Ńõťē : अगर आप सच्चे क्षत्रिय हैं और समाज हित में कुछ करना चाहते हैं तो आज इसे संपूर्ण पढ़िए और आत्म चिंतन कीजिए आपके अगर कोई सवाल हो तो पूछ सकते हैं
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कल आपने राजकोट में क्षत्राणियों का डांडिया गरबा महोत्सव की वीडियो देखी और उन वीडियो के नीचे तथाकथित 'सनातन हिंदु समाज' के लोगों के कमेंट भी देखे होंगे होंगे....आजकल सोशल मीडिया और विमर्शों में क्षत्रिय समाज के प्रति दिखने वाली नकारात्मक प्रतिक्रियाएं कोई आकस्मिक घटना नहीं हैं। राजनीति का कोई भी पक्ष हो, यदि आप आधुनिक राष्ट्रवाद, तथाकथित समाज सुधारकों और नायकों की जड़ों का विश्लेषण करेंगे, तो पाएँगे कि क्षत्रियों का सुनियोजित विरोध इनके बीच एक साझा बिंदु बन चुका है।
दुष्प्रचार करने वाले लोग इतिहास से अनजान नहीं हैं; वे इतिहास की शक्ति को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। वे जानते हैं कि जब तक एक जीवंत और गौरवशाली इतिहास किसी समाज के पास रहेगा, उसे मानसिक रूप से पराजित नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि आपकी विरासत को या तो ये लोग खुद हड़पना चाहते हैं, या फिर गाली देकर आपको तुच्छ दिखाना चाहते हैं।
इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने 'Annals and Antiquities of Rajasthan' में स्पष्ट लिखा था कि "भारत की भूमि का शायद ही कोई ऐसा कोना हो जो क्षत्रियों के रक्त से न सींचा गया हो"। मिहर भोज प्रतिहार, बप्पा रावल, पृथ्वीराज चौहान, महाराणा सांगा, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे योद्धाओं ने हमेशा व्यापक समाज और राष्ट्र के हित को अपने व्यक्तिगत या सामुदायिक हित से ऊपर रखा लेकिन आज का राजनीतिक यथार्थ (Political Realism) क्रूर है।
जिस व्यवस्था और विचारधारा के लिए क्षत्रियों ने हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर अपना सर्वस्व बलिदान किया, आज उसी व्यवस्था के भीतर से इस समाज को हाशिए पर धकेलने का प्रयास किया जा रहा है। भावुकता में आकर अपने हितों को विसर्जित कर देना आधुनिक राजनीति में सबसे बड़ी भूल है।
आज 'पहचान की राजनीति' (Identity Politics) के तहत ऐतिहासिक प्रतीकों और महापुरुषों (जैसे प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज या पृथ्वीराज चौहान, राणा पूंजा सोलंकी, सुहेलदेव बैस) पर अनर्गल दावे किए जा रहे हैं। समाजशास्त्री एम.एन. श्रीनिवास के सिद्धांतों के अनुसार, जब नए सामाजिक-राजनीतिक समीकरण बनते हैं, तो वे स्थापित विरासतों पर अतिक्रमण करके अपनी वैधता ढूंढते हैं।
इतिहास की एक कठोर सच्चाई यह भी है कि कमजोर होते समाज का इस्तेमाल वही लोग अपने हितों के लिए करते हैं, जिन पर वह सबसे अधिक भरोसा करता है। दूसरों पर अत्यधिक भरोसा करके अपनी सुरक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी उन्हें सौंप देना और स्वयं आंतरिक रूप से कमजोर होते जाना कोई बुद्धिमानी नहीं है ये मूर्खता हैं।
