🚨Enraged by the sight of a 'Jai Shree Ram' tattoo on a Hindu youth's arm outside the Haji Ali Dargah, Muslim assailants stabbed him repeatedly in front of a crowd of hundreds of Hindus.
Any Hindu who visits the Dargah is not a *Sanatani* but a 'secular' Hindu—and the consequences are right before your eyes.
Keep sleeping, secular Hindus.
Incident is reportedly from #Berhampur of #Odisha.
Two brothers, #Mukteswar Kumar and Ashis Kumar assaulted Umesh Rath in broad daylight on a public road. A woman accompanying the victim was seen shielding him with her body and pleading with the attackers to stop the assault. #Umesh condition is said to be critical.
Request @DGPOdisha to take strong action against such barbaric hooliganism.
cc @PandaJay
Ranbeef भगवान राम नहीं हो सकता
शीघ्र ही आपके बच्चे भगवान राम की पावन छवि को एक हिंसक और विकृत 'एंटी-हीरो' (खलनायक) के साथ जोड़कर देखेंगे।
अपने आराध्यों के लिए इसी भविष्य की कामना करते हैं आप?
- @GemsOfBollywood के संस्थापक, आचार्य @SanjeevSanskrit
दो महीने से लगातार सिस्टम की अनदेखी और परेशानियों से जूझते हुए आखिरकार एक इंसान का दर्द क्या होता है वो इस वीडियो को देख कर महसूस करें.....
“मेरा बाप मर गया है, मेरी माँ अंधी है…”
यह कहानी है एक जर्मन महिला की नाम था एमिली शेंकल (Emilie Schenkl)। पता नहीं आप में से कितनों ने ये नाम सुना है और अगर नहीं सुना है तो आप दोषी नहीं, इस नाम को इतिहास से खुरच कर निकाल फेंका गया है।
श्रीमती एमिली शेंकल ने 1937 में भारत मां के सबसे लाडले बेटे से विवाह किया और एक ऐसे देश को ससुराल के रूप में चुना जिसने कभी इस बहू का स्वागत नहीं किया। न बहू के आगमन में किसी ने मंगल गीत गाये और न उसकी बेटी के जन्म पर कोई सोहर गायी गयी। कभी कहीं जनमानस में चर्चा तक नहीं हुई के वो कैसे जीवन गुज़ार रही है।
सात साल के कुल वैवाहिक जीवन में सिर्फ 3 साल ही उन्हें अपने पति के साथ रहने का अवसर मिला फिर उन्हें और नन्हीं सी बेटी को छोड़ पति देश के लिए लड़ने चला आया इस वादे के साथ, कि पहले देश को आज़ाद करा लूं फिर तो सारा जीवन तुम्हारे साथ वहां बिताना ही है।
पर ऐसा हुआ नहीं और 1945 में एक कथित विमान दुर्घटना में वो लापता हो गए...!
उस समय एमिली शेंकल बेहद युवा थीं चाहतीं तो यूरोपीय संस्कृति के हिसाब से दूसरा विवाह कर सकतीं थीं, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया और सारा जीवन बेहद कड़ा संघर्ष करते हुए बिताया।
एक तारघर की मामूली क्लर्क की नौकरी और बेहद कम वेतन के साथ वो अपनी बेटी को पालतीं रहीं न किसी से शिकायत की न कुछ मांगा।
भारत भी तब तक आज़ाद हो चुका था और वे चाहती थीं कम से कम एक बार उस देश में आएं जिसकी आजादी के लिए उनके पति ने जीवन दिया।
भारत का एक अन्य राजनीतिक परिवार इतना भयभीत था इस एक महिला से, कि जिसे सम्मान सहित यहां बुला देश की नागरिकता देनी चाहिए थी, उसे कभी भारत का वीज़ा तक नहीं दिया गया।
आखिरकार बेहद कठिनाइयों भरा, और किसी भी तरह की चकाचौंध से दूर रह बेहद साधारण जीवन गुज़ार श्रीमती एमिली शेंकल ने मार्च 1996 में गुमनामी में ही जीवन त्याग दिया।
श्रीमती एमिली शेंकल का पूरा नाम था "श्रीमती एमिली शेंकल बोस" जो इस देश के सबसे लोकप्रिय जननेता नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की धर्मपत्नी थीं और जिन्हें गांधी खानदान ने कभी भारत की भूमि पर पैर नहीं रखने दिया।
देश के गद्दारों का खानदान जानता था ये देश इस विदेशी बहू को सर आंखों पर बिठा लेगा। उन्हें एमिली बोस का इस देश में पैर रखना अपनी सत्ता के लिए चुनौती लगा और शायद था भी।
@VVirakt@DrMohanYadav51 Kisaan kyon line me khada hai? Kyonki uria phosphate etc chahiye.
