श्री क्षत्रिय युवक संघ का स्वमसेवक और श्री क्षत्रिय महासेना भारत राजपुत एकता संगठन का सेनानायक
लेखक :–पंचासिका (भक्ति, शक्ति,वीरता,प्रेम और ज्ञान)#क्षत्रिय_मंच
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आप बताओ मैं कैसे जातिवाद करूँ...?
जब मेरे जीवन के हर मोड़ पर, हर पड़ाव पर मुझे समाज की हर जाति और हर वर्ग का स्नेह, सहयोग और आशीर्वाद मिला है, तो भला मैं कैसे जातिवाद करूँ...?
● वाल्मीकी /चमाइन / जाटव (दाई माँ): जब मैंने इस दुनिया में कदम रखा, तो मेरी माँ से भी पहले मुझे अपने हाथों में थामकर ममता देने वाली मेरी दाई माँ थीं।
● हजाम / नाई: मेरे जन्म की किलकारी सुनते ही पूरे गाँव-मोहल्ले में घूम-घूमकर खुशियाँ और नेवता बांटने वाले नाई दादा थे।
● धोबिन / रजक: मेरे और मेरी माँ के जन्म के समय के उन मैले कपड़ों को साफ कर हमें पवित्रता देने वाली धोबिन मौसी थीं, जो आज भी मेरा ध्यान रखतीं हैं।
● तेली / साहू: जिस तेल से मालिश कर मेरा यह शरीर पुष्ट हुआ और मेरी हड्डियाँ मजबूत हुईं, वह तेली के घर से आया था, और अभी भी आता हैं।
● पंडित / ब्राह्मण: मेरे जीवन को एक नाम, एक पहचान देने के लिए शुभ मुहूर्त देखकर नामकरण करने वाले, 21 दिन की अखंड ज्योति, पाठ, हवन करने लाले पंडित जी थे।
● कुम्हार / प्रजापति: मेरे जन्म-संस्कार से लेकर हर शुभ कार्य में इस्तेमाल होने वाले पवित्र मिट्टी के पात्र कुम्हार के चाक से सजकर आए थे।
● भाँट / किन्नर समाज: मेरी लंबी उम्र की दुआएं मांगते हुए, ढोलक की थाप पर नाच-गाकर खुशियाँ मनाने वाले वो लोग थे।
● कोइरी / कुशवाहा / मौर्य: मेरे शरीर को पोषण देने वाली हरी-ताजी सब्जियां आज भी कुशवाह समाज के भाई अपने खून-पसीने से उगाकर साइकिल से हमारे घर तक पहुँचाते हैं।
● अहीर / गूज्जर : मुझे बलवान और स्वस्थ बनाने के लिए शुद्ध दूध-मक्खन यादव जी के घर की गऊ माता का मिला।
● लोहार / विश्वकर्मा : जिनके हाथ की बनी गाड़ी और खिलौनों को पकड़कर मैंने बचपन में अपना पहला कदम बढ़ाना और चलना सीखा, वे लौहार चाचा थे।
● बढ़ई / शर्मा: मेरे घर का सुंदर दरवाजा, बैठने की कुर्सी और सोने का बिस्तर बढ़ई दादा की कलाकारी का तोहफा है।
● बुनकर / जुलाहा / अंसारी: कड़कड़ाती ठंड और तपती धूप से मेरे तन को ढकने के लिए सुंदर धागों से कपड़ा बुनने वाले मेरे बुनकर भाई थे।
● सुनार / स्वर्णकार: हमारी माताओं-बहनों के श्रृंगार और शादी-ब्याह की रौनक बढ़ाने वाले सुंदर गहने गढ़ने वाले सोनार भैया थे।
● मल्लाह / निषाद / कश्यप: जब भी जीवन की नदियों और मुश्किलों को पार करना हुआ, तो पतवार थामकर किनारा दिखाने वाले मल्लाह थे।
● क्षत्रिय / जाट : समाज की रक्षा, सुरक्षा और सरहदों पर सीना तानकर पहरा देने का हौसला मुझे हमेशा जाट भाइयों की गोद में रहकर मिला।
● राजभर / दुसाद (पासवान) / पासी : बचपन की हर ऊंच-नीच में कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलने वाले, विपत्ति में ढाल बनकर खड़े रहने वाले और हमारी बस्तियों को सुरक्षित व स्वच्छ रखने वाले मेरे यही आत्मीय भाई थे।
● बनिया / वैश्य: हमारे घर का नमक-तेल से लेकर हर जरूरत का राशन ईमानदारी से समय पर उपलब्ध कराने वाले हमारे बनिया चाचा थे।
मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा कि जब मेरे जीवन की हर सांस में, मेरी तरक्की के हर कदम में और मेरी खुशियों के हर पल में पूरे समाज के हर एक इंसान का पसीना, स्नेह और अटूट योगदान शामिल है... तो फिर मैं किसी एक जाति का होकर पूरे समाज का कर्जदार कैसे रहूँ?
