नासमझी कोई बड़ी समस्या नहीं,उसे वक्त और समझ से दूर किया जा सकता है असली मुश्किल तो वहाँ है,जहाँ इंसान सब कुछ समझते हुए भी समझना नहीं चाहता क्योंकि जिसे सच स्वीकार ही नहीं करना,उसे कितनी भी बार समझा लो,बात उसके मन तक पहुँचती ही नहीं...!
पुरुष अधिक प्रेम करता है स्त्रियों से, स्त्रियाँ अधिक प्रेम निभाती हैं पुरुषों से... पुरुष प्रेम तो करता है, परंतु डरता है परिणामों से, स्त्रियाँ तय करती हैं परिणामों को...
रक्षाबंधन उन महान भाभियों को मुबारक
जिन्होंने अपनी नंदो का
उनके भाइयों से रिश्ता ही तुड़वा दिया
जिन्होंने नंदो का मायका ही छुड़वा दिया
और खुद बड़े शौक से अपने मायके जाएंगी
अपने भाइयों को राखी बांधने।
कुछ लोग कह रहे है
शादीशुदा भाइयों के अच्छे दिन आने वाले है
बीवियाँ मायके जाने वाली है
और मोहल्ले की पुरानी सेटिंग आने वाली है
पर मुझे ये समझ नही आ रहा कि
जिनकी पत्नियाँ मायके जा रही है तो
क्या उनका मायका जंगल में है
वहाँ भी तो लोग इंतजार में बैठे होंगे
जैसे आप यहाँ बैठे हो।
मर्द होने का प्रमाण पत्र मूंछे नहीं देती, मूछें तो चूहे- बिल्ली की भी होती हैं, अकड़ गधो में भी होती हैं,और गुराना कुत्तों को भी आता है, असल मर्दानगी वहां दिखती है, जहां जुबान में तहजीब,फैसलों में समझ, वक्त पर जिम्मेदारी,किरदार में दम हो! वरना ना मुंछो के
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कभी-कभी इंसान वैसा नहीं बनता जैसा वह बनना चाहता है, बल्कि वैसा बन जाता है जैसा लोग उसे बनाते जाते हैं मैं जैसा आज हूँ,वैसा कभी बनना नहीं चाहता था लेकिन लोगों की बातें, उनकी उम्मीदें,उनके व्यवहार और उनकी थोपी हुई सोच धीरे-धीरे मुझ पर हावी होती गईं और पता ही नहीं चला कि दूसरों को खुश करने,समझने और निभाने की कोशिश में मैं खुद से ही दूर होता गया...!