मैं वो बदनसीब शख़्स हूं जो बशीर बद्र साहब के घर तो गया लेकिन उनसे मिल न सका, आज बशीर बद्र साहब हमारे दरमियान नहीं रहे क्योंकि उनका कल 91 वर्ष की उम्र में इंतिक़ाल हो गया है।
मैं 14 नवंबर 2023 में भोपाल में बशीर साहब के घर गया तो बशीर साहब सो रहे थे, उनके बेटे तैयब और बीवी से मुलाक़ात कर लौट आया, बशीर साहब से मिलने की ख़्वाहिश को अपने अंदर ही समेट लाया और सोचा कि ज़िंदगी ने मौक़ा दिया तो बशीर साहब से ज़रूर मिलूंगा लेकिन मिल न सका और मिलने से पहले ही उनका इंतिक़ाल हो गया जिसका ताउम्र ग़म रहेगा कि शायरी और संघर्ष को ज़िंदा रखने वाली शख्सियत को खो दिया ये अलग गम और एक गम ये भी कि कोशिशों के बाद बशीर साहब के घर में अंदर दाख़िल तो हुआ लेकिन मुलाक़ात न हो सकी।
बशीर बद्र साहब शायर ही नहीं बल्कि संघर्ष की वो कहानी थे जिसे पढ़ा जाए सुना जाएं तो जुनून ही जुनून पैदा हो, जिस मोड़ पर लोग सुसाइड कर लेते हैं बशीर साहब ने उस मोड़ को चीरकर दिखाया है और दुनिया में अपनी शायरी का सिक्का जमाया।
अयोध्या में जन्मे बशीर बद्र ने मेरठ को अपना घर बनाया लेकिन उन्हें मालूम नहीं था कि जिस मेरठ शहर को उन्होंने अपना घर बनाया एक दिन वो ही मेरठ उन्हें ऐसा ज़ख़्म देगा जिसको न बशीर साहब भुला सके और न दुनिया ही भुला पाई। बशीर साहब अपनी बीवी और बच्चों के साथ मेरठ के शास्त्री नगर की विकास कॉलोनी में रहते थे, इसी शहर से उन्होंने विश्वभर में अपनी शायरी के माध्यम से पहचान बनाई और इस शहर को अपना घर नहीं बल्कि खानदान बनाया, 1987 में हाशिमपुरा दंगों के दौरान दंगाई भीड़ उनके घर में घुसी और उनके घर के कीमती सामान में लूटपाट करते हुए घर में तोड़फोड़ की और बाद में पूरे ही घर को आग के हवाले कर दिया, यानी मेरठ के इन दंगों में बशीर बद्र साहब का घर फूंक दिया गया, वो घर जिसे उन्होंने अपने ख्वाबों से बनाया और सजाया था, वो घर जो उनकी ज़िंदगी भर की जमा पूंजी से बनाया गया था। दंगाइयों द्वारा घर में लगाई गई आग से उनके घर की दीवार और छत ही नहीं बल्कि उनके ख़्वाब भी जलकर राख हो गए, घर की दीवार ही नहीं बल्कि उनकी ज़िंदगी भर की मेहनत से लिखी गई शायरियों के रफ़ रजिस्टर भी चलकर राख हो गए, वो सामान भी जला जिसे बड़ी मेहनतों से ख़रीदा गया था। वो शायरियां भी जली जो अभी तक किसी किताब में प्रकाशित और मंच पर सुनाई नहीं गई थी। और दंगे में घर जलने के सदमे में डूबी उनकी बीवी की भी मौत हो गई।
अपनी आँखों के सामने अपने घर और ज़िंदगी भर की जमा पूंजी और शायरियां राख बनता हुआ देख और घर जलने के सदमे में डूबी बीवी के इंतेकाल के बाद बशीर साहब टूट गए बिखर गए और आज के लफ़्ज़ में कहां जाए तो डिप्रेशन का शिकार हो गए क्योंकि उन्हें दुख अपने घर के जलने का नहीं बल्कि शायरी के जलने का रहा जो अभी तक सुनाई नहीं गई थी प्रकाशित नहीं की गई थी। दुख पत्नी के इंतिक़ाल का रहा जो उनकी हमसफ़र थी
दंगे में घर जल जाने के 1 वर्ष बाद बशीर बद्र ने दोस्तों की सलाह पर बदनसीब मेरठ शहर को छोड़ दिया और साथ ही उन्होंने शायरी लिखना भी छोड़ दी, बशीर साहब ने मेरठ को छोड़ते वक़्त मेरठवासियों को तोहफ़े के रूप में एक शेर लिखकर दिया जो आज भी पूरी दुनियां की ज़बान पर रहता है, दंगे में जले घर पर लिखा गया शेर था कि :
