In an unseen instance, Well water kept oscillating in Virparda village, Morbi, Gujarat.
District Collector orders probe. Geologists point to trapped gas from rainwater seepage, no quakes detected. Crowds gather as mystery continues.
Doordarshan sought permission for the re-telecast of Ramayana by proposing to pay ₹25000 per episode to Ramanand Sagar's daughter-in-law "Nisha Ben Sagar" for the copyright as per the rules.
Nisha Ben Sagar wrote back letter to Doordarshan stating that I would be happy that todays children will know about Ramayana and you should telecast the entire episode.
She further wrote she don't want even a single penny for copyright and thus Nisha Ben Sagar refused to take Rs 25000 per episode for the telecast of Ramayana and gave written permission.
Sanatan Dharma teaches us Dharma, kindness, humanity, helping tendency, doing good deeds and pure conduct, an example of which is this is the best
Jai Shri Ram 🙏🚩 🙏
@NoidaUpdatesX@myogiadityanath@OfficialGNIDA@ChiefSecyUP@NandiGuptaBJP For last month, daily hours heavy traffic jam to cross this hindon bridge between 6 to 8pm. 10 m Road being resurfaced for last 1 month with very slow speed. Thousands cars pass daily and one road to cross to go 4 lakhs residents extension. Do work in night n complete in 1-2 days
Shri @myogiadityanath ji - condition of main 4 murti roundabout of greater noida w, which you proudly say "show window of U.P", disappointing work by your officers , Ravi NG & team
@OfficialGNIDA@ChiefSecyUP@NandiGuptaBJP
In Parliament today, I spoke on the “cut money” arrangement between some doctors and diagnostic centres/ pathology labs.
Diagnostic centres call it "marketing expense." Doctors call it "referral commission." All gets added to Patient's hospital bill.
A silent transaction that isn't about your treatment. It's about who referred you.
Watch this before your next medical test.
Wife is a Gynaecologist.
So, i have some feedback on how choices are changing for the young pregnant women of today. My bias is about those who are coming to Private Sector in Urban India - so relatively affluent, insured, informed and working.
What most analysts miss is how many women of today in urban areas actually choose LSCS over NVD.
They all are under pressure of their mom and mom in law to for Normal Delivery. But, the moment labour pains start they want to switch to a CS. No one wants to take the pains and wait patiently. Sometimes, the husband's become jittery ! In an era of Instagram and quick gratification, everyone wants a baby instantly, safely and without pain. Normal Delivery is a game of patient waiting, taking pains, regular assessment .
With a two child norm also getting changed to one child, most young working women are not worried about future pregnancies .
Moreover, the results of CS in terms of maternal recovery and newborn safety have improved remarkably. Better techniques & sutures, Safer anaesthesia - have made CS Complications rare. No one does the Classical C Section anymore. It is a "LSCS" - Lower Segment CS, with a sleeping Pfannensteil Incision and Subcuticular Suture (which dont need to be removed). Far more cosmetic and less prone to any complications. Following an enhanced recovery protocol allows women to get back to regular life much faster.
If a woman chooses a LSCS over NVD - should she be pressurised or shamed for her choice ? It's her body - her choice. No one should sit on judgement.
@sanjeevsanyal@doctorsoumya
देश के चर्चित मेदांता हॉस्पिटल ने नोएडा में अब ठगी का कारोबार शुरू कर दिया है, जिन्हें धरती पर भगवान का रूप माना जाता है सफेद कोट पहनकर वो डॉक्टर अब ठग बन गए हैं...
नोएडा के सेक्टर -49 थाना क्षेत्र के अंतर्गत सेक्टर -50 में स्थित मेदांता हॉस्पिटल में बीते शुक्रवार को बुखार से पीड़ित एक मरीज को भर्ती कराया गया था..
जब उसने अस्पताल प्रबंधन से खुद को डिस्चार्ज के करने के लिए बोला तो अस्पताल के प्रबंधन ने बोला कि पहले बिल पे करो तब डिस्चार्ज करेंगे और तभी तुम्हे बिल दिखाएंगे।
अस्पताल प्रबंधन को लगा कि मरीज की मेडी क्लेम पॉलिसी है, मरीज के घर वाले पढ़े लिखे होंगे नहीं, बस शुरू हो गए लूट खसोट करने..
मरीज भर्ती था बुखार के लिए और बिल दिया गया पथरी व कोविड के इलाज का, अब मरीज घर वाले पढ़े लिखे थे तो उन्होंने बिल चैक कर लिया..जिसके बाद अस्पताल में हंगामा शुरू हुआ..
