1️⃣ गाजियाबाद जिला मुख्यालय पर पत्रकारों का धरना 6वें दिन में प्रवेश कर चुका है।
लेकिन प्रशासन की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है।
#JournalistApoorva
2️⃣ जनता की आवाज सुनने के लिए जिन अधिकारियों को आगे आना च���हिए था, वहां समर्थन देने "सांप अंकल" पहुंच गए।
लगता है व्यवस्था से पहले जंगल जाग गया!
#Ghaziabad
3️⃣ धरना स्थल पर पहुंचे सांप अंकल ने मानो संदेश दिया—
"अन्याय पर मौन रहना सबसे बड़ा जहर है।"
अब सवाल है कि असली जहर किसके पास है?
4️⃣ छह दिन से पत्रकार खुले आसमान के नीचे न्याय की मांग कर रहे हैं।
धूप, धूल और संघर्ष जारी है।
लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक मौन क्यों?
5️⃣ लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं, अध��कार है।
यदि पत्रकार अपनी सुरक्षा और न्याय की मांग भी न कर सके तो फिर जनता की आवाज कौन उठाएगा?
6️⃣ धरना स्थल पर लोगों का समर्थन लगातार बढ़ रहा है।
सवाल वही है—
क्या प्रशासन जनता की आवाज सुनेगा या चुप्पी ही जवाब बनी रहेगी?
7️⃣ सांप अंकल बिना किसी प्रोटोकॉल के आए, समर्थन दिया और चले गए।
लेकिन संबंधित विभाग अब तक कार्रवाई या संवाद की पहल क्यों नहीं कर पाया?
8️⃣ पत्रकार अपूर्वा चौधरी और उनके साथियों का संघर्ष जारी है।
अब नजरें प्रशासन पर हैं।
समाधान कब?
#JournalistApoorva #GhaziabadPolice #UPGovernment
9️⃣ लोकतंत्र का विचित्र दृश्य—
पत्रकार धरने पर, जनता समर्थन में, सांप एकजुटता में, और व्यवस्था मौन!
🔟 सवाल अभी भी खड़ा है—
पहले कौन जागेगा?
व्यवस्था, विवेक, या फिर कोई और "सांप अंकल"?
@ghaziabadpolice @112UttarPradesh @DCPCityGZB
@dgpup
@CMOfficeUP @myogiadityanath @PCITweets
@ANI
@aajtak
@ABPNews
@BJP4India
@BJP4UP
@dm_ghaziabad
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1️⃣ गाजियाबाद जिला मुख्यालय पर पत्रकारों का धरना 6वें दिन में प्रवेश कर चुका है।
लेकिन प्रशासन की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है।
#JournalistApoorva
2️⃣ जनता की आवाज सुनने के लिए जिन अधिकारियों को आगे आना चाहिए था, वहां समर्थन देने "सांप अंकल" पहुंच गए।
लगता है व्यवस्था से पहले जंगल जाग गया!
#Ghaziabad
3️⃣ धरना स्थल पर पहुंचे सांप अंकल ने मानो संदेश दिया—
"अन्याय पर मौन रहना सबसे बड़ा जहर है।"
अब सवाल है कि असली जहर किसके पास है?
4️⃣ छह दिन से पत्रकार खुले आसमान के नीचे न्याय की मांग कर रहे हैं।
धूप, धूल और संघर्ष जारी है।
लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक मौन क्यों?
5️⃣ लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं, अधिकार है।
यदि पत्रकार अपनी सुरक्षा और न्याय की मांग भी न कर सके तो फिर जनता की आवाज कौन उठाएगा?
6️⃣ धरना स्थल पर लोगों का समर्थन लगातार बढ़ रहा है।
सवाल वही है—
क्या प्रशासन जनता की आव��ज सुनेगा या चुप्पी ही जवाब बनी रहेगी?
7️⃣ सांप अंकल बिना किसी प्रोटोकॉल के आए, समर्थन दिया और चले गए।
लेकिन संबंधित विभाग अब तक कार्रवाई या संवाद की पहल क्यों नहीं कर पाया?
