सीमांत क्षेत्र, जो भाईचारे, अपनत्व और आपसी सौहार्द की अपनी एक अलग पहचान रखता है, वहाँ कल कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा राह चलते एक ग्रामीण के वाहन में तोड़फोड़ करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
मेरा प्रशासन से आग्रह है कि इस घटना में शामिल असामाजिक तत्वों के विरुद्ध शीघ्र एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि क्षेत्र की शांति, सौहार्द और कानून व्यवस्था बनी रहे।
@RajPoliceHelp@BarmerDm@Barmer_Police
कैसे लौटें आदतन अपराधी मुख्यधारा में?
ऐसे अपराधी जिन्होंने कभी अपने अपराधों से समाज में भय और दहशत का माहौल बनाया, उन पर पुलिस की निगरानी आवश्यक होती है। इसी उद्देश्य से जिला पुलिस उनकी हिस्ट्रीशीट खोलती है, ताकि उनकी गतिविधियों पर लगातार नज़र रखी जा सके।
लेकिन हर हिस्ट्रीशीटर जीवनभर एक जैसा नहीं रहता। कुछ ऐसे भी होते हैं जिन्होंने अपना अंतिम अपराध 10–15 वर्ष पहले किया था। कुछ अब वृद्ध हो चुके हैं, कुछ गंभीर बीमारी या लकवे के कारण असहाय हैं, और कई वर्षों से अपराध से पूरी तरह दूर होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं।
ऐसे लोगों की हिस्ट्रीशीट अनावश्यक रूप से खुली रहने पर पुलिस का समय और संसाधन उन पर निगरानी में खर्च होता है, जबकि यह ऊर्जा नए और सक्रिय अपराधियों पर केंद्रित होना अधिक आवश्यक है। साथ ही, जिसने वर्षों पहले अपराध का रास्ता छोड़ दिया है, उसे और उसके परिवार को हमेशा उसी पुराने दाग़ के साथ जीने के लिए विवश नहीं किया जाना चाहिए।
इसी सोच के साथ पिछले एक वर्ष में झालावाड़ पुलिस ने ऐसे 71 हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी समाप्त की ।
यदि कहीं भी इन बंद हो चुकी हिस्ट्रीशीटर द्वारा नया अपराध किया जाएगा तो निगरानी पुनः शुरू होगी ।
वहीं दूसरी ओर, उभरते और सक्रिय अपराधियों पर कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए इसी अवधि में 50 से अधिक नई हिस्ट्रीशीट खोली गईं।
कानून का उद्देश्य केवल अपराधियों पर नज़र रखना नहीं, बल्कि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करते हुए समाज को सुरक्षित बनाना भी है। जो अपराध की राह पर हैं, उन पर सख्त निगरानी होगी; और जो वर्षों पहले अपराध छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं, उन्हें भी एक निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए।
झालावाड़ पुलिस- आमजन में विश्वास, अपराधियों में भय
बॉलीवुड में प्रोपोगेंडा और झूठा नैरेटिव कैसे सेट करते हैं यहाँ समझिए:-
संदीप साकेत, अनुषा नंदकुमार और प्रोसित राय के निर्देशन में Amazon prime पर 1978 के गीता और संजय चोपड़ा मर्डर केस (रंगा-बिल्ला केस) पर बनी “राख” नामक वेबसाइट किरदारों के धर्म-जाति सब बदल दिए :-
- इंस्पेक्टर VP गुप्ता यहाँ को जय प्रकाश जाटव बनाया। और तो और उन्हें जातिगत भेदभाव झेलना पड़ा ये भी दिखा दिया।
- असल में इंस्पेक्टर के साथी रामचंद्र को "जावेद मुर्तज़ा" बना दिया
- पत्रकार प्रभा दत्त को “निसार” बना दिया
- जिस बाबूलाल ने बच्चों को बचाने की कोशिश की थी, उन्हें सलीम बना दिया
- इतने दर्दनाक भयावह ख़ौफ़नाक सच्ची घटना पर भी जातिगत एंगल के साथ घटिया नैरेटिव सेट कर डाला
- भीम मीम एंगल ही सेट करना था तो कोई काल्पनिक बना लेते
- बाद में 1982 में रंगा-बिल्ला को फाँसी दे दी गई थी।
शिवलिंग पर कंडोम चढ़ाकर फोटो पोस्ट करने वाली सयानी घोष को अगर बीजेपी अपनी पार्टी में शामिल करती हैं …
उसके बाद भी सनातनी हिंदू इस बीजेपी को सपोर्ट करते हैं तो उनसे बड़ा धर्म द्रोही और निर्लज्ज कोई नहीं होगा