क्या आपने कभी जंगल जलेबी का स्वाद चखा है?
जलेबी जैसी घुमावदार फलियों वाला यह वृक्ष न केवल अपनी अनोखी बनावट के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसके फल विटामिन C और अन्य पोषक तत्वों से भी भरपूर होते हैं।
इसके फलों का सेवन कच्चे रूप में किया जाता है तथा इनसे स्वादिष्ट चटनी भी बनाई जाती है। विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में आसानी से विकसित होने वाला यह वृक्ष प्रकृति की एक अनमोल देन है।
आइए, वृक्षों को जानें, उनका संरक्षण करें और प्रकृति से अपना जुड़ाव मजबूत बनाएं।
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नीम की तरह दिखने वाला 'बकायन' जिसे चाइनाबेरी के नाम से भी कहा जाता है, प्रकृति का एक अनमोल उपहार है। त्वचा की बीमारियों के इलाज में इसकी पत्तियां, छाल और फल बेहद असरदार माने जाते हैं। बंजर और पथरीली जमीन पर भी आसानी से उगने वाले इस पेड़ की लकड़ी फर्नीचर बनाने के लिए बहुत मजबूत और टिकाऊ होती है।
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बड़ी कक्षाओं में मालूम हुआ कि मुरजबंध (palindrome) शब्द वे हैं जो उल्टे-सीधे एक समान बोले-लिखे जा सकते हैं; जैसे: नयन, नवीन, जलज, तप्त, चम्मच, नग्न, डालडा, सरस, जहाज, नमन, नवजीवन, मलयालम, वनमानव, नवभुवन, नववन, कनक, कारिका, बल्ब, रबर इत्यादि। मलयालम MALAYALAM तो हिंदी, अंग्रेजी दोनों का उदाहरण है।
मुरजबंध सूची को अपनी जानकारी से खेल-खेल में आगे बढ़ाइए।
॥सुंदर कांड॥
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई॥
भावार्थ-अयोध्यापुरी के राजा श्री रघुनाथजी को हृदय में रखे हुए नगर में प्रवेश करके सब काम कीजिए। उसके लिए विष अमृत हो जाता है, शत्रु मित्रता करने लगते हैं, समुद्र गाय के खुर के बराबर हो जाता है, अग्नि में शीतलता आ जाती है।
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#SundarKand
मैं कौन हूँ?
सात धातुओं -
रस (पोषक द्रव), रक्त (खून), मांस (मांसपेशियाँ), मेद (वसा), अस्थि (हड्डियाँ), मज्जा (नसों एवं अस्थिमज्जा का सार) और शुक्र (प्रजनन शक्ति) - से निर्मित यह स्थूल शरीर मैं नहीं हूँ।
यह शरीर जन्म लेता है, बदलता है, रोगग्रस्त होता है और अंततः नष्ट हो जाता है; इसलिए जो निरंतर बदलता है, वह मेरा वास्तविक स्वरूप नहीं हो सकता।
सुनना, स्पर्श करना, देखना, स्वाद लेना और सूँघना - इन पाँच ज्ञानेन्द्रियों द्वारा शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध का जो अनुभव होता है, वह भी मैं नहीं हूँ। इन्द्रियाँ केवल बाहरी जगत की सूचनाएँ ग्रहण करती हैं; वे स्वयं चेतना नहीं हैं।
बोलना, चलना, पकड़ना, त्याग करना और प्रजनन करना - इन कार्यों को करने वाली पाँच कर्मेन्द्रियाँ भी मैं नहीं हूँ।
वे केवल क्रिया के उपकरण हैं, कर्ता नहीं।
श्वास-प्रश्वास, पाचन, संचार और शरीर की अन्य जीवन-गतिविधियों को संचालित करने वाले प्राण और पाँच वायु भी मैं नहीं हूँ, क्योंकि वे भी शरीर के कार्य-तंत्र का ही भाग हैं।
सोचने वाला मन भी मैं नहीं हूँ।
मन निरंतर बदलता रहता है - कभी प्रसन्न, कभी दुखी; कभी शांत, कभी अशांत।
जो बदलता रहता है, वह स्थायी आत्मा नहीं हो सकता।
बुद्धि, स्मृति और अहंकार भी मैं नहीं हूँ, क्योंकि “मैं” और “मेरा” की भावना भी समय के साथ बदलती रहती है।
यहाँ तक कि वह अज्ञान भी मैं नहीं हूँ, जिसमें केवल संस्कार शेष रहते हैं, पर न कोई स्पष्ट वस्तु होती है और न कोई क्रिया।
तो फिर मैं कौन हूँ?