8️⃣ पत्रकार अपूर्वा चौधरी और उनके साथियों का संघर्ष जारी है।
अब नजरें प्रशासन पर हैं।
समाधान कब?
#JournalistApoorva #GhaziabadPolice #UPGovernment
9️⃣ लोकतंत्र का विचित्र दृश्य—
पत्रकार धरने पर, जनता समर्थन में, सांप एकजुटता में, और व्यवस्था मौन!
🔟 सव���ल अभी भी खड़ा है—
पहले कौन जागेगा?
व्यवस्था, विवेक, या फिर कोई और "सांप अंकल"?
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🚨 गाजियाबाद में पत्रकारों का अनिश्चितकालीन धरना 5वें दिन में प्रवेश कर गया, लेकिन प्रशासन अब भी मौन है!
वरिष्ठ पत्रकार अपूर्वा चौधरी की तबीयत बिगड़ गई, फिर भी जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
#JournalistProtest #Ghaziabad
⚠️ पांच दिन से पत्रकार सड़क पर, स्वास्थ्य बिगड़ रहा है, लेकिन भ्रष्टाचार और फर्जी मुकदमों पर कार्रवाई ���रने के बजाय सिस्टम चुप्पी साधे बैठा है।
जब लोकतंत्र का चौथा स्तंभ न्याय मांग रहा है और उसे अनसुना किया जा रहा है, तो सवाल पूरे सिस्टम पर उठेंगे।
#SaveJournalism #Ghaziabad
�� अपूर्वा चौधरी की बिगड़ती तबीयत प्रशासन की संवेदनहीनता का आईना है।
यदि आंदोलन के दौरान कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी किसकी होगी?
पत्रकार झुकेंगे नहीं, लड़ाई जारी रहेगी!
#JusticeForJournalists #GhaziabadDharna
पत्रकार 5 दिन से धरने पर, प्रशासन 5 दिन से खामोश।
फर्जी मुकदमों की जांच और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग अब तक अधर में।
अपूर्वा चौधरी की बिगड़ती तबीयत ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज सुनने वाला कोई नहीं?
यदि कोई अप्रिय घटना हुई तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
पत्रकारों का ऐलान — न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। #JournalistProtest #GhaziabadNews
@CMOfficeUP
@myogioffice
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@UPGovt
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@Uppolice
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🚨 गाजियाबाद में पत्रकारों का अनिश्चितकालीन धरना 5वें दिन में प्रवेश कर गया, लेकिन प्रशासन अब भी मौन है!
वरिष्ठ पत्रकार अपूर्वा चौधरी की तबीयत बिगड़ गई, फिर भी जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
#JournalistProtest #Ghaziabad
⚠️ पांच दिन से पत्रकार सड़क पर, स्वास्थ्य बिगड़ रहा है, लेकिन भ्रष्टाचार और फर्जी मुकदमों पर कार्रवाई करने के बजाय सिस्टम चुप्पी साधे बैठा है।
जब लोकतंत्र का चौथा स्तंभ न्याय मांग रहा है और उसे अनसुना किया जा रहा है, तो सवाल पूरे सिस्टम पर उठेंगे।
#SaveJournalism #Ghaziabad
🔥 अपूर्वा चौधरी की बिगड़ती तबीयत प्रशासन की संवेदनहीनता का आईना है।
यदि आंदोलन के दौरान कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी किसकी होगी?
पत्रकार झुकेंगे नहीं, लड़ाई जारी रहेगी!
#JusticeForJournalists #GhaziabadDharna
पत्रकार 5 दिन से धरने पर, प्रशासन 5 ���िन से खामोश।
फर्जी मुकदमों की जांच और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग अब तक अधर में।
अपूर्वा चौधरी की बिगड़ती तबीयत ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज सुनने वाला कोई नहीं?
