भारतीय ब्यूरोक्रेसी में ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों का प्रतिनिधित्व उन्हें मिले आरक्षण के अनुपात में इतने वर्षों के बाद भी काफी कम है। इसके बावजूद, अपना जातीय वर्चस्व बनाए रखने की मानसिकता से प्रेरित कुछ लोग लगातार यह दुष्प्रचार करते रहते हैं कि इन वर्गों की केवल कुछ ही जातियाँ आरक्षण का लाभ उठा रही हैं। यही हाल लगभग सभी विभागों में हैं।
दरभंगा की घटना : झूठ का किला ढह गया, अब सच सामने है!
दरभंगा की घटना की सारी परतें अब एक-एक करके खुल चुकी हैं और सच्चाई सबके सामने है।
लेकिन ���स पूरे मामले में जिस तरह से इस देश की जातिवादी मीडिया और कुछ खास मानसिकता वाले पत्रकारों ने अपनी कलम का इस्तेमाल किया, उसने एक बार फिर बता दिया कि इनके लिए 'निष्पक्षता' के कोई मायने नहीं हैं।
शुरुआत में जिस तरह से एकतरफा एजेंडा चलाया गया, वह हैरान करने वाला था।
टीवी स्टूडियो में बैठकर और सोशल मीडिया ��र इस तरह का माहौल बनाया गया जैसे दलित समाज ने ही कोई अपराध कर दिया हो।
शोर मचाया गया कि "पूरे गांव को फंसा दिया गया है, निर्दोषों पर केस हो रहा है।"
लेकिन सच क्या था ? और सच क्या निकला ?
पीड़ित कौन है ?
सच तो यह है कि हमला दलित समाज के घरों पर हुआ।
महिलाओं और बच्चों तक को नहीं बख्शा गया।
आज भी परिवार के लोग अस्पताल में भर्ती हैं, उनका सबकुछ तहस-नहस कर दिया गया।
लेकिन जातिवादी मीडिया को इन पीड़ितों के आंसू नहीं दिखे, उन्हें चिंता सिर्फ हमलावरों की थी।
जब हमले का असली वीडियो सामने आया, जिसमें साफ दिख रहा है कि कैसे भीड़ ने योजनाबद्ध तरीके से हमला किया, तब जाकर इन 'कलमघिस्सू' पत्रकारों का गैंग शांत हुआ।
पोल खुल चुकी थी, इसलिए अब सांप सूंघ गया है।
अब सवाल पूछा जा रहा है कि "इतने सारे लोगों पर एफआईआर क्यों ?"
जरा सोचिए, जब हमला करने के लिए सैकड़ों की भीड़ आएगी, तो क्या पीड़ित एक आदमी का नाम लेकर चुप हो जाए ?
जब हमला भीड़ की शक्ल में होगा, तो केस भी भीड़ पर ही होगा।
पहचान के आधार पर ही नाम डाले जाते हैं और यही कानून की प्रक्रिया है।
यह हमारी एकजुटता का ही परिणाम है कि आज सच दबा नहीं।
अगर हम जैसे लोग मुखर होकर जमीन की हकीकत सामने नहीं लाते, तो ये मीडिया वाले अपराधियों को ही 'बेचारा' साबित कर चुके होते।
सामाजिक विद्वेष कभी नहीं फैलना चाहिए, यह हम सबकी जिम्मेदारी है।
लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि एक समाज चुपचाप जुल्म सहता रहे और दूसरा समाज 'जाति' के नाम पर नंगा नाच करे।
शांति तभी संभव है जब न्याय बराबरी का हो।
जो पत्रकार अपनी रिपोर्टिंग में जाति देखकर पक्ष चुनते हैं, व��� पत्रकार नहीं बल्कि समाज के दुश्मन हैं।
दरभंगा की घटना ने इनका असली चेहरा बेनकाब कर दिया है।
सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं!
#Darbhanga #SocialJustice #JusticeForDalits #MediaExposure #BahujanVoice #CasteismInMedia #TruthPrevails
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में OBC श्रेणी के लिए फिर “NFS – None Found Suitable”!
अनारक्षित और EWS में नियुक्तियाँ धड़ाधड़…
पर OBC में “कोई उपयुक्त नहीं मिला”?
जब देश की सबसे बड़ी आबादी OBC है, तो हर बार योग्य उम्मीदवार कहाँ गायब हो जाते हैं?
क्या चयन प्रक्रिया पारदर्शी है? क्या रोस्टर सार्वजनिक है?
आरक्षण अधिकार है, एहसान नहीं।
NFS की आड़ में प्रतिनिधित्व खत्म नहीं होने देंगे।
2012 में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल कॉलेज में SC-ST MBBS छात्रों को Physiology में जानबूझकर बार-बार फेल किया गया,
जबकि Anatomy और Biochemistry में वे पास थे.
हाईकोर्ट की निगरानी में री-एग्जाम हुआ, सभी छात्र पास हो गए.
संसद की भालचंद्र मुंगेकर की अध्यक्षता में Tribal Development Committee ने जातिगत भेदभाव की पुष्टि की.
कमिटी ने सिफारिश की, 10 लाख मुआवजा + SC-ST एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए.
