आज मेरे लिए अत्यंत गर्व का क्षण है कि मेरे पूज्य पिताजी, भामाशाह श्री रामेश्वर प्रसाद कपूरिया (राजस्थान पुलिस, सेवानिवृत) को महात्मा गाँधी उच्च माध्यमिक विद्यालय (english medium) खोरालाड़खानी में एक कक्षा-कक्ष का निर्माण करवाने के पुनीत कार्य के लिए राजस्थान सरकार द्वारा जिला स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह में 'शिक्षा श्री सम्मान' से सम्मानित किया गया।
उनका हमेशा से मानना रहा है कि धन का सबसे श्रेष्ठ उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में होता है, क्योंकि यही वह दान है जो एक नहीं, बल्कि अनेक पीढ़ियों का भविष्य संवारता है।
"विद्या दानं महादानम्" — हमारे शास्त्रों में भी विद्या दान को सभी दानों में श्रेष्ठ बताया गया है।
पिताजी, आपके इस सम्मान के लिए आपको हृदय से बधाई एवं सादर प्रणाम। 🌸🙏
Nothing is more important than the welfare and future of our youth!
We have decided to set up fast-track courts to ensure swift and stringent punishment for those involved in paper leaks. Have directed the concerned authorities and officials to take all necessary steps in this regard. This continues our series of steps for safeguarding the interests of students.
Those who try to harm the future of our youth will not be spared.
देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए, केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा। इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए, सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की श्रृंखला में ये एक महत्वपूर्ण कदम है।
युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
Speaking at the start of the Monsoon Session of Parliament. May this session witness productive discussions that strengthen India's development journey. https://t.co/v25Vg62apy
किसी शिक्षक द्वारा किसी सामाजिक या राजनीतिक विषय पर अपनी व्यक्तिगत समझ और विचार व्यक्त करना क्या स्वतः ही उसे किसी राजनीतिक दल का कार्यकर्ता सिद्ध कर देता है?
असहमति हो सकती है, विचारों का खंडन भी किया जा सकता है—लेकिन किसी व्यक्ति के तर्क का उत्तर उसके पेशे, विभाग और पूरी शिक्षक बिरादरी पर कटाक्ष करके देना कितना उचित है?
शिक्षक भी इसी समाज का नागरिक है। उसकी अपनी वैचारिक समझ और व्यक्तिगत राय हो सकती है। किसी विचार से असहमति का अर्थ यह नहीं कि उसके शिक्षकीय दायित्व, योग्यता या पूरे शिक्षा विभाग पर व्यंग्य किया जाए।
ये आदरणीय गुरुजी ज्ञान लेकर आ गए
स्वागत होना चाहिए इनका जोरदार
तर्क में भी जबरदस्त दम है भाई। मानना तो पड़ेगा
चूंकि राजनीति विज्ञान विषय एक शिक्षक ही पढ़ाता है, इसलिए शिक्षकों के राजनीति करने में, राजनीतिक पार्टियों के लिए काम करने में कोई बुराई नहीं है। वे खुलकर राजनीति करें और सार्वजनिक तौर पर राजनीतिक पार्टियों के लिए काम करें।
गुरुदेव की यह टिप्पणी पढ़ते ही आकाश से सारे देवता पुष्प वर्षा करने के लिए एक साथ खड़े हो गए। वे पुष्प वर्षा करने ही वाले थे कि मैंने उन्हें हाथ जोड़कर कुछ देर रुकने के लिए प्रार्थना की। उन्होंने मेरी प्रार्थना स्वीकार कर ली इसलिए पुष्प वर्षा नहीं हो पाई है वरना पूरी धरती पुष्पों से आच्छादित हो जाती।
आदरणीय गुरुजी ने शिक्षकों और पत्रकारों को एक ही कतार में खड़ा भी कर दिया है। मतलब शिक्षकों के लिए जो गाइडलाइन होगी वही पत्रकारों के लिए भी आदरणीय गुरुजी चाहते हैं।
आदरणीय गुरुजी के इन विचारों के लिए ही शिक्षा विभाग उन्हें श्रेष्ठ शिक्षक का सम्मान प्रदान कर दे तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। शिक्षा विभाग को अपने शिक्षकों के बारे में जरूर विचार करना चाहिए। विभाग ने कैसे-कैसे रत्न भर्ती किए हैं, इसके लिए विभाग के अधिकारियों को भी सम्मानित किया जाना चाहिए।
18 प्रसूताओं की मौत कोई सामान्य आंकड़ा नहीं, 18 परिवारों की असहनीय पीड़ा है।
ऐसे गंभीर सवाल पर “मिलते हैं ब्रेक के बाद” जैसे शब्द बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
जनता को मज़ाक नहीं—संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाब चाहिए। #Rajasthan
राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का संवेदनहीन रवैया! पिछले दो महीनों में सरकारी अस्पतालों में 18 से अधिक गर्भवती महिलाओं की मौत पर सवाल पूछा गया तो गंभीर जवाब देने के बजाय ठहाके लगाते हुए बोले— ‘मिलते हैं ब्रेक के बाद।’ क्या यही है सरकार की जवाबदेही?
