दुनियाँ में आपको बार बार स्वयं को अलग अलग व्यक्तियों के समक्ष इसलिए सिद्ध करना पड़ जाता है क्योंकि वे सब आपकी भिन्न छवियों को बनाये बैठे हैं। आप कितनी भी बार स्वयं को सिद्ध करें ये छवियाँ यथावत रहेंगी, रूप बदल जाएंगे बस। जो स्वयं को जानते हैं वे सिद्ध करते नहीं घूमते; हैं तो हैं।
भारत नें पैरालंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। लेकिन मीडिया नें इनको वो तवज्जो नहीं दिया।किसी आरजे नें डांस नहीं किया, न ही किसी नें शादी के बारे में सवाल पूछा। अगर मीडिया और ब्रांड्स को ये खिलाड़ी उस योग्य नही लगे हैं, तो बेशर्मी का एक मेडल उन्हें भी मिलना चाहिए।
#श्रीराम पर यदि निष्ठा है तो #संशय क्यों है? नेतृत्व पर? मित्र पर? पत्नी पर? संतान पर? परिवार पर? समाज पर? जीवन में हर कहीं, हर किसी पर संशय बता रहा है, #निष्ठा ही संशयग्रस्त हैं। #निष्ठावान व्यक्ति कभी संशय में हो नहीं सकता।