कोई एक समुदाय टैक्स भरता है और दूसरे समुदाय उसपर मौज करते है, ये एक भ्रामक प्रचार है। असल में ये कुछ जातियों के लोगों द्वारा दूसरे जातियों के लोगों के विरोध में किया जा रहा हेट स्पीच है।
इंडिया में एक व्यक्ति नहीं है, जो टैक्स नहीं भरता है। जिन समुदायों की संख्या ज़्यादा है, obviously, उनका टैक्स का भरना भी ज़्यादा ही होगा।
मोबाइल फ़ोन देश में सबसे ज़्यादा है, उसपर जो इंपोर्ट ड्यूटी, जीएसटी, Cess, जैसे टैक्स है, वो कंज्यूमर भरते है। मतलब आप भरते है। मोबाइल फ़ोन सबके पास है।
कंपनियाँ अपने जेब से टैक्स नहीं भरती। आप जो समान उनसे खरीदते है, उसपर जो टैक्स होता है, वही वो सरकार को भरते है। जैसे GST कलेक्शन कंपनियाँ करती है और उसको सरकार को भर देती है।
कॉर्पोरेट टैक्स इनकम टैक्स की तरह है, कंपनियों से जो आप समान खरीदते है, उससे उसे जो प्रॉफिट होती है, उसपर वह टैक्स भरती है।
कंपनियाँ जो कस्टम एंड एक्साइज भरती है वह आपसे रिकवर करती है, मतलब प्रोडक्ट के कीमत में जोड़ देती है।
कंपनियों के कर्मचारी जो टैक्स भरते है, वह आपने उनकी कंपनी का समान खरीदने की वजह से उनकी कंपनी को जो प्रॉफिट होता है, उससे कंपनी, अपने कर्मचारियों को मोटी सैलरी देती है, उसपर कर्मचारी इनकम टैक्स देते है। आप समान नहीं खरीदोगे तो कर्मचारियों की इनकम टैक्स भरने की कोई औक़ात नहीं होगी।
आपका भरा हुवा टैक्स, कंपनियों ने आपसे जमा किया हुवा टैक्स, कंपनियों का कॉर्पोरेट टैक्स, और सरकार जो इंटरप्राइज़ेज़ चलाती है, उससे सरकार के पास जो धन आता है, उससे ही सरकार जनहित की योजनाएं चलाती है।
यहाँ किसी एक समुदाय को कुछ नहीं है। ऐसा प्रचार भ्रामक प्रचार है। हेट स्पीच है।
SC/ST में पीढ़ी दर पीढ़ी IAS -IPS हो रहे है -यह कपोल कल्पित कथा है ? इसके आँकड़े कहाँ है। UP के पांच IAS/IPS जैसे एस. डी बगला, माता प्रसाद, पी एल पुनिया, हरीश चंद्रा (सभी IAS ), जंगी सिंह, श्री राम अरुण (सभी IPS )
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समाजवादियों का पुराना इतिहास-
2004 में अनिल अंबानी ने उत्तर प्रदेश से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और राज्यसभा में प्रवेश किया, लेकिन उन्हें समाजवादी पार्टी का पूरा समर्थन प्राप्त था। हालांकि, लाभ के पद विवाद के बीच उन्हें 2006 में राज्यसभा से इस्तीफा देना पड़ा था।
विश्व रैंकिंग 2025 में मेरा नाम
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मैं JNU में नंबर 1, भारत में 11वें और एशिया में 134वें स्थान पर हूँ यह रैंकिंग मुझे समाज विज्ञानियों /वैज्ञानिकों की AD वर्ल्ड रैंकिंग 2025 द्वारा प्रदान की गयी है है. इसे साझा करते हुए गर्व महसूस हो रहा है।समाज का बहुत बहुत साभार.
जब तक अनुसूचित जाति/जनजाति के शिक्षकों का IIT में प्रतिनिधित्व नहीं बढ़ेगा,तब तक इन पहचानों के छात्रों के साथ भेदभाव जारी रहेगा।
इसलिए,दलित छात्रों के खिलाफ भेदभाव को रोकने के लिए IIT में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के शिक्षकों की संख्या में जल्द से जल्द वृद्धि की जानी चाहिए।
आरक्षण क्यों
दलितों/जनजाति/पिछड़ों के प्रतिनिधित्व पर किस समाज में कितनी घृणा,अनादर,निकृष्ट भाषा प्रयोग,ईर्ष्या भरी हुई है यह मेरी 48 शब्द की पोस्ट पर दी गयी प्रतिक्रियाओं से प्रमणित हो गया।कल्पना कीजिये अगर संवैधानिक प्रतिनिधित्व न होता तो क्या दलित इस समाज में स्वतंत्र रह पाते?
1. बहुचर्चित सामाजिक न्याय की ज़रूरत व माँग भी यही है कि यूपी सरकार माननीय न्यायालय में यदि इस बात की पुरज़ोर पैरवी करती कि एससी समाज के हित व कल्याण हेतु ’स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान’ के धन से ज़िला सहारनपुर, अम्बेडकरनगर, क़न्नौज व जालौन में बनाये गये मेडिकल कालेजों में एससी वर्ग हेतु अतिरिक्त आरक्षण की व्यवस्था 50 प्रतिशत के सामान्य आरक्षण से अलग है और इस व्यवस्था से स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान की भरपूर उपयोगिता साबित होती है, तो शायद माननीय कोर्ट इस पर ज़रूर सकारात्मक विचार करता और इस पर रोक नहीं लगाता।
2. किन्तु अब जबकि मा. हाईकोर्ट ने इस पर पाबन्दी लगा दी है और मेडिकल दाख़िला भी अब यहाँ इससे प्रभावित है, तो ऐसे में यूपी सरकार तुरन्त मा. सुप्रीम कोर्ट में आपेक्षित राहत के लिये अपील करे तो यह उचित होगा।
उत्तर भारत में बुद्धा, रैदास, अम्बेडकरवाद, फुले और पेरियार के विचारों को फैलाने का श्रेय जाटव समाज को जाता है.
