अभय तिवारी का नया खुलासा.. सीडीपीओ सामान्य वर्ग की लगभग सभी सीटें दूसरे राज्य के अभ्यर्थियों को बेची गयीं. उसने सीआईडी को बताया है की टीडीपीएल ने कम से कम 10 लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी रेट लगाये थे. जेपीएससी अध्यक्ष एल ख्यांगते और सदस्य अजीता भट्टाचार्य की इसमें मुख्य भूमिका रही. रजक नाम के अभ्यर्थी को तत्कालीन चेयरमैन एल ख्यांगते का बोर्ड मिला. इसमें रामवीर सिंह से बातचीत के जरिए 15 लाख रुपये लिये गये. काजल भारती का बोर्ड अजीता भट्टाचार्य का था. उनके पीए (PA) को 10 लाख रुपये दिये गये. प्रमोद कुमार पाठक की सेटिंग आईटीआई प्रोजेक्ट मैनेजर कृष्णा के जरिये करायी गयी. कुमारी डॉली जायसवाल की सेटिंग भी कृष्णा द्वारा करायी गयी, जिसमें अजीता भट्टाचार्य माध्यम बनीं. ख्यांगते अभी जेल में हैं. अजीत भट्टाचार्य से सीआईडी पूछताछ कर चुकी है.
क्या आपको लगता है कि इतना बड़ा भ्रष्टाचार का खेल मुख्यमंत्री की नाक के नीचे चल रहा था और CMO को इसकी जानकारी नहीं थी 🧐
@ExamsFighters@PMOIndia@JmmJharkhand@amarbauri@yourBabulal@aajtak@ndtvindia
25-30 लाख कमाने में बहुत मेहनत लगता है माननीय मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी आपसे निवेदन है जल्द से जल्द CBI जांच करवा कर इन मेहनती छात्रों को न्याय दे |
@JmmJharkhand 🙏
#CBI_FOR_JSSCCGL
झारखंड में परीक्षा हो और विवाद न हो अब तो यह अपवाद लगता है
कहीं पेपर लीक, कहीं सेटिंग, कहीं भर्ती पर सवाल, कहीं cut-off जारी होने के बाद भी Joining अधर में, कहीं CBI की जांच, तो कहीं होटल से चल रहा भर्ती का खेल...
मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM का कोई ध्यान नहीं है
यह समस्याएँ आज की नहीं हैं। सालों से झारखंड की परीक्षा और भर्ती व्यवस्था सवालों के घेरे में है। फिर भी सरकार की उदासीनता देखकर लगता है कि युवाओं का भविष्य प्राथमिकता में है ही नहीं ।
पैसे की चोरी से बड़ा भ्रष्टाचार युवाओं के सपनों की चोरी है।सरकार किस लिए है इस व्यवस्था को कौन ठीक करेगा ? सरकार की ये लापरवाही लाखों युवाओं के साथ छल है।
पूरे देश में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति बचा होगा जिसने कैंसर जैसी बीमारी को नजदीक से न देखा हो , क्या नेता क्या अभिनेता कोई इससे बचा नहीं है,
इसके अलावा तमाम ऐसे डिसऑर्डर्स हैं जिनसे लोग डेली बेसिस में जूझ रहे हैं, डॉक्टर्स से आप कारण पूछेंगे तो वो आपको लाइफस्टाइल बोल कर आगे बढ़ जायेंगे,
आज के समय में हर कोई व्यक्ति स्वयं के लिए सारे सामान नहीं बना सकते , सुबह दांतों की सफाई से लेकर रात में कुल्ला करके सोने तक हम फैक्टरीज द्वारा बनाई गई पैकेज्ड चीजों पर निर्भर हैं और हर चीज पर सरकार द्वारा निर्धारित टैक्स दे रहे हैं,
हम इस भरोसे पर चल रहे हैं कि इतना टैक्स देने के बाद सरकार द्वारा संचालित एजेंसियां अपना काम बखूबी कर रही हैं और हम सही चीज़ें कंज्यूम कर रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं , हम इस मामले में पूरी दुनिया से काफी पीछे हैं,
पूरे देश में मिलावट चरम पर है, जो भी चीजें हम सुबह से शाम तक इस्तेमाल करते हैं ,उनमें प्रिजर्वेटिव्स से लेकर खराब और खतरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल हो रहा है, कुछ ब्रांडेड प्रोडक्ट्स को छोड़ दे तो हालत बहुत खराब है , ये काम धड़ल्ले से चल रहा है और रोज बढ़ रहा है ,
जहां दुनिया के कई देशों में एजेंसियां बहुत सजग होकर काम कर रही हैं, बेहतरीन से बेहतरीन गाइडलाइंस और पैरामीटर्स बना रही हैं और टेक्नोजिकली बहुत एडवांस्ड हैं,वहां FSSAI जैसी एजेंसियां केवल लाइसेंस देने में और भ्रष्टाचार में लिप्त हैं ,
आप और हम क्या बीमार होने का इंतजार कर रहे हैं?
इस मामले में हम सभी को मिलकर आवाज उठानी चाहिए , खुद बीमार होने का इंतजार न करें। @fssaiindia
"सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ, ठीक है"
गाजियाबाद में 13 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा को अंतिम विदाई !!