देखते ही देखते वहां पर 4 मरीज और आ गाए जिनके बिल में हेराफेरी कर रखी थी..
अब अंगाजा लगाइये कि मेदांता हॉस्पिटल में रोजाना बिलों में हेरा फेरी कर मरीजों को कितने रुपए का चुना लगाया जा रहा है...हिसाब लगाएंगे तो ये आंकड़ा करोड़ों में पहुंचेगा...
सरकार से विनती है कि ऐसे लुटेरे अस्पतालों पर रोक लगाएं..
@PMOIndia@narendramodi@WHO@myogiadityanath@myogioffice@CMOfficeUP@medanta@dmgbnagar@DHSGBN1@MoHFW_INDIA@nhm_up
जस्टिस सूर्यकांत शर्मा ने कहा, देश में करोड़ो झूठे SC/ST के केश चल रहे हैं और इसके चलते काफ़ी सवर्ण परिवार बर्बाद हो चुका हैं
काफी ऐसे केस मिले हैं जिनमे लोगों ने 20 साल जेल में काटा हैं और बाद में निर्दोष साबित हुए हैं। लेकिन उनका परिवार बर्बाद हो गया
सब कुछ ख़त्म हो गया और शिकायतकर्ता पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।
लेकिन अब झूठी गवाही देने वालों पर शिकायत FIR या हलफनामा दाखिल करने पर सजा का प्रावधान किए जाने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सुनवाई कर सरकारों को नोटिस जारी किया हैं
अगर शिकायतकर्ता झूठी शिकायत करता हैं तों उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही का प्रावधान होगा।
अब उन्हें माफ नहीं बल्कि भारी भरकम दंड दिया जाएगा ताकि कोई झूठी शिकायत करने से पहले हजार बार सोचे।
चीफ जस्टिस सूर्यकान्त शर्मा के इस कानून से आप कितना सहमत हैं
ब्रिटेन का जल उद्योग परेशान है और इसका कारण है AI. एआई की उन्नति के लिए चाहिए डेटा सेंटर्स और इन डेटा सेंटरों को चाहिए पानी।
बिन पानी सब सून... शायद इसीलिए रहीम कह गए थे! असल में डेटा सेंटरों में जो सर्वर होते हैं वो बड़ी मात्रा में उष्मा पैदा करते हैं। कूलिंग टॉवर से लेकर चिलर तक सब पानी खाते हैं। हवा में नमी बनाए रखने के लिए भी पानी का इस्तेमाल होता है।
ब्रिटेन के कई इलाक़े कम बरसात और अत्यधिक गर्मी से पीड़ित हैं, वहीं डेटा सेंटर्स बन रहे हैं। कुछ डेटा सेंटर महीने में 30 लाख लीटर एक पानी माँग रहे थे।
होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेना का विशाल AH-64 Apache हेलीकॉप्टर गश्त कर रहा था। - शायद तकनीकी खराबी या ईरान का स्टील्थ ड्रोन हमला। देखते ही देखते वह ताकतवर हेलीकॉप्टर समंदर के उफनते पानी में गिर गया।
दो पायलट अथाह और ठंडे पानी में अपनी जान के लिए जूझ रहे थे। रात अंधेरी और तूफानी थी। पारंपरिक तरीके से बचाव जहाज या हेलीकॉप्टर भेजना मतलब और जानें जोखिम में डालना। लेकिन दूर, अमेरिकी 5वें बेड़े के टास्क फोर्स 59 के मुख्यालय में कंप्यूटर स्क्रीनें चमक रही थीं। वहां एक मानवरहित, स्वायत्त नाव - नाम Corsair - को तुरंत आदेश दिया गया।
24 फुट की वह नाव, जिसमें कोई इंसान नहीं था, लहरों को चीरती हुई निकली। उसकी अपनी आंखें नहीं थीं, पर उस पर लगे अत्याधुनिक रडार और AI कैमरे देख रहे थे। दो घंटों के भीतर, घुप्प अंधेरे में उसने लोकेशन ढूंढ ली और दोनों पायलटों के सामने आ खड़ी हुई। दोनों ने जान पर खेलकर नाव पर चढ़कर अपनी जान बचाई। Corsair उन्हें सुरक्षित किनारे तक ले आई। रक्षा उद्योग के इतिहास में पहली बार था कि बिना मानव ऑपरेटर वाली मशीन ने इंसान की जान बचाई हो!