@BhajanlalBjp@aajtak
बालोतरा जिले के भांडियावास के पास हुए भीषण सड़क हादसे में पाँच युवाओं का असामयिक निधन अत्यंत हृदयविदारक है।
दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि एवं शोकाकुल परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। ईश्वर उन्हें यह असहनीय दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
सड़क पर सावधानी ही जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा है। 🙏
बालोतरा जिले के भांडियावास के पास देर रात हुई भीषण सड़क दुर्घटना अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है।
इस हादसे में आरएलपी परिवार के सदस्य, बायतू विधानसभा क्षेत्र के कानोड़ निवासी स्वरूपाराम गोदारा, भरत गोदारा, भावेश गोदारा, रेवन्ताराम थाकन और किशन लेगा का असामयिक निधन अत्यंत पीड़ादायक है। एक ही परिवार के तीन सदस्यों तथा दो पड़ोसी युवाओं का इस प्रकार असमय चले जाना अपूरणीय क्षति है।
दिवंगतों के परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हुं । ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवारों को यह असहनीय दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
यह हृदयविदारक हादसा एक गंभीर चेतावनी भी है। सड़क पर थोड़ी-सी लापरवाही भी पूरे परिवार की खुशियां छीन सकती है। आप सभी से आग्रह है कि वाहन चलाते समय गति सीमित रखें, यातायात नियमों का पालन करें, सीट बेल्ट एवं हेलमेट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें तथा थकान या नींद की स्थिति में वाहन चलाने से बचें। आपकी सावधानी ही आपके परिवार की सबसे बड़ी सुरक्षा है।
क्षणभर का गुस्सा… एक विवाद… और किसी की जिंदगी खत्म, कई परिवार बर्बाद।
जयपुर के नाइट क्लब में युवक की चाकूबाजी में मौत बेहद चिंताजनक है।
आखिर हमारी युवा पीढ़ी किस दिशा में जा रही है?
हिंसा कभी समाधान नहीं हो सकती। #Jaipur
नियम जरूरी हैं, लेकिन नियम बनाते समय जमीन की वास्तविक समस्याओं को समझना भी उतना ही जरूरी है।
राजस्थान में ट्रांसपोर्ट व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर आज जो स्थिति बनी है, उसका समाधान टकराव नहीं—संवाद से निकलना चाहिए।
आम आदमी परेशान न हो और वाहन संचालकों की व्यावहारिक समस्याएं भी सुनी जाएं।
संवाद ही समाधान है।
न मुख्यमंत्री, न विधायक... फिर भी रात 12 बजे तक जनसुनवाई। यह कुर्सी का नहीं, जनता के विश्वास का असर है
जिस नेता पर जनता को भरोसा हो, उसके दरवाज़े पर समय नहीं देखा जाता।
तस्वीर रात 10:30 बजे की है
जयपुर में लगभग 25 सांसदों के घर हैं
200 विधायकों के घर हैं
यदि ऐसी एक भी तस्वीर किसी नेता के घर की मिल जाए, तो तुम जीते और हम हारे
बाकी 0 विधायक वाली पार्टी और स्वयंघोषित मुख्यमंत्री जैसी बातें करने में क्या ही ज़ोर आता है इनका कौन-सा खर्चा लगता है
"अगर ज़मीन ही सफलता की गारंटी होती, तो सबसे बड़े ज़मींदार ही सबसे अमीर होते। हकीकत यह है कि मेहनत और काबिलियत विरासत से बड़ी होती है
तुम्हारी हर पोस्ट का निष्कर्ष एक ही होता है—दो वर्गों में नफ़रत बढ़ाओ। बहस नहीं, बस वैमनस्य फैलाना ही एजेंडा लगता है