पिता
बच्चे के बाल कटाने
जब भी जाता हूँ
मिल जाते हैं मेरे पिता
मुझमें ही कहीं खड़े
वही वज़नदार आवाज़
सुनो,
इसके बाल थोड़े और हल्के करो,
मैं जान गया हूँ
पिता नहीं देखना चाहते
कोई भी बोझ
बच्चे के सिर पर,
मैं जान गया हूँ अब
कि बच्चे के सिर से बोझ उतरने
और
उम्र के साथ
पिता की भारी होती
थोड़ी कांपती सी आवाज़ में
कोई संबंध है,
बच्चे के बाल कटाने
मैं जाता तो हूँ बच्चे के साथ
पर लौटता हूँ पिता के साथ
राज कुमार सिंह
मैंने अपनी स्व गणना कर ली......क्या आपने किया???
आइए इस मुहिम का हिस्सा बनें, खुद करें दूसरों को प्रोत्साहित करें।
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नायाब किरदार है,
झूठ-फरेब से कहीं दूर,
जो टकटकाती आँखों में
हजारों उजले सवेरे लिए,
एक आस में कि किसी रोज़ आएँगे,
उनके बच्चे उन्हें याद करते इस ओर,
माँ होना — बड़ा ही बेसब्री का परिचय है।
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दो घटनाएँ हुई हैं…दोनों को ध्यान से सुनिए.
उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में यादव समाज के एक व्यक्ति को कथा सुनाने के अपराध में बेइज्जत किया गया और उसका सिर मूड़ दिया गया.
सज़ा देने वालों को कथा सुनाने का अपराध इतना बड़ा लगा कि उस व्यक्ति के ऊपर एक महिला के मूत्र का छिड़काव भी किया गया. ये दुष्कृत्य कथावाचन पर एकाधिकार समझने वाले लोगों ने किया.
दूसरी घटना ओडिशा की है जहाँ गंजाम जिले में गो-तस्करी के शक में दो दलित युवकों को बुरी तरह पीटा गया. उनका आधा सिर मुंडवाया गया. उन्हें घुटनों के बल रेंगने, घास खाने और नाली का पानी पीने के लिए मजबूर किया गया.
उत्तर प्रदेश और ओडिशा; इन दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है और दिल्ली में तो अपने सिंदूरलाल जी बैठे ही हुए हैं. ऐसे में अब सवाल ये है कि इस तरह की घटनाओं के लिए असली जिम्मेदार कौन है?
भाजपा का दलित और पिछड़ा विरोधी चरित्र, या उन राज्यों का ख़राब लॉ एंड ऑर्डर? क्योंकि ये पहली घटना नहीं है…ऐसी घटनाओं की लिस्ट बहुत लंबी है…मसलन कुछ समय पहले मध्य प्रदेश में, जहाँ भाजपा की ही सरकार है, भाजपा के एक नेता ने आदिवासी समाज के एक व्यक्ति के सिर पर पेशाब कर दिया था…और घटना के ख़िलाफ़ बोलने पर मेरे ऊपर FIR दर्ज़ की गई थी. खैर…
मुझे जानना है कि इस तरह की घटनाएँ भाजपा शासित राज्यों में इतनी अधिकता से कैसे हो जाती हैं? मुझे जानना है कि क्या किसी पिछड़े वर्ग के व्यक्ति द्वारा कथावाचन करना कोई अपराध है? अगर अपराध है तो उसके लिए भारतीय न्याय व्यवस्था में क्या प्रावधान है? कथावाचक के मान-मर्दन के लिए जिम्मेदार लोगों को सज़ा मिलने की कितनी संभावना है?