यदि कोई अप्रिय घटना हुई तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
पत्रकारों का ऐलान — न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। #JournalistProtest #GhaziabadNews
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📍गाजियाबाद जिला मुख्यालय के बाहर पत्रकारों का अनिश्चितकालीन धरना चौथे दिन भी जारी।
न्याय की मांग पर अड़े पत्रकारों ने साफ कर दिया है कि दबाव, धमकी या मौसम की मार से आंदोलन नहीं रुकेगा।
#JournalistProtest#Ghaziabad
⛈️ तेज आंधी, तूफान और मूसलाधार बारिश भी पत्रकारों के हौस��े नहीं तोड़ सकी।
पूरी रात धरना स्थल पर डटे रहे आंदोलनकारी पत्रकार, संदेश साफ—"न्याय नहीं तो धरना खत्म नहीं।"
#PressFreedom #MediaUnity
🚨 चौथे दिन धरना स्थल पर पहुंचे एसीपी, पत्रकारों का जाना हाल।
लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि केवल आश्वासन नहीं, अब ठोस कार्रवाई चाहिए।
#JusticeForJournalists #GhaziabadNews
पत्रकारों के आंदोलन को समाजसेवियों, वरिष्ठ पत्रकारों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का लगातार समर्थन मिल रहा है���
मामला अब केवल पत्रकारों का नहीं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का बन चुका है।
#SupportJournalists
अपूर्वा चौधरी ने कहा— "भ्रष्ट अधिकारियों की तानाशाही नहीं चलने देंगे। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज दबाने की हर कोशिश का जवाब दिया जाएगा।"
#ApoorvaChaudhary #JournalistProtest
धरना स्थल से एक ही आवाज— "जब तक न्याय नहीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।"
पत्रकारों का यह आंदोलन अब जनसमर्थन के साथ और मजबूत होता जा रहा है।
#MediaRights #Ghaziabad
बारिश, आंधी और प्रशासनिक दबाव के बावजूद पत्रकारों का जज्बा बरकरार।
चौथे दिन भी आंदोलन पूरी मजबूती के साथ जारी, न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं कलम के सिपाही।
#PressFreedom #JournalismMatters
लोकतंत्र में पत्रकारों की आवाज दबाने का हर प्रयास जनता की आवाज दबाने के बराबर है।
गाजियाबाद में जारी धरना इसी लड़ाई का प्रतीक बनता जा रहा है।
#SaveDemocracy #JournalistsUnity
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🚨 न्यू अशोक नगर में कानून का डर खत्म 🚨
सूत्रों के अनुसार पूर्वी दिल्ली के थाना न्यू अशोक नगर एरिया में कोण्डली मोड़ स्थित हैप्पीनेस कैफ़े की आड़ में देर रात तक कथित रूप से हुक्का और शराब परोसी जा रही ��ै।
यदि ऐसा हो रहा है तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है।
दिल्ली पुलिस, आबकारी विभाग और जिला प्रशासन जवाब दे— क्या कार्रवाई हुई? किसके संरक्षण में यह सब चल रहा है? और कब तक?
स्थानीय पुलिस क्या कर रही है ❓ आबकारी विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ रही❓
नाबालिगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि संबंधित बीट अधिकारी को हर महीने ₹15,000 का क���ित चढ़ावा दिया जा रहा है।
यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह सिर्फ एक कैफ़े का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है।
दिल्ली पुलिस और संबंधित विभाग तत्काल जांच करें और सच्चाई जनता के सामने लाएं।
#DelhiPolice #EastDelhi #NewAshokNagar #IllegalActivities #Justice
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गाजियाबाद: थाना कौशांबी क्षेत्र के भोवापुर में देसी शराब के ठेके के पीछे स्थित एक घर में कथित रूप से सट्टा चिड़िया कबूतर जैसे खेलों पर हार-जीत की बाजियां लगवाई जा रही हैं और देर रात तक खेल चलता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यह सब हो रहा है तो आखिर जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक क्यों नहीं लग रही? या फिर मामला कुछ ऐसा है कि शिकायतें फाइलों में दबकर रह जाती हैं? क्षेत्र में चर्चा है कि कथित तौर पर अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें किसी कार्रवाई का डर ही नहीं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल सट्टा पर्ची का मामला नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती है। आखिर किसके दम पर कथित रूप से यह खेल चल रहा है? कौन है जो पर्दे के पीछे से संरक्षण दे रहा है? और क्यों शिकायतों के बावजूद कार्र��ाई नजर नहीं आ रही?
