🕯️ लखनऊ धरने में शहीद हुए हमारे CHO साथी को विनम्र श्रद्धांजलि। 🙏
यह संघर्ष अब और गंभीर हो गया है। मांगें पूरी होने तक शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहेगा। कोई साथी पीछे नहीं हटेगा।
#CHO#LucknowDharna#CHOUttarPradesh
*ACHOUP के आह्वान पर 30 सितम्बर को लखनऊ में होने जा रहे धरने को लगातार विभिन्न संगठनों एवं संस्थाओं का समर्थन मिल रहा है।*
*इसी क्रम में पुष्पांजलि नर्सिंग कॉलेज, आगरा के डायरेक्टर श्री राजेश गुप्ता जी भी ACHOUP के धरने के समर्थन में 30 सितम्बर को लखनऊ पहुँच रहे हैं।*
*🕯️ भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🕯️*
*बदायूँ जनपद में तैनात रहे एवं वर्तमान में जनपद आगरा में CHO के पद पर कार्यरत मेरे सहयोगी श्री राधे ठाकुर जी का असमय निधन अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक है।*
*उनका यूँ अचानक हम सभी को छोड़कर चले जाना विश्वास से परे है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को
*ॐ शांति 🙏
🚨 लोकतांत्रिक आवाज़ को रोकना समाधान नहीं है।ACHOUP टीम के साथियों को धरने में शामिल होने से रोकने के लिए हाउस अरेस्ट किया जाना बेहद चिंताजनक है।
हमारी आवाज़ शांतिपूर्ण है, हमारा संघर्ष अपने अधिकारों और न्याय के लिए है। ✊
आवाज़ दबेगी नहीं, संघर्ष रुकेगा नहीं।
#ACHOUP#CHO#धरना
“आज की आवाज़ सिर्फ मांगों की नहीं, सम्मान और अधिकार की आवाज़ है। ✊
ACHOUP के बैनर तले प्रदेशभर के CHO साथियों की ऐतिहासिक उपस्थिति ने 7 सूत्रीय मांगों को मजबूती से शासन के सामने रखा है।
अब समाधान चाहिए, आश्वासन नहीं। 💪
#ACHOUP#CHO#7सूत्रीयमांगें#CHOएकता”
रात 11:50 से सुबह 12:52 तक दहगवां और रहारिया में पुलिस बल के साथ #CHOs को घरों में रोकना — लखनऊ में 30 सितंबर के धरने से पहले — संविधान की खुली अवहेलना है।
अनुच्छेद 19(1)(ख) शांतिपूर्ण सभा का अधिकार देता है।
अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है।
बिना लिखित कानूनी आदेश, बिना मजिस्ट्रेट के औपचारिक निदेश के रात के अंधेरे में स्वास्थ्य कर्मियों को नजरबंद करना मनमाना है।
सुप्रीम कोर्ट बार-बार कह चुका है —
“Dissent is the safety valve of democracy.”
शांतिपूर्ण विरोध को रोकना लोकतंत्र की हत्या है, न कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना।
ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर चलाने वाले CHOs स्वास्थ्यकर्मी की मांगें नियमितीकरण, मानदेय और कैडर की हैं। यह अपराध नहीं,सेवा की आवाज है।
बदायूं पुलिस @budaunpolice@Uppolice@dgpup@igrangebareilly@adgzonebareilly को जवाब देना चाहिए:
किस धारा में, किस आदेश पर, किस अधिकारी के हस्ताक्षर से इन्हें घर से बाहर निकलने से रोका गया?
लोकतांत्रिक हत्या चुपचाप नहीं होती। यह तस्वीरें सबूत हैं।
कृपया उच्च अधिकारी सूचना का संज्ञान ले और तत्काल सभी स्वास्थकर्मियो हाउस अरेस्ट से मुक्त करें, वरना पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा बाधित होगी जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी @budaunpolice की रहेगी।।
पुलिस / प्रशासन
@budaunpolice@Uppolice@dgpup@igrangebareilly@adgzonebareilly
विपक्ष:
@yadavakhilesh@samajwadiparty@RahulGandhi@INCIndia@mediacellsp@ManojSinghKAKA@pawanpandeysp
राष्ट्रीय मीडिया:
@aajtak@ABPNews@ndtvindia@ZeeNews@TV9Bharatvarsh@IndiaToday@news24tvchannel
अखबार / लोकल:
@AmarUjalaNews@live_hindustan@JagranNews@danikbhaskarup@askrajeshsahu@Indian_Analyzer
#CHOs #BudaunPolice #Article19 #Article21 #LoktantraHatya
सभी CHO साथियों की एकजुटता को सलाम! ✊🔥
अनिश्चितकालीन धरने का नेतृत्व कर रहे हिमालय भाई एवं देव तोमर भाई के समर्पण और नेतृत्व को दिल से सलाम। 💪🚩
एकता हमारी ताकत, संघर्ष हमारी पहचान!
