@ShilpiSinghINC जब सत्य को मृत समझकर उस पर झूठ की मिट्टी डाल दी जाती है तो सत्य का खोजी ऐसी भरभरी मिट्टी उखाड़ फेंकता है..
और सत्य की साँसे चलते देख उसके अपराधियों की साँसे रुकने लगती हैं..
जय भोलेनाथ🙏🙏
@TalibSi25552617@DChaurasia2312 पहले descent का अर्थ पता कीजिए..अपने हिसाब से मतलब मत बनाइये..
अवतार शब्द अव उपसर्ग और तृ धातु से मिलकर बना है..और यह शब्द सामान्यतः ईश्वर द्वारा शरीर धारण करने के लिये प्रयुक्त होता है..अवतार दो प्रकार के होते हैं-अंशावतार और ज्ञानावतार..प्रभु श्रीराम अंशावतार हैं..
@mohini_singh28 @WasimAkramTyagi इतिहासकार मोरलैंड अपनी पुस्तक ‘India at the death of Akbar’ में लिखते हैं कि “वैसे तो मुग़ल प्रजा संपन्न कही जाती है लेकिन आगरा और लाहौर के बीच के प्रदेशों में निम्नवर्गीय जनता बेहद ग़रीब और सामान्यतः निर्वस्त्र निवास करती है”(p.268,269)
अब वसीम जी बताये क्या कारण था तन न ढकने का
@rational1998 पढ़ाई-लिखाई करो..समझ विकसित करो..
एक बात पर टिको पहले..तुम दावा कर रहे हो कि मंदिर पर कब्जा किए ब्राह्मणों ने मंदिर को तोड़ने वालों को बुलाकर देश को ग़ुलाम बना दिया..??
क्या ब्राह्मण इतने मूर्ख थे..??
कम से कम बाबा साहब की पुस्तक “पाकिस्तान और भारत का विभाजन” ही पढ़ लेते🤦🤦
@rational1998 WhatsApp के इतिहास की यही समस्या है कि यह तर्क की कसौटी पर खरा नहीं उतरता..एक तरफ़ कहते हो ब्राह्मण मंदिरो पर कब्जा जमाकर शोषण कर रहे थे..तो दूसरी तरफ़ वही ब्राह्मण नये शोषक को हिस्सेदारी देने और मंदिरों को तुड़वाने के लिये बुलायेंगे..?
सच में rational बुद्धि है न..??🤦🤦
@NadeemRamAli@AshwiniUpadhyay WhatsApp पर इतिहास पढ़ते हैं क्या मित्र..??कुछ प्रश्नों के उत्तर देंगे..?
१.सावरकर ने हिंदुत्व की अवधारणा कब दिया था??
२. क्या उसके पहले पृथक निर्वाचन की माँग क्यों की गई थी..?
३.क्या मोपला हिंदू नरसंहार के ज़िम्मेदार भी सावरकर थे..?
४.इसके पहले के दंगों के ज़िम्मेदार कौन थे..?
@FireJayhind@Mayanky00@PiyushSingh_TPS@ManjeetArti जो मनुस्मृति में सिद्धांत दिये गये हैं वैसे ब्राह्मण शायद ही मिले..
१.ज्ञानहीन ब्राह्मण काठ की हाथी या चमड़े के मृग के समान निष्फल है
२.जिस ब्राह्मण के घर केवल एक दिन का भोजन हो वह सर्वोत्तम है.
३.ब्राह्मण सम्मान को विष और अपमान को अमृत समान समझे
४.उसे किसी का अनभल न सोचना चाहिये
@tabish3039 @AchAnkurArya वोटिंग से विचारधारा का पता चलता है..अगर “पाकिस्तान” बनाये जाने के आम लोग समर्थक न होते तो वही आम लोग सड़कों पर दंगे न करते..लाखों लोगों ने जान न गवाई होती..
@shahdanwhoop @AchAnkurArya और जो “direct action day” पर दंगे हुए थे वो किसने किए थे..??
अगर वोटिंग के सभी विरोधी थे तो “पाकिस्तान” न बनाने के लिये आंदोलन होता न कि उसे बनाने के लिये दंगे..