"यह बच्चे संसद भवन तक इसलिए आए थे क्योंकि वह सरकार को बताना चाहते थे कि आपका सिस्टम बीमार पड़ गया, वह काम नहीं कर रहा है। उन मासूम बच्चों को लाठियां खानी पड़ी, बेटियों के कपड़े फाड़े गए।"
- श्रीमती डिम्पल यादव जी, लोकसभा सांसद
सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मक़सद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
हो गई है पीर पर्वत-सी, पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।
#संसद_मार्च#जंतर_मंत्र
राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की धरती पर बसे भील आदिवासी एक आत्मा, एक संस्कृति और एक विरासत के धनी हैं। हमारे पुरखों ने अपने खून से इस भूमि को सींचा है।
आज वक्त आ गया है कि इस क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी सहित मानवतावादी सोच के साथ रहने वाले सभी वर्ग के हित में नये भील राज्य बनाने की दिशा में केंद्र सरकार को फैसला करने की आवश्यकता है।
#हमारी_मांग_भीलप्रदेश
संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत के आदिवासी (Indigenous Peoples) समुदाय की ओर से अपनी बात रखने का अवसर मिला।
संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में भारत सरकार द्वारा लंबे समय से किये जा रहे उस दावे का तथ्यात्मक खंडन किया कि भारत में कोई विशेष आदिवासी (Indigenous) समुदाय नहीं हैं। मैंने स्पष्ट कहा कि मैं इस दावे को स्वीकार नहीं करता।
मैंने बताया कि भारत में प्रोटो-ऑस्ट्रालॉइड, नीग्रिटो, द्रविड़ और मंगोलॉयड नस्लीय समूहों से संबंधित आदिवासी निवास करते हैं, जो कुल 705 आदिवासी समूह के रूप में अपनी पहचान बनाये हुए हैं।
वर्तमान भारत के संविधान में इन आदिवासी समुदाय को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता प्रदान की गई है, जिनकी वर्तमान जनसंख्या लगभग 14 करोड़ के करीब है।
अतः यह स्पष्ट है कि भारत की अनुसूचित जनजातियां ही भारत के इंडिजिन्स पीपुल्स हैं।
मैंने अपने वक्तव्य में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू के Kailas v. State of Maharashtra (2011) निर्णय का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि "अनुसूचित जनजातियां भारत के मूल निवासियों की वंशज हैं।"
संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे वैश्विक मंच पर भारत के भील आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए गर्व और सम्मान की बात है। यह आवाज केवल मेरी नही, बल्कि देश के करोड़ों आदिवासी भाई-बहनों की आवाज है। जोहार
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शायद यह वीडियो वायरल नहीं होता, तो राष्ट्रीय मानव का दर्जा प्राप्त बैगा आदिवासी के साथ एक माह पूर्व हुई बर्बरता मोदी जी के विकसित भारत की यात्रा में कहीं गुम हो जाती।
यह वीडियो मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के निगाही परियोजना क्षेत्र का है। एक माह पहले बैगा आदिवासी अपनी पत्नी के साथ जंगल में जड़ी-बूटी व लकड़ी लेने के लिए गया हुआ था। उक्त परियोजना क्षेत्र में सरकार द्वारा नियुक्त प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी के सुरक्षाकर्मियों ने नजदीकी जंगल में अपनी आजीविका के लिए घूम रहे बैगा आदिवासी को बुरी तरह से पीटकर अधमरा कर दिया।
बैगा आदिवासी के साथ हुई बर्बरता की न तो किसी ने पीड़ा सुनी और न ही कोई कार्यवाही हुई। जब यह एक माह बाद वीडियो वायरल हुआ, तो पुलिस हरकत में आई और प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही की खानापूर्ति की।
अब सवाल यह है कि क्या अगर वीडियो वायरल नहीं होता, तो इस राष्ट्रीय मानव बैगा आदिवासी के साथ बर्बरता करने वाले कायर सुरक्षाकर्मियों पर मुकदमा दर्ज होता ?
सवाल यह भी है कि इस तरह देश में कितने आदिवासियों और दलितों के साथ प्रतिदिन बर्बरता होती होगी ? लेकिन शायद उनके वीडियो वायरल नहीं होते होंग
मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 भाषणों व होर्डिंग्स में ही आदिवासी और दलितों के विकास व न्याय की बात करने से काम नहीं चलेगा। जिन जंगलों को उद्योगपतियों के हवाले कर आदिवासियों को विस्थापित करने का काम किया जा रहा है, उन जंगलों को आदिवासियों ने अपना घर समझकर संभाला है।
गृह मंत्री @AmitShah जी, शायद आपने नक्सलवाद मुक्त होने का दावा नहीं किया होता, तो ये प्राइवेट गुंडे इस आदिवासी को भी मारकर नक्सलवादी घोषित कर देते ?
