Festivals are over… and the real battlefield begins again.
From lights and diyas to files and pressure, nothing changes for bankers.
While others return to routine, we return to targets, harassment and exploitation from management and sometimes even customers.
Yet we stand united, fighting for rights, dignity and respect.
Because when injustice becomes routine, resistance becomes our duty.
#BankersLife #UFBU #FightForJustice #WeAreBankers #VoiceOfBankers
🪔 एक दिन परिवार के साथ दीपावली के बाद…
छत्तीसगढ़ सरकार ने 21 अक्टूबर (मंगलवार) को गोवर्धन पूजा पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है।
हम माननीय मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी एवं उत्तर प्रदेश सरकार से निवेदन करते हैं कि
दीपावली के अगले दिन (21 अक्टूबर 2025) कर्मचारियों को अपने परिवार के साथ यह पर्व मनाने का अवसर प्रदान करें।
यह निर्णय कर्मचारी कल्याण, पारिवारिक मूल्यों और भारतीय परंपरा, तीनों का सम्मान होगा।
सैकड़ों मील दूर अपने गृह जनपदों से सेवाएँ दे रहे कर्मचारियों के लिए यह कदम एक बड़ी राहत बनेगा।
👉 छत्तीसगढ़ ने बैंकर्स को छुट्टी की सौगात की है जारी।
अब है यूपी सरकार की बारी
#उत्तरप्रदेश #दीपावली #गोवर्धनपूजा #HolidayForEmployees #YogiAdityanath
BASTARD RM of @centralbank_in
This is not leadership. This is abuse.
RM (Etawah region) of #Central_Bank was caught on call threatening a BM in the most abusing & shameful language:
“साले, बेशर्म, हरामखोर, ऐसी जगह फेकूँगा कि नानी याद आएगी…
ब्रांच में तुझे घुसने नहीं दूंगा…
नौकरी छोड़ दे,
अपनी प्रॉब्लम बाद में बताना।”
Yes - These are his exact words. I have the call recording.
He wasn’t asking for performance. He was ordering a ₹50,00,000 SMA reduction under threat. Not guidance, not support - pure intimidation:
- Repeated personal abuses (साले, हरामखोर, बेशर्म)
- Direct career threats (कल से ब्रांच में घुसने नहीं दूंगा)
- Even family intimidation (नानी याद आएगी)
-Forcing loan manipulation (50 लाख आज ही निकालो)
This is criminal intimidation, not management. This is how RMs are breaking staff, destroying morale, and pushing illegal practices in the name of “targets.”
👉 Central Bank HQ & vigilance must answer:
❓Why is such a man allowed to sit as Regional Manager?
❓Is abusing staff and threatening families now “official policy”?
❓Why should any Branch Manager trust leadership if this is tolerated?
Can @rbi@dfs take some action:
1. Immediate suspension of this RM.
2. Independent investigation of all his directives & pressure tactics.
3. Written assurance that whistleblowers/Branch Managers won’t be victimised or transferred.
4. External audit of SMA reduction orders across the region - how many “targets” are just intimidation?
Central Bank staff are not slaves.
Threats like “साला, बेशर्म, हरामखोर, नानी याद आएगी… तुझे घुसने नहीं दूंगा” will not silence us. They will only expose the rot.
This recording is public evidence now.
No cover-up possible.
Action in 48 hours - the next stop is police FIR,
regulator complaint,
media escalation.
#BankingEthics #AccountabilityNow #StopHarassment
इंदौर से कटनी के लिए नर्मदा एक्सप्रेस में सवार होकर निकली अर्चना तिवारी का 8 दिन बीत जाने के बावजूद भी कुछ पता नहीं चल सका है. कटनी की रहने वाली अर्चना तिवारी 7 अगस्त को रक्षाबंधन मनाने के लिए अपनी घर जाने वाली ट्रेन से लापता हो गई थी. रानी कमलापति स्टेशन स्थित जीआरपी ने 8 दिन बीत जाने के बावजूद अर्चना का कोई सुराग नहीं मिलने पर देशभर के सभी SHO और SP को ऑल इंडिया सर्चिंग आदेश जारी कर दिया है.
