भारत स्वतंत्र नहीं है।BHARAT IS BHARAT NOT INDIA.सनातन धर्म में जीव हत्या जघन्य अपराध है।आरक्षण अयोग्यता की पहचान।महात्मा तो गोडसे हैं।मनुस्मृति सृष्टि संविधान
रुझान आने लगे हैं। सवर्णों के प्रति दीवारों पर लिखे भाषणों से उनके सार्वजनिक रेप और हत्या की धमकी से आगे बेटियाँ माँगने और न मिलने पर हत्या होने लगी है। 15 साल की लड़की पर जबरन विवाह का दवाब, छेड़ना और SC/ST एक्ट की धमकी। मोदी की लगाई विषबेल है ये।
सच में खून खौल रहा है, जब से यह विडियो देखा।
आज तक निस्वार्थ भाव से भाजपा और हिन्दुत्व के लिए लिखता रहा। चाहे लोग कमेंट आ कर गालियाँ दिए, चाहे IT सेल का होने का आरोप लगाते रहे।
पर मैं भाजपा,
और हिन्दू एकता बनाए रखने के लिए लिखता रहा।
अब कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो भाजपा और मेरा साथ बस यहीं तक रहेगा। अब औरों की तरह जातंकी बनने मे मुझे भी देर नहीं।
जय श्री राम 🚩
@narendramodi@PMOIndia
जबलपुर की 17 वर्षीय जैन किशोरी की मृत्यु केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि हमारे समाज और व्यवस्था पर एक गहरा प्रश्न है। जिस उम्र में एक बेटी को सपने देखने चाहिए थे, उस उम्र में उसे फर्जी Sc St एक्ट के भय, अपमान और प्रताड़ना ने घेर लिया।
यौन उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग के बाद जब परिवार न्याय माँगने आगे बढ़ा, तब उनके सामने एक और Sc St एक्ट नाम का भयावह हथियार खड़ा कर दिया गया।
SC-ST एक्ट जैसे काले कानूनों का उद्देश्य ऐतिहासिक रूप से पीड़ित वर्गों को सुरक्षा देना रहा है। यह कानून समाज में समानता और न्याय के लिए बनाया गया था। परंतु जब ऐसे संवेदनशील कानूनों का उपयोग न्याय के लिए नहीं, बल्कि बदले और दबाव के लिए किया जाने लगे, तब यह व्यवस्था की सबसे बड़ी विफलता बन जाती है। आज Sc St एक्ट काला कानून बन चुका है जिससे पूरा भारत परेसान है चाहे सामान्य वर्ग हो या ओबीसी हो या सिक्ख हो या फिर जैन समाज हो।
इस घटना में कथित रूप से आरोपियों ने लड़की के पिता, जो जैन समाज के एक साधारण ऑटो चालक हैं, पर झूठा मामला दर्ज कराकर परिवार को और अधिक डराने का प्रयास किया। सोचिए, एक गरीब परिवार पहले ही बेटी की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहा था, और ऊपर से Sc St जैसे काले कानूनी शिकंजे में फँसाकर उसे तोड़ दिया गया।
कानून का दुरुपयोग सबसे पहले न्याय को मारता है। और जब न्याय मरता है, तब सबसे पहले बेटियाँ मरती हैं—कभी आग में, कभी डर में, कभी आत्मा के भीतर।
आज आवश्यकता इस बात की है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जाँच हो, झूठे मामलों पर कठोर कार्रवाई हो, और कानून को प्रतिशोध का साधन बनने से रोका जाए। क्योंकि कानून अगर ढाल के बजाय हथियार बन जाए, तो वह समाज की रक्षा नहीं, विनाश करता है।
उस किशोरी की पीड़ा हमें चेतावनी देती है—कानून काला है, और उसका दुरुपयोग समाज के लिए अभिशाप बन चुका है। अब समय है कि न्याय के नाम पर अन्याय को रोका जाए, ताकि कोई और बेटी इस तरह आग में न जले।
आज की घटना ने अंदर तक झकझोर दिया।
किसी लड़की को उसकी जाति के नाम पर घेरना, डराना, अपमानित करना — यह विरोध नहीं, सीधा अन्याय है।
विचारों से असहमति हो सकती है, लेकिन किसी की गरिमा पर हमला कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आज अगर हम चुप रहे, तो कल किसी और के साथ यही होगा।
देश को बहस चाहिए, हिंसा नहीं।
न्याय चाहिए, भीड़तंत्र नहीं।
हम हर उस आवाज़ के साथ खड़े हैं जो सम्मान और सुरक्षा की मांग करती है.
#Justice_For_रूचि_तिवारी
इसलिए चाहिए UGC.....
ये ब्राह्मणों को खुलकर गाली दे रहे थे
तो एक लड़की ने इसका विरोध कर दिया...
देखिये कैसे खुद को दलित शोषित वंचित पिछड़े दबे कुचले कहने वाले जानलेवा भीड़ बनकर एक
लड़की की हत्या को उतारू हो गए...
मोदीजी...देख लीजिये...अगर देख सकें तो...
Share करो सनातनियों✊