वाराणसी में बीजेपी पार्षद की नाव पर चिकन और शराब पार्टी करने वालों को 24 घंटे के अंदर वाराणसी कोर्ट से जमानत मिल गई !
मार्च में कुछ मुस्लिम युवकों ने भी नाव पर इफ्तार पार्टी की थी , जिसमें बिरयानी खाई गई थी ,
इस मामले में गिरफ्तार सभी लोगों की जमानत याचिका वाराणसी कोर्ट ने रद्द कर दिया था , और लगभग दो महीने जेल में रहने के बाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी !
हैं न देश की कानून व्यवस्था मजेदार !
सरकार कह रही है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है.
चुनाव आयोग पहले ही आधार, वोटर आईडी, राशन कार्ड को रिजेक्ट कर चुका है.
कैसे पता करें कि जिस आदमी को तीन बार प्रधानमंत्री पद की शपथ दिला दी वो भारत का नागरिक है भी कि नहीं? 😀
उसके पास ऐसा कौन सा सर्टिफिकेट है जिससे नागरिकता साबित हो?
>मोहम्मद बिन कासिम के हमले बंद हो गए,
>गजनी भी मर गया
>गुलाम वंश भी खत्म हो गया
>तैमूर का हमला भी नहीं हो रहा
>मुगल भी चले गए
>अहमद शाह अब्दाली भी लूटने नहीं आ रहा
>अंग्रेज भी चले गए
फिर राम मंदिर को लूटने वाले कौन लोग हैं?
• आधार कार्ड नागरिकता का आधार नहीं है
• वोटर कार्ड नागरिकता का आधार नहीं है
• पैन कार्ड नागरिकता का आधार नहीं है
• ड्राइविंग लाइसेंस नागरिकता का आधार नहीं है
और अब पासपोर्ट भी नागरिकता का आधार नहीं है
अब दिखाने को कौन सा कागज बचा है?
अगर आपके पास भारत का पासपोर्ट है, तो इसका यह मतलब नहीं है कि आप भारत के नागरिक हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पासपोर्ट एक Travel Document है, Citizenship Document नहीं।
लेकिन यहां दिलचस्प बात यह है कि पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, फिर भी इससे अपने आप नागरिकता सिद्ध नहीं होती।
अभी कुछ दिन पहले ऐसे ही सुप्रीम कोर्ट आधार कार्ड के बारे में यह स्पष्ट कर चुका है कि आधार कार्ड नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है, बल्कि यह केवल पहचान का डॉक्यूमेंट है।
इसी प्रकार मतदाता पहचान पत्र को भी नागरिकता का डॉक्यूमेंट नहीं माना जाता। यह मुख्य रूप से पहचान और निवास का प्रमाण है, जो व्यक्ति को चुनाव में मतदान करने का अधिकार प्रदान करता है।
"जिसने चोरी की, वही जांच कैसे कर सकता है? वहां उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार व्यवस्था में लगी है तो जांच वही क्यों करेंगे? जांच तो वो करेगा जो उस पक्ष में पहले से ना हो, जो निष्पक्ष हो। सरकार से क्या न्याय की उम्मीद होगी? जांच के नाम पर लीपापोती हो रही है।"
- शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
आधार नागरिकता के लिए पहचान पत्र नहीं है।
पासपोर्ट नागरिकता के लिए पहचान पत्र नहीं है
लेकिन इन दोनों के माध्यम से देश में हर दस्तावेज बना सकते है। हर दस्तावेज।
अजब सिस्टम की ग़ज़ब कहानी!