पूरी ख़बर : https://t.co/JYSW5kMuEH
#MPNews #archanatiwari #railway #TRAIN #ATCard #AajTakSocial
नमस्कार दोस्तों ,
बैंक कर्मी भी हमारे ही बीच से आते हैं , कोई हमारे भाई हैं , कोई दोस्त, कोई बहन, कोई पत्नी या पति। फिर भी लोगों में उनके प्रति इतनी चिढ़ क्यों है?
आखिर सरकार बैंक कर्मचारियों को इस देश का हिस्सा क्यों नहीं मानती?
क्या उन्होंने अपनी आंखें बंद कर ली हैं, या फिर उनके साथ हो रहे अन्याय को देखना ही नहीं चाहती?
अब तो हालात ऐसे हैं कि @TheOfficialSBI के आरएम के खिलाफ फिर से शिकायत हुई है।
इस बार आरोप है कि वे स्टाफ से अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं जैसे :
मक्कार , स्टूपिड , बेहूदा , सुअर के बच्चे , हरामखोर , कमीना
और भी कई गालियां , जैसा कि पत्र में लिखा है।
क्या ऐसे व्यक्ति को इस पद पर बने रहने का अधिकार है?
@DFS_India@FinMinIndia@LabourMinistry — जवाब देश जानना चाहता है।
अहमदाबाद में UCO बैंक कर्मी जहरीली कार्यसंस्कृति के खिलाफ धरने पर हैं। PSU बैंकों की हालत ऐसी है मानो बिना ड्राइवर की बस दौड़ रही हो > दिशा भी नहीं , ब्रेक भी नहीं, और ऊपर से प्रबंधन को लगता है सब ऑल इज वेल है।
Life of an Indian Banker
- Join bank with dreams to serve and grow
- Taught to behave like a disciplined employee
- Expected to handle work beyond job role early
- Face restrictions on leave, timing, and freedom
- Judged more on targets than actual service
- Compete in transfers, promotions, and postings
- Pressured to achieve unrealistic numbers
- Constantly told what not to say to customers/management
- Adjust to new branch, new team, new pressure
- Care for customers, bosses, and colleagues’ needs
- Personal life often takes a backseat
- Dreams of a balanced life sacrificed silently
- Work day and night, mostly unrecognise
- Retire exhausted or collapse early
आजकल बैंक का नाम सुनते ही लोग अक्सर स्टाफ पर गुस्सा निकालते हैं , उन्हें कामचोर समझते हैं , जबकि हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। एक समय था जब बैंक की नौकरी अपेक्षाकृत आसान थी , लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।
डिजिटल इंडिया के इस दौर में बैंक देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं। रोजाना करोड़ों का लेन-देन , खातों का प्रबंधन , लोन प्रोसेसिंग , सरकारी योजनाओं का वितरण , केवाईसी अपडेट, डिजिटल फ्रॉड से निपटना और लगातार बदलते नियमों का पालन ये सब एक साथ बैंक कर्मियों पर भारी दबाव डाल रहे हैं।
स्टाफ की संख्या लगातार घट रही है , लेकिन वर्कलोड लगातार बढ़ रहा है। कई बार छुट्टियों और संडे को भी कर्मचारियों को ड्यूटी पर बुलाया जाता है। टारगेट का दबाव , तकनीकी समस्याएं , और ग्राहक सेवा की जिम्मेदारी यह सब मिलकर बैंक कर्मचारियों को मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से थका देता है।
फिर भी, इन्हीं कर्मचारियों की मेहनत से ग्रामीण क्षेत्रों तक वित्तीय सेवाएं पहुंच रही हैं , सरकारी योजनाओं का लाभ सही हाथों तक पहुंच रहा है , और देश का वित्तीय तंत्र 24x7 चलता है।
अगर बैंकिंग सेक्टर में समय रहते सुधार नहीं किए गए जैसे स्टाफ बढ़ाना, कार्य समय का संतुलन , डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और मज़बूत करना तो इसका असर सीधे ग्राहकों की सेवा गुणवत्ता पर पड़ेगा और सिस्टम पर भरोसा भी कमजोर हो सकता है।
केरल के एक सिनेमैटोग्राफर शेंटो ने खराब सड़कों के लिए टोल देने से मना किया। न बहस की, न झुके बस 9.5 घंटे वहीं खड़े रहे, जब तक उन्हें फ्री में जाने नहीं दिया गया।
सेवा नहीं मिली, तो पेमेंट क्यों दें?
