Medical student 💉.😎
A common man, who raised the voice of poor people ☺️.
सभी का खून हैं शामिल यहां की मिट्टी में..
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी हैं 🇮🇳
@JournoMirror हम ही को क़ातिल कहेगी दुनिया ,हमारा ही कतले आम होगा
हम ही कुएं खोदते फिरेंगे हम ही पानी हराम होगा
अगर यही जहनियत रही तो हमें ये डर की इस सदी में
न कोई अब्दुल हमीद होगा न कोई अब्दुल कलाम होगा
मर्द जब रोता है, तो समझिए दर्द सिर्फ आँखों से नहीं, पूरी रूह से बह रहा होता है…
उमर को अपने छोटे भाई अबान के जनाज़े के सामने इस तरह रोते देखना सिर्फ एक तस्वीर या वीडियो नहीं है। यह उस भाई का दर्द है, जिसने पहले अपने पिता को खोया, परिवार को बिखरते देखा और अब एक और भाई को खोने का सदमा झेला।
कुछ दर्द ऐसे होते हैं, जिनके सामने शब्द छोटे पड़ जाते हैं।
आज बहुत से लोग सवाल कर रहे हैं कि जो लोग अतीक अहमद की मौत पर खामोश रहे, वे आज अबान की मौत पर भी खामोश क्यों हैं? जिन रिश्तों और कंधों का सहारा लेकर लोग अपने मुश्किल वक्त से आगे निकल गए, उन्हीं रिश्तों के दर्द पर आज दो शब्द कहने में भी संकोच क्यों है?
शायद इसलिए कि कुछ लोगों के लिए राजनीति और पार्टी के रिश्ते, इंसानी रिश्तों से बड़े हो चुके हैं।
लेकिन सच यह है कि…
जब लाखों लोग किसी परिवार के दुख में खड़े हों, तब किसी एक शख्स के लिखने या न लिखने से उस परिवार का दर्द न कम होता है, न बढ़ता है।
हाँ, उसकी खामोशी से एक चीज जरूर सामने आती है - उसकी अपनी पहचान।
हर किसी में मुश्किल वक्त में अपने रिश्तों के साथ खड़े रहने का साहस नहीं होता। हर कोई राजनीति से ऊपर उठकर इंसानियत को चुनना नहीं जानता।
इसलिए ऐसे लोगों से सवाल मत कीजिए।
उन्हें इग्नोर कीजिए।
क्योंकि जिन रिश्तों में सच्चाई होती है, उन्हें दुनिया की गवाही की जरूरत नहीं होती।
जिसका भाई उमर जैसा हो,
जिसके साथ अली जैसा भाई खड़ा हो,
और जो अपने परिवार के दुख में चट्टान बनकर खड़ा रहे - उसे गैरों की संवेदनाओं की क्या जरूरत?
आज कौन रोया, कौन गले लगा, कौन साथ खड़ा रहा और कौन खामोश रहा - यह सब शायद आज भूल जाएँ, लेकिन वक्त कभी नहीं भूलता।
इंसान की पहचान उसके शब्दों से नहीं, उसके मुश्किल वक्त में निभाए गए रिश्तों से होती है।
- पूजा माथुर
#AbaanAhmed #UmarAhmed #AliAhmed #AtiqAhmed #HumanityFirst #PoojaMathur
केशव मौर्य सिर्फ़ मदरसों पर हमला कर सकते हैं, क्योंकि उनकी कुर्सी दरअसल एक स्टूल है।
जिन्हें अंग्रेज़ों से मोहब्बत हो, उन्हें मदरसे कैसे पसंद आएँगे? मदरसे अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ साज़िशों और आज़ादी की जद्दोजहद के मरकज़ थे। उन्होंने बेशुमार मुजाहिदीन-ए-आज़ादी पैदा किए, जबकि सावरकर अंग्रेज़ों को माफ़ीनामे लिख रहे थे।
आज़ाद भारत का पहला दहशतगर्द गोडसे किसी मदरसे का तालीब-ए-इल्म नहीं था। लेकिन भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद मदरसे में पढ़े थे। मुंशी प्रेमचंद और राजा राम मोहन राय ने भी मदरसे में तालीम हासिल की थी।
दस्तूर का आर्टिकल 30 हर अक़ल्लियती बिरादरी को अपने तालीमी इदारे क़ायम करने और चलाने का हक़ देता है। ये बेहद शर्मनाक है कि एक दस्तूरी ओहदे पर बैठा शख़्स ऐसी ज़हरीली ज़बान इस्तेमाल करे।
मगर जब कुर्सियाँ कम हों, तो स्टूल वालों को अपनी सियासी अहमियत बनाए रखने के लिए ज़हर उगलना ही पड़ता है।
पहली तस्वीर शाहरुख़ पठान की है
दूसरी भरत तिवारी की है,
दोनों पिस्तौल से धमका रहे हैं,
शाहरुख़ पठान को आतंकवादी कहा गया
जबकि भरत तिवारी को क्रांतिकारी कहा जा रहा है,
भारत में सब कुछ जाति और धर्म से तय होता है
कि किसे आतंकवादी कहना है
और किसे क्रन्तिकारी बताना है,
@aajtak तुम दलाली करो बाकी भारत पर हमला करने की किसी के गान में दम नहीं है अब्दुल कलाम (अब्दुल) नाम के बंदे ने परमाणु दे रखा है गान का गुड़गांव बना दिया जाएगा बाकी तुम करो दलाली ट्रंप की
हमें लगा था कि शिक्षक का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन इन लोगों ने पहले खान सर को फ़ैज़ल खान बनाकर पेश किया और अब खुद खुलेआम सनातनी हिंदू होने का दावा कर रहे हैं।
अब यह व्यक्ति शिक्षक कम और हिंदू-मुस्लिम की गंदी राजनीति करने वाला ज़्यादा नज़र आता है। इनके अनुसार, इनके धर्म को छोड़कर बाकी धर्मों के लोग अहिंसा, सत्य और नैतिकता नहीं, बल्कि झूठ और पाप करना सीखते हैं। ग़ज़ब है!