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में,
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।
ये शेर दुनिया के लिए शायरी लेकिन मेरठवासियों को कलंकित करने वाला शेर बन गया। आज जब भी दुनियां के लोग इस शेर को पढ़ते हैं तो मायने निकालने पर मेरठ का नाम आता है कि मेरठ के लोगों ने दंगे में एक शायर का भी घर नहीं छोड़ा, शायर के घर में लूटपाट, तोड़फोड़ करने के बाद जब उनके घर को जलाया तो सदमे में डूबी शायर की पत्नी का इस गम में इंतिक़ाल हो गया जिसके बाद शायर ने हमेशा के लिए मेरठ शहर को छोड़ते वक्त इस शेर को लिखा था और बाद में शायर ने शायरी लिखनी भी छोड़ दी थी।
बदनसीब मेरठ को छोड़ने के बाद बशीर साहब यूपी के कई जिलों में घूमे लेकिन उनका मन नहीं लगा और आखिरकार दोस्तों की सलाह पर वो मध्य प्रदेश की राजधानी और अदब और उर्दू से भरे हुए शहर भोपाल को अपना ठिकाना बनाया।
बशीर साहब की शायरी की दीवानी एक 11वीं कक्षा की छात्रा डॉ राहत बशीर साहब को तलाश रही थी जिसकी आखिरकार किसी के माध्यम से दिल्ली में मुलाक़ात हो ही गई और उम्र के बंधन को तोड़ राहत बशीर साहब की दूसरी पत्नी ही नहीं बल्कि उन्हें डिप्रेशन से निकालने के लिए 'राहत'बनी, डॉ राहत ने बशीर साहब को डिप्रेशन से निकाल दोबारा शायरी लिखने और ज़िंदगी जीने के लिए मज़बूर कर दिया, इस जोड़े को मिसाल के रूप में पेश किया गया और डॉ राहत को हर तरफ़ से तारीफे मिलती रही।
पद्म श्री से सम्मानित बशीर साहब को विदाई। अल्लाह जन्नत नसीब करें।
जैसे ही बंगाल चुनाव ख़त्म हुए, मोदी जी ने पंजाब में रोज़ ED की रेड करना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ सालों में मोदी जी ने पंजाब के साथ बहुत धक्का किया है। पंजाबियों को तरह तरह से प्रताड़ित किया है।
पंजाब के पानी पर हमला किया, पंजाब यूनिवर्सिटी को लेने की कोशिश की, ग्रामीण विकास का पैसा रोक लिया और अब ED की ताबड़ तोड़ रेड शुरू कर दी। अशोक मित्तल के यहाँ रेड हुई, अगले दिन उनको बीजेपी में शामिल करवा लिया। इसका मतलब ED की रेड का मक़सद चोरी का पैसा ढूँढना नहीं था। केवल अशोक मित्तल को तोड़कर उन्हें बीजेपी में शामिल करवाना था। कुछ दिन पहले संजीव अरोड़ा के यहाँ भी रेड हुई। वो बीजेपी में शामिल नहीं हुए तो उनके यहाँ फिर से रेड करवा दी।
पंजाब गुरुओं की धरती है। कई सौ साल पहले औरंगज़ेब ने जुर्म और अत्याचार के ज़रिए देश के कई भागों पर क़ब्ज़ा कर लिया। मोदी जी ने भी बेईमानी से देश के कई हिस्सों पर क़ब्ज़ा कर लिया है। उसके बाद औरंगज़ेब पंजाब पहुँचा। मोदी जी भी अब पंजाब पहुँचे हैं। औरंगज़ेब ने गुरुओं पर बहुत अत्याचार किए। मोदी जी भी पंजाबियों पर अत्याचार कर रहे हैं। पर गुरुओं ने कुर्बानी देकर औरंगज़ेब का सामना किया और लोगों को बचाया। आज गुरुओं की कुर्बानी से प्रेरणा लेकर पंजाब मोदी जी के अत्याचार का सामना करेगा और पूरे देश को उनके अत्याचार से बचाएगा।
कुछ वर्ष पहले मोदी जी ने पंजाब के किसानों को ललकारा था और उन्हें किसानों के आगे झुकना पड़ा। आज मोदी जी ने पूरे पंजाब को ललकारा है।
क्या आपका वोट सुरक्षित है?