👉 जब लड़ाई हक की हो, तो सिस्टम भी घुटने टेकता है।
👉 ये इंतज़ार नहीं, एक ठोस विरोध था 9.5 घंटे की खामोशी में पूरा सिस्टम हिला दिया।
#YeThikKarkeDikhao
उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक का दुर्भाग्य
#शकुनि + #दुर्योधन = #कृष्ण या #भीष्म ?
#UPGB में अमलगमेशन के बाद नए चेयरमैन तो भेजे गए, पर पुराने अध्यक्ष को हटाया नहीं गया।
अब दो-दो कप्तानों वाली ये नाव बीच मंझधार में डूबी जा रही है।
नए अध्यक्ष E-Dena से होने के कारण BOB के वालो से न तो कंट्रोल ले पा रहे हैं, न सिस्टम समझ पा रहे, न ही भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम लगा पा रहे है।
एक GM साहिब, जो जनवरी में रिटायर हैं, ट्रांसफर के नाम पर सुविधा शुल्क वसूलने में लगे हैं।
9000 से अधिक ट्रांसफर रिक्वेस्ट पड़ी हुई धूल फाँक रही है लेकिन मुश्किल से 10% पर कार्यवाही हुई है और उनमे भी कोई पारदर्शिता नहीं है।
और सबसे शर्मनाक - पूर्व अध्यक्ष उन्हें पूरा संरक्षण दे रहे हैं, ताकि जाते-जाते वो अपनी जेबें भर सकें।
नए चेयरमैन इतने असहाय लग रहे है कि GM का विभाग तक नहीं बदला पा रहे है। जिस तरह से ट्रांसफर लिस्ट RMs के वॉट्सएप पर भेजी जा रही है उससे इनके भ्रष्टाचार का साफ़ पता चल रहा है लेकिन चेयरमैन लिस्ट सार्वजनिक करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे है।
और ना ही लिस्ट पब्लिश करा पा रहे है। जमकर भ्रष्टाचार होने के कारण ट्रांसफर लिस
बैंक का दिन-ब-दिन स्टाफ पिसता जा रहा है, हज़ारों परिवार मानसिक तनाव में हैं,
जबकि@bankofbaroda धृतराष्ट्र की तरह आँखे मूँदे बैठा है और #शकुनि (पूर्व अध्यक्ष) #दुर्योधन (GM) के सहारे #हस्तिनापुर (UPGB) की बर्बादी तय करने में लगा है।
अब देखना है कि क्या नए अध्यक्ष #कृष्ण की भाँति कुछ कर पाएंगे या #भीष्म की तरह वो भी इतिहास में एक लाचार चेहरा बनकर रह जाएँगे ?
#UPGB #BankersVoice #BankCorruption #TransferScam #BOBWakeUp
X पर आवाज उठाने का प्रभाव और #UPGB मैनेजमेंट का शोषण का नया तरीका।
कई बार UPGB के साथी पूछते थे - भाई आप आए आपके जैसे और लोगो के @X पर लिखने या मैनेजमेंट को पत्र भेजने से कुछ हासिल भी होता है क्या?