जीवविज्ञान और समाजशास्त्र दोनों का irrefutable rule है—यदि आपकी race (समुदाय और अस्तित्व) survive करेगी, तभी आप अपने मूल धर्म, देश और अपने पूर्वजों की विरासत को सुरक्षित रख पाएंगे। क्षत्रिय समाज को अब लोक-लुभावन नारों और फर्जी देशप्रेम के चक्रव्यूह से बाहर निकलकर अपने हितों को प्राथमिकता देना सीखना होगा।
आगामी 10 वर्षों का विज़न और रोडमैप:
यदि समाज अपने नेतृत्व में सुधार कर, पारंपरिक शौर्य को आधुनिक उपकरणों में बदले, तो सामाजिक परिदृश्य को पूरी तरह बदला जा सकता है। मेरे अनुसार आधुनिक युग में शक्ति के चार नए स्तंभ हैं, जिन पर काम करना अनिवार्य है:
1️⃣ Intellectual : उच्च शिक्षा, कानून और नीति-निर्माण (Policy Making) में उच्चतम भागीदारी सुनिश्चित करना।
2️⃣ Financial : पारंपरिक कृषि पर निर्भरता कम करके आधुनिक व्यवसायों, उद्योग, तकनीक और कॉर्पोरेट जगत में नियंत्रण बनाना।
3️⃣ Organizational : आपसी मतभेदों और क्षेत्रीय गुटबाजी को भुलाकर एक मजबूत, अनुशासित और वैश्विक सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण।
4️⃣ Narrative Building : अपने खुद के डिजिटल मीडिया हाउस, लेखक, शोधकर्ता और थिंक-टैंक तैयार करना जो इतिहास और वर्तमान पर समाज का पक्ष मजबूती से रख सकें।
19वीं सदी के अंत में सर प्रताप सिंह (जोधपुर) और महाराजा गंगा सिंह (बीकानेर) जैसे दूरदर्शियों ने यह भांप लिया था कि भविष्य तलवारों का नहीं, आधुनिक शिक्षा का है। उन्होंने Rajput Educational Conference की नींव रखी थी। आज हमें उसी तर्ज पर एक सशक्त और आधुनिक संगठनात्मक ढांचे की आवश्यकता है।
#RajputHistory #Kshatriya #IdentityPolitics #KshatriyaAsmita
सभी लोग आगे आकर इस बिटिया का सहयोग करें 🙏
अभी तक मात्र 702 रुपए की सहायता इनके पास पहुंच पाई है।
10-20-50-100-200 अपने सामर्थ्य अनुसार सहयोग किजिए,
नहीं तो बिटिया का भविष्य अंधेरा हो जाएगा।
⚔️🚩🙏🏻🙏🏻#क्षत्रिय_मंच 🙏🏻🙏🏻🚩⚔️
⚔️🙏🏻क्षत्रिय मंच सिर्फ क्षत्रियों के लिए 🙏🏻⚔️
आप सभी क्षत्रिय समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इस स्पेस में आमंत्रित किया जाता है सा समय 9:00 से 2:00 बजे तक आप सभी जरूर जरूर पधारे सा।
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🚩🙏 जय माता दी 🙏🚩
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
#माँ_शैलपुत्री की कृपा से शारदीय
नवरात्रि का पावन शुभारंभ मंगलमय हो।
🍁या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।🍁
🍁नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः🍁
माँ दुर्गा सभी के जीवन से दुःख दूर करें,
सुख-समृद्धि प्रदान करें और हर घर में सुख,
शांति एवं खुशहाली बनाए रखें।
📿सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके📿
📿शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते📿
🙏 🌼जय माता दी! जय माँ जगदम्बे!🌼 🙏
#शारदीय_नवरात्रि #जय_माता_दी
#Navratri
*क्षत्रिय युवक-युवतियों की शादी में हो रहे अधिक विलंब के लिए कुंडली मिलान प्रथा भी जिम्मेदार !*
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महर्षि च्यवन और महर्षि भृगु की संहिता में साफ लिखा हैं कि कुंडली मिलान में नाड़ी दोष केवल 26 वर्ष 7 माह 3 दिन की उम्र तक माना जाता है इसके बाद नाड़ी दोष नही लगता।
