एक महिला को बालों से पकड़कर घसीटा जा रहा है।
चिमटे से मारा जा रहा है और भीड़ चुपचाप देख रही है।
ये सब अंधविश्वास के कारण हो रहा है।
महिला आयोग @MinistryWCD ये सब देखकर चुप कैसे रह सकता है ?
क्यों नहीं होती #News में डिबेट इस सबके खिलाफ ?
मानवाधिकार आयोग @India_NHRC सोया हुआ है क्या ?
इस देश में अंधविश्वास के खिलाफ कानून है मगर पालन कितना हो रहा है ?
महामहिम राष्ट्रपति महोदया जी ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि आदिवासियों को "वनवासी" कहना उचित नहीं है। यह उन करोड़ों आदिवासियों के संघर्ष की नैतिक जीत है, जो वर्षों से अपनी वास्तविक पहचान "आदिवासी" के सम्मान के लिए लड़ रहे थे।
डाक्टर भी आजकल झूठ लपक लपक कर बोलने लगे
प्राईवेट हॉस्पिटलो को डॉक्टरो ने लूट का अड्डा बना दीया है,
नींद कम लेने से दिक्कत होगा तो बोलते जांच करवाओ
सिटी स्कैन करवाओ ,एम आई आर करवाओ
भरोसा उठता जा रहा लोगो का डाक्टरों से कितना भरोसा करोगे आप??
आदिवासी समुदाय आज देशभर में अपने जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और अस्तित्व को बचाने की आख़िरी लड़ाई लड़ रहा है। दुखद यह है कि जब आदिवासियों के अधिकारों पर हमला होता है, तब उनके पक्ष में मजबूती से खड़े होने वाले लोग बहुत कम दिखाई देते हैं। ऐसे समय में हम जैसे कुछ लोग ही उनकी आवाज़ को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
ध्यान दो सब छोटे छोटे चैनल का माइक है बड़े चैनल वाले कहाँ मरे है . आम घर का लड़का विनोद जाखड़ neet मामले पर सड़के गर्म कर रहा है गोदी मीडिया से भी सहा नहीं जा रहा है किसी नेता का बालक होता तो अब तक बाप बना लेता मीडिया वाले , लेकिन आम घर का है तो कोई coverage नहीं
जो जो विनोद भाई के साथ है रीट्वीट करो और वक़्त जज़्बात बदल दो
🔥"यह टिफिन आज का बेस्ट लंच है!"🔥
महंगे ब्रांड्स के जमाने में एक कपड़े में लिपटी रोटी-चीनी को सबसे बेहतरीन बताने वाले इस टीचर ने न सिर्फ बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ाया, बल्कि समाज को एक गहरा संदेश भी दिया।
🌟 जरूर देखें!
इस अरब न्यूज़ एंकर ने एक कड़वा लेकिन सोचने पर मजबूर करने वाली बात कही है
"1,400 साल तक यहूदियों और ईसाइयों को अपनी प्रार्थनाओं में कोसने के बाद भी हमारे पास न एकता है, न मज़बूत देश।"
"उन्होंने अंतरिक्ष तक पहुँच बनाई,
चाँद पर कदम रखा,
परमाणु को विभाजित किया और डिजिटल क्रांति का आविष्कार किया,
जबकि हम आज भी इस बात में उलझे हुए हैं कि बाथरूम में कैसे जाना चाहिए और महिलाओं या काले कुत्तों जैसी चीज़ों से वुज़ू (धार्मिक शुद्धि) टूटता है या नहीं।"
"क्या 1,400 साल बाद भी हमारी सोच इसी तरह कैद रहनी चाहिए?"
यह आत्म-आलोचना काफी तीखी है। उनका कहना है कि अब वास्तविकता का सामना करने और आत्ममंथन करने का समय आ गया है।
जिस गर्मी में AC से बाहर लोग नहीं निकलते है उस गर्मी में विनोद जाखड़ छात्रो की लड़ाई लड़ रहा है , AC कमरों में बैठ कर अगर रीट्वीट भी नहीं कर सकते तो लाहनत है पब्लिक पर 🙏
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहते हो तो रीट्वीट करते जाओ 🙏
अध्यापक अभिनय ने इंडिया टुडे के कोर्स में फ्रॉड भी दावा किया है।
अब पोल खुल ही रही है तो सबका नम्बर आएगा।
लगता है अंजना ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ दे दिया।
भाई के हिम्मत को सलाम🫡
"आप पेड़ लगाने की बात करते हैं, लेकिन ज़मीन पर हो रही अवैध पेड़ कटाई पर चुप क्यों हैं?
ये वीडियो आपको कोई भी गोदी मीडिया नहीं दिखाएगी। डिलिट होने से पहले जल्दी देखो, RT करलो।
जातिवाद का लाइव टेलीकॉस्ट किया है BBC ने, यह वीडियो शेयर कीजिए और उन मुंह से जन्मी औलादों तक पहुंचाए जो कहते हैं भारत में जातिवाद नहीं है 🔥🔥🔥
दलित युवक रेंट पर रूम के लिए फोन लगाता है, पहले रूम मालिक हां करता है लेकिन जैसे ही उसको सरनेम से जाति का पता चलता है वह फोन काट देता है,
मध्यप्रदेश के कई गांव ऐसे हैं जिनके नाम जाति आधारित है, लेकिन मुख्यमंत्री व्यस्त हैं वह नहीं बदल पाएंगे ऐसे गांवों का नाम,
जातिवाद मल्टीलेयर है, शहरों में महीन जातिवाद होता है और गांवों में खुलकर होता है, जातिव्यवस्था के जनकों शर्म करो और प्राउड जींस कहना बंद करो ।
भारत में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति कॉलेजियम प्रणाली से होती है, जिसमें कोई खुली परीक्षा या प्रतियोगिता नहीं होती।
हाल ही में नियुक्त जस्टिस Sheel Nagu, N. V. Anjaria, Sanjeev Sachdeva, Arun Palli और V. Mohana भी इसी सिस्टम से आए हैं।
आरक्षण पर सबसे ज्यादा शोर मचाने वालों को यह कॉलेजियम सिस्टम नजर नहीं आता।
देश का युवा नौकरी के लिए सालों तक परीक्षा, कटऑफ और इंटरव्यू की लड़ाई लड़ता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति बंद कमरों में होती है।
सवाल है कॉलेजियम में SC, ST, OBC और वंचित वर्गों का सामाजिक प्रतिनिधित्व कहाँ है?
मेरिट का पैमाना क्यों सिर्फ आम युवाओं पर ही लागू होता है?
लोकतंत्र में न्यायपालिका की स्वतंत्रता के साथ-साथ पारदर्शिता और सामाजिक जवाबदेही भी जरूरी है।