दोस्तों,
उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में देर रात तक मीटिंग्स, बेतहाशा टारगेट, कंट्रोलिंग ऑफिसर्स की अभद्र भाषा और मानसिक दबाव के खिलाफ जब हम सबने यहाँ X पर खुलकर आवाज उठाई, एक-एक RM का नाम लेकर सच्चाई रखी, और प्रबंधन को कुछ पत्र लिखे
तो उससे फर्क तो पड़ा और दबाव में ये पत्र तो निकाला गया। लेकिन इसे पढ़कर लगता है कि ये राहत नहीं, बल्कि शोषण का एक और तरीका खोज लिया गया।
चेयरमैन साहब को शायद अब भी यह मालूम नहीं कि उनके GM श्री RL BUNKAR ही सबसे ज्यादा बदतमीजी से बात करते हैं और यह कोई सामान्य स्टाफ की नहीं, बल्कि RMs की फीडबैक है।
बाकी बैंक का टाइम 9:30 से 5:30 है, और कहते हैं मीटिंग 4 से 6 बजे तक चलेगी। यानी तय है कि मीटिंग देर तक खिंचेंगी। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। मीटिंग का समय उपयुक्त होना चाहिए और 17:30 पर स्वतः खत्म होना चाहिए।
वाह, एक समय में 5-6 अभियान! इनमें से 2 अभियान तो GM श्री GHANSHYAM के फेवरिट हैं care health और India First जिनसे मोटा पैसा आता है समझ नहीं आता इतन पैसे कि क्या करेंगे यहाँ से भी पैसा और ट्रांसफर में तो चल ही रहा है। बाकी PMJJBY, PMSBY, APY। अब 6 अभियान लिख दिए, तो आगे 3-4 और ठेल देंगे। आखिर कर्मचारियों को चैन कहां मिलेगा?
सप्ताह में 3 मीटिंग मतलब आधिकारिक मुहर लग गई कि कम से कम 3 से 4 बार तो बेइज्जत होना ही पड़ेगा।
सच में, अगर इतने अभियान चलाने हैं, तो शाखाओं में 10 अलग-अलग अभियान मैनेजर की भर्ती कर लीजिए।
चेयरमैन साहब, आपने दबाव में आदेश तो जारी किया, लेकिन इसे पढ़कर यही लगता है कि यह राहत नहीं, बल्कि शोषण की नई योजना है।
चेयरमैन साहिब आपको इस आंशिक राहत के लिए आभार लेकिन आपसे अनुरोध है कि इस पत्र को तुरंत संशोधित कर इसे कर्मचारियों के अनुकूल बनाया जाए। अन्यथा यह आदेश राहत नहीं, बल्कि शोषण का नया टूल ही साबित होगा।
#Banking #WorkLifeBalance
#bankersvoice
UPGP प्रबंधन की घिनौनी हरकत- भ्रष्टाचार छुपाने के लिए नीचे तक गिर गए!
UPGP (उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक) का प्रबंधन अब तक की सबसे शर्मनाक हरकत पर उतर आया है।
मेरे द्वारा हाल ही में UPGP के प्रबंधन को एक पत्र लिखकर बैंक में चल रहे भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतें और कुछ ज्वलंत मुद्दे उठाए थे। पत्र में मैंने अपना नाम, पता और फोन नंबर स्पष्ट रूप से दिया था, ताकि संवाद में कोई बाधा न हो।
लेकिन जवाब देना तो दूर, प्रबंधन की पूरी ताकत इस बात में लग गई कि
- ये आदमी हमारी पोल क्यो खोल रहा है
- आख़िर इसे कैसे रोका जाए?
पहले तो बैंक के कुछ नेताओ और स्टाफ से इनडायरेक्ट रूप से कॉल कराये गए कि आख़िर ये सब करके क्या मिलेगा फिर मेरे परिचितों को कॉल करके मुझसे जुड़ी निजी जानकारी उगलवाने की कोशिश की।
क्या यही है एक मैनेजमेंट का चरित्र?
पता नहीं चेयरमैन सच से डर गए? या भ्रष्टाचारियों को बचाने में लगे है?
UPGP प्रबंधन को साफ चेतावनी है कि अगर तुम्हारे अंदर जरा सी भी नैतिकता बची है, तो अपनी ताकत मेरी पहचान खोजने में नहीं, बैंक में हो रहे घोटालों की जड़ खोजने में लगाओ।
आज फिर से दोबारा पत्र भेजा है तो अब या तो जवाब दो
या मान लो कि तुम खुद इस भ्रष्टाचार में शामिल हो।
UPGB प्रबंधन की चुप्पी, खुद उनके अपराध की गवाही बन रही है।
अब देखना ये है कि ये जवाब देंगे, या हर बार की तरह मुँह छुपा लेंगे?