भृकुट दोष सिर्फ 24 वर्ष की आयु तक ही लगता है। मंगल दोष 29 साल 4 महीने 24 दिन की उम्र तक होता है। *अगर कन्या की आयु इससे ज्यादा है तो यह दोष स्वतः समाप्त हो चुके होते हैं।*
यही 3 के गुण मिलान की खास जरूरत होती हैं और *जब हम लोग विवाह ही 30 वर्ष के बाद कर रहे हैं फिर कुंडली की क्या मान्यता रह गई????*
*इसी वर्ष मार्च महीने में हरियाणा के कुरुक्षेत्र में ब्राह्मण समाज द्वारा एक अंतरराष्ट्रीय महायज्ञ का आयोजन हुआ था जिसमें देश - विदेश के विद्वानजन भी पधारें थे। सार्वजानिक मंच से घोषणा हुई कि शादी विवाह में कुंडली मिलान को बंद किया जाए। इसकी वज़ह से युवक -युवतियां की शादियों में अनावश्यक विलंब हो रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि ब्राह्मणों द्वारा प्रचालित यह कुंडली मिलान की प्रथा ब्राह्मण समाज के लिए ही नुकसान दायक बन गया है।*
आजकल खूब कुंडली मिलान करके शादी करने के बावजूद भी तलाक हो जा रहें हैं! *अतः हमारा भी मत है कि कुंडली मिलान के चक्कर मे न पड़े और वर -वधू की गोत्र, शिक्षा, व्यावहार, संस्कार और आर्थिक स्थिति का आंकलन करके स्वजाति में ही शादी तय करें। अन्तर्जातीय विवाह से दूर रहें, कोशिश करें कि हर हालत में बच्चों की शादियाँ समय पर हो जाए।*
*सभी क्षत्रिय कम से कम 3 बच्चे करें, दहेज प्रथा समाप्त करे औऱ अंतर्जातीय विवाह पर लगाम लगाए !!*
अन्तरजातीय विवाह, अन्तर धार्मिक विवाह पर हर हाल में सरकार को रोक लगानी चाहिए इससे समाज तनाव पैदा हो रहा है, अपराध बढ़ रहा है, हत्याएं हो रही है, इससे हर धर्म हर जाति के लोग अपमानित हो रहे हैं पीड़ित हो रहे हैं सबको अपनी अपनी जाति और अपने अपने धर्म में विवाह करना चाहिए मुझे तो अपनी जाति में विवाह करना पसंद है।।
अंतर्जातीय विवाह क्षत्रियों के लिए शर्मनाक है इससे क्षत्रिय संस्कारों का समूल नाश हो रहा है इसलिए क्षत्रियों को इससे हजार कोस दूर ही रहना चाहिए।
वर्णशकर्ता एक अभिशाप है,दोगले बच्चे ,देश धर्म और जाति ,समाज सभी को धोखा दे सकता है,ऐसे विचार रखनेवाले भेड़ियाँ से सावधान.
क्षत्रियों में यह चलन बढ़ रहा है यह चिंता का विषय है। मैं ऐसे 10 लोगों को अपने खास परिचय में जानता हूं जो पहली पीढ़ी में अमीर हुए और थोड़ा सा आगे बढ़े तो सबसे पहले बेटियों को इतना फ्रीडम दिया कि वह गैर बिरादरी में ब्याह रचा लें।उसके बाद वह लोग राणा प्रताप का नारा लगाएंगे। प्रवचन करेंगें।अपने बच्चों में संस्कार और जातीय बोध नहीं डाल पाए।इसके उलट जो ओबीसी की मजबूत जातियां हैं वह अपनी लड़कियों के इंटरकास्ट विवाह में ज्यादा सतर्क रहती हैं और फ्रीडम के नाम पर उसकी छूट देने से परहेज करते हैं।
बाकी आप अपने घर के बच्चों को समय नहीं दे पा रहें उन्हें समझा नहीं पा रहें हैं और इंस्टा पर बहन बेटियों को अधनंगा खुला प्रदर्शन करने की छूट दे रहें हैं तो आपकी सारी प्रतिष्ठा व्यर्थ हैं।
अन्तरजातीय विवाह समाज को खत्म करता है धीरे धीरे समाज का पतन तय है.
