली बात अगर कंपनी इनसे 12-12 घंटे काम करवा रही है तो लेबर लॉ का उल्लंघन कर रही है और दूसरी बात अगर कंपनी इतना काम करवाकर भी समय पर पैसे नहीं दे रही है तो यह बिहार समेत देशभर के मज़दूरों का शोषण है।
बिहार सरकार अगर यह वीडियो देख रही है तो अब भी थोड़ी शर्म करे। बिहार के लोग मशीन की तरह दूसरे राज्य में मजदूरी करते हैं और ये नेता बेशर्मों की तरह इस पलायन पर गर्व करते हैं।
अब ज़रा सोचिये कि क्या हुआ चुनाव से पहले के उन वादों का जब सरकार ने कहा था कि पलायन खत्म हो जाएगा और लोगों को उनके प्रदेश में ही रोजगार मिलेगा। अगर उन्हें रोजगार मिल रहा होता तो क्या वो फैक्ट्रियों में 12-12 घंटे काम करके अपनी हड्डियां गलाते?
A video circulating on social media claims that under the #NewLabourCode, employees will be required to work 12 hours a day, totalling 72 hours per week.
#PIBFactCheck
❌ The claim is #misleading!
✅ Under the recently introduced #labourcode, normal working hours are capped at 8 -12 hours per day and 48 hours per week.
✅ Flexibility of 12-hour workdays permitted for up to 4 days a week, with the remaining three days being paid holidays.
✅ 12-hour shift to include interval/spread-over.
✅ Overtime will be permitted only with the worker's consent. And, employers must pay all employees overtime wages at least twice the normal rate for any work done beyond the regular working hours.
For more details, read: https://t.co/gfRb4eT38M