याद रहे इंसानियत ही सबसे बड़ी पहचान है, और हम सब मिलकर ही एक पूरा हिंदुस्तान हैं।: आपका आयुवान प्रताप सिंह सिकरवार
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नाम महिपाल सिंह चौहान, उम्र - 45 वर्ष, गाँव - मकराना, जिला -नागौर, शिक्षा - गोल्ड मेडलिस्ट राजस्थान विश्वविद्यालय!!
UPSE की तैयरी छोड़कर 2003 में समाज से जुड़े, सामाजिक न्याय मंच में काम शुरू किया, सामाजिक न्याय मंच देवी सिंह जी भाटी, लोकेन्द्र सिंह जी कालवी, पंडित सुरेश जी मिश्रा और वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी सहित अनेक लोगों ने आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिये स्थापित की गई राजनैतिक पार्टी थी, जिसने राजस्थान में 2003 का विधानसभा चुनाव लड़ा था!! अपनों की ही साजिश का शिकार होना पड़ा, अपेक्षा से कम सीटें आई, 2004 में देवी सिंह जी भाटी के बेटे महेन्द्र सिंह जी भाटी की सड़क दुर्घटना में आकस्मिक मौत से हालात बदल गये, अगस्त 2006 में भाटी साहब ने भाजपा ज्वाइन कर ली, केबिनेट मन्त्री बन गये, लोकेन्द्र सिंह जी कालवी ने 1 महीने बाद 23 सितम्बर 2006 को श्री राजपूत करणी सेना की स्थापना की!! महिपाल सिंह जी मकराना को प्रथम जयपुर जिलाध्यक्ष बनाया गया!! उसके बाद 2009 में प्रदेश उपाध्यक्ष और 2011 में प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया!!
आज जो लोग बहुत जल्दी सफलता चाहते है उनको ये जानना जरूरी है की 2006 से 2016 तक महिपाल सिंह जी मकराना की कोई फोटो मंच पर नहीं है, कभी मंच पर बैठे नहीं, कभी माइक नहीं पकड़ा!!
उस आदमी ने कालवी साहब के संरक्षण में करणी सैनिकों के साथ जो प्रमुख काम किये, उसका कभी जिक्र नहीं किया!!
जिस दिन भंसाली की पिटाई हुई तब पता चला की ये महिपाल सिंह मकराना है,
UGC कानून की वापसी को लेकर माँ करणी के धाम देशनोक से लेकर, हरियाणा, चंडीगढ़, जम्मू -कश्मीर और हिमाचल के बैजनाथ धाम को 2000 किलोमीटर पैदल चलकर नाप दिया!!
9 महीने से हाथों में मशाल थाम रखी है, इनको पता है लम्बी और निर्णायक लड़ाई में धैर्य और योजना जरूरी है!! 9 महीने से
उसने चर्चा नहीं की, दिल्ली चलो, जंतर -मंतर चलो!!
लेकिन जब आह्वान करें तो एक दिन का समय दे देना
आपकी लड़ाई वो लड़ रहा है जिसने कभी झुकना नहीं सीखा!!
वो 16 साल का अभिमन्यु नहीं है, जिसको कौरव चक्रव्यूह में फंसा देंगे,वो 20 साल सड़क पर संघर्ष करके जिस दिन दिल्ली आयेगा! पूरे देश का सवर्ण समाज उसके साथ खड़ा मिलेगा, क्योंकि उसने आज तक चुनाव नहीं लड़ा, कभी राजनैतिक पार्टी का दुपट्टा नहीं पहना, पूरा देश का सवर्ण इस व्यक्ति पर पूरा भरोसा करता है!!
हमारे 2 मुद्दों पर सभी सहमत रहो
📢 ईडब्ल्यूएस सरलीकरण की मांग को मिला नया समर्थन!
महाराजा जोधपुर गज सिंह जी ने ईडब्ल्यूएस सरलीकरण के मुद्दे को केंद्र सरकार को लिखित पत्र सौंपा।
#EWSSaralikaran