खान सर से हमें कोई हमदर्दी नहीं है। अगर खान सर दोषी हैं, तो कानून उन्हें सज़ा देगा। लेकिन आप कौन होते हैं उन्हें हत्यारा और न जाने क्या-क्या कहकर फैसला सुनाने वाले?
आप यह सब इसलिए कह पा रहे हैं क्योंकि आपको पता है कि खान सर मुस्लिम हैं। इस देश में मुसलमानों के बारे में कुछ भी बोल देना बहुत आसान समझ लिया गया है।
खान सर की गलती बस इतनी है कि उन्होंने शिक्षा को सुलभ और सस्ता बनाने की कोशिश की, गरीबों के लिए अस्पताल खोले और देश के उन वर्गों के बारे में बेहतर सोचने का प्रयास किया, जिनके बारे में अक्सर जिम्मेदार लोग भी नहीं सोचते।
- पूजा माथुर @PoojaMathur01
मुसलमानों !!
6 जून को कॉकरोच जनता पार्टी जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट करेगी। मुसलमानों से गुजारिश है कि इस प्रोटेस्ट से दूर रहिएगा, बल्कि उस रास्ते से गुजरने की कोशिश भी मत कीजिएगा। अगर आपका घर उसे जगह के आसपास है तो एक दिन के लिए वह जगह ही छोड़ दीजिए।
100% उस दिन बवाल होगा और हमेशा की तरह मुसलमान बली का बकरा बनाया जाएगा। बाकी लोग अपने घर चले जाएंगे लेकिन आप खालिद सैफ़ी, मीरान हैदर और उमर खालिद की तरह जेल जाएंगे। आप पर उन सभी धाराओं में मुकदमे दर्ज होंगे जिसमें आप 10 साल तक जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।
आपका घर बुलडोज किया जाएगा, आपकी दुकान छीन ली जाएगी ,आपके घर के बाहर महीनों पुलिस खड़ी रहेगी, आपका मीडिया ट्रायल होगा, आपका पाकिस्तान कनेक्शन बताया जाएगा। आपको आतंकवादी घोषित किया जाएगा।
और याद रखिए इसी पार्टी के लोग आपको पूछेंगे भी नहीं, जैसे दिल्ली दंगों में अरविंद केजरीवाल ने अपनी ही पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन से पल्ला झाड़ लिया था। ताहिर आज तक जेल में बंद है। आम आदमी पार्टी ने पलट कर ना देखा।
इस वक्त हमारी लड़ाई खुद को बचाने की है, सर्वाइवल की है। अपने काम पर ध्यान दीजिए, अपने बच्चों की एजुकेशन पर फोकस कीजिए।
@news24tvchannel इस डेढ़ फुटिया को कोई जाके बता दे कि हिंदू त्यौहार पर कोई अब्दुल कुछ नहीं बोलता है जो खिलाफ बोलते हैं ये उनके अपने ही लोग रहते हैं इसलिए ज्ञान मत दे
@Hindu421772@shadab_chouhan1@upgrphq@RailwaySeva@AshwiniVaishnaw Hame bharosa hai ki मौत aani hai aur aayegi ek din lekin tum apna dekhna q ki waqt badalta rhta hai khuda na kare ki kabhi aise hi tumhare bete , bhai , ya phir baap ke saath ho jaye tab bhi yahi comment karn rr mat shuru kar dena
@Sachingupta मन में पैसे का लालच है चरण वंदना होठों पर
घुघरू बांध के नाच रहे हैं सरकारों के कोठों पर
हमने जिनके आदर्शों में हीरे सी मजबूती देखी
उन सब के आदर्श हमेशा से ही कांच रहे है जी
जिनका काम था सिंघासन से उत्तर पाने का वो सब
सिंघासन से पैसे पाकर नंगा नाच रहे हैं जी