जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्वत: !
त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोSर्जुन ! !
मेरे जन्म और कर्म दिव्य अर्थात अलौकिक हैं इस प्रकार जो मनुष्य तत्व से जान लेता है वह शरीर को त्याग कर फिर जन्म न पा कर मुझे ही प्राप्त होता है जय नारायण
विपदो नैव विपदः सम्पदो नैव सम्पदः!
विपद्विस्मरणं विष्णोः सम्पन्नारायणस्मृतिः !
‘विपत्ति यथार्थ में विपत्ति नहीं है,सम्पत्ति भी सम्पत्ति नहीं !
भगवान का विस्मरण होना ही विपत्ति है और उनका स्मरण बना रहे यही सबसे बड़ी सम्पत्ति है!जय नारायण
अहंकार से मुक्त और प्रेम से युक्त होना, दोनों ही, इस जगत् में और अध्यात्म जगत में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है l यही वह रसायन है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ देता है l
भगवान शिव द्वारा प्राप्त संदेश
आप और आप के साथ रहने वालों के जीवन का आधार सत्य दया प्रेम पवित्रता है इससे हटना अपने विनाश का निमंत्रण देना है जय नारायण जय सनातन धर्म
आज ६ दिसंबर २०२३को महाकाल ने मुझसे महा प्रलय से बचने के लिए तीन उपाय बताए हैं
१- महा पुरुष का संग करें ।
२- महा मंत्र ॐ नमः शिवाय का जप करें ।
३- शुद्ध शाकाहारी बने ।
जय नारायण जय सनातन धर्म