इस पुलिस वाले को सस्पेंड करने के सभी सोशल मीडिया के साथियों को आगे आना होगा!
इस वीडियो को इतना शेयर करो की पूरा हिन्दुस्तान इस पुलिस वाले पर थू थू करें!
और सस्पेंड हो जाए
ये समीर है, नॉर्थ दिल्ली के यादव नगर निवासी समीर अपनी मां के साथ रहता है और ई-रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च उठाता है। उसका कहना है कि हाल ही में उसका ई-रिक्शा चोरी हो गया, उसने खुद तलाश कर ई-रिक्शा और कथित चोर को पकड़ लिया और दोनों को लेकर पुलिस के पास पहुंचा।आरोप है कि चोरी की शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिसकर्मियों ने उसके साथ ही मारपीट की, जिसमें उसके हाथों को चोट आई। समीर के इन आरोपों कि निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद: 1909 की यह ईंट बता रही है कि मस्जिद 1911 में बनी थी। जिस मस्जिद को अवैध बताकर ढहा दिया गया, उसी के मलबे से निकली यह ईंट आज उसकी मौजूदगी और इतिहास की गवाही दे रही है।
नमाज़ पढ़ना इतना बड़ा गुनाह हो गया ? अगर सर्किट हाउस परिसर में एक सड़क पर 3-4 मिनट नमाज़ पढ़ लिया तो FIR ?
अभी अभी सावन बीता है . हुड़दंग से लेकर मारपीट और हंगामा सब हमने देखा है . पुलिस वालों को औक़ात दिखाते कांवड़ियों को भी देखा है .
🚨 एक हिंदू भाई ये तस्वीर ट्वीट करके लिखता है।🚨
हॉस्पिटल में दर्द और उम्मीद के दरमियान एक मां-बाप अपनी नन्ही बेटी का इलाज करवाने आए थे।
अचानक उन्होंने वहां मौजूद लोगों से पूछा
"नमाज़ का वक़्त हो गया है, क्या हम यहां नमाज़ पढ़ सकते हैं?
चारों तरफ़ मौजूद लोग, जिनमें ज़्यादातर हिन्दू भाई-बहन थे, मुस्कुराकर बोले ज़रूर, यहीं पढ़ लीजिए।
वो दोनों मियां-बीवी नमाज़ में खड़े हुए आंखों में आंसू और दिल में दुआएं।
नमाज़ के बाद दोनों हाथ उठाकर, न सिर्फ अपनी बेटी बल्कि वहां मौजूद तमाम बीमारों की शिफ़ा के लिए भी रो-रो कर दुआएं करने लगे।
ये नज़ारा देख कर, वहां मौजूद हर आंख भी नम हो गई।
यही है हमारा प्यारा भारत मोहब्बत, इज्ज़त और इंसानियत का असली चेहरा।
Gazze'de soykırım devam ediyor, İslam tarihinde bir soykırıma bu kadar insan hiç şahit olmamıştı ve dolayısıyla sorumluluk yükümüz çok ağır.
Bir de şu okuyan yazan Müslümanların haline bak. Gazze'den önemli gündem mi olur bu günlerde?
Genç kardeşlerim, uymayın bunlara lütfen. Allah bize bunların boş boş tartıştığı şeyleri değil Gazze'yi soracak.
Hesabı kolay verenlerden oluruz inşallah.
The killing of a father and his son as they returned home.
Israel killed these defenseless souls who were doing nothing but walking to their home.
Their lives were precious just like yours.