वंदे मातरम् बिल: संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ, चुनावी राजनीति तथा जनता के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश।
हमें किसी के "वंदे मातरम्" पढ़ने या गाने से कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में किसी दूसरे को साझी नहीं ठहरा सकता। "वंदे मातरम्" के कुछ हिस्से इस्लामी आस्था के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए किसी भी मुसलमान को इसे गाने या स्वीकार करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता और अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। किसी भी नागरिक को उसके धार्मिक विश्वास के विरुद्ध किसी नारे, गीत या विचार को अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
आज देश बेरोज़गारी, महंगाई, आर्थिक चुनौतियों, किसानों की समस्याओं और युवाओं के भविष्य जैसे गंभीर मुद्दों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में विवादास्पद विषयों को प्राथमिकता देने के बजाय संसद को जनता के वास्तविक और महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
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#ReligiousFreedom
#ConstitutionOfIndia
#Article25 #Article19
#ArshadMadani
Daughter of a BJP politician, Yashaswinee Raje Singh, tells why she supports India's student-led protests and how the Cockroach Janta Party galvanised Gen Z.
RSS द्वारा देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर क़ब्ज़े की कहानी : भाग 2
आजकल शिक्षा जगत पर RSS के बढ़ते प्रभाव और विश्वविद्यालयों के भगवाकरण को लेकर देशभर में गंभीर चर्चा चल रही है। ऐसे समय में मैं आपके लिए कुछ ऐसे सबूत साझा करने की यह श्रृंखला लेकर आया हूँ, जिन्हें हमने पिछले कई वर्षों से लगातार आपके सामने रखा था, ताकि समय रहते आपको आगाह किया जा सके। आज वही सवाल राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुके हैं।
यह वीडियो भी कुछ महीने पुराना है, जिसे मैंने अपने सोशल मीडिया संग्रहालय से आपके लिए निकाला है। इस वीडियो को स्वतंत्र पत्रकार @harshdelhise ने बनाया था। आज इसे दोबारा साझा करने का उद्देश्य केवल इतना है कि लोग देखें—जो बातें तब कही जा रही थीं, वे आज किस तरह वास्तविकता के रूप में हमारे सामने खड़ी हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में "युवा कुंभ" जैसे आयोजनों के नाम पर RSS से जुड़े कार्यक्रम खुलेआम आयोजित किए जा रहे थे। कई जगह कॉलेज प्रशासन अलग-अलग नामों से अनुमति देकर इन कार्यक्रमों का हिस्सा बनता दिखाई दिया। ऐसे आयोजनों को लेकर छात्र संगठनों और शिक्षकों के एक वर्ग ने विश्वविद्यालय की संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल उठाए और विरोध भी दर्ज कराया।
विश्वविद्यालय विचार, बहस, शोध और आलोचनात्मक चिंतन के केंद्र होने चाहिए। लेकिन जब सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों का उपयोग किसी एक वैचारिक एजेंडे के प्रचार के लिए होने लगे, तो यह केवल एक कार्यक्रम का सवाल नहीं रह जाता, बल्कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक चरित्र का प्रश्न बन जाता है।
छात्र विरोध में उतर चुके हैं, जनता सवाल पूछ रही है और कैंपस का माहौल बिगाड़ने की यह कोशिश अब सबके सामने है। सरकारी संस्थानों को किसी भी वैचारिक या राजनीतिक प्रभाव का माध्यम बनाने की प्रवृत्ति पर गंभीर बहस और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं।
यह श्रृंखला आगे भी जारी रहेगी। दस्तावेज़ों, वीडियो और तथ्यों के साथ हम उन घटनाओं को सामने लाते रहेंगे, जिन्हें उस समय नज़रअंदाज़ किया गया, लेकिन जिनके परिणाम आज पूरे देश के सामने दिखाई दे रहे हैं।
न्याय के आस में 7 माह बीते..NEET छात्रा की मां का छलका दर्द.. इस मैया की पीड़ा कलेजा छलनी कर
रही है..!
