अगले साल तक इथोनॉल ब्लेंडिंग के रिजल्ट्स कुछ भी आए,
तब तक करोड़ों गाड़ियों में इथोनॉल और उस एथनॉल से आया मुनाफ़ा गड़करी जी के सुपुत्रों की जेब में जा चुका होगा।
नागपुर के छात्र का सेंटर अगर अबूधाबी पड़ा है तो इसमें क्या समस्या है ? प्रश्न पत्रों को पहुँचाने के बाद वायु सेना के जो विमान ख़ाली हैं, उन्हीं में से एक उसे ले जाएगा। सिम्पल समाधान ।
नागपुर का एक बच्चा एक महीने से NEET re-exam की तैयारी कर रहा था।
कल परीक्षा से ठीक एक दिन पहले उसने admit card डाउनलोड किया। उसका सेंटर निकला - अबू धाबी।
न पासपोर्ट, न परिवार के पास विदेश भेजने के पैसे, न अब कोई वक़्त बचा है। वो रातभर रोता रहा, और परीक्षा देने से ही मना कर रहा है - क्या इस तनाव की कल्पना भी की जा सकती है?
आखिर ऐसा हुआ भी कैसे? कल किसी भी छात्र को सेंटर तक न पहुँच पाने की शिकायत नहीं होनी चाहिए। NTA असल में देश के बच्चों और उनके माता-पिता का सिर्फ़ धीरज test कर रही है।
जो system एक बच्चे को अपने ही शहर में एक centre नहीं दे सकती, उल्टा विदेश भेज सकती है - उसे परीक्षा करवाने का कोई हक़ नहीं।
कोटा में मैंने यही कहा था - यह अब शिक्षा व्यवस्था नहीं रही। यह एक पूरी पीढ़ी के पैसे, समय और मानसिक शांति की वसूली है।
हमारे बच्चों के भविष्य के साथ जुआ खेलना बंद कीजिए। वो एक संवेदनशील, ज़िम्मेदार और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा के अधिकारी हैं - और हम ये उन्हें दिलवा कर रहेंगे।
#ChhatronKiGoonj
#ChhatraJodo
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#DARVAS 🥸
जब लाखों युवा सड़क पर हों, 22 लाख बच्चों का भविष्य दांव पर हो और PM चुप हो - तो सरकार जवाब देने नहीं, बचने में लगी है।
जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता और NEET जैसे पेपर लीक रोकने के लिए foolproof सिस्टम नहीं बनता - हम रुकेंगे नहीं।
पापा, आपने जिस कुशल, समृद्ध और मजबूत भारत का सपना देखा था, उसे साकार करने की जिम्मेदारी मैं पूरी करूंगा।
आपकी सीख, आपके संस्कार और आपकी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी।
मितरों देश को जानबूझकर मँहगाई की आग में झोंकने वाले को देशद्रोही कहना चाहिए की नहीं?ट्रम्प से मत डरो मोदी जी, दिखाओ अपना 56 इंची सीना।
अब तो ईरान आपको सस्ता अच्छा कम भाड़े में तेल बेचने को तैयार है अगर चीन ईरान से तेल ख़रीद सकता है तो आप क्यों नहीं?
मोदी जी अगर हिम्मत है तो ईरान से सस्ता तेल खरीदकर देश की जनता को सस्ता पेट्रोल डीज़ल गैस उपलब्ध कराइए।
आर्थिक तूफ़ान सर पर है, और हमारे प्रधानमंत्री इटली में टॉफ़ी बाँट रहे हैं!
किसान, युवा, महिलाएँ, मज़दूर और छोटे व्यापारी सब रो रहे हैं - PM हंसकर रील बना रहे हैं, और BJP वाले ताली बजा रहे हैं।
यह नेतृत्व नहीं, नौटंकी है।
When there is nothing to hide, there is nothing to fear.
What happens to India’s image when the world sees a compromised PM panic and run from a few questions?
मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे - सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
ये उपदेश नहीं - ये नाकामी के सबूत हैं।
12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है - क्या ख़रीदे, क्या न ख़रीदे, कहां जाए, कहां न जाए। हर बार ज़िम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि ख़ुद जवाबदेही से बच निकलें।
देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं।
देखिये शायद पलकें नम हो जायें।
महाराष्ट्र सरकार का अतिक्रमण विरोधी बुलडोज़र विकलांग महिला ‘अर्चना पारखे’ की मिट्टी के बर्तन की दूकान पर चल रहा है।
अर्चना सड़क किनारे मिट्टी के बर्तन बेंचकर अपना घर चलाती हैं, धन्नासेठों को हज़ारों एकड़ ज़मीन कौड़ियों के भाव देने वाली सरकारों को इन ग़रीबों से इतनी नफ़रत है कि बुलडोज़र लेकर उसकी दूकान तोड़ने पँहुच गये।
सरकार का विकास अगर इतना क्रूर है तो लानत है एैसे विकास पर।
कल हमारे साथी इस बहन के यथासंभव मदद लेकर पँहुचेंगे।
@Dev_Fadnavis जी थोड़ी भी इंसानियत बची हो तो दोषियों पर कार्यवाही करिये और इस महिला को सरकारी नौकरी दीजिये।