दुःखी हूँ और क्रोधित भी।......जब देश का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान पाने वाले का ये हाल है तो सोचिये जरा नई 'कलमों' का क्या हाल होगा? भयावह है न.....? तो आगे आईये और साथ दीजिये-साहित्य का साहित्यकार का। #justiceforvinodkumarshukl#justiceforvks#hindi_sahityakar
सोचनीय है कि जब मानव कौल और विनोद कुमार शुक्ल जैसे प्रतिष्ठित लेखकों और वटवृक्षों के साथ यह व्यवहार हो रहा है तो जाने कितने नन्हे पौधे कुचले गए होंगे।
विरोध तो होना चाहिए।आवाज़ तो उठनी चाहिए।
#justiceforvinodkumarshukl
अब युवाओं की आंखें नहीं सोने वाली,साहित्य प्रेमियों की आंखें नहीं सोने वाली,
6 वर्षो तक एक 85 वर्षीय साहित्यकार की पत्र का कोई जवाब न देना,केवल 2000 रुपए महीने की आय,
नहीं यह भुलाया नही जा सकता
#justiceforvinodkumarshukl#vinodkumarshukl#hindisahityakar
कुछ मित्रों ने बेहद संजीदा विषय उठाया है।
@Bhaskarkavi5@sanjiiv_singh आदि मित्रों के माध्यम से समझ आया कि बड़े प्रकाशक किस तरह लेखकों का शोषण करते हैं।जब बड़े,स्थापित लेखकों के साथ ऐसा हो सकता है तो नवोदित रचनाकार तो अस्तित्व ही नही रखते।
#justiceforvinodkumarshukl
अगर इस हवा की खुशबू का अहसास जरूरी है हमारे लिए तो यह भी जरूरी है कि पेड़ो को पानी मिलता रहे....
#justiceforvinodkumarshukl
ध्यान रहे, हम किताब खरीदते समय उसके लेखक का नाम देखते हैं न कि प्रकाशक का नाम..
#justiceforvks@Vani_Prakashan
विनोद कुमार शुक्ल जी,आज जो साहित्य के साथ है वह इनके साथ है,इतने बड़े साहित्यकार पूरे वर्ष में केवल 14000 में जीवन व्यापान करने को बाध्य हो चुके है
ये हालात बदलने होंगे
कल सुबह से #justiceforvinodkumarshukl
से सभी अपने विचार पोस्ट करेंगे,हरिवंश राय बच्चन का सपना साकार होकर रहेगा
लेकिन कोई सुनवाई नहीं!!
कितना दुर्भाग्य है ये!!!
यकीन से परे है!
इसे जितना अधिक बढ़ा सकते हैं आगे बढ़ाएं। ऐसे प्रकाशकों को समझना होगा....एक ��ेखक उनसे नहीं चलता वो लेखकों से चलते हैं....
पूरी जानकारी 👇
https://t.co/x4WIWcbpzQ
पिछले एक साल में @Vani_Prakashan से प्रकाशित "विनोद कुमार शुक्ल" जी की तीन बहुचर्चित किताब का Sir को मात्र 6000₹ मिला है। और @RajkamalBooks से साल का मात्र 8000₹ ! कितनी ही बार ये लिखित में @Vani_Prakashanको भेज चुके हैं कि उनकी परमिशन के बगैर कोई नया संस्करण ना छापें!
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विनोद कुमार शुक्ल इस सदी के मूर्धन्य कवि हैं। उन्हें सम्मान तो मिलना ही चाहिए।
एक कदम साहित्य की ओर बढ़ाइए। प्रकाशकों को यह महसूस कराइए कि वे लेखकों से हैं लेखक उनसे नहीं।
#justiceforvinodkumarshukl
हर व्यक्ति को आज एकजुट होने की जरूरत है,
हर व्यक्ति को आप उसकी मौत के बाद ही सम्मान क्यों देते है,सुशांत सिंह,मुक्तिबोध,निराला जी
सबके साथ ऐसा ही हुआ,
परंतु विनोद कुमार शुक्ल के साथ ऐसा न हो,ये आपके हाथ में है,पहल के संग जुड़ें🙏
#साहित्य_से_ही_समाज_है#justiceforvinodkumarshukl
#justiceforvinodkumarshukl
देखिए इस मुद्दे को अगर लेकर चले तो केवल विनोद जी ही नही,साहित्य से जुड़े व आगे जुड़ने वाले हर व्यक्ति का आप भविष्य सुधार सकते है,
हाथ जोड़कर विनती है इस पहल में साथ जुड़िए,अन्याय के खिलाफ आवाज उठाइए,
हर साहित्यकार को उसका उचित मानदेय मिलना चाहिए🙏