“मेरा मौजी है,तो हलाल मीट मुमकिन है”
भारत 15 मुस्लिम देशों को हलाल मीट एक्सपो���्ट करेगा इस हेतु 3 अक्तूबर को अधिसूचना जारी कर दी गई है जो की 16 अक्तूबर से प्रभावशाली हो जाएगी!
जय जय श्रीराम
@WriterDeepak भाजप आता फक्त ओबीसी मतदार, स्वत ला ब्राह्मण समजू लागलेले मराठा, इलेक्शन कमिशनकडून मिळणारी जास्तीची ५-७ टक्के मते,विरोधी मतविभाजन
या भरवशावर आहेत.जर ओबीसींना मविआने जाणीव करून दिली की भाजपने खासगीकरण करून कशा ओबीसी ��ोकऱ्या संपवल्या,महागाई वाढवली, शेतमालाचे भाव पाडले
तर बरे होईल.
प्रो. जी.एन. साईबाबा के निधन पर हम उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनका जीवन संघर्ष और साहस का प्रतीक रहा। उन्होंने वंचित वर्गों के हक, अधिकारों के लिए आवाज उठाई और लाखों लोगों को प्रेरित किया। उनकी कमी को भर पाना संभव नहीं है। अंतिम विदाई, कॉमरेड।
देवेंद्र फडणवीस ह्यांनी राजीनामा द्यायची वेळ निघून गेलीये, आता वेळ आलीये भाजपाच्या सत्तेच्या पेकाटात लाथ मारून त्यांना सत्तेतून हाकलून द्यायची.
यशवंतराव, वसंतराव, वसंतदादा, बाळासाहेब ठाकरे, पवार साहेब, विलासराव ह्यांनी उभा केलेला महाराष्ट्र बरबाद केला भाजपने.
#BabaSiddiqui
प्रियंका ने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं होनी चाहिए। राहुल ने कहा सब छोड़िए यह बताइए नियुक्तियां कब तक हो जाएंगी? मुख्यमंत्री रेवांता में मुस्कुराते हुए कहा "दशहरे तक"।
आज दशहरा है। तेलंगाना में 11 हजार 62 शिक्षकों की नियुक्ति कर ली गई। सरकार ऐसे चलती है। बधाई शिक्षकों, बधाई मिस्टर सीएम @revanth_anumula
"मैं जेल में सोचता था कि सरकार मुझसे क्यों डरती हैं? जबकि मैं 90% विकलांग हूं।"
जी.एन. साईबाबा एक समर्पित शिक्षक, नागरिक अधिकारों के योद्धा और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षक थे। समाज के वंचित और ���ाशिए पर पड़े लोगों के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष अनुकरणीय था। पाँच साल की उम्र में पोलियो के कारण व्हीलचेयर पर सीमित रहने के बा��जूद, उन्होंने साहस और दृढ़ संकल्प का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के रूप में उनका व्यक्तित्व बौद्धिकता और इंसानियत का प्रतीक था, लेकिन माओवादी होने के आरोपों के चलते उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया गया।
मोदी सरकार ने उन्हें नक्सलियों से संबंध रखने के आरोप में 10 साल जेल में रखा, हालांकि कोई भी एजेंसी इन आरोपों को साबित नहीं कर पाई। मार्च में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था। प्रो. साईबाबा शारीरिक रूप से असक्त थे, लेकिन उनकी वैचारिक दृढ़ता अतुलनीय थी। इसी प्रतिबद्धता के कारण उन्हें लगभग आठ वर्षों तक जेल में रहना पड़ा। सत्ता ने राम रहीम जैसे अपराधियों को पैरोल देकर खुला घूमने का मौका दिया, लेकिन प्रो. साईबाबा को उनकी माँ की मृत्यु पर भी पैरोल नहीं दी गई। वह दुर्दांत अपराधी नहीं, बल्कि एक समर्पित शिक्षक थे, जिन्हें उनकी शारीरिक जटिलताओं और बीमारियों के बावजूद जेल की अंडा सेल में रखा गया।
उनकी वैचारिकता से सत्ता भयभीत थी, और इसलिए उनकी तकलीफों की अनदेखी की गई। लंबी जद्दोजहद के बाद उन्हें जमानत पर रिहाई मिली। अब, उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है, और उनके शरीर को मानवता की बेहतरी के लिए शोध के लिए मेडिकल कॉलेज को दान किया जाएगा। उनके योगदान और साहस को सलाम करते हुए, हम कॉमरेड जी.एन. साईबाबा को आखिरी लाल सलाम देते हैं। आपकी प्रेरणा और संघर्ष हमेशा जीवित रहेंगे!
टाटांनी मीठ दिलं आजचे उद्योगपती मुंबईची मिठागरे गिळतायत
टाटा गेले याचं वाईट वाटतं आणि मुंबईतली मिठागरे गिळणारे जात नाहीत याचं वाईट वाटतं:दसरा मेळाव्यात उद्धव ठाकरे यांची अदानींवर अप्रत्यक्ष टीका
राष्ट्रवादी काँग्रेसचे नेते आणि माजी मंत्री बाबा सिद्दिकी यांचा गोळीबारामध्ये मृत्यू
आचारसंहिता लागू होण्याच्या शेवटच्या क्षणापर्यंत महाराष्ट्राच्या कायदा सुव्यवस्थेचे रेकॉर्ड ब्रेक वाटोळे सुरु आहेत
बाबा सिद्दिकी यांना तर वाय दर्जाची सुरक्षा पण ह���ती म्हणे
फेसबुक लाईव्ह वर गोळीबार झाला, आमदाराचा पोलीस स्टेशन मध्ये गोळीबार झाला, आता माजी मंत्र्याचा गोळीबाराने मृत्यू.
विश्वास ठेवा... महाराष्ट्रात घडतंय हे सगळं.
म्हणजे उत्तर प्रदेशच्या वाट्याला संपूर्ण दक्षिण भारताच्या एकूण रकमेपेक्षा जास्त....
खरं तर लोकसंख्येचा तर्क सुद्धा असायला नको कारण ही तर... सरळ सरळ योग्य वागणाऱ्याला शिक्षा आणि अयोग्य वागणाऱ्याला बक्षीस आहे.
ज्या राज्यांनी लोकसंख्या वाढीवर प्रयत्नपूर्वक
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का बयान कि "अरे होता रहता है ट्रेन एक्सीडेंट" बेहद शर्मनाक और संवेदनहीन है, खासकर जब देश में लगातार ट्रेन हादसे हो रहे हैं। इन हादसों के कारण न केवल लोगों की जान जा रही है, बल्कि हजारों परिवारों का जीवन बर्बाद हो रहा है। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करे, लेकिन ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी के मंत्री इस गंभीर मुद्दे को हल्का समझते हैं। जब स्वयं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी ऐसी घटनाओं को "छोटी घटना" करार देते हैं, तो यह दर्शाता है कि उन्हें मानव जीवन की कोई चिंता नहीं है। यह स्पष्ट है कि वर्तमान सरकार ने सुरक्षा को प्राथमिकता देने में विफलता दिखाई है, और ��स प्रकार की संवेदनहीनता की कड़ी आलोचना की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।