आदरणीय प्रधानमंत्री जी / केंद्रीय गृहमंत्री जी / मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
केंद्रीय गृह सचिव / गृह सचिव, उत्तर प्रदेश / डीजीपी, उत्तर प्रदेश
��िषय: उत्तर प्रदेश पुलिस के हजरतगंज थाने और तत्कालीन SHO श्री विक्रम सिंह का हैरान करने वाला कारनामा — मेरे द्वारा कभी न दिए गए कथित मनगढ़ंत बयान को मेरे नाम से केस डायरी एवं पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज कर आरोपपत्र में प्रस्तुत करने, मुझे आरोपपत्रित कर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, पुलिस रिकॉर्ड एवं जांच प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग, प्रभावशाली व्यक्तियों को अनुचित लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से कथि�� मिलीभगत एवं आपराधिक साजिश रचने तथा इसमें शामिल सभी जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों एवं अन्य व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जाँच कर उनके विरुद्ध आपराधिक एवं विभागीय कार्रवाई किए जाने हेतु।
महोदय,
मैं अत्यंत गंभीर विषय आपके संज्ञान में लाना चाहती हूँ। थाना हजरतगंज, लखनऊ की दिनांक 16.03.2025 की केस डायरी में मेरे नाम से ऐसा कथित बयान दर्ज किया गया है, जो मैंने कभी दिया ही नहीं। इसमें दर्शाया गया है कि मैंने अपने पति एवं मेरी बहन साध्वी सिंह के कथित संबंधों के विषय में किसी पत्रकार को जानकारी देने अथवा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की बात कही थी। मैं इस कथित बयान का स्पष्ट एवं पूर्णतः खंडन करती हूँ।
वास्तविकता यह है कि 16.03.2025 को मैं अपने स्टाफ के साथ थाना हजरतगंज केवल अपने विरुद्ध दर्ज एक अन्य मामले में अपना अतिरिक्त लिखित जवाब एवं दस्तावेज देने गई थी, जिसमें मेरी निर्दोष पुत्री को भी अभियुक्त बनाया गया था। मैंने तत्कालीन SHO श्री विक्रम सिंह के कार्यालय में अपने दस्तावेज प्रस्तुत किए और उनकी रिसीविंग/प्राप्ति आज भी मेरे पास उपलब्ध है।
उसी दौरान मैंने साध्वी सिंह से संबंधित FIR के विषय में जानकारी मांगी थी। मुझे बताया गया कि “इस मामले में कुछ नहीं है, आप सुल्तानगंज थाना चली जाइए और IO मधुकर सिंह आपको एक स्लिप देंगे, उस पर साइन कर दीजिए।” इसके बाद मैं निर्देशानुसार सुल्तानगंज गई और आवश्यक कार्यवाही की।
इसके बिल्कुल विपरीत, मेरे नाम से एक ऐसा मनगढ़ंत बयान पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज कर आरोप��त्र में प्रस्तुत कर दिया गया, जिसमें पत्रकार को जानकारी देने तथा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जैसी बातें लिखी गईं, जो मैंने कभी कही ही नहीं। यदि मैंने वास्तव में ऐसा कोई बयान दिया था तो पुलिस उसकी मूल रिकॉर्डिंग, मेरे हस्ताक्षरयुक्त लिखित बयान अथवा कोई अन्य स्वतंत्र एवं विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करे।
यह केवल गलत बयान का मामला नहीं है। मेरी गंभीर आशंका है कि मेरे विरोधी पक्ष के प्रभाव अथवा मिल���भगत में पुलिस रिकॉर्ड एवं जांच प्रक्रिया का दुरुपयोग कर मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, मेरे विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल करने, न्यायिक कार्यवाही को प्रभावित करने तथा प्रभावशाली व्यक्तियों को अनुचित लाभ पहुँचाने का प्रयास किया गया। यदि इसकी पुष्टि होती है तो यह अत्यंत गंभीर पुलिस कदाचार एवं आपराधिक साजिश का विषय है।
अतः मेरी विनम्र प्रार्थना है कि:1. 16.03.2025 की थाना हजरतगंज की उपलब्ध CCTV फुटेज तत्काल सुरक्षित कराकर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए और उसका स्वतंत्र परीक्षण कराया जाए।
2. तत्कालीन SHO श्री विक्रम सिंह की मूल रिसीविंग तथा मेरे द्वारा उस दिन दिए गए दस्तावेजों का सत्यापन कर उन्हें केस डायरी के कथित बयान से मिलाया जाए।
3. पत्रकार को जानकारी देने अथवा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने संबंधी कथित बयान के समर्थन में मौजूद मूल रिकॉर्डिंग, हस्ताक्षरयुक्त बयान या अन्य मूल साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं।
4. स्वतंत्र पुष्टि होने तक इस विवादित एवं मेरे द्वारा स्पष्ट रूप से अस्वीकृत कथित बयान के आधार पर मेरे विरुद्ध कोई प्रतिकूल निष्कर्ष न निकाला जाए।