कोलकाता एयरपोर्ट पर तीन सौ का झोला बिक रहा है। झोला बनाने वाले ने यही सोचा होगा कि श्री राम मंदिर लिखा देखकर लोग ख़रीदेंगे क्योंकि आस्था है। जिन लोगों ने आस्था के नाम पर यह झोला ख़रीदा होगा, उन्होंने रोज़गार सृजन में योगदान किया होगा। मगर मंदिर ट्रस्ट की नाक के नीचे आस्था के नाम पर दान में दी गई एक किलो से लेकर दो सौ किलो की चाँदी और कई सौ करोड़ के चढ़ावे का हिसाब न देने वालों ने क्या किया? आस्था के नाम पर अपनी पीढ़ियों का इंतज़ाम कर लिया? चंपत राय ने ट्रस्ट को प्रधानमंत्री का पद बना दिया है। जैसे इस्तीफ़ा दे देंगे तो क्या हो जाएगा। बीजेपी को अगला चुनाव चंपत राय के चेहरे पर लड़ना चाहिए ।
दो गरीब थे।
एक ने अपने पुरुषार्थ से सैकड़ों एकड़ संपत्ति खरीद ली। पूरे परिवार को गरीबी से निकाला।
दूसरा हर जगह मैं गरीब था का रोना रोता रहा, दूसरों की बनाई संपत्ति बेचता रहा, और उस पैसे से दोस्तों के साथ ऐश करता रहा।
दोनों में असली और बड़ा लीडर बनने की क्षमता किसमे है?
बिहार चुनाव के समय मैंने ढेरों भाजपा नेताओं के फोटो साझा किए, जिन्होंने फ़रवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा में वोट डाला और फिर नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव में वोट डाला।
उन पर कब FIR होगी?
📍 मोहाली, पंजाब | 22 जून
भीड़ द्वारा नाज़िर अहमद की पीट-पीटकर हत्या के मामले में उम्रकैद की सज़ा पाए 14 दोषियों की रिहाई की मांग को लेकर गौ रक्षा परिषद ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान फैसला सुनाने वाली जज तबस्सुम खान का पुतला जलाया गया, "तबस्सुम बेगम मुर्दाबाद" के नारे लगाए गए और 14 दोषियों की रिहाई की मांग की गई।
जब हत्यारों के समर्थन में भीड़ सड़कों पर उतरे, न्याय देने वाले जज का पुतला जलाया जाए, उन्हें उनकी धार्मिक पहचान से निशाना बनाकर "मुल्ली" कहा जाए और खुलेआम डराने-धमकाने की कोशिश की जाए, तो यह सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि न्यायपालिका और कानून के राज को खुली चुनौती है।
क्या ऐसा किसी और लोकतंत्र में संभव है, या सिर्फ भारत में ही न्याय देने वाले जजों को इस तरह निशाना बनाया जाता है?
सोनम वांगचुक स्विट्ज़रलैंड जा रहे हैं.!! हमेशा के लिए ??
वहाँ पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी के भविष्य पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने.
सोनम बताते हैं कि जब वे वीज़ा लेने स्विस एंबेसी पहुँचे, तो उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया. उन्हें पाँच वर्ष का वीज़ा दिया गया.
वीज़ा फीस तक नहीं ली गई.
अधिकारियों ने कहा कि यह उनके लिए सम्मान की बात है.
एक पराया देश है, जो उनके काम का सम्मान करता है, उनके विचारों को सुनना चाहता है.
और एक अपना देश है, जहाँ उन्हें कभी राष्ट्रविरोधी, कभी देशद्रोही और कभी व्यवस्था-विरोधी बताने की कोशिशें होती रहती हैं.😑
क्यों?
क्योंकि वे लद्दाख के बच्चों की शिक्षा, पर्यावरण और जलवायु जैसे मुद्दों पर काम तो करते ही हैं, साथ ही सत्ता और व्यवस्था से सवाल भी करते हैं.
और हमारे समय का सबसे बड़ा अपराध शायद यही है...सवाल करना.
हमारे यहाँ वैज्ञानिकों, शिक्षकों और विचारकों के लिए सम्मान तभी तक है जब तक वो सत्ता की धुरी के पहिये-कीले बने रहे.
तब वे पुरस्कार जीतते रहेंगे, मंचों पर मुस्कुराते रहेंगे तब तक वे राष्ट्र का गौरव बने रहेंगे.
लेकिन जिस दिन वे जनता, पर्यावरण, लोकतंत्र या सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने लगते हैं, वे अचानक संदिग्ध हो जाते हैं. समस्या हो जाते है.
जबकि किसी लोकतंत्र की ताकत केवल उसकी सेना, सड़कें और ऊँची इमारतें नहीं होतीं....उसकी असली ताकत उसके विचार होते हैं.