पहलगाम आतंकी हमला देश में हुआ पहला आतंकी हमला नहीं था…देश लंबे समय से आतंकवाद से लड़ रहा है…और हमने अपने हज़ारों नागरिक आतंकी हमलों में खोए हैं…
हर बार ये हमले पूरे देश के विरुद्ध माने गए…और मृतकों को देश का नागरिक माना जाता रहा…पर भाजपा सरकार की कृपा से ऐसा पहली बात हुआ जब पूरे देश ने मृतकों की सूची में हिंदू और मुसलमान नाम छाँटे…
…माहौल बनाया गया कि आतंकियों ने धर्म पूछकर मारा…एक पूरे समाज को आतंकवादी और उनका साथी बताने की कोशिश की गई…
…जबकि सच ये है कि सरकार अभी तक हमलावरों को पकड़ना तो दूर उनकी सही पहचान तक नहीं जुटा पाई है…और अब खबर आ रही है कि सरकार ने पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार आतंकियों के ग़लत स्केच जारी किए थे.
अब सवाल ये है कि जिस ग़लत जानकारी के आधार पर देश की एक बड़ी आबादी को अपमानित किया गया, उसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा…और जो कष्ट पहुँचा है, उसकी भरपाई कैसे होगी?
एक सबसे जरूरी सवाल ये है कि आख़िर भारतीय जनता पार्टी किन लोगों की पार्टी है? सरकार चलाने वाले लोग कौन लोग हैं?
ये लोग दलितों को अपमानित करते हैं, पिछड़ों को अपमानित करते हैं, महिलाओं को अपमानित करते हैं, अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित और अपमानित करते हुए उनकी वफ़ादारी पर सवाल उठाते हैं…आख़िर ये कौन लोग हैं? ये किस हक़ से ऐसा करते हैं? और ये किन लोगों की पार्टी है?
क्या ये कहना ग़लत होगा कि भारतीय जनता पार्टी दरअसल देश के बहुसंख्यक सवर्ण समाज के पुरुषों के वर्चस्व वाली पार्टी है?
सच ये है कि भाजपा में मौजूद बाक़ी समाजों के प्रतिनिधि दरअसल प्रतिनिधि नहीं कठपुतलियाँ हैं, जो अपने समाज का हित करने का ढोंग करते हैं और उन्हें बरगलाते हैं…और अगर ऐसा नहीं है तो ऐसी घटनाओं पर भाजपा में मौजूद इन कठपुतलियों ने अब तक कोई व्यापक आंदोलन क्यों नहीं किया?
भाजपा का अल्पसंख्यक मोर्चा अल्पसंख्यकों के लिए क्या कर रहा है?
सच ये है कि देश के लिए आतंकवाद से ज़्यादा ख़तरनाक जातंकवाद है…क्योंकि इसे फैलाने में बहुत सारे लोग शामिल हैं जिन्हें सरकार का मूक समर्थन मिला हुआ है.
एक बेहद अहम सवाल ये भी है कि गाय के नाम पर जिस तरह से देश भर में लिंचिंग की गई है, उससे गोपालन को बढ़ावा मिलेगा या लोग हतोत्साहित होंगे?
पहले गाय के नाम पर मुस्लिम समाज को निशाना बनाया जाता था, अब दलितों को भी टारगेट किया जा रहा है…मेरा विश्वास कीजिए…जो लोग ख़ुद को सुरक्षित समझ रहे हैं और ऐसी घटनाओं के प्रति तटस्थ हैं, वो भी दरअसल सुरक्षित नहीं हैं…भरोसा न हो तो कुछ दिन इंतज़ार कर लीजिए!
आज देश को आतंकवाद के साथ-साथ जातंकवाद से लड़ने की भी जरूरत है, जिसके लिए सबसे पहले इसकी जड़ पर प्रहार करना होगा.
और
जानवर से मनुष्य होने के लिए,
प्रेम का अविष्कार जरूरी था।
और
मनुष्य से समाज होने के लिए,
विरह का निर्माण जरूरी था।
और
आप मनुष्य हो प्रेम करते हैं,
समाज होते ही-बिछुड़ना होता है।
और
ऐसी धार के बीच मैंने
जाने दिया उसे
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President Droupadi Murmu confers Major Dhyan Chand Khel Ratna Award, 2024 on Ms. Manu Bhaker in recognition of her outstanding achievements in Shooting. Her achievements are:
• Bronze medal in Olympic Games (Women's 10m air pistol) held in Paris, France in 2024.