जनता पूछ रही है— "क्या भोवापुर में कानून सो रहा है या फिर किसी की छत्रछाया में अवैध खेल खुलेआम चल रहा है?"
@dgpup
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#Ghaziabad #Kaushambi #Bhovapur #IllegalGambling #UPPolice #BreakingNews #SachKiGoonj
गाजियाबाद: थाना कौशांबी क्षेत्र के भोवापुर में देसी शराब के ठेके के पीछे स्थित एक घर में कथित रूप से सट्टा चिड़िया कबूतर जैसे खेलों पर हार-जीत की बाजियां लगवाई जा रही हैं और देर रात तक खेल चलता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर य��� सब हो रहा है तो आखिर जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक क्यों नहीं लग रही? या फिर मामला कुछ ऐसा है कि शिकायतें फाइलों में दबकर रह जाती हैं? क्षेत्र में चर्चा है कि कथित तौर पर अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें किसी कार्रवाई का डर ही नहीं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल सट्टा पर्ची का मामला नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती है। आखिर किसके दम पर कथित र���प से यह खेल चल रहा है? कौन है जो पर्दे के पीछे से संरक्षण दे रहा है? और क्यों शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नजर नहीं आ रही?
जनता पूछ रही है— "क्या भोवापुर में कानून सो रहा है या फिर किसी की छत्रछाया में अवैध खेल खुलेआम चल रहा है?"
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गोकुलपुरी में कानून का खुला मजाक!
पुलिस बीट से सटकर मेन रोड पर कब्जा, रोजाना जाम और हजारों लोग परेशान।
स्कूल के बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग घंटों ट्रैफिक में फंस रहे हैं, लेकिन न दिल्ली पुलिस जाग रही है, न दिल्ली नगर निगम और न ही दिल्ली सरकार।
क्या अवैध कब्जाधारियों को सरकारी संरक्षण प्राप्त है?
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दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम (MCD) के "अतिक्रमण हटाओ अभियान" की पोल गोकुलपुरी में खुल रही है।
पुलिस चौकी के पास सड़क पर कब्जा, अव्यवस्थित पार्किंग, डिलीवरी बाइकों का जमावड़ा और रोजाना जाम।
जब कानून के रखवालों के सामने ही सड़कें कब्जे में हैं, तो बाकी दिल्ली का क्या हाल होगा?
जनता जवाब मांग रही है!
#Gokulpuri #TrafficJam #DelhiPolice #MCDDelhi
गोकुलपुरी की जनता पूछ रही है—
🔴 पुलिस बीट के पास सड़क पर कब्जा कैसे? 🔴 शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं? 🔴 रोजाना जाम में फंस रहे स्कूली बच्चों की जिम्मेदारी कौन लेगा? 🔴 क्या दिल्ली सरकार, एमसीडी और दिल्ली पुलिस किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
भाषण नहीं, कार्रवाई चाहिए!
#Gokulpuri #DelhiGovernment #MCD #DelhiPolice #PublicIssue
"गोकुलपुरी में कानून की उड़ रही खुलेआम धज्जियां" पुलिस बीट के पास सड़क पर कब्जा, जनता जाम में कैद और प्रशासन मौन! दिल्ली पुलिस, एमसीडी और दिल्ली सरकार बत��एं—क्या सड़कें जनता की हैं या कब्जाधारियों की? अगर कार्रवाई नहीं होगी तो जनता इसे मिलीभगत मानेगी। #Gokulpuri #DelhiPolice #MCD #DelhiGovernment
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