और वैचारिक रूप से अभी देश अपने पतन पर है.
सोनम वांगचुक भारत में रहेंगे या नहीं, यह उनका निजी निर्णय है.लेकिन अपने ही देश मे उन्हें उचित सम्मान ना मिलना,उस के निर्णयों को प्रभावित कर सकता है.
फिर भी मुझे नहीं लगता कि वे इस मिट्टी को छोड़ देंगे..वे लौटेंगे.
वे लौटेंगे, और फिर उसी काम में जुट जाएँगे जिसके लिए दुनिया उन्हें सम्मान देती है और अपना देश उनसे सवाल पूछता है.
सम्मान मिले या अपमान, वह अपने समय के ज़रूरी सवाल पूछना नहीं छोड़ता.
ठीक उसी तरह,जैसे मुझे यहाँ गालियां मिलती है,भर्त्सना होती है..लेकिन मैं व्यवस्था पर बात करूंगा..
सरकार कोई भी हो..
हमने कांग्रेस के समय में भी सवाल किए..अब भी करते है.
हमारे सवाल सरकार से कम..सिस्टम से ज्यादा है.
सरकारें आती जाती रहेगी,
सिस्टम से सवाल ना करना...
आप के चाटुकार होने का ..
या आप के बौद्धिक दिवालिया होने का ..
या आप के बिक जाने का...
या फिर आप की आत्मा के मर जाने का प्रमाण है।
राहुल गांधी नें jio नेटवर्क की परते उधेड़ दी
मोदी जी से मिलीभगत करके देश को लूट रहे है,
राजस्थान में jio का नेटवर्क कबाड़ हो चुका है,
रिट्वीट करके jio के खिलाफ विरोध दर्ज करें। 🔥⚡️
अनीता भारद्वाज नाम की एक महिला ने चंपत राय को चांदी का कागभुशुंडि बनवाकर दान किया। उनकी इच्छा थी कि कागभुशुंडि महाराज को राम मंदिर में रखा जाए। अब कागभुशुंडि महाराज भी चंपत हो चुके हैं।
चाहे 200 किलों चांदी दान करने वाला सिंधी समाज हो, चाहे सोने की ईंटें दान करने वाले व्यापारी हों, चाहे कागभुशुंडि दान करने वाली ये महिला... सबसे यही कहा गया था कि बाद में वॉट्सएप पर रसीद भेजी जाएगी। किसी को नहीं भेजी गई।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। ट्रस्ट के संचालन की जिम्मेदारी भाजपा नेताओं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पदाधिकारियों और आरएसएस से जुड़े लोगों को सौंपी गई। करोड़ों राम भक्तों द्वारा मंदिर निर्माण के लिए दिया गया प्रत्येक रुपया इन्हीं लोगों की निगरानी में था।
दान राशि, सोना और चांदी में चोरी हुई हैं, तो इसके लिए जवाबदेही भी इन्हीं लोगों की बनती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा जाएगा कि आखिर मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफलता क्यों हुई?
देश के करोड़ों श्रद्धालु पारदर्शिता, जवाबदेही और सच जानने का अधिकार रखते हैं।
UN commission of inquiry की रिपोर्ट: इजराइल ने जानबूझकर फिलिस्तीनी बच्चों को मारा; 20 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत.
UN आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, "जानबूझकर ऐसे काम किए जिनसे लाखों फ़िलिस्तीनी बच्चों की मौत हुई और उन्हें गंभीर शारीरिक व मानसिक नुकसान पहुँचा."
आयोग के अध्यक्ष, भारत के पूर्व हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश और अभी सुप्रीम कोर्ट के सीनियर अधिवक्ता एस. मुरलीधर ने कहा कि जांच में बच्चों को निशाना बनाकर किए गए हमलों के पुख्ता सबूत मिले हैं. इजराइली सेना मानवता के खिलाफ अपराध और युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार हैं.
अक्टूबर 2023 से अब तक 20 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत हुई और 44 हजार से ज्यादा घायल.
बच्चों की मौतें हवाई हमलों, ड्रोन हमलों और स्नाइपर फायरिंग में हुईं. कई मामलों में उनके सिर और शरीर के ऊपरी हिस्से को निशाना बनाया गया.