खुद से युद्ध लड़ना अत्यंत मानसिक पीड़ादायक होता है,खैर!... अंत में परिणाम चाहे जो भी हो,एक बात निश्चित है इस युद्ध के बाद हम कभी वैसे नहीं रहते,जैसे उससे पहले थे...!
एक उम्र के बाद, एक ठहराव आ जाता है,हर मोह, हर बंधन, धीरे से छूट जाता है।वो माता-पिता, वो बचपन के साए,पीछे छूट जाते हैं, बिना कुछ बताए।ना किसी को पाने की चाह, ना खोने का डर,बस एक शांत राही, और एक लंबा सफ़र।दिल अब किसी बात पर हैरान नहीं होता,भावनाओं का वो पुराना तूफ़ान नहीं होता।
मेरे जीवन में अब सब कुछ बदल जाएगा। करुणा मर जाएगी। प्रेम सिमट जाएगा। दुःख अविरल होंगे। रिश्ते नकार दिए जाएंगे। उम्मीदों के आखिरी दीये भी बुझ चुके हैं। अब न कोई शिकवा बचा है, न कोई तसल्ली। बस एक खामोश शून्य है,जो मेरे भीतर धीरे-धीरे फैल रहा है। सब कुछ मिट चुका है। मै मिट चुका हूं।
26 के उम्र के बाद पढ़ाई लिखाई में रुचि नहीं रह जाती। किताबें बोझ लगती है और ये जीवन नर्क महसूस होता है। इस उम्र तक जो नौकरी पा लिया या अच्छा कॉलेज पा लिया वो ठीक है, इसके बाद समाज और परिवार का दवाब आये या न आए, लेकिन अंदर अंतरात्मा से आवाजें आना अवश्य शुरू हो जाती है कि कब तक ये अनिश्चितताओं के खेल जैसी नौकरी या इसकी तैयारी के पीछे पड़े रहोगे। कब तक खुद को छलोगे। अकेले रह कर परीक्षाओं के लिए क्या मिला? जीवन में आज एक व्यक्ति नहीं है जिस से एक रुपये की मदद ले सकूं, एक खास मित्र नहीं जिस से कुछ सच में खुल कर साझा कर सकूं। जीवन कितना अजीब हो गया है। अब तो कुछ लिखने में भी अजीब लगता है, सोचता हूं जो पढ़ेगा वो गाली ही देगा और मन ही मन चुटिया बोलकर हँस देगा।
देखता हूं क्या कर सकता हूं। जीवन में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हर मुद्दों पर अंधेरा ही छाया है। कभी कभी लगता है काश पैसों का जखीरा होता तो पढ़ना नहीं पड़ता, इतना बेवजह अवसाद नहीं आता, किसी को कुछ प्रूफ करने का दवाब नहीं रहता। पर सच तो यही है कि जो अकेला है, वो जीवन भर अकेला ही रहेगा जब तक उसे मनपसंद की चीजें न मिल जाए।
कभी-कभी वे लोग,जो हजारों किलोमीटर दूर होते हैं,अपने स्नेह,समझ और अपनत्व से हमें इतना करीब महसूस कराते हैं कि पास बैठे लोग भी उतनी गर्माहट नहीं दे पाते दूरी केवल जगहों की होती है,दिलों की नहीं और सच्चा जुड़ाव वही होता है,जहाँ बिना पास रहे भी अपनापन महसूस हो...!
हर कोई प्रतिभाशाली होता है। लेकिन अगर आप किसी मछली को पेड़ पर चढ़ने की क्षमता के आधार पर आंकेंगे, तो वह पूरी जिंदगी यही मानती रहेगी कि वह मूर्ख है।
~ अल्बर्ट आइंस्टीन