दोषी आरोपियों के नाम है :
V.K. शर्मा (पूर्व प्रिंसिपल)
शोभा दास (HOD, Physiology)
जयश्री भट्टाचार्जी (प्रिंसिपल)
राज कपूर (प्रोफेसर)
जातिवाद का तरीका अब बदल चुका है. अब फेल कर या इंटरव्यू में कम नंबर देकर जातिवाद किया जाता है. मानसिकता वही है, तरीका बदल गया है.
अंग्रेजों ने सन 1919 में ब्राह्मण को जज बनाने में रोक लगा दी अंग्रेज कहते थे ब्राह्मणों में न्यायिक चरित्र नहीं होता ब्राह्मण जाति देखकर निर्णय लेता है।
आज भारत में 90% जज एक ही जाति से है ।
यही वजह है कि बहुजन समाज के खिलाफ हमेशा हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट से फैसले आते हैं।
तीन मामले, तीन फैसले —
▪️ OBC को 27% आरक्षण
कोर्ट केस → तुरंत स्टे
7 साल से केस, आज तक फैसला नहीं।
▪️ किसानों के खिलाफ 3 कृषि कानून
किसान कोर्ट गए → कोई स्टे नहीं
2 साल सड़क पर संघर्ष → तब जाकर क���नून रद्द।
▪️ UGC नियम
कोर्ट केस → फौरन स्टे
क्या आपको इसमें कुछ असामान्य लगता है मार्गदर्शन करे !
#OBCReservation
#FarmersProtest
#UGC
#सवाल_पूछना_जरूरी_है
@baagi_kamlendra @HemraajGurjar
@obcvijay
House rent up by 10%
Medical insurance by 14%
School fees increased 15%
But Oct'25 Inflation Data 0.48%
Fudged Inflation Data directly affect DA in Employees Pay Slip. Double LOSS to middle Class Families.
@Profdilipmandal Jo baat established hai, ki Ambedkar hi Samvidhan nirmata hai.. usko lie aap debate ki pairwi kyon kar rahe.. ye vivad kisne create karne ki koshish ki .. aur madhyasthta ...wale kauan haii
मध्य प्रदेश में एक कुशवाहा युवक को ब्राह्मण के पैर धोकर पानी पीने को मजबूर किया गया। यह 21वीं सदी नहीं, जातिवाद के अंधकार युग की तस्वीर है। यह धर्म नहीं, सामाजिक गुलामी का प्रदर्शन है। सरकार और प्रशासन की चुप्पी शर्मनाक है।
@DGP_MP@DrMohanYadav51
कुछ दिनों से मध्यप्रदेश के CM मोहन यादव पर सवर्ण समाज टूट पड़ा है. सोशल मीडिया पर शोर मचाया गया कि MP में आरक्षण 73% हो जाएगा.
तुरंत तीनों सवर्ण जातिया�� एकजुट होकर BJP पर बरस पड़ीं और कहा कि पार्टी हिन्दुओं को नाराज़ कर रही है.
BJP ने सफाई दी, OBC आरक्षण 27% ही रहेगा, 35% नहीं. अब सवाल ये है विरोध करने वाला तबका अगर हिन्दू है तो OBC कौन हैं ? क्या OBC हिन्दू नहीं.
तीन सवर्ण जातियां चालाकी से अपने विरोध को "हिन्दू सेंटीमेंट" बता देती हैं. सिर्फ़ 10% आबादी इतनी ताक़तवर कि 55% के हक़ को दबा दे.
BJP झुकती हुई नजर आ रही है क्योंकि वो अपने कोर वोटरों के ख़िलाफ़ नहीं जा सकती. ���े बात OBC कब समझेगा ?
अनिरुद्धाचार्य CJI गवई को धमकी दे रहा है- हिरणीकश्यप की तरह अपनी छाती फड़वानी हो तो बताओ।
सोचो, चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया को मार देने, बीच से फाड़ देने की धमकी दी जा रही है तो आम आदमी का क्या हश्र होगा!
हिंदू राष्ट्र का नहीं पता, आतंकी राष्ट्र तो बन चुका है।
तर्कवाद, जन अधिकार, आत्मसम्मान, वैज्ञानिक दृष्टिकोणतथा वंचितों के उत्थान के लिए आवाज़ उठाने वाले समता और स्वतंत्रता के महान पैरोकार, महान क्रांतिकारी एवं आजीवन धार्मिक अंधविश्वास, पाखंड, कर्मकांड, जातिवाद, वर्णव्यवस्थ��� व महिलाओं पर सामाजिक अत्याचार का कड़ा विरोध करने वाले महान विचारक व समाज सुधारक श्रद्धेय ई वी रामासामी जी पेरियार जी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन। #Periyar #HBDPeriyar
शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा योगदान राष्ट्रपिता महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई का है.
सर्वपल्ली राधाकृष्णन न��� जीते जी खुद के जन्मदिन पर शिक्षक दिवस मनाने की घोषणा कर दी.
इस आदमी पर अपने ही छात्र की थीसिस चोरी आरोप लगा था. इस आदमी ने कभी बहुजन समाज के शिक्षा के ��िए कोई कार्य नही किया.
असल शिक्षक दिवस 3 जनवरी है. हम सावित्री बाई फुले के जन्मदिन पर ही शिक्षक दिवस मनाया जाना चाहिए.
Salary tax : 30%
Fuel tax : 50%
GST tax : 28%
Vehicle tax : 30%
Health tax : 18%
And you get this facility in return 💔
Where is all the tax money going in India?