• Bronze medal in Olympic Games (Mixed team 10m air pistol) held in Paris, France in 2024.
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि सरकार मार्च 2025 तक सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज की एक संशोधित योजना पेश करेगी।
इस योजना के तहत घायल का प्रति दुर्घटना, प्रति व्यक्ति अधिकतम ₹1.5 लाख तक का इलाज कैशलेस होगा। यह सुविधा दुर्घटना की तारीख से अधिकतम 7 दिनों की अवधि तक उपलब्ध रहेगी।
इस योजना का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को त्वरित और सुगम चिकित्सा सुविधा प्रदान करना है।
आँकड़ों की बात करें तो, देशभर में हुए सड़क हादसों में पिछले साल 2024 में 1 लाख 80 हजार मौतें हुई हैं। मृतकों में 66% लोग 18 से 34 साल के युवा थे। अगर समय पर इलाज मिल जाता तो इनमें से कई लोगों को बचाया जा सकता था।
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(यात्रा: 17)
मैंने आंख खोली और मैं फिर किसी नए शहर में था। ये शायद जीवन का दसवाँ शहर है जहाँ मैं कुछ महीने रहने को बाध्य हूँ। मेरी खिड़की से पत्थर-पहाड़ और पेड़ नज़र आते हैं। शहर इनके पीछे लापता है।
इस शहर में मैं किसी को नहीं जानता।
1/N
मैंने इतनी किताबें खंगाली
कि
पहचान लेता हूँ
दूर से ही
आती हुई कहानी।
सिवा
तुम्हारे
क्योंकि
तुम निकले कविता।
और कविताओं को
समझने के लिए
किताब काफ़ी नहीं।।
(फ़ोटो : aishwaryashok)
प्रेम में भीगी हुई सूखी रोटियाँ, प्रेम में रंगे हुए मोटे कपड़े और प्रेम के प्रकाश से आलोकित छोटी-सी कोठरी, अपनी इस विपन्नता में भी वह स्वाद, वह शोभा और वह विश्राम रखती है, जो शायद देवताओं को स्वर्ग में भी नसीब नहीं।
- प्रेमचंद
मिस्टर अम्बेडकर!
तुम्हारी किताब में
ये काफ़ी
खतरनाक विचार हैं
कि
पूरी आदम जात का एक आधार है।
कि
कोई किसी पे
जुल्म न करे,
जो जिससे मर्जी
प्रेम करे-
कि
हक मिले हर
हकदार को-
खेत मिले
हर हलदार को।
जड़ और जंगल मिले
वहाँ के वासी को-
रोटी मिले
हर निवासी को।
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ये वही नौजवान है जो सरकार चुनने में अत्यधिक महत्वपूर्ण भागीदारी देते हैं ये वही युवा है जिनके हाथ मे देश प्रदेश का भविष्य होगा ! ये वही युवा है जो अपने क्षेत्र प्रदेश में नेतृत्व करने की योग्यता रखते हैं ! Normalisation का विरोध कर रहे छात्रों के साथ प्रशासन का दुर्व्यवहार सही नही ! छात्रों की मांग पर विचार विमर्श करके कोई न कोई ठीक फैसला लेने की अति आवश्यकता है
#uppcs_no_normalisation
तुम्हें पता है कि
चिंपांज़ी अपनी भाषा में बता सकते हैं
कि
सामने शेर आने को है।
डॉलफिन अपनी भाषा में बात करते हैं
सामने रखे खाने की।
विज्ञान बताता है कि
हर जानवर अपनी भाषा में बता सकते हैं
जो हो रहा हो-जो देखा हो।
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