प्रियंका गांधी पुलिस हिरासत में मारे गए सफाईकर्मी अरुण वाल्मीकि की पत्नी और माँ से मिलीं। उन्होंने प्रियंका गांधी को अपने परिवार पर गुजरे ख़ौफ़नाक क़हर को बयान किया।
#बालमिकियों_के_संग_प्रियंका
घर का जोगी जोगना , आन गाँव का सिद्ध। जबतक लालू परिवार का चाणक्यशिप मनोज झा सम्भाल रहे थे। तब तक लालू परिवार उत्थान में था। पार्टी ज़िंदा हो गई थी , एक ��ऊवंश बेटे का ब्याह ख़ानदानी घर में हो गया था।लालू को बेल मिल जाती थी। एक बेटा उप-मुख्यमंत्री बन गया था।
तेजस्वी ने आते ही हरियाणा से एक नया चाणक्य मंगाया। जिसके ज्ञान से आज पार्टी वापस उसी छिद्र में मिल गई है , जहाँ नीतीश-मोदी ने इसके पहले 2010 में मिलाई थी।
आज पंडित जी की जयंती है।
ब��हार में कांग्रेस 2 सीटों के लिए संघर्ष कर रही है।गांधी परिवार को यह तय करना होगा कि उन्हें जवाहर लाल नेहरु और इंदिरा गांधी की विचारधारा पर चलना है या फिर कांग्रेस के भीतर बैठे वामपंथी विचारधारा ? जो हमेशा यह दावा करते हैं कि देश में लेफ्ट का सबसे बड़ा नेता राहुल गांधी है।
भारत के राष्ट्रीय गीत - वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर देशवासियों के नाम मेरा संदेश -
आज भारत के राष्ट्रीय गीत - वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जिसने हमारे राष्ट्र की सामूहिक आत्मा को जागृत किया और स्वतंत्रता का नारा बन गया। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित, वंदे मातरम् हमारी मातृभूमि, भारत माता, यानी भारत के लोगों की भावना का ���्रतीक है और भारत की एकता और विविधता का प्रतीक है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, वंदे मातरम् का गौरवशाली ध्वजवाहक रही है। 1896 में कलकत्��ा में कांग्रेस के अधिवेशन के दौरान, तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष रहमतुल्लाह सयानी के नेतृत्व में, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार सार्वजनिक रूप से वंदे मातरम् गाया था। उस क्षण ने स्वतंत्रता संग्राम में नई जान फूंक दी। कांग्रेस समझ गई थी कि ब्रिटिश साम्राज्य की फूट डालो और राज करो की नीति, धार्मिक, जातिगत और क्षेत्रीय पहचानों का दुरुपयोग करके, भारत की एकता को तोड़ने के लिए रची गई थी। इसक�� विरुद्ध, वंदे मातरम् एक देशभक्ति के गीत के रूप में उभरा, जिसने सभी भारतीयों को भारत माता की मुक्ति के लिए एकजुट किया।
1905 में बंगाल विभाजन से लेकर हमारे वीर क्रांतिकारियों की अंतिम साँसों तक, वंदे मातरम् पूरे देश में गूंजता रहा। यह लाला लाजपत राय के प्रकाशन का शीर्षक था, जर्मनी में फहराए गए ��ीकाजी कामा के झंडे पर अंकित था, और पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की क्रांति गीतांजलि में भी पाया जाता है। इसकी लोकप्रियता से भयभीत होकर, अंग्रेजों ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया, क्योंकि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की धड़कन बन गया था।
1915 में, महात्मा गांधी ने लिखा था कि वंदे मातरम् "बंटवारे के दिनों में बंगाल के हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सबसे शक्तिशाली युद्धघोष बन गया था। यह एक साम्राज्यवाद-विर���धी नारा था। बचपन में, जब मैं 'आनंद मठ' या इसके अमर रचयिता बंकिम के बारे में कुछ नहीं जानता था, तब भी वंदे मातरम ने मुझे जकड़ लिया था, और जब मैंने इसे पहली बार गाया, तो मैं मंत्रमुग्ध हो गया। मैंने इसे अपनी शुद्धतम राष्ट्रीय भावना से जोड़ लिया..."