जाटव समाज ने ही अपनी कड़ी मेहनत से उत्तर भारत में अब तक सबसे बड़ा बहुजन आंदोलन खड़ा किया है.
जैसे ब्राह्मण समाज सवर्ण समुदाय का मार्गदर्शक है, उसी तरह जाटव समाज बहुजन समाज का मार्गदर्शक है.
ब्राह्मण समाज के साथ क्षत्रिय, बनिया, खत्री और कायस्थ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं.
इसी तरह दलित समाज की सभी जातियां को भी जाटव समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहिए.
इस समाज ने जो सहा है, जो जातीय अपमान झेला है और जो सामाजिक कार्य किया है वो किसी और जाति ने नही किया है.
अपने साथियों की इस बात से सहमत हूँ कि जाटव और वाल्मीकि समाज को छोड़कर बाकी दलित जातियां अंबेडकर जयंती भी नही मनाते.
इस समाज का मैं हमेशा कर्जदार रहूंगा.
I Love You, Brothers ❤️
सूचना…
जाति आधारित भेदभाव को समाप्त करने वाले UGC Regulation के मामले में हमारी टीम सुप्रीम कोर्ट में मुकदमें में हिस्सा बनेगी।
चूँकि सरकार से निकलकर माला कोर्ट के पाले में जा चुका है, और अनुसूचित जाति की तरफ से इसमें कोई पक्ष रखने वाला चाहिए।
अंजना ओम कश्यप ने यहाँ अपने पद का ही इस्तेमाल किया है और उनका जातिगत अहंकार साफ़ तौर पर दिखाई देता है। उन्होंने साफ़ कह दिया चलो, हमारे चैनल से हटो। मानो यह चैनल उनकी जागीर हो।
यही सब तो विश्वविद्यालयों में भी होता है। कह दिया जाता है चलो, यहाँ से निकलो, तुम्हारे लिए कोई नौकरी नहीं है। तुम्हारे लिए यहाँ दाख़िले में भी जगह नहीं है जैसे विश्वविद्यालय उनके पिता और दादाजी की विरासत हो।
साथियों यूपी के आजमगढ़ मे लोको पायलट के हत्यारों को फाँसी हो इस मांग को लेकर बहुजन समाज पार्टी के सिपाही और जनता मैदान मे उतर चुकी है!धरना प्रदर्शन जारी है!
@Mayawati
अखिलेश यादव दलितों के एक तबके का वोट पाने के बावजूद भी उनके मुद्दे पर चुप रहते हैं, उससे उनके PDA का यह मतलब समझ में आया है।
P- परिवार पहले, फिर पिछड़ा, फिर Poor (Upper Caste)
D- दलित उसके भी बाद
A- अल्पसंख्यक आख़िर में
सोचिए कि PDA की जगह ADP, DAP, ADP भी तो सोचा जा सकता था।
BSP सरकार में 4 मेडिकल कॉलेज SC/ST के स्पेशल प्लान बजट से बने थे, जिसकी वजह से वहाँ ज़्यादा सीटें आरक्षित थी।यह व्यवस्था 10 साल से ज़्यादा समय चल रही थी।
साबरा अहमद की याचिका पर हाईकोर्ट का एक जज इस व्यवस्था को ख़ारिज कर देता है। वकील थे मोतीलाल यादव।
@myogiadityanath सरकार….
सुप्रीम कोर्ट से ख़बर आ रही है कि वहाँ कर्मचारियों कि लिए संविधान प्रदत्त आरक्षण लागू कर दिया गया है। सोचिए ऐसा होते हुए 75 साल हो गया।
इस संस्था की ज़िम्मेदारी आरक्षण लागू कराने की थी। मेरी नज़र में यह सबसे जातिवादी संस्था हैं।
मणिपुर का दंगा न्यायपालिका के निर्णय की वजह हुआ था। सबसे पहले कलेजियम ने दक्षिण भारत से एक जज को मणिपुर हाईकोर्ट ट्रांसफ़र किया जिसको वहाँ की परिस्थितियों की जानकारी नहीं थी।
उस जज ने आदेश दिया कि मैती समुदाय को ST में शामिल किया जाय जबकि संविधान यह पावर पार्लियामेंट को देती है।
@satishmisrabsp Thanks a lot Sir, for your kind words of appreciation. This will definitely boost morale of a number of academicians. Your words are example for many leaders in Bahujan Movement. They will also learn to appreciate others for their genuine achievements. With Warm Regards.
पता नहीं कितने लोगों की कमाई का रुपया जलकर राख हो गया?
जज की नामौजूदगी में उसके घर में आग लगी। दमकल विभाग को एक कमरे में जले हुए नोटों के निशान मिले।
रुपये किसके थे?
क्या कलेजियम ने खेल कर दिया है?
दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर पैसा एक हफ़्ता पहले मिला था। देश की मीडिया को एक हफ़्ता तक यह मामला पता ही नहीं चला।
एक हफ़्ता के अन्दर इस केस में क्या क्या खेल कर दिया गया होगा यह सोचा भी नहीं जा सकता?
दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर में आग लग गयी। फायर ब्रिगेड के अधिकारियों को बड़ी संख्या में पैसा मिला है। कलेजियम ने जज का ट्रांसफ़र इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया है।
आगेपैसे की ज़िम्मेदारी ले लेने के लिए किसी रिस्तेदार को लाया जाएगा, जज बच जाएगा।
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