बाहर निकालना जरूरी है!
बाहर निकालो, दूनिया देखो, धोखा खाओ,
अनुभव करो, मजबूत बनो।
शक्ति ऐसे ही आएगी, वरना घर में पड़े पड़े
कब उम्र गुजर जाती है
पता भी नहीं चलता!
गणेश शंकर विद्यार्थी जी का ट्वीट viral हैं.
विद्यार्थी जी के बारे में कुछ जानकारियां और देखें उन्होंने क्या-क्य�� लिखा.
- उनकी शहादत के बाद गांधीजी ने 'यंग इंडिया’ में लिखा: “उसका खून अंत में दोनों मजहबों को आपस में जोड़ने के लिए सीमेंट का काम करेगा. कोई कृत्रिम समझौता हमारे हृदयों को आपस में नहीं जोड़ सकता. पर गणेश शंकर विद्यार्थी ने जिस वीरता का परिचय दिया है, वह अंत में पत्थर से पत्थर हृदय को भी पिघलाकर एक कर देगी. ...वह मरे नहीं, आज हम सबसे कहीं अधिक सच्चे रूप में जीवित हैं"
- विद्यार्थी जी अपनी पत्रकारिता से लोगों को देश के लिए खड़े होने का सन्देश देते थे. अलग धर्मों में भाईचारा हो इसके लिए उन्होंने खूब लिखा. देखें ‘प्रताप’ में उनका 1924 का लेख: ‘‘इस समय देश में धर्म की धूम है. उत्पात किए जाते हैं, तो धर्म और ईमान के नाम पर...रमुआ पासी और बुद्धू मियां धर्म और ईमान को जानें या न जानें लेकिन उसके नाम पर उबल पड़ते हैं और जान लेने व जान देने के लिए तैयार हो जाते हैं. .. साधारण से साधारण आदमी तक के दिल में यह बात अच्छी तरह बैठी है कि धर्म और ईमान की रक्षा के लिए प्राण तक दे देना वाजिब है. बेचारा साधारण आदमी धर्म के तत्वों को क्या जाने. लकीर पीटते रहना ही वह अपना धर्म समझता है. उसकी इस अवस्था का चालाक लोग बेजा फायदा उठा रहे हैं.’’
- 'हिन्दू राष्ट्र' पर विद्यार्थी जी ने लिखा: ‘‘हमें जानबूझकर मूर्ख नहीं बनना चाह���ए और ग़लत रास्ते नहीं अपनाने चाहिए. हिन्दू राष्ट्र-हिन्दू राष्ट्र चिल्लाने वाले भारी भूल कर रहे हैं. इन लोगों ने अभी तक राष्ट्र शब्द का अर्थ ही नहीं समझा है."
- वैसे उन्होंने संयुक्त प्रांत, करीब करीब आज का उत्तर प्रदेश, में कांग्रेस का नेतृत्व किया. उन्हें राज्य कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष भी बनाया गया.
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आज उनको पढ़ने की बहुत ज़रुरत है
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