हरीश अब दिल्ली एम्स पहुंच गए हैं। यहां उनके लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम हटाए जाएंगे और उन्हें इच्छा मृत्यु दी जाएगी। इस देश में कोई भी हरीश को ठीक नहीं कर पाया।
उन मां–बाप के लिए बेहद भावुक पल था, जब वो हरीश को आखिरी विदाई दे रहे थे। उन्हें पता था कि हरीश अब कभी उठ खड़े नहीं हो सकते, फिर भी वो 13 साल तक बेड पर उसकी सेवा करते रहे।
एवरेस्ट के 4 मसाले क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गए हैं. इनके नाम हैं एवरेस्ट गरम मसाला. एवरेस्ट किचन किंग मसाला. एवरेस्ट कश्मीरीलाल और एवरेस्ट मीट मसाला. एवरेस्ट गरम मसाला, एवरेस्ट किचन किंग मसाला, एवरेस्ट कश्मीरीलाल और एवरेस्ट मीट मसाला में एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया मिला है. कई पेस्टिसाइड्स भी पाए गए हैं.
पूरी खबर: https://t.co/FkQJOvbroT
Everest | Quality Test | Kitchen | Health
आप पेशे से क्लाइमेट एक्टिविस्ट हैं , लेकिन लोमड़ी की खाल से बनी पर्स जेब में रखते हैं, मगरमच्छ की खाल की जैकेट पहनते हैं ,घर में शेर की खालें लटकी हैं, खुद के बेटे की फैक्ट्री के लिए न जाने कितने पेड़ कटवा डाले , अंतराष्ट्रीय महोत्सवों में प्राइवेट जेट से जाते हैं,घर में 14 साल से छोटे बच्चे मजदूरी करते हैं , शाम होते ही घर के गार्डेन में मार्टिनी के साथ रोस्टेड चिकन चलता है और रात खाने के लिए चंपारण मटन की हांडी चढ़ी रहती है , और फिर मोमबत्ती जला कर मास एक्टिंक्शन और क्लाइमेट चेंज पर लेख लिखते हैं, राजा पर नियम लागू नहीं होते राजा दूसरों के लिए नियम बनाता है ,ये कर सको तो समझो राजा हो।
Note: सारे ट्रांसफार्मर फूंक कर शक्ति प्रदर्शन करो।
क़रीब एक महीने पहले की बात है। मेरी एक रिश्तेदार बोरसी तापने के दौरान जल गई थीं। बेहतर इलाज के लिए उन्हें रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती किया गया। लेकिन कुछ राहत नहीं मिली। वे लगभग 70 प्रतिशत जल चुकी थीं। फ़ैसला हुआ कि एम्स दिल्ली लेकर जाया जायेगा। सवाल उठा कि कैसे? तब एयर एंबुलेंस की बात सामने आई। मैंने बताया कि झारखंड सरकार 50% सब्सिडी में एयर एंबुलेंस देती है क्यों नहीं उसके लिए प्रयास किया जाए। टॉल फ्री नंबर पर बात करने पर बताया गया कि बर्न केस में 30% प्रतिशत से अधिक जल जाने पर हमलोग एयर लिफ्ट नहीं करते। फिर प्राइवेट एयरलाइंस से बात हुई और वे 7.5 लाख में ले जाने को तैयार हुए। पैसा क़रीब तीन बजे ही जमा लिया गया और शाम क़रीब सात बजे मरीज़ को एयरलिफ़्ट करके एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया गया।
अब आते हैं मरीज़ संजय कुमार के केस में। जिस विमान का हादसा हुआ वह रेडबर्ड एयर लाइंस का ही था। और झारखंड सरकार जो एयर एंबुलेंस की सुविधा 50 फ़ीसदी सब्सिडी के साथ देती है उसका संचालन भी एयर बर्ड एयर लाइंस ही करता है। परिवार वालों ने जैसी जानकारी दी उसके अनुसार कर्ज लेकर 7.5 लाख जुटाया और एयर एंबुलेंस के लिए दिया। तो यहां सवाल उठता है कि आख़िर मरीज़ संजय को सरकार की सब्सिडी वाला एयर एंबुलेंस क्यों नहीं मिला ? जैसी जानकारी है उसके अनुसार संजय भी 65% प्रतिशत जल चुके थे। तो सवाल है कि जो रेड बर्ड कंपनी प्रतिशत का आंकड़ा दिखाकर सरकारी व्यवस्था के तहत मरीज़ को ले जाने से मना कर देती है वही कंपनी वही जगह से पूरा पैसा लेकर उसी विमान से कैसे लेकर जाती है? क्या इसमें कोई बड़ा खेल है? जानकारी तो यह भी मिली है कि रेड बर्ड कंपनी के जिस Beechcraft King Air BE9L का हादसा हुआ वह क़रीब 39 साल पुराना विमान था। पूरे मामले की कठोर जांच की ज़रूरत है।
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Questionnaire with 18 structured questions launched on MyGov
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झारखंड सरकार के खजाना का ₹10,000 करोड़ कहाँ गया पता नहीं चल रहा.पूर्व वित्त मंत्री डॉ॰ रामेश्वर उराँव ने ऑडिट कराया तो घपला उजागर हुआ.उन्होंने बैठक बुला विभागीय सचिवों से पूछा,पता नहीं चला.वर्तमान वित्त मंत्री और @HemantSorenJMM अरबों रूपए की इस वित्तीय हेराफेरी की जांच कराएँ.