हमारी आँख में खद्दर के ख़ाब बिकते थे
तुम आए यहाँ और बोस्की के थान खुले
ये कौन भूल गया उन लबों का ख़ाका यहाँ
ये कौन छोड़ गया गुड़ के मर्तबान खुले
• उमैर नज्मी
जीवन के पास इतने संदर्भों और प्रसंगों का ढेर था कि कुछ भी अभूतपूर्व नहीं लगता था। जैसे तुम्हारा दिखना न जाने कितने बरसों के बाद। ये ऐसे भी दिख सकता था कि आया-आया वसन्त, कितने-कितने पतझर के बाद। पर दिखा तो केवल तुम्हारा दिखना।
सुबह माथे पर दिया गया चुंबन दिन भर पेड़ बनकर साथ चलता है। उसने आदतन चूमा। मैं उठा। उसे छोड़कर नहीं जा सकता। बाहर जाना, छोड़कर जाना नहीं होता। मेरा एक हिस्सा हमेशा उसके आँचल में बँधा रहता है; ज़रूरी बात की तरह।
~नीरव @jholachhapmemer
चुप न रह, ओ पाखी!
चुप न रह!
आज चुप रहेगा आकाश
तू आपबीती कह
घर तेरा किसने उजाड़ा
कह, डर मत!
बहता निर्झर किस कारण
उस व्यथा को कह
चुप न सह
कह सकना न सम्भव
तो
गा दे निर्भय
उस करुण-गान को गा दे
कि
चुप रहना कोई न्याय नहीं
कह, कह, कह
गा! गा! गा!
ओ मन-पाखी।
नीरव @jholachhapmemer
उस स्वप्न की कल्पना भी नहीं की जा सकती, जिसमें छाँव न हो। यथार्थ तो इससे भयावह होगा। आप वृक्ष नहीं बचाएंगे तब भी वह निष्ठा से प्राण-वायु देते रहेंगे। मूक मर जाएँगे पर गुहार न करेंगे।अब यह हमार कर्तव्य है विरोध दर्ज करें, और वृक्षों का आभार प्रकट करें।
#SaveBuxwahaForest
अपने जल, जंगल, ज़मीन बचाइए। यही आपकी धरोहर है। इसके अलावा आप अपनी आने वाली पीढ़ी को कुछ नहीं दे सकते। इन्हें केवल पूजने से कुछ नहीं होगा। इन्हें ख़त्म होने से बचाइए।
#SaveBuxwahaForest
A nation that destroys its soils destroys itself. Forests are the lungs of our land, purifying the air and giving fresh strength to our people.
#SaveBuxwahaForest
The @narendramodi government is completely destroying India's Forests and Tribal People areas by giving them to industrialists. The tribal People here are being displaced. This forest & Tribal is the future of India. #SaveBuxwahaForest