प्रधानमंत्री @narendramodi जी, उक्त घटना के साथ-साथ पूरे देश में आदिवासियों को जंगलों में इस तरह प्रताड़ित किया जाता है, उन सभी पर अंकुश लगाया जाए।
महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, बैगा आदिवासी को राष्ट्रीय मानव का दर्जा प्राप्त है। आप एक सर्वोच्च पद पर होने के साथ ही आदिवासी समुदाय से आती हैं। आदिवासी क्षेत्रों में असंवैधानिक रूप से आने वाली समस्त परियोजनाओं पर रोक लगाकर आदिवासियों को संरक्षण प्रदान करें।
@rashtrapatibhvn@Bap12MP@MlaDKamleshwar@komal_dhopiya@ndtv@TheQuint@TOIIndiaNews@News18MP@mpbreakingnews@patrika_mp@MpDainik
देश की माननीय राष्ट्रपति आदरणीय श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी को पत्र लिखकर आदिवासी समाज की भावना और झारखंड राज्य की आकांक्षा को ध्यान में रखते हुए जनगणना के द्वितीय चरण में आदिवासी/सरना धर्म (साथ ही अन्य सदृश्य धार्मिक व्यवस्था) के लिए अलग कोड निर्धारित करने का अनुरोध किया है, ताकि समाज की विशिष्ट पहचान सुरक्षित एवं सम्मानित रह सके।
@rashtrapatibhvn
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र कोटड़ा, जिला उदयपुर में घटिया निर्माणाधीन स्कूल भवन की दीवार के नीचे दबकर एक छात्रा ने अपनी जान गवा दी और अन्य घायल है।
हमारा देश आज 79वा स्वतंत्रता दिवस मना रहा है लेकिन आजाद भारत के भ्रष्ट तंत्र से निर्माणाधीन स्कूल के नीचे दबकर देश का भविष्य अपनी जान गवा रहा है।
यह TAD मंत्री बाबूलालजी खराडी का गृह विधानसभा क्षेत्र है। मंत्रीजी के नाक के नीचे घटिया निर्माण ने आज एक मासूम की जान ले ली। क्या यही अमृत महोत्सव है।
@BhajanlalBjp@madandilawar@BabulalKharadiB@BabulalKharadiB
जोहार
कल सुबह से लेकर शाम तक
सोशियल मीडिया साथी
जो ट्विटर, फेसबुक यूजर हैं।।
वह सभी #हमारी_मांग_भीलप्रदेश
हैशटैग पर अधिक से अधिक पोस्ट करें,
रीट्वीट करें।।
भील पूर्वजों का हक अधिकार, मान, सम्मान, स्वाभिमान और जीवन आधार "भीलप्रदेश राज्य" बने तभी जल जंगल जमीन खनिज संस्कृति रूढ़ी प्रथा कस्टमरी लॉ की सुरक्षा संभव होगी!!
#हमारी_मांग_भीलप्रदेश
जोहार
राजस्थान गुजरात मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के 49 जिल्लों मे निवासरत 3 करोड़ से अधिक भीलो के विकास उन्नति के लिए भीलप्रदेश राज्य का गठन किया जाना चाहिए!
#हमारी_मांग_भीलप्रदेश
वर्तमान बांसवाड़ा के भाजपा नेताओं को भ्रष्टाचार के होर्डिंग लगा के प्रचार-प्रसार करने का बहुत बड़ा शौक है, चलो अच्छी बात है।
लेकिन बांसवाड़ा की जनता चाहती है कि विधायक जयकृष्ण पटेल के 20 लाख की रिश्वत कांड वाले जो होर्डिंग लगाये हैं उसके दूसरी तरफ भाजपा के पूर्व व वर्तमान जिला अध्यक्षों एवं पानी वाले पूर्व मंत्रीजी के ये करोड़ों अरबों के घोटाले की होर्डिंग भी लगा देते तो कितना बढ़िया रहता। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र की जनता समझ चुकी है।
एक कहावत है - सो चूहे खाकर बिल्लिया हज को चली।