एमके स्टालिन, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल जी की हार के पीछे चौंकाने वाली समानता है और आँकड़े बेहद ख़तरनाक हैं।
MK Stalin- कोलाथुर में 1.02 लाख वोट काटे गए, हार का अंतर मात्र 8,795
Mamata Banerjee- भवानीपुर में 51,000 वोट काटे गये, हार का अंतर 15,105
Arvind Kejriwal- नई दिल्ली में 42,000 वोट कटे, हार का अंतर सिर्फ 4,089
@ECISVEEP अब निष्पक्ष संस्था नहीं... बल्कि BJP का 'चुनावी टूल' बन चुका है।
जिस दिल्ली और बंगाल को भाजपा 'मोदी वेव' की चरम सीमा पर नहीं जीत पाई.. 2015 में दिल्ली में और 2016 में बंगाल में इनकी 3-3 सीट आई..
उस दिल्ली और बंगाल को भाजपा ने तब जीत लिया जब मोदी जी की लोकप्रियता पूरे देश में पाताल में जा रही... कैसे?
बीच नफरत के बोने को उतर आए हो बात-बात पर रोने पर उतर आए हो और तुम पर लाजिम था कि तुम मर्दों की तरह मैदान में उतरो लेकिन तुम तो नामर्दों की तरह जादू टोने पर उतर आए हो।
आपको गुजराती चैनल ABP Asmita की AI Hindi Translated ये रिपोर्ट जरुर देखनी चाहिए।
बीजेपी तिलमिला गयी है। ख़ुद बीजेपी के बड़े नेता उनकी पार्टी और सरकार को आगाह कर रहे हैं कि आने वाले समय में गुजरात में AAP की लहर आने वाली है।
(Original गुजराती रिपोर्ट भी साथ ही पोस्ट है)
यह अंत नहीं… यह एक नई शुरुआत है।
करीब 700 वोटों से हार जरूर हुई है, लेकिन हिम्मत और हौसला आज भी बुलंद है।
आपका साथ और विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
हम पहले भी आपके बीच थे, आज भी हैं और आगे भी हमेशा आपके बीच रहेंगे।🙏
यह अंत नहीं.....यह एक नई शुरुआत है।
“मुसलमानों को कुछ मत दीजिए, हिंदुओं को 500 रुपये में गैस सिलेंडर और 50 रुपये में पेट्रोल दे दीजिए, हम जाकर धपाधप बीजेपी को वोट दे देंगे।”
- बंगाल का एक मुस्लिम वोटर
तीन दिन से गुजरात में हूँ… जिस समय गुजरात में हज़ारों कार्यकर्ता अपनी जान जोखिम में डालकर, सारे ख़तरे और बीजेपी की धमकियाँ झेलकर पार्टी की विचारधारा को मजबूत करने के लिए खून पसीना बहा रहे है, उसी समय कुछ गद्दारों ने पंजाब के कार्यकर्ताओं के ख़ून पसीने की कमाई का सौदा कर लिया।
जो राज्यसभा सदस्य आज बीजेपी के सामने झुक गए, अपनी निजी मजबूरियों, डर और लालच के कारण जिन्होंने पंजाब के लोगों के साथ ग़द्दारी की है, उन्हें पता होना चाहिए कि पंजाब गद्दारों को कभी माफ नहीं करता है।
"Raghav Chadha जैसा धोखेबाज़ शायद आप ने कभी देखा होगा!
राघव चड्ढा सबसे बड़ा कायर है!
ED और CBI के डर से इसने BJP ज्वॉइन ली"
ध्रुव राठी को सुने आप!
राघव चड्ढा की पोल खोल दी!