हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था
व्यक्ति को मैं नहीं जानता था
हताशा को जानता था
इसलिए मैं उस व्यक्ति के पास गया
मैंने हाथ बढ़ाया
मेरा हाथ पकड़कर वह खड़ा हुआ
मुझे वह नहीं जानता था
मेरे हाथ बढ़ाने को जानता था
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न उस को मुझ पे मान था
न मुझ को उस पे ज़ोम ही
जो अहद ही कोई न हो
तो क्या ग़म-ए-शिकस्तगी
सो अपना अपना रास्ता
हँसी-ख़ुशी बदल दिया
वो अपनी राह चल पड़ी
मैं अपनी राह चल दिया
- अहमद फ़राज़
भले दिनों की बात है
भली सी एक शक्ल थी
न ये कि हुस्न-ए-ताम हो
न देखने में आम सी
न ये कि वो चले तो कहकशाँ सी रहगुज़र लगे
मगर वो साथ हो तो फिर भला भला सफ़र लगे
सो एक रोज़ क्या हुआ
वफ़ा पे बहस छिड़ गई
मैं इश्क़ को अमर कहूँ
वो मेरी ज़िद से चिड़ गई
मैं कोई पेंटिंग नहीं
कि इक फ़्रेम में रहूँ
वही जो मन का मीत हो
उसी के प्रेम में रहूँ
तुम्हारी सोच जो भी हो
मैं उस मिज़ाज की नहीं
मुझे वफ़ा से बैर है
ये बात आज की नहीं
मैं इस औरत की जली हुई लाश पर सिर पटककर
जान दे देता अगर मेरी एक बेटी न होती तो!
और बेटी है कि कहती है-
पापा तुम बेवज़ह ही हम लड़कियों के बारे में इतने भावुक होते हो
"हम लड़कियाँ तो लकड़ियाँ होती हैं जो बड़ी होने पर
चूल्हे में लगा दी जाती हैं"
- रमाशंकर यादव "विद्रोही"
बहुत बड़े आकाश में हम अपने हिस्से का आकाश चुग लेते हैं।
देखने के लिए हम बहुत ख़ूबसूरत और बड़ा आकाश देख सकते हैं
पर जीने के लिए हम उतना ही आकाश जी पाएंगे
जितने आकाश को हमने
अपने घर की खिड़की में से जीना सीखा है।
- मानव कौल
निर्धन जनता का शोषण है
कहकर आप हँसे
लोकतंत्र का अंतिम क्षण है
कहकर आप हँसे
सब के सब हैं भ्रष्टाचारी
कह कर आप हँसे
चारों ओर बड़ी लाचारी
कहकर आप हँसे
कितने आप सुरक्षित होंगे मैं सोचने लगा
सहसा मुझे अकेला पाकर फिर से आप हँसे
- आपकी हँसी/रघुवीर सहाय
यदि तुम्हारे घर के
एक कमरे में आग लगी हो
तो क्या तुम
दूसरे कमरे में सो सकते हो?
यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में
लाशें सड़ रहीं हों
तो क्या तुम
दूसरे कमरे में प्रार्थना कर सकते हो?
यदि हाँ
तो मुझे तुम से
कुछ नहीं कहना है।
—सर्वेश्वरदयाल सक्सेना 🌻
त्यौहार मनाने
घर आया लड़का नहीं बताता
वह बीमार पड़ा था बहुत
पिछले दिनों।
घर आए लड़के को नहीं बताया जाता
माॅं ने अपनी अंतिम सोने की चूड़ी बेच दी
पिछले दिनों।
- चंद्रशेखर साकल्ले🌷
बहुत बड़े आकाश में हम अपने हिस्से का आकाश चुग लेते हैं।
देखने के लिए हम बहुत ख़ूबसूरत और बड़ा आकाश देख सकते हैं
पर जीने के लिए हम उतना ही आकाश जी पाएंगे
जितने आकाश को हमने
अपने घर की खिड़की में से जीना सीखा है।
- मानव कौल
मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी कभी
होती है दिलबरों की इनायत कभी कभी
फिर खो न जाएँ हम कहीं दुनिया की भीड़ में
मिलती है पास आने की मोहलत कभी कभी
तन्हा न कट सकेंगे जवानी के रास्ते
पेश आएगी किसी की ज़रूरत कभी कभी
- साहिर ❤️
اس ایک ڈر سے خواب دیکھتا نہیں
جو دیکھتا ہوں میں وہ بھولتا نہیں
کسی منڈیر پر کوئی دیا جلا
پھر اس کے بعد کیا ہوا پتا نہیں
میں آ رہا تھا راستے میں پھول تھے
میں جا رہا ہوں کوئی روکتا نہیں
تری طرف چلے تو عمر کٹ گئی
یہ اور بات راستہ کٹا نہیں
اس اژدھے کی آنکھ پوچھتی رہی
کسی کو خوف آ رہا ہے یا نہیں
میں ان دنوں ہوں خود سے اتنا بے خبر
میں بجھ چکا ہوں اور مجھے پتا نہیں
یہ عشق بھی عجب کہ ایک شخص سے
مجھے لگا کہ ہو گیا ہوا نہیں