5. यह स्वतंत्र रूप से जाँचा जाए कि मेरे द्वारा न दिए गए कथन को मेरे नाम से किसने, किस आधार पर और किन परिस्थितियों में पुलिस रिकॉर्ड एवं आरोपपत्र का हिस्सा बनाया।
6. यदि जांच में पुलिस अधिकारियों अथवा अन्य व्यक्तियों द्वारा जानबूझकर गलत बयान दर्ज करने, रिकॉर्ड/जांच प्रक्रिया के दुरुपयोग, मिलीभगत, आपराधिक साजिश अथवा किसी प्रभावशाली व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुँचाने की पुष्टि होती है, तो सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार आपराधिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।
यह मामला मेरे लिए केवल व्यक्तिगत अन्याय का नहीं, बल्कि पुलिस रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और आम नागरिक के पुलिस व्यवस्था पर विश्वास का भी प्रश्न है। अतः मैं इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं समयबद्ध जांच की प्रार्थना करती हूँ।
सादर,
भानवी कुमारी सिंह
भदरी, प्रतापगढ़ @PMOIndia @AmitShah @myogioffice @NCWIndia @dgpup @Uppolice @@SinghVikra78658
If UP, Bihar and Maharashtra all have BJP Chief Ministers today, then WHY is inter-BJP coordination on something this basic so low?
You cannot talk about one India and then make someone’s ability to work in another Indian state depend on whether they speak the regional language well enough.
Despite all the claims of huge investment and job creation in UP, so many people from UP and Bihar still have to leave home and go all the way to Mumbai to drive autos and taxis. They work endless hours, live in tiny shared rooms, sometimes 8 to 10 people together, just to send some money home.
It hurts my heart seeing their livelihood depend on whether they know Marathi well enough. They are stopped, tested, made to attend roadside Marathi classes, issued notices, heavily fined, harassed, and there have even been cases of drivers being assaulted over language.
Why does this burden fall only on the auto and taxi drivers? On the men who cannot afford to lose even one day’s earning?
Of course Maharashtra has every right to protect and promote Marathi. But there has to be a better way than making poor migrant workers feel like outsiders in their own country.
And this also affects how people from UP and Bihar feel about their own languages. Awadhi, Braj, Bhojpuri, Maithili, Magahi etc. I want our people to carry these with pride too.
Regional languages should be a matter of pride, not a barrier to someone earning his living.
The bigger question is not language, it is governance. When these three states are politically aligned under the BJP/NDA, why is the coordination still so weak?
@BJP4India@myogiadityanath@Dev_Fadnavis@samrat4bjp please work on this our people deserve some dignity.
युवाओं की केंद्र सरकार से नाराज़गी से ये स्पष्ट है कि वर्षों की अनदेखी, अन्याय और अपने भविष्य को लेकर युवाओं में बेचैनी है। छात्र और युवा जब सवाल पूछते हैं, तो उन्हें चुप कराने के बजाय उनके सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।
अब वक्त है कि युवाओं की आवाज़ को गंभीरता से सुना जाए। उनके अधिकार, सम्मान और भविष्य से कोई समझौता न हो।
अपने हक़ के लिए मजबूती से आवाज़ उठाएँ—लेकिन शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से। क्योंकि जागरूक युवा सिर्फ सवाल नहीं पूछता, वह बदलाव की दिशा भी तय करता है।
I sincerely thank @OfficeofUT sir and @RajThackeray sir for extending their support to CJP’s protest in Mumbai on October 2.
All Indians must come together to save our democracy before it’s too late.
२ ऑक्टोबर रोजी मुंबईत होणाऱ्या CJP च्या आंदोलनाला पाठिंबा दिल्याबद्दल @OfficeofUT साहेब आणि @RajThackeray साहेब यांचे मी मनापासून आभार मानतो.
आपली लोकशाही वाचवण्यासाठी सर्व भारतीयांनी एकत्र येणे गरजेचे आहे.
