जो इंसान खुद से सोच नहीं पाता,किसी बात को अपने विवेक से समझकर उसका विस्तार नहीं कर पाता और हर बात के लिए दूसरों की सोच का सहारा लेता है,वह दूसरों से ज्यादा खुद के लिए घातक होता है क्योंकि विचारों की कमी सिर्फ समझ को ��ीमित नहीं करती,बल्कि इंसान को दूसरों की बातों,भ्रम और बहकावे का आसान शिकार बना देती है अपनी सोच खो देने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे यह भी भूल जाता है कि सही और गलत के बीच फैसला खुद करना होता है...!
जब खालीपन हृदय में उतर जाता है तो डूबता हुआ दिन ही सुकून देता है..क्योंकि आपका हृदय भी डूब रहा होता है..भविष्य की अनिश्चितता और खंडित वर्तमान आपको प्रतिपल आहत करता है इससे बचने का हमारे पास कोई उपाय नहीं रहता है..दुनियाँ में तमाम रंग होने के बाद भी हमारी ज़िंदगी बेरंग हो जा���ी है।
कभी-कभी मन की उलझनों में कुछ ऐसे शब्द मुँह से निकल जाते हैं,जिन्हें कहने का इरादा बिल्कुल नहीं होता सामने वाला शायद उन शब्दों को सुनकर आहत हो जाए,मगर सच तो यह है कि उनका दर्द कहने वाले के भीतर कहीं ज्यादा देर तक रहता है क्योंकि कुछ शब्द कह देने के बाद वापस नहीं ल���ए जा सकते,बस उनका अफसोस मन में रह जाता है...!
मेरे जीवन में एक ही लड़की आयी,जिसने मुझसे प्यार किया जाते वक्त उसने कहा था अपना ख्याल रखना वो रुककर मेरा ख्याल रख भी सकती थी लेकिन उसे किसी और का ख्याल रखना था शायद,मैं आज विचारों से जैसा भी बना हूँ उसमें उसके चले जाने की घटना का थोड़ा हिस्सा जरूर है....!