लेकिन इस पूरी अद्भुत कहानी का असली हीरो ओमान के समंदर में नहीं था। वह हजारों मील दूर, अमेरिका के टेक्सास राज्य की एक लैब में बैठा था। उस नौजवान का नाम था - विभव अलतेकर, भारत से
विभव एक साधारण भारतीय पृष्ठभूमि से, महाराष्ट्र से आया था, आंखों में विज्ञान और तकनीक के सपने लिए। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग पढ़ते हुए विभव को केबल और तारों से परे सोचने वाली तकनीक ने मोहित कर लिया।
कुछ साल पहले, सितंबर 2022 में, पूर्व Navy SEAL 'डिनो मावरूकास' ने एक नए विचार को जन्म दिया - 'Saronic Technologies'। वह ऐसे रोबोट बनाना चाहते थे जो समंदर में काम कर सकें और कठिन परिस्थितियों में टिक सकें। लेकिन इस विचार को हकीकत बनाने के लिए उन्हें एक तेज दिमाग चाहिए था। वह दिमाग उन्हें विभव के रूप में मिला। विभव कंपनी के को-फाउंडर और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) बन गए।
रात-रात भर जागकर, सैकड़ों लाइन कोड लिखकर और जटिल मशीन लर्निंग प्रयोग करके, विभव ने इस 'Corsair' ड्रोन का 'दिमाग' और 'दिल' बनाया। इससे पहले, 'Anduril' कंपनी में काम करते हुए उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के 'Ghost Shark' ड्रोन पनडुब्बी पर भी अपना कौशल दिखाया था। आज उनकी उपलब्धियों के कारण अमेरिकी नौसेना ने उनकी कंपनी के साथ 3,200 करोड़ रुपये ($392 मिलियन) का विशाल अनुबंध किया है।
विभव दके सहयोग से बनाई गई यह 'Corsair' नाव विज्ञान का चमत्कार है। अगर हम इसके डिजाइन को देखें तो विभव की इंजीनियरिंग की सटीकता आश्चर्यचकित करती है:
सख्त डिजाइन : यह नाव, जो केवल 24 फुट लंबी है, 65 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से लहरों पर दौड़ सकती है।
असीम क्षमता : अपने छोटे वजन के बावजूद, यह आसानी से 454 किलोग्राम तक वजन ले जा सकती है - इसीलिए यह भारी G-सूट पहने दो पायलटों को ले जाने में सक्षम थी।
दृष्टि : एक बार ईंधन भरने के बाद, यह बिना किसी मानवीय सहायता के, खुद निर्णय लेते हुए लगभग 1,850 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर सकती है।
एक विचार..
युद्ध और आपदाओं ने मानव इतिहास में हमेशा लोगों की जान ली है। लेकिन विभव अलतेकर जैसे भारतीय युवक ने अपनी बुद्धि की शक्ति से प्रकृति और युद्ध के क्रूर नियमों को चुनौती दी है। 'Corsair' द्वारा बचाई गई दो जानें सिर्फ 2 सैनिक नहीं थीं, बल्कि विज्ञान का मानवता के लिए एक सुंदर उपहार थीं। जब विज्ञान का उपयोग विनाश के लिए नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए किया जाता है, तभी वास्तव में एक नए युग की शुरुआत होती है, विभव ने दुनिया को यह दिखाया है।
During a hearing in the Supreme Court:
Lawyer to Sr. Adv. Siddhartha Dave: arey aap samajh nahi rahe hai
Dave: I can’t understand but the language is English. We should at least endeavour to speak in English…
Justice Sandeep Mehta: kal toh aap humare upar bhi objection lagayenge ki aap Hindi mein kyun puchte hai. Ye kya baat hogayi.. we are proud of that.
Dave: just one minute. The bench was on Justice Kabir and Justice Katju. Justice Katju used to speak in Hindi. But Justice Kabir corrected us. He said judge may speak, but you have to address us in English…
Justice Mehta: we don’t mind both ways. Don’t worry.
सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, भाई बहनों की अनुमति के बिना बाहरी लोगों को नहीं बेच सकेंगे कृषि भूमि। पहला हक उनको खरीदने का है, अगर वो नहीं खरीदते है तो सबकी सहमति के बाद ही बाहरी व्यक्ति को बेच सकेंगे खेत।
सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि विरासत में मिली कृषि (खेत) भूमि पर भी 'हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम' (Hindu Succession Act) की धारा 22 लागू होती है।
इसका मतलब है कि यदि कोई क्लास-1 वारिस (बेटा, बेटी, पत्नी, या माँ) अपनी विरासत की कृषि भूमि का हिस्सा किसी बाहरी व्यक्ति को बेचना चाहता है, तो उसे पहले परिवार के अन्य क्लास-1 सदस्यों को इसे खरीदने का मौका देना अनिवार्य होगा।
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य परिवार के भीतर ही विरासत में मिली संपत्ति और कृषि भूमि को सुरक्षित रखना है।
नोएडा (जेवर) एयरपोर्ट यात्रियों के लिए कभी भी एक बढ़िया विकल्प नहीं बन पाएगा। इसकी सबसे बड़ी वजह इसकी दूरी और कनेक्टिविटी है…
ये कार्गो टर्मिनल के रूप में तो विकसित हो सकता है, इससे आस पास के लोगों को रोज़गार भी मिलेगा और सरकार को राजस्व भी लेकिन यात्रियों के लिहाज़ से It’s a bad idea…
आज आकासा एयरलाइंस ने अपनी बेंगलुरु और नवी मुंबई की उड़ानों को यहां से बंद कर दिया है…जब यात्री ही नहीं होंगे तो घाटे में खाली जहाज कितने दिन उड़ाएगी कम्पनी…
आईएएस और पीसीएस परीक्षाओं के बारे में ज़रूरत से ज़्यादा जागरूकता फैल चुकी है। अब और ना फैलाइये। देश के हर गाँव का बच्चा बच्चा इनके बारे में जानता हैं। हाँ , यह बताना ज़्यादा ज़रूरी है कि इन परीक्षाओं में 99 प्रतिशत लोग फ़ेल हो जाते हैं और केवल 0.1 प्रतिशत लोग ही सफल हो पाते हैं। सच्चे मेहनती और समर्पित लोग भी लगातार 4-5 साल लगाने के बाद भी असफल हुये हैं ।
इसलिये सफल लोगों से यह गुज़ारिश है कि सफल होने के बाद यह बात ना फैलाइये कि सिर्फ़ मेहनत और लगन से सफलता मिल जाती हैं। मैंने देखा है कि तमाम सेमिनारों में सक्सेस फ़ुल स्टूडेंट्स भारी भीड़ के सामने विनम्र दिखने के चक्कर में बार बार यही बोलते हैं कि मेहनत और लगन से सबकुछ संभव है । यह ग़लत है, यह झूठ है।
मेहनत लगन और समर्पण के साथ साथ इन परीक्षाओं मे सफल होने के लिये आपके अंदर औसत से ऊपर की बुद्धिमत्ता ( इंटेलीजेंस) का होना ज़रूरी है। स्कूली और स्नातक स्तर पर एक मज़बूत नींव का निर्माण होना भी ज़रूरी है । कुछ स्किल्स भी बहुत ज़रूरी हैं जैसे कि समझने की क्षमता , मज़बूत स्मरण शक्ति , क्रिटिकल थिंकिंग, स्वतंत्र सोच और प्रेजेंटेशन स्किल्स इत्यादि। यह सब होने क बाद भी सफलता की गारंटी नहीं है, और यह सब बातें दो चार महीने की कोचिंग या ट्रेनिंग से नहीं आती है ।इसलिये अपनी क्षमताओं का मूल्याँकन करने के पश्चात ही जीवन में ध्येय का निश्चय करना चाहिये। हर इंसान में कुछ गुण होते हैं और उन गुणों को पहचान कर हमें अपने लक्ष्य निर्धारित करने चाहिये।
अंत मे क्षमताओं और स्किल्स के साथ साथ क़िस्मत का अपने साथ होना भी बहुत ज़रूरी है। टॉपर्स को भी रिज़ल्ट आनेवाले समय तक यह पता नही होता है कि उसका नाम फ़ाइनल लिस्ट मे रहेगा या नही। यह बात और है कि टॉप करने के बाद वह यह बोले कि वह सोलह से अठारह घंटे पढाई करता था और उसको पूरा विश्वास था कि वह ज़रूर सफल होगा। वह सफल हुआ क्योंकि उसके पास ज़रूरी स्किल्स थे, निश्चय ही उसने मेहनत भी की थी और यकीनन भाग्य उसके साथ था।