मैं वह शुद्ध साक्षी-चेतना हूँ जो शरीर, इन्द्रियों, प्राण, मन, बुद्धि और अहंकार - इन सभी को जानती और देखती है, पर स्वयं उनसे कभी बंधती नहीं।
मैं न जन्म लेता हूँ, न मरता हूँ।
मैं केवल शुद्ध अस्तित्व, शुद्ध चेतना और शुद्ध आनंद स्वरूप हूँ।
शब्द विचार
अंग्रेजी में एक शब्द है– "crybaby." यह उसके लिए प्रयुक्त होता है जो छोटी-छोटी बातों पर शिकायत करता है और अकारण रोने लगता है। हिंदी में इसे रोंदु, रुवांटा कहा जाता है। रोंदु के समानार्थी हैं– हर घड़ी रिरियाने वाला, शिकायती, कायर, डरपोक।
बोलियों में कुछ अन्य शब्द भी पाए जाते हैं; जैसे- कुमाउँनी में "डड़हल्लू"और "रोवा", गढ़वाली "रुँदेड़", राजस्थानी "रोंतड़ा", अवधी "रोअना", छत्तीसगढ़ "रोन्टू", मालवा "रोतला", हिमाचल में "रोणू" सुना है!
आपकी बोली में crybaby को क्या कहते हैं?
कनेर एक उपयोगी एवं सजावटी पौधा है, जो अपने सुंदर फूलों से पर्यावरण की शोभा बढ़ाता है। यह पार्कों, बगीचों और सड़कों के किनारे व्यापक रूप से लगाया जाता है। हालांकि, इसके फल और पत्तियां विषैले होते हैं, इसलिए इसके उपयोग में सावधानी आवश्यक है।
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हर पुरुष को ये 12 फ़िज़िकल टेस्ट ज़रूर करने चाहिए:
1. 1.5 km की दौड़ 8–9 मिनट से कम समय में पूरी करें।
अगर आप इसमें फेल हो जाते हैं, तो आपको अपनी फ़िटनेस पर काम करने की ज़रूरत है।
2. 25 सही पुश-अप्स।
छाती ज़मीन को छूनी चाहिए—कोई चीटिंग नहीं।
3. 8–10 पुल-अप्स।
कंट्रोल्ड मूवमेंट, शरीर हिलना नहीं चाहिए।
4. ज़मीन पर बैठें और बिना हाथों का इस्तेमाल किए वापस खड़े हो जाएँ।
यह आपको अपनी असलियत दिखाता है—ज़्यादातर लोग ऐसा नहीं कर पाते।
5. 90 सेकंड का प्लैंक।
कोर स्थिर रहना चाहिए; शरीर काँपना नहीं चाहिए।
6. 30 डीप स्क्वैट्स (सिर्फ़ अपने शरीर के वज़न के साथ)।
पूरी रेंज ऑफ़ मोशन, कंट्रोल्ड तरीके से।
7. अपने पैरों के पंजों को छुएँ और 10 सेकंड तक उसी पोज़िशन में रहें।
यह आपकी मोबिलिटी और कंट्रोल को टेस्ट करता है।
8. पुल-अप बार पर 45–60 सेकंड तक लटके रहें।
यह आपकी पकड़ और कंधों की ताक़त को टेस्ट करता है।
9. बिना थके 10,000 कदम चलें।
फ़िटनेस के लिए यह कम से कम ज़रूरी पैमाना है।
10. बिना रुके 20 बर्पीज़ करें।
यह आपकी सहनशक्ति का असली टेस्ट है।
11. वज़न उठाएँ (हर हाथ में 15–20 kg) और 30 सेकंड तक उसे पकड़े रहें।
यह आपकी असली फ़ंक्शनल ताक़त को दिखाता है।
12. आँखें बंद करके एक पैर पर 30 सेकंड तक संतुलन बनाए रखें। यह आपकी स्थिरता और कंट्रोल को टेस्ट करता है।
अपने शरीर के ज़रिए अपनी भावनाओं को कैसे नियंत्रित करें
1. तनाव में हों = दौड़ने जाएँ
2. दुखी हों = पुश-अप्स करें
3. ज़्यादा सोच रहे हों = कुछ लिखें
4. आलस आ रहा हो = अपना फ़ोन बंद कर दें
5. घबराए हुए हों = ध्यान करें
6. थके हुए हों = ठंडे पानी से नहाएँ
7. पूरी तरह थक चुके हों = टहलने जाएँ
8. गुस्सा आ रहा हो = वज़न उठाएँ
9. उदास महसूस कर रहे हों = किसी हरी-भरी जगह पर जाएँ
10. विचारों से घिरे हुए हों = पेंटिंग करें
11. बेचैन हों = कोई आध्यात्मिक अभ्यास करें
12. ध्यान न लग रहा हो = आराम करें