🚨 24 जून से आरक्षण पर निर्णायक लड़ाई शुरू!
ओबीसी आरक्षण के महत्वपूर्ण मामले में माननीय हाईकोर्ट द्वारा प्रतिदिन सुनवाई का निर्णय लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी उम्मीदों को नई ताकत देता है।
यह केवल एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और संविधान में मिले अधिकारों की रक्षा का प्रश्न है।
हमारी मांग स्पष्ट है—
✅ ओबीसी वर्ग के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रहें
✅ सामाजिक न्याय की भावना अक्षुण्ण रहे
✅ युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय न हो
आइए, अधिकारों की इस लड़ाई में एकजुट रहें और अपनी आवाज़ को मजबूत बनाएं।
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@Barmer_Harish@jitupatwari@UmangSinghar@INCIndia@INCMP
उम्मीद करते हैं कि न्यायापालिका ओबीसी आरक्षण पर इस बार सांप सीढी का खेल खत्म करके ही रहेगी। आखिर प्रदेश के युवाओं ने सरकारी भर्तियों में चयन होकर क्या गुनाह कर दिया है? न्याय तंत्र अब अंतिम फैसला कब ?
ओबीसी वर्ग के बच्चे बीजेपी सरकार से लगा रहे गुहार फिर नहीं मिल रहा हे न्याय ??
एक तरफ सरकार 2047 के विकसित मध्यप्रदेश का सपना दिखा रही है, दूसरी तरफ 2023 की माध्यमिक शिक्षक भर्ती में चयनित हजारों अभ्यर्थी नियुक्ति पत्र के लिए सड़कों पर भटक रहे हैं।
2022 में भर्ती का विज्ञापन निकला, 2023 में पात्रता परीक्षा हुई, 2025 में चयन परीक्षा और परिणाम भी आ गया, दस्तावेज सत्यापन भी पूरा हो गया, लेकिन 4,000 चयनित शिक्षकों को आज तक जॉइनिंग नहीं मिली। मजबूर होकर उन्हें डीपीआई का घेराव करना पड़ रहा है और "जॉइनिंग दो... जॉइनिंग दो..." के नारे लगाने पड़ रहे हैं।
विडंबना देखिए, कैग और यू-डाइस की रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश के 1,275 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है और 12,000 से अधिक स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। 70 हजार से अधिक शिक्षकीय पद रिक्त पड़े हैं। फिर भी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दी जा रही।
सरकार बताए कि जब स्कूल शिक्षक विहीन हैं, बच्चे शिक्षकों के अभाव में पढ़ाई से वंचित हैं और भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो आखिर नियुक्ति रोककर किसका भला किया जा रहा है?
मैं मध्यप्रदेश सरकार से मांग करता हूं कि चयनित माध्यमिक शिक्षकों को तत्काल नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं तथा प्रदेश के सभी रिक्त शिक्षकीय पदों को भरकर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। विकास के विज्ञापन नहीं, स्कूलों में शिक्षक चाहिए।
@INCMP@JansamparkMP@RahulGandhi
ओबीसी आरक्षण पर भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है। प्रधान जी! सबसे संक्षिप्त उत्तर है करके दिखाना। इसलिए बोलिए कम और करिए ज्यादा। क्योंकि पिछड़ा होने का हक अदा करने का समय आ गया है। जय ओबीसी । जय संविधान।
#ओबीसीआरक्षण_लागू_करो@narendramodi@GaneshSingh_in@DrMohanYadav51
वाह @narendramodi जी, क्या गज़ब का ओबीसी प्रेम है!
मंच से ओबीसी, भाषण में ओबीसी, चुनाव में ओबीसी, पोस्टर में ओबीसी.
लेकिन मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण 7 साल से फाइलों और अदालतों के चक्कर काट रहा है।
लगता है @BJP4India@BJP4MP का नया नारा है— "ओबीसी का वोट हमारा, लेकिन अधिकार इंतज़ार में बेचारा!"
जब वोट चाहिए तो "हम भी ओबीसी", और जब 27% आरक्षण लागू करने की बात आए तो "मामला विचाराधीन है"।
इतना लंबा इंतज़ार देखकर तो लगता है कि @drmohanoffice51 सरकार आरक्षण लागू नहीं कर रही, बल्कि उसे पुरातत्व विभाग को सौंपकर ऐतिहासिक धरोहर बनाने की तैयारी में है।
#JusticeForOBC #OBCReservation #MeritMyFoot #SocialJustice
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि जब 2019 के कानून पर कोई रोक नहीं है, तो फिर उसे लागू करने में हिचकिचाहट क्यों?
सबसे दिलचस्प बात यह है कि 87:13 का फार्मूला न तो संविधान में लिखा है, न विधानसभा ने बनाया, न ही कोर्ट ने दिया।
यह @drmohanoffice51@BJP4India@BJP4MP सरकार और उसके विधि @minlaw5 सामान्य प्रशासन विभाग @GADdeptmp तंत्र की ऐसी अद्भुत खोज है,
जिसने 27% OBC आरक्षण को कागज़ पर तो जिंदा रखा, लेकिन लाखों युवाओं के लिए उसका 13% हिस्सा फ्रीज़र में रख दिया।
जब मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी को श्रेय लेना हो तो पूरा 27% हमारा। जब नियुक्ति देनी हो तो 13% होल्ड।
जब सवाल पूछो तो जवाब—मामला कोर्ट में है।
अरे भाई, कोर्ट ने कब 87:13 का फार्मूला बनाया? कोर्ट तो बार-बार पूछ रही है कि जब कानून पर रोक नहीं है, तो उसे लागू क्यों नहीं कर रहे?
लगता है 87:13 का फार्मूला गणित की किताब में नहीं, बल्कि OBC युवाओं को उलझाने की प्रयोगशाला में तैयार हुआ है।
OBC समाज पूछ रहा है— अगर 27% आरक्षण का कानून बना है, तो 87:13 का यह जादुई फार्मूला आखिर आया कहां से?
और लाखों युवाओं के छिने हुए अवसरों का हिसाब कौन देगा?
#JusticeForOBC #OBCReservation #OBCRepresentation #SocialJustice #MeritMyFoot
दिनांक 16.6.26 को हाईकोर्ट जबलपुर OBC आरक्षण के प्रकरणों की सुनवाई करेगी नई डिविजन बैंच. जिसमे जस्टिस आनंद पाठक एवं जस्टिस भगवती प्रसाद शर्मा करेगे 2:30 बजे से सुनवाई |
*आखिर ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई की राह में और कितने आएंगे रोड़े?, एक्टिंग चीफ जस्टिस की कॉजलिस्ट में मामला 16 जून को नहीं हुआ लिस्ट*
https://t.co/O7aQ9aWtLi
बेंच बदल गई है। अब WP 5901/2019 का मामला 16 जून 2026 को जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध है।लेकिन ओबीसी युवाओं की चिंता अब भी बनी हुई है।
पिछले 7 वर्षों से लंबित इस मामले में लाखों OBC अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा है। हर नई तारीख़ के साथ उम्मीदें भी जुड़ती हैं और आशंकाएँ भी।
अब सबकी निगाहें जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की बेंच पर हैं। सवाल सिर्फ सुनवाई का नहीं, बल्कि उस न्याय का है जिसका इंतज़ार लाखों ओबीसी अभ्यर्थी वर्षों से कर रहे हैं।
16 जून को यह तय होगा कि न्याय की दिशा में ठोस कदम बढ़ेगा या इंतज़ार का एक और अध्याय जुड़ जाएगा।