Aise me kisaan ko to dhakke khana hi chahiye.
Ab kab organic kheti ko tyag ke, Gai bail etc ko kaat karke kisaan sochega ki govt bhala kar de to aisa hoga nahi.
Kisaan akhir kaar humko zehar hi to khila Raha hai.
मजहब की ख़ूबसूरती देखो
एक हिजाब पहनी महिला को अपने परिवार में उलाला करने से इनकार करने पर गर्म लोहे को चाटने के लिए मजबूर किया गया
एक ग़लत किताब ने इनकी जिंदगी जहन्नुम बना दी
Know why night driving feels more dangerous than it did 20 years ago?
Because it is.
We replaced 1000-lumen halogens with 6000-lumen HIDs. Six times brighter. Zero regulation on aim. ☀️
Your great-grandfather drove with dim yellows and saw the road.
You drive in a Star Wars lightsaber duel. Every car armed. Every commute a battle.
The industry sold us battlefield lighting for civilian streets. Now we're all combatants.
We paid premium. They profited. Our retinas paid the rest. 🚗
Who's actually safer?
अतीत में सोमनाथ को मोहम्मद गजनी और खिलजी ने लूटा लेकिन आजाद भारत में भगवान् सोमनाथ से सबसे अधिक नफरत पंडित नेहरू को थी।
इसकी सबसे बड़ी बानगी देखिये कि पंडित नेहरू ने 21 अप्रैल 1951 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को "प्रिय नवाबजादा" कहकर संबोधित करते हुए पत्र लिखा और उसमें सोमनाथ के दरवाजों की कहानी को "पूरी तरह से झूठा" बताया। पंडित नेहरू ने लियाकत अली खान के आगे एक तरह से सरेंडर करते हुए लिखा कि सोमनाथ मंदिर के निर्माण जैसा कुछ नहीं हो रहा।
आखिर पंडित नेहरू को लियाकत अली खान से ऐसा क्या डर था जो वे उसे सोमनाथ मंदिर के बारे में पत्र लिख रहे थे। पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा का सामना करने या भारत की सभ्यतागत स्मृति का बचाव करने के बजाय, पंडित नेहरू ने हिंदू ऐतिहासिक प्रतीकों को कम करके पाकिस्तान को खुश करना चुना और आंतरिक आत्मविश्वास के बजाय बाहरी तुष्टीकरण को प्राथमिकता दी।
यह अंधी तुष्टिकरण की राजनीति और मुग़ल आक्रांताओं का महिमामंडन नहीं था तो और क्या था?
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स्कूल मे सुबह की प्रार्थना उर्दू में करवाई जा रही है
इसमे इस्लामी दुआ और कलमा पढ़वाये जा रहे है
ये गाजीपुर का MRD Public School है
ये हो क्या रहा है देश मे .............??
@Uppolice@ghazipurpolice
*बंग्लादेश*
*सेवानिवृत्त हिन्दू शिक्षक की विदाई*
*अगर आप भारत में ये सब नही देखना चाहते*
*तो हमे एक बार फिर कुरुक्षेत्र में आना होगा*
*अफसोस*
*आज दिल्ली में राम है और यूपी में श्याम*
*लेकिन हनुमान और पांडव कहाँ है*
*क्या आप बता सकते है*
जर्मनी में एक सीरियाई शरणार्थी परिवार, जो बहुविवाह करता है, विवाद का कारण बन गया है।
अहमद अपनी दो पत्नियों और छह बच्चों के साथ एक मुफ्त घर में रहता है। उसका कहना है कि वह दो और पत्नियां चाहता है और उसके कुल 20 बच्चे हैं।
वह अनपढ़ है, काम नहीं करता और कहता है कि उसका एकमात्र लक्ष्य अधिक से अधिक बच्चे पैदा करके 'जर्मनी को और अधिक मुस्लिम बनाना' है।