अक्षरधाम मंदिर हमला मामले में छह साल बाद तीन मुस्लिम युवक बरी।
अहमदाबाद की एक विशेष पोटा (आतंकवाद निवारण अधिनियम) अदालत ने अक्षरधाम मंदिर हमले के मामले में गिरफ्तार किए गए तीन मुस्लिम पुरुषों को छह साल बाद बरी कर दिया है।
अयोध्या के भदरसा क्षेत्र के बहुचर्चित गैंगरेप मामले में बुधवार को बड़ा फैसला आया। पॉक्सो एक्ट की विशेष न्यायाधीश निरुपमा विक्रम की अदालत ने समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया। अदालत ने 14 जनवरी को अंतिम सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे बुधवार दोपहर सुनाते हुए मोईद खान को सभी धाराओं से दोषमुक्त घोषित किया गया। इससे छह माह से अधिक समय से चल रहे इस हाई-प्रोफाइल मामले का अंत हो गया।
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मोईद ख़ान बरी हो गए। मोईद पर आरोप लगते ही उनकी संपत्तियों पर बुलडोज़र चला दिया गया था। अब मोईद तो बरी हो गए! तो सवाल यह है कि क्या उनकी जिन संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया गया है क्या सरकार उनका पुनिर्माण कराएगी? जिन मीडिया संस्थानों ने मोईद को बलात्कारी लिखकर/बोलकर प्रकाशित प्रसारित किया था क्या वो अपनी धूर्तता के लिए माफी मांगेंगे? जिन लोगों ने मोईद के नाम पर राजनीतिक की थी, मोईद का नाम लेकर उनके समाज के खिलाफ नफ़रती ज़हर फैलाया था, क्या वो अपने इंसान होने का परिचय देंगे? क्या वो मोईद से माफी मांगेंगे?
“मेरा बेटा भी 5 साल से जेल में है लेकिन उसका कोई नाम भी नहीं लेता।”
My son has been languishing in jail for 5 years, yet no one even mentions his name. At the solidarity meeting for political prisoners,I met the father of Shadab Ahmed, one of the 9 accused denied bail in the Delhi riots case.
‘1 करोड़ मौतें होंगी…’ मुंबई दहलाने की धमकी देने वाला ज्योतिषी, मुस्लिम दोस्त को फंसाने की साज़िश!
देखिए @Saurabh_Unmute की रिपोर्ट।
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कैसा समाज बनता जा रहा। मुस्लिम बन बम से उड़ाने की धमकी ताकि मुस्लिम फँस जाएँ। यह कैसा नफ़रती प्रयोग है भाई? भला हो पुलिस का की ऐसे लोग पकड़े गए। सच्चाई सामने आई।
ये हैं उमर ख़ालिद: देश के गरीबों पिछड़ों के बारे में चिंता करते थे। इनकी कोई भी स्पीच सुनेंगे।हर स्पीच में अहिंसा की बात करते थे।मुसलमान होने के कारण मोदी के पुलिस ने गिरफ़्तार कर रखा है।पाँच साल से इनकी ट्रायल शुरू भी नहीं हुई है, फिर भी हाई कोर्ट ने बेल नहीं दी! ये कैसा न्याय?
उमर खालिद, शरजील इमाम, खालिद सैफ़ी, मीरान हैदर ,गुलफिशा फ़ातिमा व अन्य को बिना ट्रायल किये जेल में रखकर 5 वर्ष बाद भी जमानत ना देकर अब अदालत भी कठघरे में खड़ी हो गई है, अफ़सोस कि जिस कटघरे में आरोपी खड़े होते थे आज उसमें अदालत भी खड़ी हो गई है!
पिछले 5 साल में 5 चीफ़ जस्टिस आ चुके हैं !
क्या किसी को भी ये दिखाई नहीं देता कि ट्रायल नहीं शुरू हो रहा है और लोग जेल में बंद हैं ?
: सर्वप्रिया सांगवन, जर्नलिस्ट
Breaking story: Delhi High Court refuses bail to 10 of the 18 accused in the 2020 Delhi riots conspiracy case — including Sharjeel Imam, Umar Khalid and others — FIVE years after their arrest. 5 years in which even the basic arguments have not been completed! Same court said in July: ‘With 700 witnesses, (for) how much time (can) a person be kept inside?”
So your Lordships, please tell us: is bail a right, and jail an exception or not? And what has changed between July and now? Those in power who make hate speeches become ministers/legislators, those outside the power zone are dubbed ‘anti-national’ and condemned to prison without a fair trial? Yeh Kaisa Kanoon Judge Saheb?
Pathetic… unfair .. compromised.. Mockery of justice. History will never forgive this. Its for us to continue our fight against this injustice and stand by #umarKhalid and all #PoliticalPrisoners#justasking
1,800+ days in jail without trial. Bail is the rule as per Supreme Court, but not people like Umar Khalid.
Umar Khalid has never given a hate speech. He's always talked about unity.