40+ के बाद स्त्री और पुरुष के बीच दोस्ती का मतलब बदल जाता है।ये वो उम्र होती है जब ज़िन्दगी ने हमें बहुत कुछ सिखा दिया होता है…….रिश्ते, जिम्मेदारियाँ, टूटना, संभलना। यहाँ दोस्ती में कोई जल्दबाज़ी नहीं होती, कोई दिखावा नहीं होता। यहाँ मतलब होता है एक हद में रहकर एक-दूसरे को दिया जाने वाला असीम अहसास।
इस उम्र की दोस्ती में शरीर से पहले मन छूता है। न हाथों को एक-दूसरे को थामने की ज़रूरत होती है, न लफ़्ज़ों को सबूत देने की। बस एक नज़र काफी होती है ये समझने के लिए कि सामने वाला थका हुआ है। एक छोटा सा “सब ठीक है ना” काफी होता है आधे बोझ को हल्का करने के लिए। ये दोस्ती चिल्लाकर नहीं कहती “मैं हूँ ना” ये चुपचाप साथ बैठकर वक़्त को आसान बना देती है।
40 के बाद हमें समझ आ जाता है कि हर रिश्ते की अपनी मर्यादा होती है और इसी मर्यादा में ही असली सुकून छुपा होता है। हम एक-दूसरे की ज़िन्दगी में दखल नहीं देते, सलाह के नाम पर जज नहीं करते। हम बस सुनते हैं बिना काटे, बिना तुलना किए।
पुरुष अपने कंधे पर दुनिया का बोझ लिए घूम रहा होता है, और स्त्री घर-बाहर दोनों जगह खुद को साबित करती रहती है।ऐसे में एक दोस्त मिल जाए जो कहे “तुम्हें थकना अलाउड हैं” तो वो दोस्ती किसी दवा से कम नहीं लगती।
इस दोस्ती में इच्छाए नहीं होती, मांग नहीं होती।तुमने मुझे टाइम क्यों नहीं दिया; ये वाला हिसाब नहीं होता।यहाँ दोनों जानते हैं कि परिवार, काम, सेहत सब पहले हैं। फिर भी महीने में एक बार की चाय, या थोड़ी बात, पूरे हफ्ते को सुकून से भर देती है।ये वो अहसास है जो कहता है तुम अकेले नहीं हो,मैं यहाँ हूँ दूर सही, पर हूँ।
40+ की दोस्ती सबसे खूबसूरत इसलिए भी है क्योंकि यहाँ दोनों एक-दूसरे को पूरी तरह जानते हैं। हम जानते हैं कि जिंदगी परफेक्ट नहीं होती।बाल सफेद होते हैं, जिम्मेदारियाँ बढ़ती हैं, शरीर धीमा होता है,फिर भी सामने वाला हमें बिना फिल्टर के पसंद करता है।इसी को तो असीम अहसास कहते हैं जहाँ शर्तें खत्म और स्वीकृति शुरू होती है।
इसलिए 40 के बाद की दोस्ती प्रेम नहीं, लेकिन वो प्रेम से कम भी नहीं। ✨🧡
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
मेरे भीतर जो खलीपन है उसमे शायद कहीं मैं प्रेम करना ही भूल न जाऊँ, फिर भी दिल की गहराइयों में कोई छोटी सी लौ बाकी है जो कहती है कि शायद एक दिन, किसी अप्रत्याशित पल में, प्रियतमा मेरे सन्नाटे को तोड़कर आएगी, और मैं इस खालीपन में डूबा हुआ, इंतज़ार करता हूँ उस दिन का जो शायद कभी आए।
अगर तुम उसके पहले प्यार नहीं हो, तो मत पूछना कभी उससे कि क्या तुम सिर्फ मुझसे ही प्यार करती हो? वह कह देगी तुम्हारा मन रखने के लिए कि सिर्फ तुमसे प्यार करती हूँ।
जबकि सच आपको भी पता था और उसे भी कि कुछ इंसान नहीं भुलाए जा सकते और ना ही उतना प्रेम आपको दे पाएगी वह, जो उस इंसान से करती थी...
क्योंकि पहला इश्क़ 'pure form' था लव की, अब सिर्फ़ समझौते हैं, जिनमें वह आपके फैसलों के साथ खड़ी है जबकि उसका मन आज भी कुछ और ही सोचता है...
तभी मैं हमेशा कहता हूँ, लड़कियों का पहला प्रेम और लड़कों का आखिरी प्रेम दोनों एक जैसे होते हैं, वे चाहते हैं कि यह हमसे अब कभी दूर न हो, इसलिए अगर आप उसका पहला प्यार नहीं हैं, तो मत पूछना उससे कभी कि आपको सिर्फ़ मुझसे प्यार है? आपका मन रखने के लिए वह हाँ ज़रूर कहेगी, पर यह सिर्फ़ झूठ होगा और कुछ नहीं।
तुम्हारी पसंद का हर रंग, मेरे लिए अनमोल है। मैं तुम्हारे लिए बाज़ार की हर गली में जाऊंगा, तुम्हारी पसंद की चूड़ी ढूंढने के लिए। जब तुम चूड़ी पहनोगी, तुम्हारी सुंदरता और बढ़ जाएगी। मेरे दिल की धड़कनें तेज हो जाएंगी, तुम्हारी सुंदरता को देखकर।
- @chastemonk
तुम्हारी बाँहों की कैद में
आज़ाद हो जाने की चाहत है
हर रात
तुम्हारी साँसों की गर्माहट में
पिघल के खो जाने की चाहत है।
जब तुम
इतनी नज़दीक आओ
कि फ़ासला भी शर्मा जाए
धड़कनों का हर राज़
मेरे सीने से लिपटकर
तुम्हारा नाम लेने लगे
साँसें उलझें तुम्हारी साँसों से
बस ऐसी एक मुलाक़ात की चाहत है।
तुम्हारे बालों की खुशबू
जो हर बार नशे-सी छा जाए
तुम्हारी गर्दन की नरम-सी छुअन
जहाँ धड़कन ठहर-ठहर जाए
और तुम्हारी बाँहों का घेरा
जो दुनिया से महफ़ूज़ रखे
इन सबसे बढ़कर
अपनी पूरी ज़िंदगी
तुम्हारे साथ बिताने की चाहत है।
काश
हर रात यूँ ही
तुम मेरी बाँहों में सिमट जाओ
मैं तुम्हारी धड़कनों में खो जाऊँ
तुम मेरी धड़कनों को सुनो
और चाँदनी भी शर्मा के
खिड़की से लौट जाए
और हमारे बीच
मोहब्बत की ख़ामोशी
हर इज़हार से ज़्यादा बोलती रहे
बस ऐसी ही हर रात की चाहत है।
तुम्हारे होंठों तक पहुँचने से पहले
तुम्हारी नज़दीकियाँ ही
मुझे बेकरार कर दें
निगाहें झुकें, साँसें थमें
और वक़्त भी वहीं ठहर जाए
फिर तुम्हारा यूँ
मेरे सीने पर ठहर जाना
दिल की हर धड़कन में
तुम्हारा नाम बस जाना
और पूरी दुनिया का
उसी एक पल में सिमट जाना
बस इसी एहसास को
जनम-जनम तक
जी लेने की चाहत है।