कुमाऊँ विश्वविद्यालय से निकलकर खड़ा हुए शोभन सिंह जीना परिसर का हाल देखिए. एक साल में साढ़े पांच हजार छात्र कम हुए. वजह क्वालिटी एजुकेशन और एक्सपोज़र है. पहले गढ़वाल विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला.इसके बाद ये सारा खेल खेला गया. सेंट्रल यूनिवर्सिटी तो नहीं मिली कुमाऊं को बल्कि प्रतिष्ठित कॉलेज के चार जिलों को और एक कैंपस तो तोड़कर नया विश्वविद्यालय बना दिया गया. हालात देख लीजिए अब कहां पहुंच गए हैं!
लोगों पर फर्जी आरोप तो खूब लगते हैं, लेकिन अब गुलदारों पर भी लगाए आरोप फर्जी निकल रहे हैं। आदमखोर समझ कर पकड़े गुलदारों को जांच के बाद बरी (वापस जंगल में छोड़ना) करना पड़ रहा है।
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फायर सीजन में उत्तराखंड के जंगल आग से धधकते हैं। इसका असर वन संपदा के साथ पर्यावरण पर भी पड़ता है। हालिया अध्ययन में सामने आया है कि नमी कम होने से जंगल अधिक धधकते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इससे वनाग्नि पर रोक लगाने के लिए नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
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उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटक स्थलों पर पर्यटकों की संख्या बढ़ने से जलवायु और पर्यावरण पर प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों का बढ़ता तापमान, पिघलते ग्लेशियर इसका उदाहरण है। वैज्ञानिक भी चिंतित हैं। ऐसे ही रहा तो हालत के और बिगड़ने की संभावना है।
#climate_change#uttarakhand
विश्वविद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रोफेसर नहीं हैं। जो प्रोफेसर अब तक पढ़ा रहे थे उन्हें भी पढ़ाने की बजाय कुत्तों की गिनती करनी पड़ेगी। अब देखना यह है कि बच्चों को पढ़ाने के लिए सरकार किसको जिम्मेदारी देती है।
वाह रे सरकार.......
#Uttarakhand
हिमालय की जीवनदायिनी औषधियां जलवायु परिवर्तन, मानवजनित कारणों से संकट में हैं। अब इन औषधियों के संरक्षण को पिथौरागढ़ में स्थित तीन घाटियों का चयन किया गया है। इनमें स्थानीय लोगों के साथ मिलकर औषधियों की खेती की जाएगी।
स्वैलोटेल तितली, तितली की सबसे छोटी फैमिली है। दुनिया में इसकी कुल 573 और भारत में 77 प्रजातियां ही पाई जाती हैं। वहीं, केवल उत्तराखंड में ही इसकी 35 प्रजातियां दर्ज की गई हैं। इसका कारण विशेषज्ञ होस्ट प्लांट्स का होना बता रहे हैं।
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हिमालय में ग्लोबल वार्मिंग का असर लगातार बढ़ रहा है। हालिया रिसर्च में सामने आया है कि हिमालय के निचले इलाकों में उगने वाले नींबू, माल्टा आदि सिट्रस फल अब अधिक ऊंचाई पर हो रहे हैं। निचले क्षेत्रों में इनका उत्पादन घटने के साथ गुणवत्ता भी गिर रहे है.
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चार धाम उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटक स्थल हैं। यहां लाखों पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन पर्यटकों की यह भीड़ पर्यावरण के लिए खतरा बन सकती है। वैज्ञानिकों की ओर से इसको लेकर रिपोर्ट जारी की गई है। जिसमें इन धामों की केयरिंग कैपेसिटी तय की गई है।
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काली नदी भारत और नेपाल की सीमा बनाती है। नदी के आसपास का यह क्षेत्र पर्याप्त वनस्पतियां और अनुकूल वातावरण मिलने से पक्षियों को खूब भा रहा है। अध्ययन से पता चला है कि कई पक्षियों ने इस क्षेत्र को अपना घर बनाया है
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