यह बात भी सच है कि मेहनत तो बहुत लोग करते हैं लेकिन वो सभी सफल नही होते हैं । मेरे बहुत से दोस्त जो मुझसे ज़्यादा इंटेलिजेंट थे,अच्छे शैक्षणिक बैकग्राउंड से आते थे, और वह हर तरह से मुझसे ज्यादा होनहार थे लेकिन फिर भी किन्हीं कारणवश वह यह परीक्षा नही पास कर पाये। मेरी क़िस्मत अच्छी थी कि मैने यह परीक्षा दी और मै इसे पास कर सका। यह परीक्षायें जीवन का एक हिस्सा हो सकती हैं , जीवन नही ।
जीवन मे कोई भी क्षेत्र हो, सपने देखना ज़रूरी है और उन सपनों को पूरा करने के लिये जान लगा देनी चाहिये। आईएएस पीसीएस बनने का सपना हर विद्यार्थी का अधिकार है लेकिन यह भी ध्यान रहे कि इन परीक्षाओं मे बैठने के लिये जो स्किल्स होने चाहिये, वह आप मे हैं या नही। स्वयं का वस्तुनिष्ठ मूल्याँकन बहुत जरूरी है। सफलता का चांस न्यूनतम है और फेल होने के बाद बिना हताश हुये जीवन में और विकल्प भी तैयार रहने चाहिये।
यह पोस्ट किसी संघर्षरत स्टूडेंट्स को हतोत्साहित करने के लिये नही है। लेकिन यह पोस्ट सच से एक साक्षात्कार ज़रूर है।
#CreativeConsciousness
दादरी के मा० विधायक @tejpalnagarMLA दादरी से सटे बिसाहड़ा मे सरकारी अस्पताल बनवाने के लिए तेजी से प्रयास कर रहे। अस्पताल बन जाने से आसपास के 10-12 गांवों के लगभग 2 लाख आबादी को लाभ मिलेगा। परंतु पिछले 7-8 वर्षों से ग्रेनो वेस्ट की 8-10 लाख जनता सरकारी मल्टी स्पैशलिटी अस्पताल की मांग कर रही उस पर दादरी विधायक मौन क्यों हैं? ग्रेनो वेस्ट मे सरकारी अस्पताल बनवाने के लिए दादरी विधायक प्रसयासरत क्यों नहीं है? क्या दादरी विधायक ग्रेनो वेस्ट को अपना नहीं मानते? क्या ग्रेनो वेस्ट की जनता को महज वोट बैंक समझा जाता है? या फिर दादरी विधायक ग्रेनो वेस्ट मे @OfficialGNIDA द्वारा किए जाने वाले विकास कार्यों को अपना प्रयास बता कर श्रेय लेने तक सीमित रहेंगे? @BJP4India@BJP4UP@iabhishek4bjp@mppchaudhary@NitinNabin@myogiadityanath@myogioffice@CMOfficeUP
अपने बच्चों को किसी कोचिंग सेंटर में दाखिला दिलाने से पहले सिर्फ फीस, फैकल्टी और रिजल्ट मत देखिए... उनकी सुरक्षा भी देखिए।
एक अभिभावक के रूप में यह जानना आपका अधिकार है कि
• क्या भवन में आपातकालीन निकास (Emergency Exit) है ?
• क्या आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने के एक से अधिक रास्ते हैं?
• क्या फायर अलार्म और फायर फाइटिंग सिस्टम काम कर रहे हैं?
• क्या सीढ़ियां खुली और सुरक्षित हैं या उन पर सामान रखा हुआ है?
• क्या भवन में क्षमता से अधिक बच्चे तो नहीं बैठाए जा रहे?
इसी तरह किसी होटल में ठहरने से पहले केवल कमरा और सुविधाएं मत देखिए।
जब होटल प्रबंधन आपकी पहचान सत्यापित करने के लिए आईडी मांगता है, तो आपको भी यह जानने का अधिकार है कि
• आपातकालीन निकास कहां है?
• आग लगने पर निकासी की क्या व्यवस्था है?
• फायर सेफ्टी सिस्टम काम कर रहा है या नहीं?
• भवन के पास अग्निशमन वाहन पहुंच सकते हैं या नहीं?
याद रखिए, अधिकांश हादसों में जान आग से कम और धुएं, भगदड़ तथा सुरक्षा मानकों की अनदेखी से अधिक जाती है।
दुर्घटना के बाद सवाल उठाने से बेहतर है कि दुर्घटना से पहले सवाल पूछ लिए जाएं।
सुरक्षा कोई औपचारिकता नहीं है, यह जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर भी हो सकती है।
अपने बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी सुरक्षा की भी तस्दीक कीजिए।
होटल, कोचिंग, मॉल या किसी भी सार्वजनिक भवन में प्रवेश करने से पहले एक बार यह जरूर देख लीजिए कि आपात स्थिति में बाहर निकलने का रास्ता कौन सा है।
क्योंकि जागरूक नागरिक ही सुरक्षित नागरिक होता है।
#SafetyFirst #FireSafety #PublicSafety #EmergencyExit #BeAlert