“एक जागरूक बैंककर्मी जो डरता नहीं, लड़ता है।”
UPGB TRANSFER PROCESS = #AREA51
UPGB प्रबंधन जिस तरीके से ट्रांसफर लिस्ट तैयार कर रहा है, वो NASA के एलियन रिसर्च जैसा लग रहा है
सुपर सीक्रेट, रहस्यमयी और पूरी तरह से अपारदर्शी।
उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में ट्रांसफर प्रक्रिया को जिस तरह से गुप्त रखा जा रहा है, वो वाकई चौंकाने वाला है। एक साधारण प्रक्रिया को इतना जटिल और छुपा-छुपा कर क्यों किया जा रहा है?
- पूरी ट्रांसफर लिस्ट सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं जारी की जा रही?
- क्यों उसे चुपचाप RO, RM को व्हाट्सएप पर भेजा जा रहा है?
- क्या कुछ छिपाया जा रहा है?
- क्या इसमें भारी भरकम रिश्वतबाजी शामिल है?
- अब तक शक GM पर था, लेकिन क्या चेयरमैन भी इसमें शामिल हैं?
- और आख़िर यूनियन और उनके नेता क्यो चुप है।
इस तरह की गोपनीयता सिर्फ संदेह को जन्म देती है। स्टाफ का मनोबल गिर रहा है, विश्वास टूट रहा है, और बैंक की गरिमा को ठेस पहुंच रही है।
अब तक लग रहा था कि इस घोटाले में केवल GM ही शामिल है, लेकिन जिस तरह से चीज़ें हो रही हैं, अब साहिब (चेयरमैन) की भूमिका भी संदिग्ध लग रही हैं।
इस तरह की गोपनीयता सिर्फ संदेह को जन्म देती है। स्टाफ का मनोबल गिर रहा है, विश्वास टूट रहा है, और बैंक की गरिमा को ठेस पहुंच रही है।
जिस तरह से ट्रांसफर लिस्ट को छुपाया जा रहा है उससे संदेह और असंतोष पैदा हो रहा है।
@bankofbaroda यदि आप इस विषय में तुरंत हस्तक्षेप करते हुए UPGB मैनेजमेंट को आदेश दे कि
- पूरी ट्रांसफर लिस्ट को एक बार में सभी के लिए सार्वजनिक किया जाए
- यदि कोई वैध कारण है तो स्पष्टीकरण दिया जाए
- और यदि भ्रष्टाचार की आशंका हो तो आंतरिक जांच शुरू की जाए
पारदर्शिता कोई एहसान नहीं, हमारा अधिकार है।
UPGB को रिश्वत का अड्डा मत बनने दीजिए।
हम सभी चाहते हैं कि बैंक की गरिमा बनी रहे, स्टाफ का मनोबल ना टूटे, और एक स्वस्थ, भरोसेमंद माहौल बना रहे।
CANARA BANK के गुवाहाटी सर्कल की बहादुर महिला क्रांतिकारी बहनो को मेरा सैल्यूट! 🫡
आज देखकर लगा कि चलिए कोई तो है जिसका खून खौलता है
जब यूनियन के पुरुष नेता चुपचाप कुर्सियों से चिपके बैठे हैं,
तो इन बहनो ने झांसी की रानी बनकर सीधा मौर्चा संभाल लिया
ऐसा लग रहा है कि @canarabank के अधिकारी शोषण की सारी हदो को पार कर देना चाहते है।
28.07.25 को एक महिला CSA के साथ सर्किल ऑफिस के अधिकारी ने बदतमीज़ी की।
और जवाब में इन महिला कर्मचारियों ने सर्कल ऑफिस घेर लिया और उसके सामने डटकर प्रदर्शन किया
Circle Office हाय हाय
Circle Office मुर्दाबाद !
ये सम्मान मांग रही हैं, भीख नहीं।
इन्होंने जो साहस दिखाया इसे बहादुरी कहते है
अब तो कम से कम खुद को नेता कहने वाले नामर्दों को शर्म आनी चाहिए।
अब यूनियन सिर्फ़ फोटो खिंचवाने और बधाई संदेश देने के लिए रह गई है?