#ACHOUP#CHO#CHOWelfareAssociation
उत्तर प्रदेश के CHO की 9 सूत्रीय मांगों को लेकर इको गार्डन लखनऊ में धरना, सेवा-सुरक्षा और सम्मानजनक मानदेय की उठी आवाज
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की जमीनी स्वास्थ्य व्यवस्था संभालने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने शासन से समाधान की मांग की.
लखनऊ, 28 सितंबर। उत्तर प्रदेश में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) ने अपनी लंबे समय से लंबित सेवा-संबंधी मांगों को लेकर सोमवार से लखनऊ में धरना शुरू किया है। CHO संघ उत्तर प्रदेश और CHO यूनियन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से CHO शामिल हो रहे हैं। इस धरने की घोषणा से पहले संगठन की ओर से शासन एवं संबंधित अधिकारियों को मांगों का ज्ञापन भी दिया गया था।
CHO का कहना है कि वे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य जागरूकता तथा विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश भी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में विशेष रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद आबादी तक सुलभ, किफायती, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने को मिशन का महत्वपूर्ण उद्देश्य बताता है।
*नौ सूत्रीय मांगों पर समाधान की अपेक्षा*
CHO संगठनों द्वारा शासन के समक्ष रखी गई नौ प्रमुख मांगों में PBI को मूल मानदेय में शामिल करना, ₹60,000 मासिक मानदेय अथवा ₹4,800 ग्रेड-पे के समकक्ष वेतनमान, पारदर्शी वार्षिक स्थानांतरण नीति, पृथक CHO कैडर एवं नियमितीकरण की प्रक्रिया प्रमुख हैं।
इसके साथ ही CHO ने राज्य कर्मचारियों के समान DA एवं HRA, CHO तथा उनके आश्रितों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा, ₹1 करोड़ का बीमा कवर, आगामी भर्तियों में सेवा अवधि के आधार पर अतिरिक्त वेटेज तथा Earned Leave (EL) की सुविधा की मांग भी रखी है। ये मांगें हाल में CHO संगठनों द्वारा दिए गए ज्ञापन और मीडिया रिपोर्टों में भी दर्ज हैं।
CHO का सवाल—जिम्मेदारी बढ़ी तो सेवा-सुरक्षा भी क्यों नहीं?
CHO समुदाय का तर्क है कि प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था में उनकी जिम्मेदारियां लगातार महत्वपूर्ण होती गई हैं। ऐसे में उनके मानदेय, सेवा-सुरक्षा, स्थानांतरण, सामाजिक सुरक्षा और अवकाश जैसी मूलभूत सेवा-शर्तों पर भी स्पष्ट और स्थायी नीति की आवश्यकता है।
CHO का कहना है कि उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना नहीं, बल्कि अपनी लंबित समस्याओं का शासन स्तर पर समाधान प्राप्त करना है। संगठन चाहता है कि उनकी मांगों पर संबंधित विभागों के साथ औपचारिक एवं समयबद्ध संवाद हो।
अब निगाहें शासन और NHM प्रशासन पर
CHO के इस आंदोलन के बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष इन मांगों पर संवाद की अपेक्षा रखी जा रही है।
विभाग के अनुसार NHM का मूल उद्देश्य ही समुदाय के स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करना है। ऐसे में CHO जैसे फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों की सेवा-संबंधी समस्याओं पर शासन स्तर पर संवाद और समाधान की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
धरना एक संदेश भी है
28 सितंबर से शुरू हुआ CHO आंदोलन केवल मानदेय की मांग तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में सम्मानजनक सेवा-शर्तें, पारदर्शी स्थानांतरण व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, भविष्य की सेवा-सुरक्षा और CHO के लिए स्पष्ट कैडर व्यवस्था जैसे विषय हैं।
प्रदेश के हजारों CHO जिन स्वास्थ्य केंद्रों पर काम कर रहे हैं, वे सीधे ग्रामीण आबादी के संपर्क में हैं। इसलिए CHO संगठनों की मांग है कि सरकार उनकी सभी मांगों का विभागीय एवं वित्तीय परीक्षण कराकर जो मांगें नियमों के अनुरूप स्वीकार्य हों, उन पर ठोस एवं समयबद्ध निर्णय ले और शेष मांगों पर स्पष्ट रोडमैप उपलब्ध कराए।
CHO समुदाय की अपेक्षा अब यही है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और NHM प्रशासन के साथ सार्थक संवाद के माध्यम से इस गतिरोध का समाधान निकले—ताकि CHO सम्मान और सेवा-सुरक्षा के साथ प्रदेश की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूती से आगे बढ़ा सकें।
“CHO की आवाज केवल कर्मचारियों की आवाज नहीं, बल्कि प्रदेश की जमीनी स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े मानव संसाधन के भविष्य का प्रश्न भी है।”
@brajeshpathakup@HarishD_BJP@BJP4UP@myogiadityanath@nhm_up
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की जायज़ मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार करे।
नियमितीकरण, समान कार्य–समान वेतन, कैडर एवं सम्मानजनक सेवा शर्तें हमारा अधिकार है।
सरकार से अपील है—CHO की आवाज़ सुनें और शीघ्र सकारात्मक निर्णय लें।
#CHO#CommunityHealthOfficer#EqualWorkEqualPay