क्षत्रियों की समुदायिक पहचान खत्म हो रही।
उसके इतिहास पर चर्चा और विचार करने वाले कम है।
कायस्थ जैसी शानदार जाति इस इंटरकास्ट विवाह के चलते हासिये पर चली गई,इंटरकास्ट अभिशाप है.
लड़कियाँ के साथ साथ लडके भी निम्न कुल की लड़कियों से शादी कर रहे हैं, क्या उनके वंशज को क्षत्रिय कह सकते हैं या मान सकते हैं, बिल्कुल भी नहीं।
क्षत्रियों की सामुदायिक पहचान ही खत्म हो जाएगी इंटरकास्ट मैरिज से।
ऐसी शादियों को रीढ़विहीन और पैसे को ही सब कुछ मानने वाले सपोर्ट कर सकते हैं।
क्लास चेंज होने का मतलब तुंरत किसी गैर बिरादरी के व्यक्ति के साथ ब्याह रचाना ही नहीं होता। मौकापरस्त और तात्कालिक लाभ वाले जिनका स्वाभिमान मर गया वही सरेंडर वाली भाषा बोल कर इसे सेलिब्रेट करते हैं।बाकी यहूदी और पारसी दुनिया के सबसे ज्यादा साइंटिफिक टेंपरामेंट वाले और अमीर व्यक्ति माने जाते हैं वह भी शादी विवाह में कमोबेश परंपरावादी ही हैं और अपने समुदाय में ही विवाह करते हैं।
अतः सभी क्षत्रिय युवाओं से निवेदन है कि क्षत्रिय जाति में ही विवाह करें 🙏🙏
इस पार्टी को हमारे लोगों ने अपने समय, संघर्ष और धन से सींचा है। 1980 में सबसे अधिक डोनेशन राजस्थान के लोगों ने दिया था। आज इस पर कुछ वामपंथी और जातिवादी सोच वाले लोगों का कब्जा होता दिख रहा है। लेकिन उनके फैसलों को देखकर अगर हम यह सोच लें कि पार्टी छोड़ दें, तो यह सही नहीं होगा।
हम वर्षों के संघर्ष को ऐसे ही नहीं छोड़ सकते। हमने कठिन समय में जी-तोड़ मेहनत की, और जब सफलता हमारे नजदीक है, तब इसे बीच में छोड़ देना सरासर मूर्खता होगी। हम पार्टी में नए और कर्मठ लोगों को लेकर आएंगे और ला भी रहे हैं। व्यवस्था में सुधार करना समाज का काम है, उसे छोड़कर भाग जाना नहीं।
हमारा महाराज योगी आदित्यनाथ जी को पूरा समर्थन है। अब हमारी पूरी कोशिश उन्हें शीर्ष पद पर पहुँचाने की है। जब अच्छे लोग आगे आएंगे, तो पार्टी में भी सकारात्मक सुधार आएगा,और उन्हीं के कार्यकाल में भारत हिंदू राष्ट्र घोषित होगा और उन्हीं के कार्यकाल में भारत अखंड राष्ट्र बनेगा, विश्व का सबसे विकसित देश बनेगा। आचार्य चाणक्य ने भी कहा था—"जैसा मुखिया होगा, उसके सेवादार और समाज भी वैसा ही आचरण करेंगे।"
इसलिए मुखिया बदलो, समाज को नहीं! हमारा संपूर्ण समर्थन भारतीय जनता पार्टी को है और हमेशा रहेगा, हम आरक्षण के मुद्दे पर बात कर रहे हैं, हम एससी एसटी एक्ट में सुधार की बात कर रहे हैं, ईडब्ल्यूएस सरलीकरण कि बात कर रहे हैं। 🚩🙏