पटना के एक हॉस्टल में 6 जनवरी को Neet छात्रा संदिग्ध परिस्थितियों में अचेत अवस्था में मिली थी..11 जनवरी को अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी..!
प्रारंभिक जांच में मामला यौन शोषण से जुड़ा पाया गया..जिसकी जांच CBI कर रही हैं..!
7 माह बीतने के बाद न्याय न मिलने की दशा में मां का धैर्य टूट गया वह कैमरे से सामने आकर न्याय की गुहार लगा रही है..साथ ही सरकार और सिस्टम को
कोस रही है..!
“DCP रैंक के अफ़सर के ऑर्डर पर इस्तेमाल हुई थीं PELLET GUN !” कौन है वो DCP ?
The Hindu अख़बार का एक और बड़ा ख़ुलासा
Excellent report by @vijaita@the_hindu
https://t.co/SLPSa6LtNE
#CJP#JantarMantar#Protest#PelletGun
इबादत
सादिक
अब्दुल्ला
साहेब
फैजल
आजम
शब्बीर
इमरान
मुश्ताक और राजिक .
इनका नाम ही इनकी पहचान है और इनकी पहचान ही आज के दौर में इनकी सबसे बड़ी मुसीबत है . इस सबको एमपी पुलिस ने दंगा , आगजनी , मारपीट , घर में जबरन घुसने और विस्फोटक रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था , मध्यप्रदेश पुलिस के मुताबिक ये सारे दंगाई थे लेकिन मध्यप्रदेश की ही अदालत ने इन्हें हिंसा और दंगा के आरोपों से बरी कर दिया है . अदालत ने अपने फैसले में ये भी पूछा है कि पुलिस ने आखिर इन 11 लोगों को किस आधार पर दंगे का आरोपी बनाया ? आज इंडियन एक्सप्रेस ने विस्तार से पूरी रिपोर्ट छापी है .
कोर्ट का ये फैसला एमपी सरकार के मुंह पर तो तमाचा है ही इस बात का भी सबूत है कि कैसे इस देश में मुसलमानों को दंगाई घोषित करके सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है .
पूरा वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल पर
The chronicle of violence at @AmitShah's orders has been written on the bodies of students.
We will hold you accountable for every pellet injury and gunshot wound.
For every student you hospitalised a hundred more will carry forward the vision of an equitable, democratic India.
मुसलमानों के नाम पर अपनी सियासी रोटी सेकने वालों ने कभी मुसलमानों के मुद्दों को इस तरह नहीं उठाया होगा जिस बेबाकी से नेहा बोरा ने आवाज़ उठाई है
मुसलमानों का झोला भर भर कर वोट लेने वाले तो "मुसलमान" लफ़्ज़ बोलने से परहेज़ करते हैं
आज सबसे बड़ी चुनौती अब जंतर मंतर पर धरनास्थल खाली हो गया युवा सब अपने अपने घर पहुच रहे हैं
लेकिन उस जुनैद का क्या जिसने 37 दिन पूरे इस आंदोलन में इन सब युवाओ को खाना खिलाया पानी पिलाया पूरे आंदोलन में अपनी इंसानियत की सेवा दिया ।
उसके साथ बहुत बुरा हो गया पिता बहन रिश्तेदार सबको पुलिस गिरफ्तार कर लिया उठाकर ले गयी ।
उसका क्या दोष था क्या वी मुस्लिम था इस कारण उसको टोपी की और मुस्लिम होने की सजा मिली कब तक मुस्लिम समाज को देशभक्ति और अपनी पहचान बतानी पड़ेगी
कब तक मुस्लिम समुदाय के साथ इस देश मे यह नफरत की राजनीति होगी बताओ जवाब दो और जुनैद को न्याय दिलाओ अब सब मिलकर।
@TV9Bharatvarsh अगर गृहमंत्री सच कह रहे हैं तो आंदोलनकर्ताओं(Gen Z) को अगला इस्तीफा गृहमंत्री से मांगना चाहिए क्योंकि दिल्ली पुलिस ने रक्षक के बदले भक्षक वाला जो काम किया 20 जुलाई को उसकी जवाबदेही लेते हुए गृहमंत्री को भी इस्तीफा दे देना चाहिए