1938 में, पंडित नेहरू ने लिखा, "पिछले 30 वर्षों से भी अधिक समय से, यह गीत सीधे तौर पर भारतीय राष्ट्रवाद से जुड़ा हुआ है। ऐसे 'जनता के गीत' न तो किसी के मन पर थोपे जाते हैं और न ही अपनी मर्ज़ी से। ये अपने आप ही ऊँचाई प्राप्त कर लेते हैं।"
इसलिए, एक साल पहले, 1937 में, उत्तर प्रदेश विधान सभा ने वंदे मातरम् का पाठ शुरू किया, जब पुरुषोत्तम दास टंडन इसके अध्यक्ष थे। उसी वर्ष, पंडित नेहरू, मौलाना आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस, रवींद्रनाथ टैगोर और आचार्य नरेंद्र देव के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने औपचारिक रूप से वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता दी, जिससे भारत की विविधता में एकता के प्रतीक के रूप में इसकी स्थिति की पुष्टि हुई।
हालाँकि, यह बेहद विडंबनापूर्ण है कि जो लोग आज राष्ट्रवाद के स्वयंभू संरक्षक होने का दावा करते हैं - आरएसएस और भाजपा - उन्होंने अपनी शाखाओं या कार्यालयों में कभी वंदे मातरम् या हमारा राष्ट्रगान जन गण मन नहीं गाया। इसके बजाय, वे "नमस्ते सदा वत्सले" गाते रहते हैं, जो राष्ट्र का नहीं, बल्कि उनके संगठनों का महिमामंडन करने वाला गीत है। 1925 में अपनी स्थापना के बाद से, आरएसएस ने अपनी सार्वभौमिक श्रद्धा के बावजूद, वंदे मातरम् से परहेज किया है। इसके ग्रंथों या साहित्य में एक बार भी इस गीत का उल्लेख नहीं मिलता।
यह सर्वविदित तथ्य है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और संघ परिवार ने राष्ट्रीय आंदोलन में भारतीयों के विरुद्ध अंग्रेजों का साथ दिया, 52 वर्षों तक राष्ट्र���य ध्वज नहीं फहराया, भारत के संविधान का दुरुपयोग किया, बापू और बाबासाहेब आंबेडकर के पुतले जलाए और सरदार पटेल के शब्दों में, गांधी जी की हत्या में शामिल रहे।
दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी वंदे मातरम् और जन गण मन, दोनों पर अत्यधिक गर्व करती है। दोनों गीत कांग्रेस की प्रत्येक सभा और आयोजन में श्रद्धा के साथ गाए जाते हैं, जो भारत की एकता और गौरव का प्रतीक हैं।
1896 से लेकर आज तक, कांग्रेस की हर बैठक, चाहे वह बड़ी हो या छोटी, चाहे वह महाधिवेशन हो या ब्लॉक स्तरीय बैठक, हमने भारत के लोगों को श्रद्धांजलि स्वरूप गर्व और देशभक्ति के साथ वंदे मातरम् गाया है।
कांग्रेस पार्टी अपनी मातृभूमि के शाश्वत गीत, हमारी एकता के आह्वान और भारत की अमर आत्मा की आवाज, वंदे मातरम् में अपने अटूट विश्वास की पुष्टि करती है।
🇮🇳वंदे मातरम् 🇮🇳
जय हिंद
भारत के राष्ट्रीय गीत - वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामना।
वंदे मातरम् ने हमारे राष्ट्र की सामूहिक आत्मा को जागृत किया और स्वतंत्रता का नारा बन गया। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित, वंदे मातरम् हमारी मातृभूमि, भारत माता, यानी भारत के लोगों की भावना का प्रतीक है और भारत की एकता और विविधता का प्रतीक है।
राष्ट्रीय ग��त "वंदे मातरम्" के 150 वर्ष पूर्णोत्सव पर युगवक्ता @DrKumarVishwas जी से सुनिए मां भारती की इस अद्वितीय वंदना से जुड़ा ये रोचक तथ्य 🇮🇳😍
#VandeMataram150
#NationalSong 🪷
अजीब विडंबना है ये आम हो चला है कि ये कह दिया जाता है कांग्रेस को JNUGang चला रहा है अक्सर राजनीतिक गलियारों में चर्चा में भी यही रहता है, लेकिन गौर देने लायक बात ये है कि कल JNUSU के चुनाव में NSUI के प्रत्याशियों को 300 वोट भी नहीं मिले जो ABVP को मिले वोटों का भी छठा हिस्सा है
सुधीर पांडेय को सकुशल बरामद कर लिया गया है। भोला यादव ने इनसे अपने पैर चटवाए, लात घूँसो की बौछार की, इतनी बेरहमी से मारा की पूरी आँखें सूज गईं।
भोला यादव पर NSA लगा क्या? उसकी गिरफ्तारी हुई? इस गरीब परिवार की ख़बर मीडिया की हैडलाइन बनी क्या?
