उज्जैन में शाही मस्जिद के बाहर झड़प, मुस्लिम समाज के लोग अब खुद ही मस्जिद का हिस्सा तोड़ने लगे, क्या है यह पूरा मामला?
रिपोर्टः शुभांगी मिश्रा
शूट/एडिटः शाद मिद्हत
अतिरिक्त रिपोर्टिंगः समीर ख़ान
Indian police used tear gas and batons on demonstrators as hundreds of people gathered for the second day to protest against the scheduled demolition of a mosque in the city of Ujjain. Several people were arrested, while work began to knock down part of the building.
"أجبرونا على هدم مسجدنا بأيدينا".. مئات المسلمين يعتصمون أمام مسجد الشاهي التاريخي في مدينة أوجين بولاية ماديا براديش الهندية احتجاجاً على قرار هدم أجزاء منه، والشرطة تعتدي على الجموع لتفريقهم.. فماذا وراء القرار؟ وما علاقته بمهرجان سيمهاستا 2028 الهندوسي؟
ما #تعليقك على هذه القصة؟
الهند : حشود من المسلمين تصدوا اليوم لتجريف مسجد تاريخي عمره أكثر ٦٠٠ سنة.
وقد أرسل النظام مئات الجنود المدججين بالسلاح لهدم المسجد!
هذا ويعيش المسلمون في الهند اضطهادا بشعا من الهندوس في أنفسهم وأموالهم ومساجدهم وحريّتهم الدينية،في ظلّ صمت وخذلان لما يعانونه والله المستعان
📍 उज्जैन, मध्य प्रदेश
रातभर उज्जैन की तारीख़ी शाही मस्जिद के बाहर मुसलमान डटे रहे। पास में बुलडोज़र और पोकलैंड जैसी मशीनें मौजूद थीं।
सवाल उन सेक्युलर लोगों से है, जो कुछ दिन पहले जंतर-मंतर पर टोपी पहनकर खाना खिला रहे थे आज शाही मस्जिद के लिए आपकी आवाज़ कहाँ है?
सवाल झोली भर-भरके मुसलमानों के वोट लेने वाली सेक्युलर पार्टियों से भी है आज जब मस्जिद के सामने बुलडोज़र खड़ा है, तो आपके नेता कहाँ हैं?
अल्लाह शाही मस्जिद की हिफ़ाज़त फ़रमाए और वहाँ डटे लोगों को अपनी अमान में रखे। आमीन।
#SaveUjjainShahiMosque
Hundreds of Muslims have gathered in the Indian city of Ujjain to protest the partial demolition of a mosque they say is more than 600 years old.
The BJP-led state government says the action is needed to widen roads ahead of the 2028 Hindu pilgrimage.
क्या 'अस्सलामुअलैकुम' कहना अब एक अपराध है?
🚨 IPS बुशरा बानो को अंग्रेजी चैनलों ने दिखाया
उन्हें सिर्फ़ इस आम इस्लामी अभिवादन और अस्सलामुअलैकुम' शब्द का इस्तेमाल करने के लिए हंदुत्व संगठनों के गुस्से और ताने का सामना करना पड़ा...
3 सितंबर को दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी से सवाल पूछने की कोशिश करने पर महिला पत्रकारों शाहीन ख़ान और नफ़ीसा ख़ान को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर साकेत थाने ले जाने, मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप बेहद गंभीर हैं।
वहीं, पूर्व @BBCHindi पत्रकार हुदा जरीवाला को सहारनपुर मस्जिद विध्वंस पर सवाल उठाने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की कार्यशैली की आलोचना करने पर यूपी पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की खबर भी बेहद चिंताजनक है।
महिला पत्रकारों ने मारपीट के संबंध में FIR दर्ज करने के लिए शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई न होना पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वहीं, हुदा जरीवाला की गिरफ्तारी भी प्रेस की स्वतंत्रता और सत्ता से सवाल पूछने के अधिकार पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
संबंधित राज्य सरकारों से हमारी मांग है कि हुदा जरीवाला को तत्काल रिहा किया जाए और अगर अगले 72 घण्टो में में शाहीन ख़ान और नफ़ीसा ख़ान की शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई, तो मैं स्वयं साकेत पुलिस थाने के बाहर आकर शांतिपूर्ण धरना दूंगा।
मेरे पत्रकार भाइयों और बहनों से अपील है कि एकजुट होकर अपनी साथी पत्रकारों का साथ दें। आज वे हैं, कल आपकी बारी भी हो सकती है।
यह प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतंत्र से जुड़ा गंभीर सवाल है।
@UPGovt@DelhiGovDigital
This News has brought International Fame for Delhi Police.
A Media Person from Saudi Arabia reports on this unfortunate incident.
He asks "When will the atrocities on Muslims Stop in India? How long we have to wait to fix the Accountability?"
Two Muslim female journalists allege they were detained and brutally assaulted by police in India’s capital, Delhi. Police have denied the allegations, claiming the journalists were brought to the station over an illegal parking dispute.
لو حصل هذا لأحد من أهلك..
هل كنت ستقبل بالصمت؟
صحفية هندية مسلمة تتعرض للضرب والإهانة أثناء قيامها بعملها، في مشهد يعكس واقعًا مؤلمًا يواجهه كثير من المسلمين في الهند.
إلى متى تستمر هذه الانتهاكات دون محاسبة؟
نحن لا نطالب بالمستحيل، بل نطالب بتحرك حقيقي يحمي حياة المسلمين وكرامتهم، ويضع حدًا للكراهية والاعتداءات بحقهم.
الصمت أمام الظلم قد يفهمه الظالم كرسالة واحدة: استمر، فلن يحاسبك أحد.
انشروا هذه المقاطع، وارفعوا أصوات إخوانكم وأخواتكم في الهند. ربما يصل صوتهم اليوم إلى من يستطيع أن يصنع فرقًا.
देखते हैं कितने देश के सच्चे पत्रकार आज मीडिया पर हुए हमले का विरोध करते है झारखंड प्रोटेस्ट में एक पत्रकार आतंकवादीयो में से अपनी जान बचा कर आया था तब मिडिया ने छात्रों को नक्सलवादी, आतंकवादी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी
पूरा मिडिया समाज आ गया था आज देखना यह है मीडिया अभी भी जिंदा है
दिल्ली की मुख्यमंत्री @gupta_rekha
से सवाल पूछने पर पत्रकारो की पिटाई कर रही है दिल्ली पुलिस,
पत्रकारों से उनका धर्म पूछ कर उनको और मारा जा रहा है । @4pmnews_network की पत्रकार शाहीन और उनकी सहयोगी नफीसा को दिल्ली पुलिस ने थाने में बंद करके मारा । गंभीर आरोप।
4PM की महिला पत्रकारों के साथ अत्याचार पर पूरा देश गुस्से में है।
दिल्ली पुलिस का ये बयान नाकाफी है कि VVIP रूट पर स्कूटी खड़ी करने की वजह से पत्रकारों को थाने ले जाया गया।
दोनों पत्रकारों के शरीर पर मारपीट के निशान हैं जिसका साफ़ मतलब है कि उनके साथ अत्याचार किया गया।