@The_saarang
कुछ शब्द....??
मैंने
सबसे पहले
तुम्हारी आंखें पढ़ी
और
मुझे सभी ग्रंथों
या कि
अब तलक रचे गए सभी साहित्यों का संयोग मिला |
तुम खुद शब्दों के सागर हो-
जैसे
पारिजात ज़रते हैं
अक्टूबर की ठंडी सुबहों में;
रचनाएं तुम्हारे बोलने भर से गिर पड़ती हैं || ❣️
तुम्हारे कुछ भाव, कुछ शब्द और कुछ पंक्तियाँ, मेरे पास बस ये ही हैं जो एक वजह देते हैं.. स्वप्न देखने की.. जीवन से भरे स्वप्न, जहाँ दिन उदास नहीं होता, शामें सूनी नहीं होती, रातें बोझिल नहीं होती.. मुझे कुछ शब्द हमेशा देना.. दोस्त!
@Kitabganj1 परीणाम चाहे जो भी रहे हो, वो किसी और विषय पे हो सकते है;
मगर मन्दिर बनने का मुझे या मेरी दादी या सैंकड़ों हिंदुओं को बोहोत ही आनंदित करता है ||
और इसके लिए हम तबकी सरकार जो भी रही हो उसको वर्षो तक आशीष देते रहेंगे ।।
३/३
@Kitabganj1 तो फिर हटा दो सब मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा, या कुछ भी हैं। कर सकते है ?
यह विषय महज़ मन्दिर का ही नहीं था, मगर मेरी दादी जैसे उन सैंकड़ों देशवासियों या कि दुनियां में कहीं भी बसने वाले सैंकड़ों हिंदुओं की आस्था भी थी ||
२/३