इस वीडियो को देखकर आप अपने आंखों में आंसू रोक नहीं पाएंगे 😥
एक छोटा भाई आख़िरी बार अपनी बहन को देखने हॉस्पिटल गया, तो बहन के आख़िरी शब्द थे,कि
तू पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बनना भाई,
क्योंकि.. तेरी बहन आज से इस को छोड़ कर जा रही है, और तू बड़ा होकर भी मुझे भूलना मत।😥
जहां भी कांग्रेस को पॉलिटिकली नीचा दिखाया जाएगा उसका हिस्सा तो मैं बिल्कुल भी नहीं बनना चाहता, कांग्रेस मतलब राहुल गांधी की कांग्रेस, बिहार में राजद जीते हारे, vip जीते हारे मुझे उससे कुछ भी लेना देना है, आज जो कांग्रेसी खुश हो रहे हैं, बताओ ना भाई कांग्रेस को क्या मिला, हां मिला, कांग्रेस की 10 सीटों पर राजद, left ने अपना candidate डाल दिया, उसकी सीट पर कांग्रेस से कैंडिडेट हटवा लिया, डूब मर जाओ सालों... खुशी मना रहे हो, मनाओ हमे क्या..
कृष्णा अल्लावरू के तेवर बचाने की जिम्मेदारी कांग्रेस की थी!
कहीं फिर से आरजेडी के दफ्तर से न चलने लग जाए कांग्रेस!!
अप्रैल के महीने में मेरी मुलाकात हैदराबाद में कृष्णा अल्लावरू से हुई थी। बिहार में कृष्ण-कन्हैया की तब बहुत चर्चा थी।
कृष्णा ने मुझसे जानना चाहा था क��� लोग क्या कह रहे हैं, फीडबैक क्या है। मैंने तब उन्हें जो उल्लेखनीय बात बतायी थी कि लोगों का मानना है कि कांग्रेस में चुनाव के आखिर तक कृष्ण-कन्हैया का तेवर ही नहीं रहने दिया जाएगा। मैंने जोड़ा था- अगर ये तेवर बना रह गया तो कांग्रेस का कलेवर बदल चुका होगा।
कृष्णा ने ओठ भींचते हुए कुछ बोलने को तत्पर होकर भी ना बोलते हुए सिर हिलाकर सिर्फ इतना कहा था- देखते हैं।
हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कह���ँ दम था,
मेरी कश्ती वहाँ डूबी, जहाँ पानी कम था।
(आज कृष्णा अल्लावरू के पंख कुतर डाले गये हैं, उनकी भावनाएं लहु-लुहान है। उन्हें मेरी कही गयी बात तब समझ में न आयी हो, मगर आज जरूर समझ में आ रही होगी।)
@Allavaru @RahulGandhi @Pawankhera @gurdeepsappal @SupriyaShrinate
#KrishnaAllavaru #Congress #BiharElection2025 @Allavaru #biharassemblyelection2025 #BiharElection2025
ये लोग एक जाती से ऊपर उठ नहीं सकते हैं इतना खुल के बैटिंग करने आ जाते हैं बिहार में कुछ भी हो कांग्रेस लड़ी जीत हार अपनी जगह @Allavaru सर ने ये ताकत दिया है और हो सकता है कोई और इनके जगह इन्हीं के सोच का आ जाए तो जीत भी सकते हैं जैसे तेलंगाना जीते
बिहार में कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू को कांग्रेस अध्यक्ष ने अखिल भारतीय युवा कांग्रेस के राष्��्रीय प्रभारी पद से हटाकर मनीष शर्मा को प्रभारी बनाया है. शायद, पार्टी इस आशंका से परेशान थी कि अल्लावरू साहब कहीं युवा कांग्रेस का हाल भी बिहार कांग्रेस जैसा न कर दें!
ये सिर्फ उमाशंकर दुबे की लाश नहीं है!
ये सच्चाई है--- असहाय होने की, पीड़ित होने की, शोषण की, हाशिए पर होने की, जान की कोई कीमत ना होने पर! पिल्लू कुमार और आशीष कुमार ने पीट-पीटकर निर्मम हत्या कर दी। शुक्र है कि हत्या के बाद SC-ST नहीं लगा दिया। उमाशंकर दुबे को ही शोषक नहीं बता दिया।
दुर्भाग्य देखिए की चारों तरफ चुप्पी है! सब मौन हैं। UP ke सुल्तानपुर की यह घटना मीडिया से गायब क्यों है?
इस बच्ची की जितनी उम्र है उससे ज़्यादा सालों से नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं, और ये ब्राह्मणों से, सवर्णों से नाराज़ है जिन्हें बिहार की सत्ता से हटे 35 वर्ष हो गये
ये होती है नैरेटिव की ताक़त, इसे कहते हैं ब्रेनवाशिंग