जब नकारा नेता सो रहे हो तो महिला कर्मचारियों को मैदान में आना ही पड़ेगा।
अब भी नहीं जागे तो यूनियन शब्द से “यूनिटी” हटा दीजिए।
ये विद्रोह नहीं इज़्ज़त की माँग है। और अब डर कर जीने का वक्त गया।
आदरणीय मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी आपके राज में अयोध्या जैसे महत्वपूर्ण स्थल से बदमाशों ने बैंक के अधिकारी का अपहरण कर लिया l रास्ते में सामान और नकदी छीन ली बेहोश अधिकारी को मृत समझकर आधे रास्ते में गाड़ी से बाहर फेंक दिया l
We Demand Exemplary Action
@Uppolice
इंडियन बैंक में यूपी पुलिस की गुंडागर्दी
लखनऊ के एक बैंक में एक सिपाही वर्दी पहनकर आया और महिलाओं के सामने खुलेआम बोला:
मैं पुलिस में दीवान हूँ, जिसको बोलना है बोल दो, जो उखाड़ना है उखाड़ लो! और फिर मां-बहन की गालियों की बरसात!
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, क्या अब आपकी पुलिस बहन-बेटियों को खुलेआम गाली देगी। उनकी मैया चो…गी और आप खामोश रहेंगे?
प्रधानमंत्री @narendramodi जी, ये यूपी में कैसा रामराज्य है?
@Uppolice अब गुंडई की यूनिफॉर्म बन चुकी है?
क्या वर्दी अब महिला अपमान का लाइसेंस है?
- अगर यही हरकत किसी आम नागरिक ने की होती,
क्या पुलिसवाले उसके घर नहीं घुस जाते?
- पर जब खुद सिपाही ही गाली दे रहा हो, तो आपके पुलिसकर्मी चुप क्यों खड़े थे? क्या सबका खून ठंडा हो गया था?
@AmitShah@dgpup क्या आपमें इतनी हिम्मत है कि इस गालीबाज पुलिसिये को टर्मिनेट कर सको?
या फिर वही पुराना खेल - Inquiry, Suspension, और फिर Transfer?
सीएम साहिब क्या वर्दी वाला दरिंदा आपकी शह पर ऐसे बर्ताव कर रहा है?
क्या कल को आपकी पुलिस किसी की मां को गाली देगी और कहेगी
“मुख्यमंत्री हमारा है, जो उखाड़ना है उखाड़ लो”?
#ShameOnUPPolice
#TerminateDarogaNow
#YogiJawabDo
#BankMeinGundagardi
#RespectWomen
#PoliceOrGunda
#StopPoliceTerror
#PublicQuestionsYogi
#bankersvoice
मैं खुद एक बैंकर हूं, और ये पोस्ट देखकर थोड़ी देर को लगा कि शायद अगला स्टेप होगा “EMI माफ करवाने की यूनियन बना लो!”
हाँ, अगर रिकवरी एजेंट बदतमीज़ी करता है, धमकाता है या रात को नींद खराब करता है तो पूरा हक़ बनता है शिकायत करने का, FIR करने का।
लेकिन ये मत भूलिए कि लोन लेने वाला कोई मजबूर पीड़ित नहीं होता, वो एक समझदार व्यक्ति होता है जिसने खुद दस्तखत करके पैसा लिया होता है।
अब EMI भरनी है तो वो “धर्म संकट” कैसे हो गया?
- EMI नहीं भर सकते? तो बैंक से बात करो, रीस्ट्रक्चरिंग कराओ, लेकिन “मैं नहीं दूंगा और तू आएगा तो FIR कर दूंगा” ये कैसा लॉजिक है?
- बैंक का पैसा कोई फ्री का पैसा तो नहीं है ना, ये पब्लिक का पैसा है अगर कोई नहीं लौटाएगा, तो अंत में नुकसान उसी आम जनता का होता है।
रिकवरी एजेंटों की गुंडागर्दी गलत है, लेकिन
“लोन ले लो, EMI मत भरो, एजेंट आए तो कानून दिखाओ” ये सोच उससे भी ज़्यादा खतरनाक है।
थोड़ा बैलेंस रखिए जनाब,
“अधिकार” और “जिम्मेदारी” दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं।
~ साभार: EMI टाइम पर भरने वाला बैंकर