प्रकृति और नारी दोनों की खामोशी को कमजोरी समझने की भूल मत ���ीजिए।
दोनों सृजन की शक्ति हैं, धैर्य की पहचान हैं और अपने भीतर अपार सामर्थ्य समेटे हुए हैं।
लेकिन जब उनकी सीमाओं को बार-बार लांघा जाता है, तो उनका मौन भी एक दिन जवाब बन जाता है।
आज का Cyclone हमें प्रकृति की उसी विराट शक्ति का एहसास करा रहा है-
जिसे इंसान कितना भी नियंत्रित करने की कोशिश करे, प्रकृति अंततः अपना संतुलन स्वयं तय करती है।
नारी का सम्मान हो या प्रकृति का संरक्षण दोनों किसी उपकार के नहीं, हमारी जिम्मेदारी के विषय हैं। 🌿🌧️
🌪️ प्रकृति को हराकर कोई विकास कभी स्थायी नहीं हो सकता।
हमने विकास की दौड़ में जंगल काटे, नदियों के रास्ते बदले, पहाड़ों को खोदा और समुद्र के किनारों तक कंक्रीट से भर दिए।
फिर जब प्रकृति तूफ़ान, बाढ़ या भारी बारिश के रूप में अपना संतुलन दिखाती है, तो ��म उसे सिर्फ एक “आपदा” कहकर आगे बढ़ जाते हैं।
Cyclone Arnab हमें डराने नहीं, सोचने पर मजबूर करने आया है।
सड़कें बनें, शहर बनें, उद्योग लगें विकास हर हाल में होना चाहिए।
लेकिन सवाल यह है कि क्या विकास और प्रकृति के बीच दुश्मनी जरूरी है?
प्रकृति को चोट पहुँचाकर बनाई गई तरक्की शायद आज चमकती हुई दिखाई दे,
लेकिन उसकी कीमत आने वाली पीढ़ियाँ चुका सकती हैं।
विकास वह नहीं जो प्रकृति को पीछे छोड़ दे;
विकास व�� है जो इंसान और प्रकृति दोनों को साथ लेकर आगे बढ़े। 🌿🌧️
#CycloneArnab #Nature #Environment #SustainableDevelopment
अंतिम जोहार बड़े भाई सोनू जी
ॐ शांति! 🙏💐
मन अत्यंत दुख और भारी हृदय के साथ माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी के साथ प्रिय बड़े भाई एवं झ���रखंड सरकार के मंत्री स्वर्गीय सुदिव्य सोनू जी के अंतिम दर्शन किए।
Sonu Da…ये जाने की उम्र नहीं थी। एक शिक्षा मंत्री ऐसा भी था। देश को जानना चाहिए। आमतौर पर नेताओं को लेकर हम सबकी अपनी धारणाएं है���। मगर वो विरले थे…
ऐसे लोकतांत्रिक लीडर कम ही बचे हैं।
CM हेमंत सोरेन ने उन्हें बड़ा भाई बताते हुए,उनके जाने को व्यक्तिगत क्षति बताया। मगर ये पूरे राज्य के लिए क्षति है। Sudivya Kumar Sonu जी को विनम्र श्रद्धांजलि 🙏🏼
आज 80 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर के0के0एन0 स्टेडियम में आयोजित मुख्य समारोह में माननीय मंत्री श्री हफिजूल हसन द्वारा ध्वजारोहण किया गया। इस अवसर पर उन्होंने सभी देवघर जिलावासियों सहित समस्त झारखण्ड व��सियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ दी।
@JharkhandCMO @prdjharkhand
@RaghaviBhadri@SinghkolAashika Staying strong in times like these is so tough. It is heartbreaking to see someone tear a family apart and then demand financial extortion on top of emotional damage. Stand firm with your mom justice and truth will prevail
लोकतंत्र ऐसे चलता है - तानाशाहियों से नहीं - कर्नाटक के मुख्यमंत्री @DKShivakumar और गृहमंत्री @PriyankKharge प्रोटेस्ट 🪧 कर रहे छात्रों से संवाद कर समस्या का हल मिलकर निका��ते हुए 🇮🇳❤️👍.
हल संवाद है - पेलेट गन-AK-47,आँसू गैस,शॉक बैटन या पुलिस की लाठी नहीं @narendramodi . #SackShah
#WATCH | Cockroach Janta Party (CJP) Founder Abhijeet Dipke says, "I am ready to show documents related to my education loan and the scholarship letter. I also request Narendra Modi to show his degree."
As #CJP visibly continues to grow, one question keeps coming back to me.
Given the level of public attention, media engagement and growing support the CJP is receiving, one question keeps coming back to me, why hasn’t it registered with the Election Commission of India yet?
This isn’t unique to CJP it’s a broader generational (#GenZ) pattern. We launch the Instagram page before we file the paperwork.
Virality is not the same as institutional seriousness. A movement can command enormous public attention and still remain institutionally unformed.
I think formalisation is what makes a successful movement sustainable. Registration, documentation and official recognition are what turn an initiative into an institution.
Credit where it’s due. Building this level of public engagement around political accountability is no easy feat.
I hope their next phase is about institutionalising everything they’ve built and giving it a lasting foundation for electoral legitimacy.